पिटती पुलिस, बेबस जनता, खामोश अफसर—आखिर न्याय की उम्मीद किससे ?

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मीनेश चंद्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

टोंक। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक सोमवार को जिला परिषद सभागार में उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब टोंक-सवाईमाधोपुर सांसद एवं पूर्व डीजीपी हरीश चंद्र मीणा ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि “अधिकारियों की ढिलाई ही भ्रष्टाचार को जन्म देती है। यदि शिकायतें आने के बावजूद जांच नहीं होती तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।”
बैठक में कलेक्टर टीना डाबी, पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सांसद ने ग्रामीण विकास, पुलिस, शिक्षा, राजस्व, स्वायत्त शासन और खनिज विभागों के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए जन समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।



“पुलिस पिट रही है, तो आम आदमी कैसे सुरक्षित महसूस करेगा?”

कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए सांसद ने एसपी की मौजूदगी में कहा कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।
उन्होंने कहा —
“जब पुलिसकर्मी ही पिट रहे हैं और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, तब आम आदमी खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेगा? ऐसी घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और कानून व्यवस्था पर लोगों का विश्वास डगमगा देती हैं।”
सांसद ने आरोप लगाया कि कई मामलों में फरियादियों को न्याय दिलाने में पुलिस अनावश्यक ढिलाई बरत रही है। उन्होंने पीड़ितों को बैठक में बुलाकर अधिकारियों के सामने उनकी समस्याएं भी रखीं।

नगर परिषद की वसूली पर उठाए सवाल —

बैठक के दौरान सांसद ने नगर परिषद द्वारा अधिकृत एजेंसी के माध्यम से नेशनल हाईवे पर वाहनों से कथित रूप से वसूले गए टैक्स का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया।
उन्होंने नगर परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट से सीधे सवाल किया,
“किसके आदेश पर हाईवे पर वाहनों से टैक्स वसूला गया और वह राशि आखिर गई कहां?”
आयुक्त ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर हाईवे पर वसूली की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह प्रक्रिया बंद कर दी गई है।


“100 साल पुरानी खातेदारी भी सैटेलाइट सर्वे में बदल गई”


राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए सांसद ने कहा कि आधुनिक सर्वेक्षणों की गलतियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा —
“जिस जमीन पर परिवार 100 वर्षों से खेती कर रहा है, सैटेलाइट सर्वे में उसकी जमीन कहीं और दिखा दी गई। यह किसानों के साथ अन्याय है।”
सांसद ने पीड़ित किसानों को कलेक्टर टीना डाबी से मिलवाया। कलेक्टर ने मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।

शिक्षा विभाग पर भी बरसे सांसद —

निवाई क्षेत्र के एक विद्यालय में परीक्षा परिणामों को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए सांसद ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि पहले बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को फेल किया गया, फिर दबाव पड़ने पर पास कर दिया गया और मीडिया में मामला आने के बाद दोबारा फेल घोषित कर दिया गया।
सांसद ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा —
“बच्चों का भविष्य कोई प्रयोगशाला नहीं है। शिक्षा व्यवस्था में ऐसी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”



बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर दिया जोर
बैठक के दौरान सांसद हरीश मीणा ने कहा कि जनता को बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों को जवाबदेही तय करते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

जनता की आवाज बने सांसद, अधिकारियों को दी जवाबदेही की सीख —

दिशा समिति की बैठक में सांसद हरीश चंद्र मीणा का तेवर स्पष्ट रूप से आक्रामक और जनहित केंद्रित नजर आया। भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था, किसानों की जमीन, शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर उन्होंने अधिकारियों से सीधे जवाब मांगे। बैठक ने यह संदेश दिया कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति अब सवालों के घेरे में है।

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