कहां से आती है इतनी हिम्मत भ्रष्टाचारियों में ??? पकड़े जाने पर भी गिलवा शिकवा नहीं !!!

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मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

जयपुर। गिरफ़्तारी का नाम सुनते ही बड़े-बड़े अपराधियों के चेहरे की हवा-हवाइयां उड़ जाती हैं, लेकिन कानोता थाने का एएसआई 30 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार होने पर थानेदार जी का चेहरा सामान्य की तरह नजर आ रहा था।



घूसखोर थानेदार को धमकाने का बड़ा शौक था  >>>

गौर तलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बुधवार को राजस्थान की राजधानी के नाक के नीचे बड़ी कार्रवाई करते हुए कानोता थाने में तैनात थानेदार बने सिंह को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी थानेदार पीड़ित द्वारा दर्ज करवाए गए परिवाद पर कार्रवाई करने और विपक्षी पक्ष की क्रॉस रिपोर्ट को दबाने की एवज में लगातार रिश्वत मांग रहा था। लेकिन परिवादी के दिल और दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। शिकायतकर्ता ने ब्यूरो ने एसीबी के एडिशनल एसपी भूपेंद्र चौधरी को शिकायत दर्ज कराई और थानेदार को ट्रैप करने का कार्यक्रम शुरू किया गया। शिकायतकर्ता ने शिकायत में ब्यूरो को अवगत कराया कि एएसआई बने सिंह उस पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत देने का दबाव बना रहा है। आरोपी ने कुल 50 हजार रुपए की मांग रखी थी और अंततः 30 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इसी आधार पर एसीबी ने बुधवार को जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गुरुवार आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया।

20 सितंबर को हो गया था सत्यापन >>>

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, शिकायत की पुष्टि करने के लिए 20 सितंबर को कराए गए सत्यापन के दौरान भी आरोपी एएसआई ने परिवादी से 10 हजार वसूल किए थे। यह स्कम तय सौदे से अलग थी। सत्यापन रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ही ब्यूरो ने आगे की कार्रवाई कर ट्रैप की योजना बनाई। एसीबी टीम ने योजना के तहत नोटों पर पहचान की स्याही लगाकर परिवादी को थाने भेजा। जैसे ही एएसआई बने सिंह ने पैसे लिए, टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों धर दबोचा। आरोपी के हाथों पर रंग चढ़ने से रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।



सालभर पहले ही ट्रैफिक पुलिस से कानोता लगा था >>>

आरोपी एएसआई करीब एक साल पहले ही ट्रैफिक पुलिस से ट्रांसफर होकर कानोता थाने में आया था। विभाग बदलने के बाद से ही वह थाने में पदस्थापित था। गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी मूल रूप से भरतपुर का रहने वाला है और वर्तमान में जयपुर के सुमेल रोड स्थित ओम शिव विला में रह रहा था।

आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों पर हो रही है तलाशी >>>

आपको बता दे, एएसआई  के गिरफ्तार होने के बाद ब्यूरो टीम ने आरोपी के आवास स्थान और संदिग्ध ठिकानों पर छापामारी का अभियान शुरू कर दिया है। कुछ दिनों में आरोपी के और भी मामला उजागर होने से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल से एएसआई पद पर पदोन्नत हुआ था। इसलिए थानेदार भ्रष्टाचार करने का अच्छा खासा तजुर्बा होने की आशंका है।

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