मीनेश चंद्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जयपुर। एक फिल्म का गाना बहुत मशहूर हुआ। आपको याद होगा गाना था — पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा, बेटा हमारा ऐसा काम करेगा।
लेकिन राजस्थान में इसका उल्टा हो गया। इसकी वजह से राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सत्ता, नौकरशाही और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जी हां, यह बात पूरी सौलह आने सही है। IAS शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़े 40 विला-कॉटेज की खरीद के मामले में अब सरकार ने भी बड़ा कदम उठाया है। गोयल फैशन्स प्रा. लि. को मिलने वाले सरकारी निवेश प्रोत्साहन और छूट पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उद्योग विभाग ने आदेश जारी किए हैं। ACB की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को सरकारी लाभ नहीं मिलेंगे।
सरकारी लाभों पर रोक और संपत्तियों की जांच ने मामले को और गंभीर बना दिया है। ACB अब विभिन्न विभागों से दस्तावेज जुटा रही है। IAS-IPS दंपती को नोटिस जारी कर बुलाने की तैयारी भी की जा रही है।
40 विला-कॉटेज की खरीद, अब सरकारी लाभों पर ताला
गोयल फैशन्स प्रा. लि. को निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत मंजूर सरकारी लाभों पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आयुक्त, उद्योग एवं वाणिज्य कार्यालय ने आदेश जारी किए हैं।

ACB की प्रारंभिक जांच पूरी होने तक कंपनी को किसी भी तरह की सरकारी छूट अथवा निवेश प्रोत्साहन का लाभ नहीं मिलेगा।
ACB की जांच का शिकंजा, संपत्ति और आय का हिसाब तलब
जांच एजेंसी ने उदयपुर कलेक्टर, उदयपुर सब-रजिस्ट्रार और अलवर सब-रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी है।
कार्मिक विभाग से आईआर और जीए-55 यानी प्रॉपर्टी रिटर्न का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। आयकर विभाग से भी इनकम टैक्स रिटर्न की जानकारी तलब की गई है।
अब जांच एजेंसी संपत्तियों और आय से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
अब खुलेंगी संपत्ति की परतें या होगा कोई बड़ा खुलासा?
सरकारी लाभों पर रोक, विभागों से दस्तावेज तलब करना और IAS-IPS दंपती को नोटिस जारी करने की तैयारी ने मामले को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
अब निगाहें ACB की जांच पर टिकी हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही तय करेंगे कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
सवाल बड़ा है—क्या सरकारी पद, संपत्ति और निवेश से जुड़े इस मामले में जांच कोई नया खुलासा करेगी?
फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।