रवि प्रकाश जूनवाल
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख
नई दिल्ली । हाल ही में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल के शेयरों में 5 से 7 फीसदी तक गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता तनाव है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 11 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई। लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी।

हो सकती है कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास >>>
अमेरिका और सऊदी अरब जैसे बड़े देशों के लिए यह इलाका बेहद अहम है और वे किसी भी तरह की रुकावट को रोकने की पूरी कोशिश करेंगे। इसलिए आगे चलकर सप्लाई में कोई बड़ी रुकावट आने की उम्मीद नहीं है। ब्रोकरेज के मुताबिक अभी जो बढ़त तेल की कीमतों में दिख रही है, वह असल में सिर्फ सप्लाई को लेकर डर की वजह से है। बाजार में मांग बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, इसलिए अगर तनाव कुछ समय में खत्म हो गया तो कच्चे तेल की कीमत दोबारा 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकती है। इसका मतलब है कि ओएमसी यानी सरकारी तेल कंपनियों को कच्चे तेल के ऊंचे दामों से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

पेट्रोल और डीजल पर कंपनियों को 5.4 प्रति लीटर का मिल रहा है मार्जिन >>>
रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल पर कंपनियों को 5.4 प्रति लीटर का मार्जिन मिल रहा है, जो कि उनके खुद के अनुमान 4.8 प्रति लीटर से भी ज्यादा है। इस साल की शुरुआत से अब तक इनका औसत मुनाफा 10.6 प्रति लीटर रहा है। इसका मतलब है कि अगर कच्चे तेल के दाम कुछ समय और ऊंचे भी रहे, तो भी इन कंपनियों को पेट्रोल-डीजल से इतनी कमाई होती रहेगी कि उनका घाटा नहीं होगा।
