सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : NDPS मामलों में ‘स्पीडी ट्रायल’ के नाम पर बेल नहीं !!!

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मीनेश चन्द्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

जयपुर। नशा तस्करी से जुड़े मामलों में बेल को लेकर उच्चतम न्यायालय ने एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमर्शियल क्वांटिटी (commercial quantity) के मामलों में केवल “लंबी हिरासत” या “स्पीडी ट्रायल के अधिकार” का हवाला देकर जमानत नहीं दी जा सकती। सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जमानत आदेशों को रद्द कर दिया।



हाईकोर्ट की गलती क्या थी ?

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 37 की अनिवार्य शर्तों पर कोई संतुष्टि दर्ज नहीं होने, आरोपी के आपराधिक इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुति, पहले की जमानत याचिकाओं की जानकारी छिपाने, जैसे कई गंभीर खामियां खुलासा किया। कोर्ट ने कहा कि डिस्क्रेशन मांगने वाला व्यक्ति पूरी सच्चाई बताए, अधूरी जानकारी देना न्यायालय को गुमराह करने जैसा होता है। कोर्ट ने अपने पुराने फैसले Parwinder Singh versus State of Punjab का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में बढ़ते ड्रग्स संकट को देखते हुए अदालतों को बेल देने में अत्याधिक सतर्क रहने का फरमान भी जारी किया।

क्या हुआ अंतिम आदेश ?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के दोनों बेल आदेश रद्द करते हुए आरोपियों को 1 सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश देते हुए आरोपियों को हिदायत दी गई कि कानून के अनुसार आरोपी नए सिरे से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं।

इस फैसले का बड़ा असर

यह निर्णय देशभर की अदालतों के लिए एक guideline बन गया है। इस निर्णय से अब NDPS मामलों में  जमानत देना अब और भी कठिन हो गया। ऐसे मामलों में “लंबी हिरासत” अकेला आधार नहीं रहेगा। संबंधित न्यायालय को हर हाल में Section 37 की शर्तें रिकॉर्ड करनी होंगी। फैसले के अनुसार अधूरी जानकारी देने पर याचिका खारिज हो सकती है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि नशा तस्करी के मामलों में “लिबर्टी” और “सख्त कानून” के बीच संतुलन होना जरूरी है। जहां तक मामला commercial quantity का हो, तो  कानून की कठोरता प्राथमिकता होगी।



क्या था मामला ?

10 जनवरी 2024 को पंजाब के तरनतारन जिले पुलिस थाना कालरा ने महिन्द्रा XUV-300 वाहन संख्या UP-15-DD-6521 को नाकाबंदी के दौरान सन्देह के आधार पर एक कार रोकी। जांच पड़ताल में पुलिस ने कार से 1.465 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। कार में सवार अभियुक्त को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद NDPS Act के तहत गिरफ्तार किया गया। जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा करने की आदेश दिए। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

उच्चतम न्यायालय के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस जोर्ज मसीह  की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि NDPS Act की धारा 37  के “ट्विन कंडीशन्स” अनिवार्य हैं, जिसके तहत बिना यह संतुष्टि दर्ज किए कि आरोपी निर्दोष हो सकता है और दोबारा अपराध नहीं करेगा, इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

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