जांच की सूचना देने के लिए पुलिस बाध्य :: अब नहीं चलेगा गोपनीयता का बहाना

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कजोड़ मल मीना
  हैलो सरकार कानूनी मामलों के विशेषज्ञ

नई दिल्ली/भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिससे न केवल आम जनता को पुलिस के जांच संबंधी सूचना लेने की सहूलियत मिलेगी अपितु जांच एजेंसियों की गोपनीयता की आड़ में चल रही व्यवस्था को भी तगड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियां केवल “जांच एजेंसी” होने के आधार पर RTI से बाहर नहीं रह सकतीं। देश में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पुलिस की जांच भी सूचना में शामिल हैं।


जनता कसेगी पुलिस पर नकेल

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने Special Police Establishment बनाम Kamta Prasad Mishra (2026 INSC 644) के मामले में मध्यप्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को कानून के विपरीत करार दिया, जिसके जरिए लोकायुक्त पुलिस को RTI के दायरे से बाहर रखा गया था। न्यायालय ने दो टूक कहा कि राज्य सरकारें केवल अधिसूचना जारी करके किसी संस्था को RTI से बाहर नहीं कर सकतीं। गोपनीयता की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि RTI कानून में छूट केवल उन्हीं संस्थाओं को मिल सकती है जो वास्तव में “इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन” हों।

इस फैसले से भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों पर बढ़ेगी जवाबदेही

जी हां, यह बात पूरी सोलह आने सही है कि इस फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसियों को अब पहले की तरह पूर्ण गोपनीयता का कवच नहीं मिलेगा। यदि कोई नागरिक या आरोपी कानून के तहत जानकारी मांगता है, तो एजेंसी को यह साबित करना होगा कि जानकारी देने से जांच वास्तव में प्रभावित होगी। केवल सामान्य बहाना अब नहीं चलेगा।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

न्यायालय ने कहा कि RTI कानून का मूल उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही वाला कानून है। इसलिए अपवादों की संकीर्ण व्याख्या की जानी चाहिए, न कि व्यापक। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले में यह बात साबित हो चुकी है कि आरटीआई कानून में बहाना बाजी भी संबंधित विभाग को भारी पड़ सकती है।

फैसले का दूरगामी असर

कानून विषय के कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में देशभर की अनेक भ्रष्टाचार निरोधक और विशेष जांच एजेंसियों पर असर डाल सकता है। अब सरकारी संस्थाओं द्वारा “गोपनीयता” की आड़ में सूचना रोकना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। हालांकि गोपनीयता के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने अलग से  व्याख्या की हैं।

फैसले की सबसे बड़ी बात


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा है कि “जांच एजेंसी होना और इंटेलिजेंस एजेंसी होना अलग-अलग बातें हैं” — सुप्रीम कोर्ट की यह स्पष्ट टिप्पणी आने वाले वर्षों में RTI कानून की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल मानी जा रही है।
इसी फैसले से सूचना अधिकार के कार्यकर्ताओं को कितना  फायदा मिलेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है की गोपनीयता की आड़ में सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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