हाईकोर्ट ने कहा — क्या रहा एमपी-एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल मामलों में केस ऑफिसर की नियुक्ति का

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कजोड़ मल मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

जयपुर । सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों की अवहेलना की बानगी एक बार फिर राजस्थान हाई कोर्ट में देखने को मिली। जहां पिछले तीन सालों से सुप्रीम कोर्ट की दिशा निर्देशों की पालना नहीं हो रही है।

केस ऑफिसर की नियुक्ति के संबंध में क्या कार्रवाई हुई

गौरतलब हैं कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मौजूदा व पूर्व एमपी-एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल केसों से जुड़े मामले में राज्य सरकार से पूछा है कि इन मामलों में केस ऑफिसर की नियुक्ति के संबंध में क्या कार्रवाई की है।


वहीं राज्य के एजी राजेन्द्र प्रसाद से कहा है कि वे राज्य सरकार से सुझाव लेकर बताएं कि इन केसों के आरोपियों व गवाहों को तामील के लिए क्या किया है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश सोमवार को मौजूदा व पूर्व एमपी एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल कैसों से जुड़े स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में दिया। अदालत ने हाईकोर्ट प्रशासन से कहा है कि वे इन केसों की जल्द ट्रायल के लिए जारी किए आदेश व निर्देशों की कॉपी आगामी सुनवाई पर पेश करें।



सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में सभी हाईकोर्ट को जारी किए थे दिशा-निर्देश

आपकों बता दें, राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि इन केसों में केस ऑफिसर नियुक्त होने चाहिए ताकि वे हर तारीख पर आरोपी व गवाहों की कोर्ट में उपस्थिति को सुनिश्चित कर सकें। अदालती आदेश के पालन में हाईकोर्ट प्रशासन के अधिवक्ता संदीप पाठक ने खंडपीठ को बताया कि इन केसों की जल्द ट्रायल के लिए पूर्व में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। वहीं हाल में 22 जुलाई को भी जल्द ट्रायल के निर्देश दिए गए हैं। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।
काबिले गौर है कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में एमपी-एमएलए से जुड़े क्रिमिनल केसों के मामले में दिशा-निर्देश जारी कर हाईकोर्ट को इन केसों की मॉनिटरिंग के लिए कहा था।

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