मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जयपुर। राजस्थान में वन प्रबंधन अब पारंपरिक तरीकों से निकलकर हाईटेक युग में प्रवेश करने जा रहा है। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘डिजिवन (DigiVan)’ पोर्टल को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को वन विभाग मुख्यालय अरण्य भवन में विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब जंगलों की निगरानी, योजना निर्माण और निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह डेटा आधारित और तकनीक संचालित होगी।

प्रत्येक माह पोर्टल के उपयोग की होगी विस्तृत समीक्षा
मुख्य सचिव ने डिजिवन को वन विभाग के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का गेम चेंजर बताते हुए कहा कि यह केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि भविष्य के वन प्रशासन की मजबूत नींव है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक माह पोर्टल के उपयोग की विस्तृत समीक्षा की जाए और प्रदर्शन के आधार पर जिलों की रैंकिंग तय की जाए। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
AI और डेटा एनालिटिक्स से जंगलों की होगी स्मार्ट मॉनिटरिंग
बैठक में सबसे ज्यादा जोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और मल्टीपल डेटा सोर्सेज को डिजिवन से जोड़ने पर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वन प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। इससे वन क्षेत्र की निगरानी, संसाधनों के संरक्षण और योजनाओं के क्रियान्वयन में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
देश का पहला और अनोखा डिजिटल वन प्लेटफॉर्म
मुख्य सचिव ने डिजिवन को देश में अपनी तरह का पहला और अद्वितीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि इसमें उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले मल्टी-लेयर डेटा का उपयोग विभिन्न सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित यह प्लेटफॉर्म वन विभाग की कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

युवा अधिकारियों को नवाचार का मंच, कर्मचारियों को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
मुख्य सचिव ने युवा अधिकारियों को डिजिवन के माध्यम से नवाचार और विश्लेषणात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। साथ ही फील्ड स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला स्तर पर अधिकाधिक डेटा संकलन और दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने को भी कहा ताकि पोर्टल की उपयोगिता लगातार बढ़ती रहे।
हर माह होंगे वेबिनार, विभागों के बीच होगा डेटा शेयरिंग नेटवर्क
क्षमता निर्माण और तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक माह वेबिनार आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य विभागों के साथ API आधारित डेटा शेयरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इससे विभिन्न विभागों के बीच डेटा आधारित समन्वय को नई गति मिलेगी और डिजिवन पोर्टल और अधिक प्रभावी बन सकेगा।
बैठक में वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) अरिजीत बनर्जी, प्रमुख शासन सचिव (वित्त) वैभव गलरिया सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
खबर की बड़ी बात
राजस्थान सरकार का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में AI, बिग डेटा और डिजिटल तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएंगी। डिजिवन यदि अपने लक्ष्य के अनुरूप कार्य करता है तो यह मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है।

