मीणा की पहल पर किसानों के लिए नई क्रांति : मोबाइल से बुकिंग होगी खाद, कतारों से मिलेगी मुक्ति !!

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मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

जयपुर/राजसमंद, 25 जून।  कृषि मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा की पहल अब  साकार रूप लेती नजर आ रही है। जी हां, यह बात पूरी सोलह आने सही है। राजस्थान में किसानों के लिए खाद वितरण व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने जा रही है। राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी, फर्जी खरीद और लंबी कतारों की समस्या पर बड़ा प्रहार करते हुए फर्टीलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम (एफएसएएस) का शुभारंभ कर दिया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन से ही खाद की बुकिंग कर सकेंगे और उन्हें फार्मर आईडी के आधार पर पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।

गौरतलब है कि डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के हितों के बारे में वक्तव्य देते हुए संदेश दिया था कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रही है। मीणा की पहल पर कृषि विभाग के आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र राजसमंद में इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह व्यवस्था किसानों को तकनीक आधारित, पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

अब नहीं लगानी पड़ेगी खाद के लिए लाइन

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद किसानों को खाद लेने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। किसान घर बैठे मोबाइल के जरिए खाद की मांग दर्ज कर सकेंगे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों का समय और श्रम दोनों बचेंगे।

कालाबाजारी और फर्जीवाड़े पर सीधा वार

एफएसएएस के जरिए उर्वरकों का वितरण सीधे किसान की फार्मर आईडी से जोड़ा गया है। इससे खाद की कालाबाजारी, फर्जी खरीद-फरोख्त और अनियमित वितरण पर प्रभावी रोक लग सकेगी। विभाग का दावा है कि अब अनुदानित खाद केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचेगी।



राजसमंद और सिरोही बने मॉडल जिले

इस अभिनव व्यवस्था की शुरुआत फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजसमंद और सिरोही जिलों में की गई है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो जल्द ही पूरे राजस्थान में इसे लागू किया जा सकता है।

कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की शुरुआत

कार्यक्रम में मौजूद एडीएम नरेश बुनकर ने कहा कि तकनीक आधारित यह पहल किसानों को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं अतिरिक्त निदेशक कृषि, खंड भीलवाड़ा निरंजन सिंह राठौड़ ने इसे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाली क्रांतिकारी व्यवस्था बताया।

इस खबर की खास बात

खाद वितरण में हर वर्ष सामने आने वाली अव्यवस्था, कृत्रिम संकट और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच राजस्थान सरकार का यह कदम किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले समय में खाद वितरण व्यवस्था का पूरा चेहरा बदल सकता है और किसान को उसकी जरूरत का उर्वरक बिना भटकाव और बिना सिफारिश के समय पर उपलब्ध हो सकेगा।

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