रवि प्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
नई दिल्ली।
चुनाव आयोग को बीजेपी, समाजवादी पार्टी, सीपीएम और बसपा जैसे तमाम राजनीतिक दलों से करीब 70 सुझाव मिले हैं। आयोग की ओर से इन सुझावों पर विचार किया जा रहा है। इन सुझावों में से आधे तो अकेले बीजेपी ने ही दिए हैं।

बीजेपी का कहना है कि वोटर लिस्ट को तैयार करने और उसमें संशोधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी मदद लेनी चाहिए। इसके अलावा सिर्फ जिला निर्वाचन अधिकारी और मतदाता पंजीयन अधिकारी के अलावा कुछ प्रोफेशनल्स को भी वोटर लिस्ट के काम में शामिल करना चाहिए।
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट जैसे छोटे राजनीतिक दलों ने भी आयोग को सुझाव दिया हैं, कांग्रेस ने अब तक कोई बात नहीं की।
तृणमूल कांग्रेस ने डुप्लिकेट ईपीआईसी नंबर को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद मार्च में चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे थे। सपा ने सुझाव दिया है कि हर महीने बूथवार वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाए। इसके अलावा उन मतदाताओं की सूची को साझा किया जाए, जो संबंधित इलाके में रहते हों। कहीं और शिफ्ट हो गए हों, मृत्यु हो गई हो या फिर है।
डुप्लिकेट वोटर के चलते नाम कटे गए हों। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे दिलचस्प सुझाव बसपा ने दिया है।
आयोग की ओर से फिलहाल यह अनिवार्य किया गया है कि यदि कोई उम्मीदवार आपराधिक प्रवृत्ति का है तो उसके बारे में समाचार पत्रों में जानकारी प्रकाशित करानी होगी। इसका खर्च भी कैंडिडेट को ही उठाना है और यह उसके प्रचार राशि में जुड़ जाता है। इस पर बसपा ने आपत्ति जताई है। बसपा का कहना है कि इसे बंद करना चाहिए क्योंकि कमजोर आर्थिक बैकग्राउंड के प्रत्याशियों पर यह एक बोझ होता है।
