एटीएस का बड़ा खुलासा :: राजस्थान में पूर्व सैनिक बनकर नौकरी कर रहे 28 जने गिरफ्तार

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मीनेष चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

जयपुर। पढ़े लिखे बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं जबकि दूसरी तरफ फर्जी कागजात बनवाकर अच्छी खासी नौकरी कर रहे हैं। एटीएस ( एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने आज 28 फर्जी पूर्व सैनिक को गिरफ्तार किया है।



सिक्योरिटी एजेंसी के जरिए एफसीआई में लगे नौकरी —

गौर तलब है कि आरोपी फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर सिक्योरिटी एजेंसी के जरिए एफसीआई में नौकरी लगे थे। पुलिस ने फर्जी डॉक्यूमेंट जब्त किये गये। आरोपियों से पूछताछ जारी है।

सारा खेल दलालों का –

मजे की बात यह है आपके नौकरी के बाद 3 से 5 हजार रुपए हर महीने दलाल को कमीशन देते थे। एटीएस ने फर्जीवाड़े का पता लगने पर मॉक ड्रिल का जाल बिछाकर सभी के डॉक्यूमेंट मांगे थे।
इसके बाद फर्जी जवानों को लिस्टेड कर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के राजस्थान में 31 ठिकानों पर दबिश देकर इन्हें पकड़ा। एटीएस आरोपियों से पूछताछ के बाद जल्द मामले का खुलासा करेगी।
मॉकड्रिल के बहाने सिक्योरिटी गार्ड्स के डॉक्यूमेंट लिए।



90 प्रतिशत सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती रिटायर्ड सैनिकों से –

मीडिया से बातचीत में आईजी (अट्स) विकास कुमार ने बताय कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के प्रावधान में 90 प्रतिशत सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती रिटायर्ड सैनिकों की रहती है।
एटीएस को इनपुट मिला था कि इसका फायदा उठाकर कई लोगों ने फर्जी तरीके से खुद को रिटायर्ड इंडियन आर्मी जवान बताकर नौकरी पाई है। इनपुट मिलने के बाद एफसीआई के कोटा, भीलवाड़ा और उदयपुर व बांसवाड़ा के 31 ठिकानों पर दबिश देकर मॉक ड्रिल की बात कहकर सभी सिक्योरिटी गार्ड्स को इकट्ठा किया गया। सभी से इंडियन आर्मी से जुड़े डॉक्यूमेंट लिए गए। डॉक्यूमेंट की जांच करने के बाद 28 फर्जी जवानों की लिस्ट बनाई गई। इसके बाद सभी को गिरफ्तार किया।



आरोपी करीब 3-4 साल से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। आर्मी के फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए 30 से 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति खर्च किया गया था। हर महीने दलाल को कमीशन देते थे।

विकास कुमार आईजी (एटीएस)

हर महीने दलाल को देते थे कमीशन –

आपको बता दें पकड़े गए फर्जी जवान करीब 3-4 साल से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। आर्मी के फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए 30 से 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति खर्च किया गया था। एफसीएल में 21 हजार से ज्यादा सैलरी में नौकरी लगे थे।
जॉब लगने के बाद प्रति महीने सैलरी में से 3 से 5 हजार रुपए कमिशन के दलाल को दिया करते थे। एटीएस को इस तरीके से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी पाने वालों का आंकड़ा ज्यादा होने का अनुमान है। इस फर्जीवाड़े की गैंग का जल्द खुलासा होगा। एटीएस की ओर से कुल 3 प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है।

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