मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
कोटा। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी एवं लोकनायक स्व. भैरवलाल काला बादल ने अपने गीतों और साहित्य से हाड़ौती की ढाणियों और गांवों में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाई। आजादी की लड़ाई में उनकी प्रेरणा से हाड़ौती क्षेत्र ने भी अहम योगदान दिया। शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव और नई चेतना लाने के उनके विचारों को मूर्त रूप देते हुए ही आदिवासी-मीणा समाज ने कोटा के रानपुर में देश का पहला आदिवासी विश्वविद्यालय स्थापित किया है।


काला बादल जयंती समारोह आयोजित >>>
लोकसभा अध्यक्ष गुरुवार को जय मीनेष आदिवासी विश्वविद्यालय, रानपुर में आयोजित काला बादल जयंती समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से बना यह विश्वविद्यालय भविष्य में अपनी अलग पहचान कायम करेगा। यहां तकनीकी एवं प्रोफेशनल कोर्स शुरू किये जा रहे हैं और आने वाले वर्षों में प्रदेशभर से आदिवासी छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा प्राप्त कर क्षेत्र और देश का नाम रोशन करेंगे।

गीतों, कविताओं से जन-जन में स्वतंत्रता की चेतना >>>
बिरला ने कहा कि भैरवलाल ‘कालाबादल’ जी ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गीतों और कविताओं के माध्यम से जन-जन में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। गाँव-गाँव और ढाणी-ढाणी में जाकर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध जनजागरण किया और लोगों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। विधायक और मंत्री रहते हुए भी उनकी सादगी, सेवा और साहित्यिक योगदान आज भी समाज के लिए आदर्श है। बिरला ने कहा कि कालाबादल जी के प्रयासों से शिक्षा का महत्व आदिवासी समाज में गहराई से स्थापित हुआ।

रानपुर बनेगा शिक्षा का हब >>>
उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर जिले और उपखंड स्तर पर प्राथमिकता से छात्रावास खोले जाएंगे। रानपुर को शिक्षा का हब बनाने की दिशा में तेजी से काम होगा। यहां पहले से ट्रिपल आईटी है, आगे और विश्वविद्यालय एवं शिक्षण संस्थान स्थापित होंगे। श्री बिरला ने कहा कि जनजाति क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं और केंद्र सरकार इनके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएगी। विद्यालयों में कंप्यूटर लैब और आधुनिक सुविधाएं देकर छात्रों की प्रतिस्पर्धी क्षमताएं बढ़ाई जाएंगी।

कन्या छात्रावास निर्माण पर विचार >>>
कार्यक्रम में केन्द्रीय जनजाति कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास निर्माण के लिए यदि राज्य सरकार आर्टिकल 275 के तहत प्रस्ताव भेजेगी तो उस पर सकारात्मक निर्णय होगा। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के पास जनजाति क्षेत्रों के विकास के लिए 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए का बजट है, जिसका पूरा उपयोग ट्राइबल एरिया डवलपमेंट में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाड़ौती संभाग के विकास में भी कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।

समाज की साझेदारी से बना विश्वविद्यालय >>>
राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया ने कहा कि आदिवासी-मीणा समाज द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय एक पौधा है, जिसे माली बनकर समाज को सींचना होगा ताकि यह वटवृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ियों को छाया दे। लाडपुरा विधायक श्रीमती कल्पना देवी ने कहा कि उनके क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय स्थापित होना गौरव की बात है। उन्होंने परिसर में हरियाली बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।
अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजाति क्षेत्र विकास विभाग श्री कुंजी लाल मीणा ने बताया कि इस विश्वविद्यालय के निर्माण में समाज के हर वर्ग ने योगदान दिया। किसानों ने तूड़ी बेचकर, कर्मचारियों ने एक माह का वेतन देकर और भामाशाहों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार सहयोग देकर इसे संभव बनाया। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सांसद विकास निधि से योगदान दिया, जबकि लाडपुरा विधायक सहित 93 विधायकों ने भी अपने कोष से सहयोग किया।

32 करोड़ की लागत से मुख्य भवन >>>
विश्वविद्यालय के चेयरमैन एवं पूर्व आरएएस अधिकारी श्री आरडी मीणा ने बताया कि सांसद-विधायकों, कंपनियों के सीएसआर फंड और 4 हजार भामाशाहों के सहयोग से विश्वविद्यालय का मुख्य भवन 32 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा स्टूडेंट ब्लॉक, 300 क्षमता का बॉयज हॉस्टल और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का भी निर्माण हुआ है, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से विश्वविद्यालय में बालिका छात्रावास के लिए फंड उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

श्रद्धांजलि और लोकार्पण >>>
इस अवसर पर जिला कलक्टर श्री पीयूष समारिया, मीणा समाज के गणमान्यजन, समिति पदाधिकारी और विश्वविद्यालय निर्माण में योगदान देने वाले भामाशाह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष और केन्द्रीय जनजाति मंत्री ने विश्वविद्यालय की लोकार्पण पट्टिका का अनावरण किया। इससे पहले अतिथियों ने स्वतंत्रता सेनानी स्व. भैरुलाल काला बादल की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पूर्व छत्रपुरा स्थित कालाबादल की प्रतिमा पर भी स्पीकर बिरला ने माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
