मीनेश चंद्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जयपुर। पंचायतीराज एवं शहरी निकाय चुनाव लडने वाले लोगों के लिए खुशखबरी। प्रदेश में अब दो से ज्यादा संतान वाले भी पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला 30 साल बाद बदल दिया गया है। इससे निकाय और पंचायतीराज की सियासत बदलेगी।

कैबिनेट ने दी मंजूरी >>>
गौरतलब है कि पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इन दोनों संशोधनों के बाद अब दो से ज्यादा बच्चों वालों के निकाय-पंचायत चुनाव लड़ने पर लगी रोक हटा जाएगी। मंत्री जोगा राम पटेल ने कहा- दोनों बिल इसी सत्र में पारित होंगे। जिस वक्त ये प्रावधान लागू किए थे, उस वक्त जनसंख्या नियंत्रण का मकसद था। अब हालात बदल गए हैं। इसके साथ ही
अजमेर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय खुलेगा। कैबिनेट ने अजमेर में आयुर्वेद एंड नेचुरोपैथी यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दी है।
बनेगा राजस्व आसूचना और आर्थिक अपराध निदेशालय >>>
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने कहा- राजस्व आसूचना निदेशालय की जगह राजस्व आसूचना और आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन को मंजूरी दी है। इसका मुख्यालय जोधपुर होगा। यह निदेशालय बैंक, शेयर से लेकर मल्टी लेवल मार्केटिंग के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने का काम करेगा। सहकारी सोसाइटी के जरिए जमीनों की धोखाधड़ी रोकने का काम करेगा। निदेशालय के लिए 60 पद बनाए गए हैं।

भारत मंडपम की प्रोजेक्ट लागत 5800 करोड़ >>>
भारत मंडपम की प्रोजेक्ट लागत 5800 करोड़ की उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि जयपुर में बी-टू बायपास पर भारत मंडपम बनने का फैसला हुआ था। पहले के फैसले को सुधारा है। उस वक्त कुल प्रोजेक्ट लागत 3500 करोड़ आ रही थी। उस कीमत में रेवेन्यू जनरेट करने में गैप आ रहा था, वो 635 करोड़ था। हमने उसे बदल दिया है। अब प्रोजेक्ट कॉस्ट को 5800 करोड़ कर दिया है। इससे अब रेवेन्यू जनरेशन 5800 करोड़ से ज्यादा होगा। राज्य सरकार पर अब कोई भार नहीं आएगा। राठौड़ ने कहा कि उदयपुर में आयरन ओर (लौह अयस्क) की खान है। कंपनी आयरन के लिए 500 करोड़ का निवेश करना चाहती है। इस कंपनी को 53 एकड़ जमीन आवंटन करने की मंजूरी दी है।
भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला 30 साल बाद बदला >>>
आपको याद होगा, 1995 में तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार के समय 2 से ज्यादा बच्चों पर निकाय और पंचायतीराज चुनाव नहीं लड़ सकने का प्रावधान किया था। उस वक्त पंचायतीराज कानून और राजस्थान नगरपालिका कानून में संशोधन करके ये प्रावधान जोड़े थे। अब 30 साल पुराने इस प्रावधान को बदलने का फैसला हुआ है। दो से ज्यादा बच्चों वालों को निकाय-पंचायतीराज चुनाव लड़ने पर पाबंदी हटाने से स्थानीय स्तर की सियासत बदलेगी। तीन बच्चों वाले कई नेता जो चुनाव नहीं लड़ पाते थे। अब उन्हें मौका मिलेगा। बीजेपी और कांग्रेस में जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं।

कई संगठनों ने उठाई थी मांग, विधानसभा में भी उठा था मामला >>>
पंचायतीराज और शहरी निकायों में चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की बाध्यता हटाने की लंबे समय से मांग चल रही थी। बीजेपी के कई नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने भी सरकार को ज्ञापन देकर दो बच्चों का प्रावधान बदलने की मांग उठाई थी। विधानसभा में भी कई विधायकों ने इसकी मांग उठाई थी। गहलोत सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने दो संतान की बाध्यता हटाने की मांग उठाई थी।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नहीं है यह प्रतिबंध >>>
पिछले बजट सत्र में चित्तौड़गढ़ से विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने सरकार से पूछा था कि प्रदेश में तीन संतान होने पर पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यह प्रतिबंध नहीं है। पंचायत चुनाव में इस नियम को हटाया जाए। इस पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने विचार करने कर आश्वासन दिया था।