मीनेश चंद्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
दौसा : राजस्थान के दौसा स्थित रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इलाज नहीं, बल्कि सरेआम हुई ‘गुंडागर्दी’ है। अस्पताल परिसर से एक ऐसा विचलित करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में अस्पताल का स्टाफ एक शख्स को बेरहमी से पीटते और घसीटकर कमरे में ले जाते हुए दिखाई दे रहा है।

दर्द की पुकार पर मिलीं लाठियां और घूंसे —
घटना गुरुवार सुबह की है। दौसा निवासी नंदलाल पथरी के असहनीय दर्द से कराहता हुआ अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टर ने जांच के बाद उसे तुरंत इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। नंदलाल का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने दर्द से बेहाल होकर स्टाफ से जल्दी उपचार करने की गुहार लगाई। आरोप है कि जल्दी इलाज की बात सुनते ही वहां तैनात गार्ड और नर्सिंग स्टाफ आगबबूला हो गया।
पीड़ित नंदलाल के अनुसार, पहले तो उसे सरेआम पीटा गया और फिर खींचकर एक कमरे में बंद कर दिया गया। बंद कमरे में उसके साथ फिर से मारपीट की गई। वह मदद के लिए चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन सफेद कोट पहने ‘धरती के भगवान’ और सुरक्षाकर्मियों का दिल नहीं पसीजा।
मामले पर लीपापोती की कोशिश ?
वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस हरकत में तो आए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल ‘जांच’ का आश्वासन मिला। अस्पताल के पीएमओ आरके मीणा ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई होगी। वहीं, कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि दोनों पक्ष थाने आए थे, लेकिन बिना किसी लिखित शिकायत के ‘आपसी बातचीत’ कर लौट गए। बाद में इसे ‘गलतफहमी’ का नाम दे दिया गया, जिससे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है।

विवादों का पुराना नाता : भ्रष्टाचार से लेकर लापरवाही तक
रामकरण जोशी अस्पताल के लिए यह कोई पहली घटना नहीं है। यह संस्थान अव्यवस्थाओं का गढ़ बन चुका है। जून 2019 में तत्कालीन एनएचएम निदेशक डॉ. समित शर्मा ने यहां की बदहाली देख 7 कर्मचारियों को निलंबित किया था। इसी अस्पताल और जिले के अन्य केंद्रों में फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र बनाकर लाखों रुपये डकारने का काला खेल भी उजागर हो चुका है, जिसमें 9 डॉक्टरों सहित 20 कर्मियों पर गाज गिरी थी।
कब सुधरेंगे हालात?
अस्पताल में बार-बार होने वाले हंगामे और स्टाफ के अड़ियल रवैये से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। जिलेवासियों का कहना है कि चाहे गलती किसी की भी हो, मरीज को इस तरह घसीटना और पीटना अपराध है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल का नियमित औचक निरीक्षण किया जाए और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हो जो नजीर बन सके।