
कजोड़ मल मीना
हैलो सरकार विशेष रिपोर्ट
जोधपुर। आपको जानकर हैरानी होगी कि आयकर विभाग मनमानी कार्रवाई खुद पर ही भारी पड़ गई। जी हां यह बात पूरी सोलह आने सही है।
गौरतलब है कि देशभर में बेनामी संपत्तियों के नाम पर चल रही कार्रवाईयों के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने आयकर विभाग और जांच एजेंसियों के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संपत्ति को बेनामी साबित करने की पूरी जिम्मेदारी आयकर विभाग की है और बिना ठोस साक्ष्य के किसी नागरिक या कंपनी को बेनामी संपत्ति धारक नहीं ठहराया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें, जयपुर की रियल एस्टेट कंपनी मैसर्स अलीशान कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड की 79 संपत्तियों को आयकर विभाग ने जून 2022 में बेनामी बताते हुए लगभग 11.16 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों पर कार्रवाई कर दी थी। विभाग का दावा था कि इन संपत्तियों का वास्तविक लाभ किसी अन्य व्यक्ति को मिल रहा था। बाद में ट्रिब्यूनल ने भी विभाग के पक्ष को स्वीकार कर लिया था।
हाईकोर्ट ने पलट दी तस्वीर
आश्चर्यजनक बात यह है कि राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का समुचित पालन नहीं हुआ और कंपनी को प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि मामले की पुनः सुनवाई आवश्यक है।
इस टिप्पणी से आयकर विभाग में मचा हड़कंप
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “केवल बयान, अनुमान या संदेह के आधार पर किसी संपत्ति को बेनामी नहीं माना जा सकता। इसके लिए विभाग को पुख्ता दस्तावेजी और कानूनी साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।”
अब बड़ा सवाल आयकर विभाग की घालमेल कार्रवाई पर
अदालत ने यह भी नोट किया कि संबंधित आकलन अधिकारी पहले ही यह मान चुका था कि संपत्तियों की खरीद वैध बैंकिंग माध्यमों और वैध धनराशि से की गई थी। ऐसे में बेनामी होने के आरोपों की जांच अत्यंत सावधानी से की जानी चाहिए।

कॉरपोरेट जगत के लिए राहत
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि किसी कंपनी की संपत्तियों का स्वामित्व केवल इस आधार पर तय नहीं किया जा सकता कि कंपनी के शेयरधारक या प्रबंधन में बदलाव हुआ है। स्वामित्व का निर्धारण कानून और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
क्यों माना जा रहा है यह फैसला ऐतिहासिक ?
✅ बेनामी साबित करने का पूरा भार विभाग पर डाला गया।
✅ सिर्फ बयानों और संदेह के आधार पर कार्रवाई को अस्वीकार्य माना गया।
✅ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को सर्वोपरि बताया गया।
✅ वैध बैंकिंग लेनदेन को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।
✅ हजारों लंबित बेनामी मामलों पर इस फैसले का असर पड़ सकता है।
हैलो सरकार की पड़ताल
हैलो सरकार की लीगल फोरम ने कानूनी विशेषज्ञों की फैसले पर राय मांगी गई तो उनका मानना है कि यह फैसला भविष्य में बेनामी संपत्ति कानून के तहत होने वाली जांचों और कुर्कियों के लिए एक महत्वपूर्ण मानक बनेगा। अब जांच एजेंसियों को केवल आरोप नहीं, बल्कि अदालत में टिकने वाले मजबूत साक्ष्य भी प्रस्तुत करने होंगे।
बड़ी खबर का बड़ा संदेश
“शक कानून का आधार नहीं हो सकता, सबूत ही अदालत में सच साबित करते हैं।”
राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल आयकर विभाग के लिए चेतावनी है, बल्कि उन हजारों नागरिकों और कंपनियों के लिए भी राहत की खबर है जो बिना पर्याप्त साक्ष्यों के बेनामी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
