मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जमवारामगढ़। जयपुर जिले का प्रसिद्ध रामगढ़ बांध इस समय जल संकट से जूझ रहा है। इसको भरने के लिए राज्य सरकार एडी-चोटी का जोर लगा रही है। रामगढ़ बांध को भरने की उम्मीद से चलाया जा रहा कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) का प्रोजेक्ट आखिरी दौर में भी नाकाम रहा।
तीन बार ड्रोन से क्लाउड सीडिंग की, लेकिन बांध क्षेत्र में एक बूंद बारिश नहीं हो सकी >>>
गौर तलब है कि रविवार को कृषि व आपदा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, स्थानीय विधायक महेंद्रपाल मीणा की मौजूदगी में वैज्ञानिकों ने तीन बार ड्रोन से क्लाउड सीडिंग की, लेकिन बांध क्षेत्र में एक बूंद बारिश नहीं हो सकी। हालांकि वैज्ञानिकों का दावा है कि पहाडियों में हल्की बरसात हुई है और इसका असर कैचमेंट एरिया में देखने को मिल सकता है। ड्रोन को कभी 900 मीटर तो कभी 1000 फीट की ऊंचाई पर भेजा गया। लेकिन स्थानीय स्तर पर बारिश का असर दिखाई नहीं दिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाउड सीडिंग का असर कई बार कुछ किलोमीटर दूर जाकर देखने को मिलता है।

जनता को गुमराह करने के लिए लगी हुई है सरकार — पूर्व विधायक गोपाल मीणा >>>
पूर्व विधायक गोपाल मीणा ने कहा कि सरकार बांध को भरने के नाम पर जनता को गुमराह करने में लगी हुई है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि चार चरणों में कुल 10 बार क्लाउड सीडिंग की गई और तकनीकी दृष्टि से ये सभी प्रयास सफल रहे।
जिस दिन यहां अच्छी बारिश होगी, उसी दिन अतिक्रमण अपने आप हट जाएंगे – डॉक्टर किरोडी लाल >>>
एक सवाल के जवाब में मंत्री डॉ. किरोड़ी ने कहा कि बांध क्षेत्र में फैले अतिक्रमण पर सरकार येनकेन प्रकारेण किसी भी तरह से रामगढ़ बांध भरा जा सकें इसके लिए गंभीर है। बांध के कैचमेंट एरिया के अतिक्रमण पर मंत्री ने कहा कि जिस दिन यहां अच्छी बारिश होगी, उसी दिन अतिक्रमण अपने आप हट जाएंगे।

हमने देखा कि उत्तराखंड, हिमाचल में पहाड़ों पर बारिश से तबाही मची है। जिस दिन यहां अच्छी बारिश होगी, उसी दिन अतिक्रमण अपने आप हट जाएंगे। मंत्री का इशारा था कि भारी बारिश होने पर अतिक्रमण बहकर या टूटकर अपने आप हट जाएंगे और इसके लिए अलग से किसी बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं पड़े। हालांकि केबिनेट मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी कांग्रेस ने इसको लेकर तंज कसा है। गौरतलब है कि रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया के अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट कमेटी भी कई दौरे कर चुकी है और कमेटी ने भी माना की आवक क्षेत्र में रसूखदारों के अतिक्रमण है।
विधानसभा में रखी जाएगी दो माह के ट्रायल की रिपोर्ट >>>
मंत्री डॉ. किरोड़ी ने स्पष्ट किया कि अब तक इस प्रोजेक्ट पर सरकार का एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है। लगभग 3 करोड़ रुपये का पूरा खर्च कंपनी ने उठाया है। मंत्री ने कहा कि दो महीने के ट्रायल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विधानसभा में रखी जाएगी और मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि बड़े स्तर पर नई कार्ययोजना बनाई जाएगी, ताकि बांध को भरने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रह सकें।
दूसरी तरफ जमवारामगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक गोपाल मीणा ने इसे जनता को गुमराह करने वाला प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि क्लाउड सीडिंग पूरी तरह फेल है। पिछले दो महीने से करोड़ों रुपये खर्च की बात कर रहे हैं, लेकिन बांध में तो एक बूंद भी पानी कृत्रिम बारिश से नहीं आया। सरकार और वैज्ञानिक केवल दिखावा कर रहे हैं।
