काले कारनामों से थानेदार को बनाया सिपाही :: पुलिस का नाम बदनाम हो रहा था इसलिए बनाया सिपाही

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मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कुछ वर्षों पूर्व पुलिस थाने में एक ऐसी घटना घटी जिसके कारण पुलिस महकमें को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। भीलवाड़ा के एक थाने में तैनात महिला कॉन्स्टेबल से ASI ने गाली-गलौज की। इसके बाद महिला ने थाना परिसर में बने सरकारी क्वार्टर में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया।



महिला कांस्टेबल ने 2018 में किया था सुसाइड >>>

गौर तलब है कि भीलवाड़ा जिले के करेड़ा थाने में तैनात महिला कॉन्स्टेबल सूरमा जाट से थाने के ASI उपेंद्र सिंह ने गाली-गलौज की। इससे प्रताड़ित होकर महिला कॉन्स्टेबल सूरमा ने 22 अक्टूबर 2018 को अपने सरकारी क्वार्टर में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी ने जांच के निर्देश दिए। तत्कालीन एसपी ने मामले की जांच करवाई, जिसकी रिपोर्ट 7 साल बाद आई। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने ASI उपेंद्र सिंह का डिमोशन करके कॉन्स्टेबल बना दिया है। मामला जिले के करेड़ा थाने का है।



विभागीय जांच में दोषी पाया गया था थानेदार >>>

काफी लंबे समय से चल रही जांच में ASI उपेंद्र सिंह दोषी पाया गया इसलिए उपेंद्र सिंह को ASI से सिपाही बना दिया गया। मृतक सिपाही सूरमा मूल रूप से सीकर की रहने वाली थी। पुलिस की प्राथमिक जांच में ही पता लगा की ASI उपेंद्र सिंह का बर्ताव सूरमा के प्रति ठीक नहीं था। उसके आचरण से पुलिस विभाग की छवि काफी धूमिल हुई। इस आधार पर उपेंद्र सिंह के खिलाफ नियम 16 सीसीए के तहत औपचारिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।



थानेदार के काले कारनामों से बदनामी हुई थी विभाग की >>>

एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि तत्कालीन एएसआई उपेंद्र सिंह ने करेड़ा में पोस्टेड महिला कॉन्स्टेबल को गालियां दी, उसके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके कारण महिला ने सुसाइड कर लिया। प्राथमिक जांच में पुलिस विभाग की छवि खराब होना प्रमाणित हुआ। इस पर उपेंद्र सिंह के खिलाफ 16 सीसीए के तहत कार्रवाई की गई। विभागीय जांच एएसपी द्वारा की गई और आरोप प्रमाणित होने पर सीसीए नियम 14 (4) के तहत आरोपी उपेंद्र सिंह को एएसआई से कॉन्स्टेबल पद पर डिमोशन किया गया है।

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