मीनेश चंद्र मीना
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
जयपुर। केंद्रीय उप मुख्य श्रम आयुक्त श्री निरंजन कुमार ने कार्यालय में नवीन श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में इनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

श्रम इतिहास में एक नए युग की शुरुआत
उन्होने बताया कि भारत सरकार ने 21 नवम्बर 2025 से 29 श्रम कानूनों के स्थान पर चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं। देश के श्रम इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से लागू की गई नई श्रम संहिताएं देश में श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव का मार्ग खोलती हैं। यह संहिताएँ श्रम नियमावली को आधुनिक बनाती हैं तथा श्रमिकों की भलाई सुनिश्चित करते हुए श्रम इकोसिस्टम को कार्य की बदलती दुनिया के साथ जोड़ती हैं। देश के कई श्रम कानून आज़ादी के बाद के शुरुआती दौर में बनाए गए थे, उस समय अर्थव्यवस्था और कार्य की दुनिया बहुत अलग थी। बदलती अर्थव्यवस्था, रोजगार के बदलते तरीकों तथा आधुनिक वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाते हुए ये संहिताएँ श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को सशक्त बनाती हैं तथा आत्मनिर्भर भारत के लिए मार्ग प्रशस्त करती हैं।
सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य
श्री निरंजन कुमार ने बताया कि नई श्रम संहिताओं के तहत सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें रोज़गार सुनिश्चित होगा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुगमता से मिल सकेगा। इसके साथ ही वेतन के समानिकरण और समयबद्ध वेतन भुगतान के प्रावधानों से श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा मज़बूत होगी। श्रम शक्ति में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से संहिताओं में प्रावधान किए गए हैं, जिनके अनुसार उनकी सहमति से उन्हें रात्रिकालीन पारी में भी काम करने की अनुमति होगी। इससे महिलाओं के लिए बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे।
29 श्रम कानूनों का समावेश
केंद्र सरकार ने मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थिति संहिता सहित कुल चार संहिताओं में 29 श्रम कानूनों का समावेश किया है। ये सभी नए श्रम कानून देश के समग्र विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

कानून की मुख्य मुख्य विशेषताएं
श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी तथा सम्मानजनक जीवन की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। विशेष रूप से सभी के लिए न्यूनतम मजदूरी का क्रियान्वयन तथा नियुक्ति आदेश (अपॉइंटमेंट लेटर) जारी करना अनिवार्य कर दिया गया।
इसी प्रकार एक वर्ष में 180 दिन कार्य करने पर सवेतन अवकाश लागू होने के साथ मजदूरी राष्ट्रीय फ्लोर वेतन से कम नहीं होनी चाहिए।
इसी तरह महिलाओं को अनुमति के साथ सभी क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर दिया गया है तथा उनकी उचित सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी और 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश भी मिलेगा। जहाँ महिलाएँ कार्यरत हों, वहाँ चाइल्ड केयर (बाल देखभाल) केंद्रों की स्थापना करना जरूरी होगा।
कानून के अनुसार महिलाओं को घर से काम करने का अवसर प्राप्त होगा। सभी श्रमिकों की प्रत्येक वर्ष निःशुल्क स्वास्थ्य जांच अनिवार्य रूप सेहोगी। कार्य, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में संतुलन हेतु कार्य समय में लचीलापन (प्रतिदिन 8-12 घंटे, सप्ताह में 48 घंटे का होगा यदि किसी श्रमिक से अतिरिक्त कार्य करवाया जाएगा तो दोगुना वेतन देना अनिवार्य कर दिया गया।
कानून की सबसे खास बात सिंगल लाइसेंस तथा सरलीकृत रिटर्न नीति का क्रियान्वयन करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य परिस्थितियों का भी मानकीकरण जरूरी किया गया है।
