एसटी कोटे का हक दिया दूसरे को, लोगों में फूटा गुस्सा, सरकार ने गलती छिपाने के लिए किया जांच का बहाना

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मीनेष चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

भीलवाड़ा। राजस्थान सरकार वैसे तो एससी और एसटी के हितों की बातें लंबी-लंबी करते हैं परंतु हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जी हां, यह बात पूरे सौलह आने सही है।



यूडीएच मंत्री के सामने हंगामा :  किया लीपापोती का प्रयास ―

गौर तलब है कि भीलवाड़ा में रियायती आवासीय भूखंड योजना की लॉटरी में एसटी कोटे में दूसरे वर्ग के लोगों के नाम निकलने पर यह हंगामा हो गया। हंगामा बढ़ने पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आवेदकों को समझाया और मामले को दबाने के लिए लीपापोती करने का प्रयास किया। यूडीएच मंत्री ने कहा कि 1 महीने के अंदर लॉटरी प्रक्रिया की जांच पूरी होगी। जिन लोगों के दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उनको ही आवंटन पत्र जारी होगा। वहीं जिन लोगों के दस्तावेज सही नहीं पाए जाएंगे, उनके आवेदन निरस्त किए जाएंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि अगर किसी ने गलत दस्तावेज चाहे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र या कोई भी दस्तावेज गलत प्रस्तुत किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री की बात का समर्थन करते हुए जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने आवेदनों की दोबारा जांच करने और डॉक्यूमेंट्स का फिर से वेरिफिकेशन करवाने की बात कही। तब जाकर मामला शांत हुआ।



3081 प्लॉटों के लिए मिले थे 88 हजार से ज्यादा आवेदन ―

दरअसल, भीलवाड़ा नगर निगम टाउन हॉल में गुरुवार को यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने यूआईटी के 3081 प्लॉटों के लिए लॉटरी निकाली। इसके लिए कुल 88 हजार 239 आवेदन मिले थे। इस लॉटरी प्रक्रिया में शामिल होने जयपुर विकास प्राधिकरण की 3 सदस्यीय टीम भी पहुंची थी और लॉटरी की प्रक्रिया चालू की।

एसटी कोटे में अन्य वर्ग के लोगों के नाम खुलने पर हंगामा ―

लॉटरी के दौरान एसटी कोटे में अन्य वर्ग के लोगों के नाम खुलने पर टाउन हॉल में मौजूद आवेदकों ने आपत्ति की। इनका कहना था कि जब एसटी के लिए निर्धारित कोटा है और लॉटरी के फॉर्म की चेकिंग की गई है तो इस कोटे में दूसरे समाज के लोगों के नाम कैसे निकले। इस पर काफी देर तक टाउन हॉल में अधिकारियों की समझाइश के बाद लोग माने, लेकिन कुछ आवेदक लॉटरी निरस्त करने की मांग को लेकर हंगामा करते रहे।



फॉर्म चेक करने के लिए इतना टाइम लिया तो फिर गड़बड़ियां कैसे ―

कैंप में उपस्थित लोगों ने इस बात को लेकर हंगामा किया कि लॉटरी की पूरी प्रक्रिया दूषित है इसलिए इस लॉटरी को निरस्त किया जाए। लॉटरी में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि जब यूआईटी ने फॉर्म चेक करने के लिए इतना टाइम लिया तो फिर गड़बड़ियां कैसे निकली। साथ ही लोगों ने कहा कि प्रकिया के दौरान जो भी गड़बड़ियां सामने आ रही है, उनका इसी समय पर निस्तारण किया जाए और लॉटरी को स्थगित किया जाए।

डॉक्यूमेंट्स का फिर से वेरिफिकेशन करेंगे – कलेक्टर

लॉटरी में विवाद को लेकर जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने कहा कि जो भी आपत्तियां जिस-जिस कैटेगरी में आई है, हम उन कैटेगरी के सभी सब्मिट डॉक्यूमेंट का दोबारा वेरिफिकेशन करवाएंगे। यदि किसी भी टेक्निकल कारण से कोई भी मिस्टेक हुई है तो उसे क्लियर करवाई जाएगी। यूआईटी लॉटरी के बाद तभी प्लॉट अलॉट करेगी, जब पूरी कंडीशन चेक होगी। हंगामा कर रहे लोगों ने प्रकिया के दौरान जो भी गड़बड़ियां सामने आई, उनका उसी समय पर निस्तारण करने और लॉटरी को स्थगित करने की मांग की।

8 योजनाओं में 3081 भूखंडों का होना था आवंटन ―

यूआईटी की 8 योजनाओं में 3081 भूखंडों के लिए 88 हजार 239 आवेदन लॉटरी में आए। सबसे ज्यादा आवेदन इडब्ल्युएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी में 321 प्लॉट के लिए 21,877 लोगों ने किए। एलआईजी (निम्न आय वर्ग) में 261 भूखंडों के लिए 8421 आवेदन और एमआईजी-ए श्रेणी में 1470 भूखंडों के लिए 40,560 आवेदन आए। एमआईजी-बी श्रेणी में 687 भूखंडों के लिए 10,080 आवेदन आए।



दोपहर 2 बजे सम्पन्न हुई लॉटरी प्रक्रिया ―

आपको बता दे, सुबह 10 बजे लॉटरी प्रक्रिया शुरू करनी थी, लेकिन 10:30 बजे प्रक्रिया शुरू हुई। करीब 11.15 से नाम निकलने शुरू हुए। गड़बड़ी सामने आने पर दोपहर 12.15 लोगों ने हंगामा कर दिया। करीब 1 घंटे तक हंगामा चलता रहा। इस दौरान लॉटरी प्रकिया भी चलती रही। दोपहर 2 बजे लॉटरी प्रक्रिया का समापन हो गया।

पारदर्शिता के लिए यूट्यूब पर किया सीधा प्रसारण ―

यूआईटी ने लॉटरी में पारदर्शिता के लिए पूरी प्रक्रिया का यू-ट्यूब पर सीधा प्रसारण किया गया। दूर-दराज के आवेदकों ने ऑनलाइन प्रक्रिया देखी। टाउन हॉल में एक बड़ी एलईडी स्क्रीन, कॉरिडोर और निगम परिसर में 2 एलईडी स्क्रीन लगाई गई। ई-लॉटरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए 10 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
सफल आवेदकों की सूची पोर्टल पर, असफल को 15 दिन में रिफंड सफल आवेदकों की सूची पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। जिसमें आवेदन नंबर, आवेदक का नाम, पिता का नाम, भूखंड संख्या और योजना का नाम शामिल होगा। असफल आवेदकों के अकाउंट में लॉटरी निकलने के 15 दिन में राशि रिफंड कर दी जाएगी।

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