जजों पर कार्यवाही के आदेश : रोज 4 घंटे सुनवाई करें राजस्व कोर्ट

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मीनेश चंद्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख

जयपुर। जिन लोगों के मुकदमें रेवेन्यू कोर्ट में चल रहे हैं उन लोगों के अच्छे दिन आने वाले हैं। जी हां, यह बात पूरे सौलह आने सही है। प्रदेश में राजस्व से जुड़े पेंडिंग मुकदमों को जल्दी निपटाने के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अफसरों को गाइडलाइन जारी की।



रेवेन्यू कोर्ट के जजों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव ने सर्कुलर जारी कर पेंडिंग मामलों को निपटाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। पुराने मामलों में रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। मुख्य सचिव ने सभी एसडीएम, सहायक कलेक्टरों, तहसीलदारों सहित सभी राजस्व अफसरों को हर वर्किंग डे पर सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक राजस्व अदालत चलाने और नियमित सुनवाई करने के निर्देश दिए। निर्देशों की पालना रेवेन्यू कोर्ट के जजेज नहीं करते हैं तो कार्रवाई की तलवार हमेशा उनके सिर पर लटकी रहेंगी।



SOP की सख्ती से होगी पालना

आपकों बता रहे, राज्य में राजस्व न्यायालयों के लिए पहले से ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू है। हालांकि, रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और तकनीकी कारणों से इसमें देरी होती रही है। अब मुख्य सचिव ने इस गैप को दूर करने के लिए सघन मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं। सभी लंबित वादों की मासिक समीक्षा की जाएगी। इसकी प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इससे जिला प्रशासन और राजस्व मंडल के बीच समन्वय बेहतर होगा और मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

मुख्य सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि अत्यधिक पुराने मामलों में संबंधित अभिलेख समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही तय होने से कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है।

न्यायालयों का नियमित निरीक्षण

मुख्य सचिव के आदेश के अनुसार संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टरों को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र के न्यायालयों का नियमित निरीक्षण करें। निरीक्षण की रिपोर्ट राजस्व मंडल को भेजी जाएगी, ताकि सिस्टम की कमियों को समय रहते सुधारा जा सके।

आमजन को मिलेगा त्वरित न्याय

इन प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश के उन हजारों किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा जिनके मामले सालों से राजस्व अदालतों में लटके हुए हैं। त्वरित न्याय मिलने से न केवल उनका समय बचेगा, बल्कि अदालती खर्चों का बोझ भी कम होगा। मुख्यमंत्री की इस पहल को राजस्थान में सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

रेवेन्यू अदालतों के कार्यों पर लगातार होगी मॉनिटरिंग

सर्कुलर के अनुसार राजस्व से जुड़े लंबित मुकदमों के जल्दी निपटाने के लिए SOP जारी हो चुकी है, लेकिन नोटिस तामील में देरी, रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और मुकदमों में जिरह के बीच गैर जरूरी अंतराल के कारण इनके निस्तारण में देरी हो रही है। इस गैप को दूर करने के लिए रेवेन्यू अदालतों में केस निपटारे की पूरी प्रक्रिया की सरकार के स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।

राजस्व अफसरों को 4 घंटे कोर्ट चलाने के आदेश

मुख्य सचिव ने सभी एसडीएम, सहायक कलेक्टरों, त हसीलदारों सहित सभी राजस्व अफसरों को हर वर्किंग डे पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक राजस्व अदालत चलाने और नियमित सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने तीन साल से ज्यादा समय तक लंबित राजस्व केस में संबंधित पक्षों को नोटिस रिसीव करवाने का काम प्राथमिकता से करने और तय पते पर नहीं मिलते हैं तो अखबारों में सूचना प्रकाशित करके नोटिस रिसीव करवाएं।

100 सबसे पुराने पेंडिंग केस की लिस्ट बनाकर निपटारा करना होगा

मुख्य सचिव के सर्कुलर के अनुसार सभी एसडीएम और सहायक कलेक्टरों को 1 अप्रैल को 100 सबसे पुराने लंबित केसों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता से निपटाना होगा। इन मामलों की हर महीने समीक्षा कर चालू वित्तीय वर्ष में उनका निस्तारण करना होगा।

पुराने मामलों में समय पर रिकॉर्ड पेश नहीं किया तो अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी

मुख्य सचिव की ओर से जारी सर्कुलर में अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। सर्कुलर के अनुसार राजस्व से जुड़े ज्यादा पुराने मामलों में संबंधित रिकॉर्ड समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी लंबित केसों की हर महीने समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजना अनिवार्य किया गया है। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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