जयपुर। जो कोई भी कर्मचारी अधिकारी समय पर अपनी अचल संपत्ति के बारे में विवरणी प्रस्तुत नहीं कर पाए उन कर्मचारियों के लिए सरकार विशेष मौका दे रही है।
2011 से 2024 के बीच की अनिवार्य आईपीआर अब तक भी नहीं भरी
आपको बता दें सरकार ने राज्य कर्मचारियों को वर्षों से लंबित अचल संपत्ति विवरणी (IPR) जमा करने का विशेष अवसर प्रदान किया है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में कहा है कि जिन अधिकारी व कर्मचारियों ने वर्ष 2011 से 2024 के बीच की अनिवार्य आईपीआर अब तक नहीं भरी प्रस्तुत नहीं की है, वे अब राजकाज पोर्टल के माध्यम से इसे 1 से 15 अगस्त के बीच ऑनलाइन भर सकेंगे। वहीं वर्ष 2025 (1 जनवरी 2026 की स्थिति) की आईपीआर अब केवल राजकाज के वर्जन-2 के जरिए भरी जाएगी।
ऑनलाइन करनी होगी घोषणा
अचल संपत्ति नहीं तो विकल्प चुनें : वर्ष 2025 की आईपीआर के लिए कर्मचारियों को ई-राजकाज पोर्टल पर लॉगइन कर अपनी प्रोफाइल सत्यापित करनी होगी। जिन कर्मचारियों के नाम कोई अचल संपत्ति नहीं है, वे “Declare IPR as NIL” विकल्प का उपयोग कर सकेंगे, जबकि संपत्ति रखने वाले कर्मचारियों को सभी संपत्तियों का विवरण दर्ज कर ऑनलाइन घोषणा करनी होगी।
जयपुर। आपको यह जानकर बड़ी खुशी होगी कि राजस्थान विधानसभा के 20 अगस्त से शुरू होगी। विशेषकर 16वीं विधानसभा के छठे सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल, खेजड़ी संरक्षण बिल, कॉमर्शियल टैक्सेशन संबंधी संशोधन और सीआरपीसी आदि से जुड़े बिल लाए जाने की पूरी संभावना है। सत्र के नोटिफिकेशन के साथ पहले दिन से ही विधायकों के तारांकित प्रश्न लगना शुरू हो गए हैं।
सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे वासुदेव देवनानी
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार सत्र से एक-दो दिन पहले स्पीकर वासुदेव देवनानी सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे। सत्र के दौरान भाजपा और कांग्रेस की ओर से उठाए जाने वाले विषयों और विपक्ष के हमलों पर सरकार और कांग्रेस की ओर से तैयारी की जा रही है। कांग्रेस कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगी। छोटा चलने वाला यह सत्र पूरी तरह हंगामेदार रहने के आसार हैं। कांग्रेस और भाजपा विधायकों की ओर से सत्र में उठाए जाने वाले प्रश्नों के लिए अधिकृत रूप से विधानसभा को प्रश्न भेजने होते हैं। यह कार्य नोटिफिकेशन जारी किए जाने के साथ ही शुरू हो जाता है।
शुरू कर दिया विधायकों ने प्रश्न लगाना
सत्र की घोषणा होते ही विधायकों ने इसके साथ ही प्रश्न लगाना शुरू कर दिया है। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बताया कि सत्र बेहतर तरीके से चले, शांतिपूर्ण तरीके से विधायी कार्य संपन्न हो और समन्वय से प्रदेश की जनता के हित के फैसले हों, इसके लिए सर्वदलीय बैठक में सभी दलों के साथ बातचीत कर रणनीति बनाई जाएगी। देवनानी से सत्र की तैयारियों की समीक्षा भी की।
सरकार की पूरी तैयारी
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि यह सत्र छोटा होगा। सरकार इसमें कुछ बिल लेकर आएगी। इसमें कौन-कौनसे बिल होंगे, क्या क्या विधायी कार्य पूर्ण किए जाएंगे, इस संबंध में विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में तय किया जाएगा।
छात्रों के मुद्दे और प्रसूताओं की मौत पर हंगामेदार होगा सत्र
सत्र के दौरान इस बार छात्रों के आंदोलन और उन पर की जा रही कार्रवाई प्रमुख मुद्दा होगा। इसे लेकर विपक्ष सरकार को घेरने वाला है। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा प्रसूताओं की मौत का है। इसके अलावा शिक्षा, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था सहित अन्य तात्कालिक मुद्दे भी प्रमुखता से सदन की चर्चा का हिस्सा रहेंगे। इसमें सरकार की ओर से जवाब पेश किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि विपक्ष इस बार सरकार के जवाब का प्रतिकार करेगी। ऐसे में हंगामेदार सत्र रहने वाला है।
हर वर्ग पीड़ित, सदन लंबा चले
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बताया कि विपक्ष चाहता है कि सदन में सार्थक चर्चा हो। सरकार अधिक से अधिक सदन चलाए, ताकि जनता की समस्याओं का निदान हो सके। युवा, मजदूर, किसान, महिला, व्यापारी, दलित, आदिवासी सभी वर्ग पीड़ित हैं। सरकार के मंत्री जनता के प्रश्नों का उत्तर दें और उनका समाधान कराएं।
जयपुर। नई दिल्ली रेलवे भर्ती बोर्ड ने बीटेक, इंजी. डिप्लोमा और बीएससी योग्यता वालों के लिए तकनीकी श्रेणी के कुल 4098 पदों पर भर्ती की घोषणा की है।
आवेदन 14 अगस्त से शुरू
गौरतलब है कि रेलवे भर्ती बोर्ड के इस भर्ती अभियान के तहत जूनियर इंजीनियर, डिपो मटेरियल सुपरिटेंडेंट और केमिकल एंड मेटालर्जिकल असिस्टेंट पदों पर नियुक्तियां होगी। ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तारीख 14 अगस्त आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 13 सितंबर है। विस्तृत नोटिफिकेशन 13 अगस्त को जारी किया जाएगा। आवेदन शुल्क सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 500 रुपए, जबकि अन्य सभी वर्ग के लिए 250 रुपए रखा गया है। परीक्षा में शामिल होने के बाद नियमानुसार शुल्क का एक हिस्सा वापस किया जाएगा।
पदों का विवरण
रेलवे भर्ती बोर्ड के विज्ञप्ति के अनुसार जूनियर इंजीनियर पदों के लिए 3,749 और डिपो मटेरियल सुपरिटेंडेंट पदों के लिए 314 तथा केमिकल एंड मेटालर्जिकल पदों के लिए असिस्टेंट 35 रिक्तियां घोषित की गई है।
सैलरी और आयु सीमा
आयुसीमा : न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 33 वर्ष होनी चाहिए। ओबीसी को 3 वर्ष तथा एससी/एसटी वर्ग को 5 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा में छूट मिलेगी। आयु की गणना 1 जनवरी 2027 को आधार मानकर की जाएगी।
वेतनमान : चयनित को 35,400 रु. का शुरुआती मूल वेतन मिलेगा।
शैक्षणिक योग्यता
JE एवं DMS पद : सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी या अन्य इंजी. शाखा में डिप्लोमा या डिग्री। CMA पद: फिजिक्स और कैमिस्ट्री विषय और 45% अंकों के साथ बी.एससी डिग्री चाहिए।
आधार कार्ड को लेकर रेलवे के खास निर्देश
आवेदन से पहले आधार के जरिए पहचान सत्यापित करें। आधार में दर्ज नाम और जन्मतिथि 10वीं (मैट्रिक) की मार्कशीट से पूरी तरह मेल खाने चाहिए। उम्मीदवार लेटेस्ट फोटो और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट व आइरिस) अपडेट करा लें, ताकि आवेदन सत्यापन में देरी न हो।
चयन प्रक्रिया
इस भर्ती में चयन कुल चार चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण कंप्यूटर आधारित परीक्षा-1 होगी। यह क्वालिफाइंग टेस्ट है। द्वितीय चरण कंप्यूटर आधारित परीक्षा -2 है। इसके आधार पर मुख्य मेरिट लिस्ट बनेगी। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन होगा। अंत में मेडिकल एग्जाम होगा।
जयपुर। सरकारी नौकरी देने में भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार से आगे निकल गई है। कांग्रेस ने पांच साल में 2,13,839 नियुक्तियां दी थीं जबकि भाजपा सरकार में नियुक्तियों का आंकड़ा 2,29,824 पहुंच गया है। 1,78,397 पदों पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। 51427 पदों पर परीक्षाएं हो चुकी हैं और भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं।
गहलोत सरकार के 5 साल में 2.13 लाख नौकरी, ढाई साल में भजनलाल सरकार ने 2.29 लाख नियुक्ति दे दी
गौरतलब है कि भाजपा सरकार में नियुक्तियों का आंकड़ा कांग्रेस के आंकड़े से 15985 अधिक पहुंच जाएगा। मार्च 2027 तक 81023 पदों पर भर्ती परीक्षा होगी। इसके अलावा 70031 पदों पर भर्तियां पाइपलाइन में हैं। यह भर्तियां पूरी होने पर नियुक्तियों का आंकड़ा 3,80,878 पर पहुंच जाएगा। जयपुर में 20,734 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है, जो राज्य में सबसे अधिक है। इसके बाद सीकर, जोधपुर, अजमेर और उदयपुर का स्थान है। सरकार का मानना है कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के कारण युवाओं का सरकारी नौकरियों के प्रति भरोसा और रुझान बढ़ा है। 10 जिले, जहां सबसे अधिक नियुक्तियां जयपुर ≤≥ 20,734 सीकर ≤≥ 7,287 जोधपुर ≤≥ 6,960 अजमेर ≤≥ 6,729 उदयपुर ≤≥ 6,587 अलवर ≤≥ 6,488 झुंझुनूं ≤≥ 5,781 नागौर ≤≥ 5,707 दौसा ≤≥ 5,384 बांसवाड़ा ≤≥5,298
मार्च 2027 तक इन भर्ती परीक्षाओं का होगा आयोजन
आपकों बता दें, आगामी समय में होने वाली 81023 पदों की भर्तियों में सितंबर 2026 तक 9268 पदों पर कंप्यूटर अनुदेशक, सांख्यिकी अधिकारी, पीटीआई सहित कई भर्तियां, अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक 45325 पदों पर जेईएन, कनिष्ठ लेखाकार, जूनियर असिस्टेंट, चिकित्सा अधिकारी पैरामेडिकल व नर्सिंग, आरएएस सहित कई भर्तियां और जनवरी से मार्च 2027 तक 26430 पदों पर वीडीओ, कांस्टेबल सहित कई अन्य भर्तियों के लिए परीक्षाओं का आयोजन होगा।
जयपुर। राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग जयपुर के कार्यालय आदेश कमांक:- प.1 (ग) () का/ एस.एम. ई-3/ डी.एल.बी./स.स. भर्ती / 26/02 दिनांक :- 27.07.2026 के माध्यम से संविदा सफाई कर्मचारी पद हेतु सीधी भर्ती विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत 24752 रिक्त पदों पर विज्ञप्ति जारी की है। जिस183 नगरीय निकायों में 24,752 पदों पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती होगी। 15 अगस्त से 28 सितंबर तक आवेदन होंगे। पहले 3 बार यह भर्ती रद्द हुई, उसमें करीब 24 हजार स्थाई पद थे। अब इसके नियम बदल दिए हैं।
बदले नियमों के बाद पहली बार संविदा आधार पर निकाली भर्ती
5 साल संविदा पर काम के बाद स्थाई किया जाएगा। भर्ती ‘राजस्थान कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स, 2022’ के संशोधित प्रावधानों के तहत होगी। स्वायत्त शासन विभाग ने सोमवार को अधिसूचना जारी की। भर्ती में 21 से 40 साल की उम्र के अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे। सामान्य वर्ग के लिए 600 रु. और आरक्षित व दिव्यांगों के लिए 400 रुपए फीस होगी। डॉक्यूमेंट जांच के बाद लॉटरी के जरिए चयन किया जाएगा। आवेदन राजस्थान स्वायत्त शासन निदेशालय की वेबसाइट या एसएसओ आईडी के जरिए होंगे। एक से अधिक निकायों में आवेदन पर आवेदन निरस्त किए जाएंगे। स्वायत्त शासन सचिव रवि जैन के अनुसार भर्ती के लिए इसी पर सहमति बनी कि 5 साल परफॉर्मेंस देख कर ही स्थाई किया जाएगा।
24,752 पदों पर सफाईकर्मियों की भर्ती होगी, 5 साल संविदा फिर स्थाई
जयपुर ≤≥ 4811 भरतपुर ≤≥ 450 बीकानेर ≤≥1084 अलवर ≤≥ 426 जोधपुर ≤≥ 890 उदयपुर ≤≥ 300 सीकर ≤≥ 480 अजमेर ≤≥ 290 शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं, सबसे ज्यादा पद जयपुर में भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता नहीं है। किसी भी नगरीय निकाय में एक साल सफाई कार्य का अनुभव जरूरी है। भर्ती में महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण मिलेगा।
शिवसागर। असम के शिवसागर से वैसे तो असम में ब्रह्मपुत्र हर साल बाढ़-तबाही लाती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा भयानक हैं। सबसे ज्यादा दर्दनाक स्थिति जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों में है, जहां 500 से ज्यादा गांव 19 जुलाई से लगभग जलमग्न हैं। करीब 7 लाख घरों में न बिजली है, न पीने का पानी। सरकार राशन व राहत सामग्री भी बड़ी मुश्किल से पहुंचा पा रही है। जहां बाढ़ खत्म मिली, वहीं जिंदगी थमी हुई है।
बाढ़ में 68 मौतें, 100 अधिक भी लापता
हैलो सरकार टीम ने शिवसागर जिले में पहुंचकर हालात देखे। यहां 328 गांव आज भी 3-4 फीट तक डूबे हैं। नेपाली खुटी गांव के 78 साल के सुभोमन ने बताया कि 50 साल में इतनी भयानक बाढ़ कभी नहीं देखी। आधी रात को धमाके की आवाज के साथ नदी आई और सब बहा ले गई। हम जैसे-तैसे बचे। 38 साल के मंगल साउरा की पत्नी, बेटा, छोटी बेटी उनकी आंखों के सामने बह गए। मंगल का घर दिखो नदी के पास था। उन्होंने बताया कि वो प्रलय जैसा था।
शिवसागर जिले में 20 से अधिक लोगों की मौत
हम 25 लोग एक पक्के मकान की दो मंजिला छत पर चढ़ गए थे। लेकिन, थोड़ी देर बाद छत तक पानी आ गया। पत्नी, बेटा-बेटी मेरा हाथ पकड़े थे, लेकिन बहाव तेज था। हाथ छूट गया। शिवसागर जिले में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई है जबकि 50 लोग अब भी लापता है। लोग सड़क किनारे तंबू में रातें गुजार रहे हैं। कल तक जो लोग बड़े मकानों में रहते थे, कारों में घूमते थे, अब सरकारी राहत के लिए लाइनों में लगे हैं।
आंखों के सामने पक्का मकान बह गया… 43 साल के बिजित पात्रो
अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ बीते सप्ताह तक अपने घर आराम से रह रहे थे। लेकिन, बाढ़ ने सब तबाह कर दिया। जोरहाट जिले के सेलेंग सुमोनी पथोर गांव की रहने वाले बिजित ने भास्कर को बताया, “पाई-पाई जोड़कर घर बनाया था। कुछ भी नहीं बचा। झांजी नदी के पास बसे बिजित के सेलेंग सुमोनी पथोर गांव में 25 घर थे। सभी पानी में डूबे हुए हैं। लेकिन, बिजित और उनके एक पड़ोसी का मकान पूरी तरह पानी में बह गया। बिजित कहते है, “हमने ऐसी विनाशकारी बाढ़ की बात अपने बाप-दादा से भी नहीं सुनी।” कितना नुकसान : 9 जिलों में अब तक 68 शव मिल चुके हैं। 100 से ज्यादा लापता हैं। 7 लाख लोग विस्थापित हैं। सेना, एनडीआरएफ समेत कई बचाव एजेंसियां गांवों से लोगों को निकाल रही हैं।
बादल नगालैंड में फटा, तबाही असम में आई…
इस बार तबाही को नगालैंड की दिखो नदी ने भयानक बनाया। दरअसल, 18-19 जुलाई को नगालैंड में बादल फटा। उसके पानी से जुन्हेबोटो जिले से निकलने वाली दिखो नदी उफनी। 256 किमी लंबी दिखोव का 98.5 किमी का हिस्सा असम के मैदानों, विशेषकर शिवसागर जिले से होकर बहता है। इसलिए बाढ़ग्रस्त 9 जिलों में से सबसे ज्यादा तबाही शिवसागर में ही है।
जयपुर। अब आपके लिए ई-मित्र की सेवाएं 51 से बढ़कर 72 हो गई है। जी हां यह बात पूरी सोलह आने सही है। बिजली बिल डाउनलोड करने, बिजली की शिकायत दर्ज कराने या नगर निगम के प्रमाण-पत्र के लिए कार्यालय या ई-मित्र केंद्र जाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने ई-मित्र वॉट्सएप प्लेटफॉर्म पर बिजली और स्वायत्त शासन विभाग की 21 नई सेवाएं जोड़ दी हैं। साथ ही वॉट्सएप पर उपलब्ध सरकारी सेवाओं की संख्या 51 से बढ़कर 72 हो गई है।
विद्युत वितरण निगम की 4 सेवाओं में बिजली संबंधी शिकायत
गौरतलब हैं कि जयपुर विद्युत वितरण निगम की 4 सेवाओं में बिजली संबंधी शिकायत दर्ज करना, बिल डाउनलोड करना, शिकायत की स्थिति देखना और कनेक्शन का K नंबर खोजना शामिल है। नगर निकायों से जुड़ी फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस, सीवर कनेक्शन, यूडी टैक्स, म्यूटेशन, साइनेज लाइसेंस, वन टाइम लीज डीड और स्ट्रीट वेंडर लाइसेंस के आवेदन की स्थिति भी वॉट्सएप पर देखी जा सकेगी।
संबंधित प्रमाण-पत्र भी डाउनलोड किए जा सकेंगे
आपकों बता दें, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 1 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेस में ई-मित्र वॉट्सएप सेवा शुरू की थी। अब तक नागरिक इस प्लेटफॉर्म का 1.40 लाख से अधिक बार उपयोग कर चुके हैं। अब आप मोबाइल में 94610-62705 नंबर सेव करें। इस पर Hi लिखकर भेजें। सेवा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। भाषा चुनने के बाद सेवाओं की सूची खुलेगी। संबंधित विकल्प चुनकर मांगी गई जानकारी दर्ज करनी होगी।
जयपुर । सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों की अवहेलना की बानगी एक बार फिर राजस्थान हाई कोर्ट में देखने को मिली। जहां पिछले तीन सालों से सुप्रीम कोर्ट की दिशा निर्देशों की पालना नहीं हो रही है।
केस ऑफिसर की नियुक्ति के संबंध में क्या कार्रवाई हुई
गौरतलब हैं कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मौजूदा व पूर्व एमपी-एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल केसों से जुड़े मामले में राज्य सरकार से पूछा है कि इन मामलों में केस ऑफिसर की नियुक्ति के संबंध में क्या कार्रवाई की है।
वहीं राज्य के एजी राजेन्द्र प्रसाद से कहा है कि वे राज्य सरकार से सुझाव लेकर बताएं कि इन केसों के आरोपियों व गवाहों को तामील के लिए क्या किया है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश सोमवार को मौजूदा व पूर्व एमपी एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल कैसों से जुड़े स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में दिया। अदालत ने हाईकोर्ट प्रशासन से कहा है कि वे इन केसों की जल्द ट्रायल के लिए जारी किए आदेश व निर्देशों की कॉपी आगामी सुनवाई पर पेश करें।
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में सभी हाईकोर्ट को जारी किए थे दिशा-निर्देश
आपकों बता दें, राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि इन केसों में केस ऑफिसर नियुक्त होने चाहिए ताकि वे हर तारीख पर आरोपी व गवाहों की कोर्ट में उपस्थिति को सुनिश्चित कर सकें। अदालती आदेश के पालन में हाईकोर्ट प्रशासन के अधिवक्ता संदीप पाठक ने खंडपीठ को बताया कि इन केसों की जल्द ट्रायल के लिए पूर्व में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। वहीं हाल में 22 जुलाई को भी जल्द ट्रायल के निर्देश दिए गए हैं। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। काबिले गौर है कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में एमपी-एमएलए से जुड़े क्रिमिनल केसों के मामले में दिशा-निर्देश जारी कर हाईकोर्ट को इन केसों की मॉनिटरिंग के लिए कहा था।
टोंक (राजस्थान)। बदलाव की बयार जब उठती है, तो वो सीमाओं को लांघकर पूरे विश्व के लिए एक मिसाल बन जाती है। राजस्थान की ऐतिहासिक धरा टोंक ने आज बालिका शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण का एक ऐसा नया अध्याय लिखा है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। समाज के भामशाहों (दानदाताओं) के अटूट संकल्प और जन-सहयोग के बल पर सवा दो करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ ‘मां पन्नाधाय बालिका गुर्जर छात्रावास’ अब अपने द्वार खोलने जा रहा है। यह सिर्फ एक चारदीवारी या ईंट-सीमेंट का ढांचा नहीं है बल्कि यह हजारों बेटियों के सपनों को पंख देने वाली एक आधुनिक उड़ान है! 1 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे इस छात्रावास को राजस्थान में गुर्जर समाज का ऐसा पहला बालिका छात्रावास माना जा रहा है, जो पूरी तरह से भामाशाहों के सहयोग से संचालित और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है।
96 सीटों के लिए 845 दावेदार : एक सीट पर महामुकाबला!
शिक्षा की इस अलख का असर ऐसा है कि टोंक ही नहीं, बल्कि बूंदी, अजमेर, और सवाई माधोपुर जैसे पड़ोसी जिलों से भी बेटियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। कुल उपलब्ध सीटें : 96 प्राप्त आवेदन : 845 हकीकत : हर एक सीट पर लाडली बेटियों के बीच कड़ा और कड़ा मुकाबला है। यह विशाल आंकड़ा इस बात का सीधा सबूत है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सुरक्षित, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अभिभावक और बेटियां कितनी आतुर थीं। जो जरूरत सालों से महसूस की जा रही थी, वह आज इस पहल से पूरी होती नजर आ रही है।
5 मई 2024 से 1 अगस्त 2026 : संकल्प से सिद्धि तक का सफर
‘श्री देवनारायण शिक्षा समिति, टोंक’ के तत्वावधान में सांड बाबा मंदिर के समीप 5 मई 2024 को इस प्रकल्प का भूमि पूजन हुआ था। महज दो सालों के भीतर इस विशाल सपने को धरातल पर उतार दिया गया है। छात्रवास की प्रमुख विशेषताएं : 51 सुसज्जित कमरे : स्वच्छ और सुरक्षित आवास व्यवस्था। डिजिटल और कॉम्पिटिटिव हब : समृद्ध पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब और डिजिटल लर्निंग। भविष्य की तैयारी : प्रशासनिक सेवाओं (UPSC/RPSC), मेडिकल, इंजीनियरिंग, और रक्षा क्षेत्र की तैयारी के लिए विशेषज्ञों द्वारा कोचिंग व गाइडेंस। मात्र ₹2,000 प्रति माह सहयोग शुल्क : ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी भी बिना किसी बोझ के अपने सपने पूरे कर सके।
हवन यज्ञ करते हुए गुर्जर समाज के गणमान्य लोग
पन्नाधाय के त्याग से प्रेरित, भविष्य संवारने को तत्पर
समिति के सदस्य के.एल. गुर्जर और पदाधिकारियों ने गर्व से बताया कि समाज के भामाशाहों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक योगदान से ही यह मुमकिन हो पाया है। उनका मकसद सिर्फ आवास देना नहीं, बल्कि बेटियों को देश की बागडोर संभालने लायक बनाना है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि सामुदायिक सहयोग (Community Collaboration) का यह टोंक मॉडल सिर्फ गुर्जर समाज ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व और हर समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। जब समाज ठान ले, तो बेटियों की राह में आने वाली हर रुकावट हवा हो जाती है!
टोंक (राजस्थान)। बदलाव की बयार जब उठती है, तो वो सीमाओं को लांघकर पूरे विश्व के लिए एक मिसाल बन जाती है। राजस्थान की ऐतिहासिक धरा टोंक ने आज बालिका शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण का एक ऐसा नया अध्याय लिखा है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। समाज के भामशाहों (दानदाताओं) के अटूट संकल्प और जन-सहयोग के बल पर सवा दो करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ ‘मां पन्नाधाय बालिका गुर्जर छात्रावास’ अब अपने द्वार खोलने जा रहा है। यह सिर्फ एक चारदीवारी या ईंट-सीमेंट का ढांचा नहीं है बल्कि यह हजारों बेटियों के सपनों को पंख देने वाली एक आधुनिक उड़ान है! 1 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे इस छात्रावास को राजस्थान में गुर्जर समाज का ऐसा पहला बालिका छात्रावास माना जा रहा है, जो पूरी तरह से भामाशाहों के सहयोग से संचालित और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है।
96 सीटों के लिए 845 दावेदार : एक सीट पर महामुकाबला!
शिक्षा की इस अलख का असर ऐसा है कि टोंक ही नहीं, बल्कि बूंदी, अजमेर, और सवाई माधोपुर जैसे पड़ोसी जिलों से भी बेटियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। कुल उपलब्ध सीटें : 96 प्राप्त आवेदन : 845 हकीकत : हर एक सीट पर लाडली बेटियों के बीच कड़ा और कड़ा मुकाबला है। यह विशाल आंकड़ा इस बात का सीधा सबूत है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सुरक्षित, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अभिभावक और बेटियां कितनी आतुर थीं। जो जरूरत सालों से महसूस की जा रही थी, वह आज इस पहल से पूरी होती नजर आ रही है।
5 मई 2024 से 1 अगस्त 2026 : संकल्प से सिद्धि तक का सफर
‘श्री देवनारायण शिक्षा समिति, टोंक‘ के तत्वावधान में सांड बाबा मंदिर के समीप 5 मई 2024 को इस प्रकल्प का भूमि पूजन हुआ था। महज दो सालों के भीतर इस विशाल सपने को धरातल पर उतार दिया गया है। छात्रवास की प्रमुख विशेषताएं : 51 सुसज्जित कमरे : स्वच्छ और सुरक्षित आवास व्यवस्था। डिजिटल और कॉम्पिटिटिव हब : समृद्ध पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब और डिजिटल लर्निंग। भविष्य की तैयारी : प्रशासनिक सेवाओं (UPSC/RPSC), मेडिकल, इंजीनियरिंग, और रक्षा क्षेत्र की तैयारी के लिए विशेषज्ञों द्वारा कोचिंग व गाइडेंस। मात्र ₹2,000 प्रति माह सहयोग शुल्क : ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी भी बिना किसी बोझ के अपने सपने पूरे कर सके।
पन्नाधाय के त्याग से प्रेरित, भविष्य संवारने को तत्पर
समिति के सदस्य के.एल. गुर्जर और पदाधिकारियों ने गर्व से बताया कि समाज के भामाशाहों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक योगदान से ही यह मुमकिन हो पाया है। उनका मकसद सिर्फ आवास देना नहीं, बल्कि बेटियों को देश की बागडोर संभालने लायक बनाना है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि सामुदायिक सहयोग (Community Collaboration) का यह टोंक मॉडल सिर्फ गुर्जर समाज ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व और हर समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। जब समाज ठान ले, तो बेटियों की राह में आने वाली हर रुकावट हवा हो जाती है!
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का सख्त रुख कि अगर परिवार में पहले से वैध सर्टिफिकेट मौजूद है, तो अधिकारियों को बच्चों का जाति प्रमाण पत्र 60 दिनों के भीतर जारी करना होगा।
पिता के पास जाति प्रमाण पत्र है तो बच्चों का भी बनाएं
जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दशकों पुराने कागज़ात जुटाने की उलझन और प्रशासनिक अड़ंगों का सामना कर रहे हज़ारों परिवारों के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक राहत भरा और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि परिवार के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, तो महज 1950 के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर बच्चों को कास्ट सर्टिफिकेट देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला ?
बिलासपुर के निवासी निष्ठा बघेल और अभय बघेल ने अपने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। लेकिन अधिकारियों ने यह कहकर उनका आवेदन अटका दिया कि उनके पास वर्ष 1950 का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। अधिकारियों की इस मनमानी और प्रशासनिक लालफीताशाही से तंग आकर आवेदकों ने एडवोकेट डॉ. प्राची दीवान के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में स्पष्ट तर्क दिया गया कि जब पिता के पास पहले से प्रामाणिक और वैध जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, तो केवल 1950 का दस्तावेज न होने के आधार पर बच्चों को उनके अधिकार से वंचित करना पूरी तरह से अनुचित है।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने अफसरों की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि 60 दिनों की समय-सीमा के अंदर संबंधित अधिकारी सभी औपचारिकताएं पूरी कर आगामी 60 दिनों के भीतर आवेदकों को जाति प्रमाण पत्र जारी करें।
पुराने नियमों का अड़ंगा खत्म :
यदि परिवार का मुख्य प्रमाण पत्र वैध है, तो हर पीढ़ी से 1950 के पुराने रिकॉर्ड मांगना तर्कसंगत नहीं है।
फैसले का आम जनता पर कैसा पड़ेगा असर?
हाई कोर्ट का यह फैसला उन हजारों युवाओं और विद्यार्थियों के लिए नज़ीर बनेगा जो शैक्षणिक प्रवेश, छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरियों के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाने में 1950 के रिकॉर्ड की अनिवार्यता के कारण दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर थे। इस आदेश से अब प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आवेदकों को अनावश्यक मानसिक उत्पीड़न से राहत मिलेगी।
नई दिल्ली। “नाम में ‘राम’ होने से कोई भगवान नहीं बन जाता!” जी हां, यह बात पूरी सोलह आने सही है। अभी हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले में ऐसी टिप्पणी आने से पूरे न्याय जगत में तहलका मच गया।
18 साल पुराने केस में सबसे बड़ा धमाका!
अदालत ने कहा— नाम से नहीं, कर्मों से तय होती है इंसान की औकात! रेप-अपहरण के आरोपी ‘रामचंदर’ को कोर्ट ने बरी कर दिया। अदालत में गूंजा वो सच, जिसे कहने से सब डरते हैं! क्या किसी का नाम ‘राम’ होने से वह दूध का धुला हो जाता है? या नाम में ‘मोहम्मद’ लग जाने से उसकी नीयत तय हो जाती है? दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसकी गूँज कई सालों तक कानून के गलियारों में सुनाई देगी।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा
“उत्तर भारत में बच्चों का नाम ‘राम’ रखना कोई नई बात नहीं है, वैसे ही जैसे कई मुस्लिम परिवारों में नाम ‘मोहम्मद’ होता है। लेकिन नाम किसी के चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं होता! यह कलयुग है… यहाँ नाम ‘रामचंदर’ रख लेने भर से कोई मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम नहीं बन जाता!” इंसानी फितरत और नाम के बीच के ढोंग को बेनकाब करते हुए हाई कोर्ट ने यह ऐतिहासिक टिप्पणी उस वक्त की, जब वह 18 साल पुराने एक बेहद संगीन मामले पर फैसला सुना रहा था।
18 साल की तबाही… और आखिर में ‘ज़ीरो’ साबित हुआ केस!
पुलिस की ऐसी लापरवाही हुई जिसके कारण पीड़िता को 18 साल केस लड़ने के बावजूद हार मुंह देखना पड़ा। मामला साल 2006 का है। एक 13 साल की नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में रामचंदर नाम के शख्स को सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। सालों-साल मुकदमा चला, जिंदगी बर्बाद हुई… लेकिन जब हाई कोर्ट ने फाइलों के पन्ने पलटे, तो पुलिस और अभियोजन पक्ष (Prosecution) की थ्योरी की धज्जियां उड़ गईं।
झूठ की नीव पर टिका केस :—
सरकारी पक्ष की गवाहियों में इतने बड़े विरोधाभास थे कि कोर्ट का माथा ठनक गया।
पीड़िता का यू-टर्न :—
पीड़ित लड़की ने अदालत के सामने खड़े होकर साफ कह दिया— “मुझे आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहिए!”
मर्जी का खेल :—
आरोपी शुरू से चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था कि लड़की बालिग थी और अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी, नतीजा यह हुआ कि सबूतों ने भी इसी सच पर मुहर लगाई।
इंसाफ की सबसे बड़ी जीत : —
नाम का आभामंडल ध्वस्त, आरोपी बाइज्जत बरी! हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि अदालतें नाम के प्रभाव या पुलिस की गढ़ी हुई कहानियों पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों के आधार पर चलती हैं। अभियोजन पक्ष आरोपी का जुर्म साबित करने में बुरी तरह नाकाम रहा, जिसके बाद कोर्ट ने रामचंदर को ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) देते हुए बेदाग बरी कर दिया।
सबक बिल्कुल साफ है :—
कलयुग में नाम के पीछे छिपकर न तो कोई गुनाह छुपाया जा सकता है, और न ही सिर्फ ‘नाम’ के आधार पर किसी निर्दोष को ताउम्र गुनहगार माना जा सकता है।
जयपुर। काफी समय से बाट जोह रहे कर्मचारियों को को लग रहा था कि तबादलों पर लगी रोक हटी तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का ईलाज कराया जा सकेगा और जीने के लिए नई जिंदगी मिल सकेगी। परन्तु राजस्थान में तबादलों की आंधी क्या चली, सिस्टम की संवेदनशीलता ही उड़ गई! सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे कि विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को राहत दी जाएगी और उनके घर के पास पोस्टिंग मिलेगी। लेकिन धरातल पर जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया है।
जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे लोगों की आस को लगी नजर
गौरतलब हैं कि कैंसर पीड़ितों और बेसहारा विधवा महिलाओं को सैकड़ों किलोमीटर दूर फेंक दिया गया, वहीं दूसरी तरफ सत्ता के रसूख की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसने ‘नियम-कायदों’ का मखौल उड़ा कर रख दिया। मजेदार बात यह मंत्री पुत्र के लिए 4 घंटे में बदला नियम तो जनता हैरान सी रह गई। पूरा मामला कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के बेटे दीपक से जुड़ा है, जो सहायक प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत हैं।
जोराराम कुमावत मंत्री राजस्थान सरकार
आपकों बता दें, 9 जुलाई को दीपक का तबादला सुमेरपुर (पाली) से 60 किलोमीटर दूर सांचौर जालोर कर दिया गया था। लेकिन रसूखात का जादू चला कि अभी आदेश की स्याही सूखी भी नहीं थी कि महज 4 घंटे के भीतर ऊपर से अदृश्य दबाव आया और तबादला तुरंत निरस्त कर दिया गया! दीपक को वापस सुमेरपुर में ही तैनात कर दिया गया। बेकाबू सोशल मीडिया पर अब यह सवाल आग की तरह फै़ैल रहा है कि क्या आम जनता और रसूखदारों के लिए कानून अलग-अलग हैं? इस सवाल के जवाब पर भजन लाल शर्मा की सरकार मौन धारण का व्रत कर लिया।
अपनों को ‘राहत’ और पीड़ितों को ‘आफत’—आदेश कुछ और, खेल कुछ और!
शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों ने सरकार की गाइडलाइंस को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। इन हैरान करने वाले मामलों को बानगी देखिए :—
कैंसर पीड़ित पर सितम : शाहपुरा में तैनात एक कैंसर पीड़ित वरिष्ठ अध्यापक को राहत देने के बजाय कोटपूतली-बहरोड़ ट्रांसफर कर दिया गया।
विधवा शिक्षिका के साथ क्रूर मजाक : एक बेसहारा विधवा शिक्षिका को सीकर से झुंझुनू भेज दिया गया, जबकि सरकार की प्राथमिकता उन्हें राहत देने की थी।
बैकडेट का खेल: एक प्रिंसिपल का तबादला सामोद से डेहरा जयपुर किया गया और बाद में बैकडेट (पुरानी तारीख) में फेरबदल कर उन्हें सीकर लगा दिया गया।
पुरस्कृत शिक्षक भी परेशान: एक सम्मानित और पुरस्कृत शिक्षक को झोटवाड़ा से सीधे झालावाड़ भेजने के आदेश जारी कर दिए गए, जिसके खिलाफ अब वे कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
अब कोर्ट की शरण में पीड़ित कर्मचारी
पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि विभागों ने इन विशेष श्रेणियों के लिए न तो कोई अलग व्यवस्था बनाई और न ही पारदर्शी तरीके से आवेदन मांगे। सिस्टम की इस मनमानी से तंग आकर अब बड़ी संख्या में प्रभावित कर्मचारी कोर्ट और राजस्थान सिविल सेवा अधिकरण (RAT) की शरण में पहुंच रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल : क्या संवेदनशील सरकार के दावों के बीच, रसूखदारों के लिए पलकें बिछाने और लाचारों को दूर भगाने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर नियमों की यह बलि ऐसे ही चढ़ती रहेगी?
जयपुर। किसानों की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एक ऐसा ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाया है जिससे देश के करोड़ों किसानों की किस्मत और उनके हक को लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का रास्ता साफ हो गया। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया। अदालत ने सीधे तौर पर सरकारों को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि जब फसलों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का कानूनी प्रावधान मौजूद है, तो उसे जमीन पर लागू क्यों नहीं किया जा रहा ?
सरकार से नाराज़ हैं हाई कोर्ट
गौरतलब है कि पिछले 7 साल से सरकार की ‘खामोशी’ पर कोर्ट सख्त रवैया अपनाते हुए चेतावनी दी गई। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में साल 2019 में ही नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन आज तक पिछले 7 साल में सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया है। अदालत ने अब इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है।
भारतीय खाद्य निगम और राजफैड को पक्षकार बनाने के निर्देश
आपकों बता दें, सरकार ने जानबूझकर FCI और राजफैड पक्षकार नहीं बनाने पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि केवल सरकारों को ही नहीं, बल्कि FCI (भारतीय खाद्य निगम) और राजफैड को भी इस मामले में पक्षकार बनाने के कड़े निर्देश दिये है।
करोड़ों का नुकसान, जवाबदेह कौन ?
राजस्थान हाई कोर्ट ने रामपाल जाट की जनहित याचिका में इस बात का खुलासा किया गया है कि राजस्थान में साल 2012 के बाद बाजरे की खरीद न होने से किसानों को भारी घाटा हुआ है। मक्का, मूंग और चना जैसी फसलों के नुकसान का भी हवाला दिया गया है। हाई कोर्ट ने याद दिलाया कि कोर्ट ने पूर्व में 2019 में सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को MSP पर खरीद की श्रेष्ठतम नीति और उसके क्रियान्वयन (Implementation) पर सुझाव देने को कहा था। लेकिन सरकार हर बार सिर्फ समय मांगती रही। अब कोर्ट के तेवर साफ कर रहे हैं कि किसानों के हक के साथ यह ढिलाई अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई को तय की गई है। देखना यह होगा कि कोर्ट के इस ‘अंतिम अल्टीमेटम’ के बाद सरकार के पास क्या जवाब होता है। यह फैसला आने वाले समय में देश के कृषि ढांचे और किसान आंदोलन की दिशा बदल सकता है।
नई दिल्ली / बैंकॉक : आपको मालूम होगा दुनिया जिसे 21वीं सदी का डिजिटल युग कह रही है, उसी तकनीक की आड़ में म्यांमार, थाईलैंड और लाओस की सीमाओं पर ‘ठगी का एक खूनी साम्राज्य’ खड़ा हो चुका है, जिसका तोड़ विश्व के बड़े बड़े देशों के पास भी नहीं है। जी, हां यह बात पूरी सोलह आने सही है कि म्यांमार के भीतर चल रहे इन अवैध साइबर ठगी के अड्डों ने आज एक ऐसा भयानक रूप ले लिया है, जिसने दुनिया के कई देशों के हजारों मासूम नागरिकों को ‘आधुनिक बंधक’ (मॉडर्न स्लेव्स) बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक चौंकाने वाले और डराने वाले अनुमान के मुताबिक, म्यांमार के इन स्कैम सेंटरों में 1 लाख से ज्यादा लोग अपनी इच्छा के खिलाफ, बंदूक की नोक पर काम करने को मजबूर हैं।
साधारण फ्रॉड नहीं, बहुत बड़ा नेटवर्क
विश्व के सभी देशों को इस बात को भली-भांति समझ लेना चाहिए कि यह कोई साधारण फ्रॉड नेटवर्क नहीं है। म्यांमार-थाईलैंड सीमा के म्यावाडी इलाके में स्थित ये स्कैम सेंटर असल में भारी सुरक्षा वाले ‘हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड’ हैं। इन्हें स्थानीय सशस्त्र मिलिशिया (आतंकी गुटों) के संरक्षण में चीनी माफिया द्वारा चलाया जा रहा है। ‘केके पार्क’ और ‘श्वे कोक्को’ जैसे इलाके आज वैश्विक अपराध और मानव तस्करी के सबसे कुख्यात केंद्र बन चुके हैं।
नौकरी का झांसा देकर करते हैं अपहरण और बिजली के लगाते है झटके !!
नौकरी की तलाश में भटक रहे युवकों की इस नरक की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। युवाओं को विदेशों में (जैसे बैंकॉक में) ₹70,000 प्रति माह वाली कॉल सेंटर की नौकरियों का लालच देकर बुलाया जाता है, और फिर उन्हें म्यांमार के इन अड्डों पर अगवा कर लिया जाता है। टारगेट पूरा न होने पर यातनाएं देते है। यदि ये बंधक मासूम लोगों से साइबर धोखाधड़ी करने का लक्ष्य (Target) पूरा नहीं कर पाते, तो उन्हें बिजली के झटके दिए जाते हैं, बर्बरता से पीटा जाता है और भूखा रखा जाता है।
रिहाई के बदले मांगते हैं मोटी फिरौती
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले 30 वर्षीय कौस्तुभ शेजवाल, उत्तर प्रदेश के मोहम्मद उस्मान अंसारी व मोहम्मद हसन रजा, और बिहार के अनुरंजन कुमार जैसे सैकड़ों युवाओं ने वीडियो जारी कर अपनी जान बचाने की गुहार लगाई है। अपहरणकर्ताओं द्वारा उनकी रिहाई के बदले 8 लाख रुपये तक की फिरौती मांगी जा रही है। ‘सिविल सोसाइटी नेटवर्क फॉर ह्यूमन ट्रैफिकिंग विक्टिम असिस्टेंस’ के आंकड़ों के अनुसार, कई बार की गई बड़ी कार्यवाहियों के बावजूद इन अड्डों में 5300 से ज्यादा विदेशी नागरिक आज भी तड़प रहे हैं। यह एक वैश्विक मानवीय संकट है क्योंकि इसमें किसी एक देश के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के नागरिक फंसे हैं जिनमें मुख्य रूप से करीब 1,600 चीनी, करीब 200 बर्मी, 20 थाई नागरिकों के अलावा भारत, फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया, ब्राजील, रूस, केन्या, युगांडा, रवांडा और जिम्बाब्वे जैसे देशों के नागरिक भी इन यातना गृहों में कैद हैं। अकेले म्यांमार के इन अड्डों पर 800 से 1000 भारतीयों के फंसे होने की आशंका है।
अब तक का रेस्क्यू ऑपरेशन और वैश्विक दबाव
हालांकि संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव के बाद म्यांमार प्रशासन ने इस अरबों डॉलर के काले साम्राज्य (अवैध आपराधिक उद्योग) पर कार्रवाई शुरू की है। भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की मुस्तैदी के कारण पिछले डेढ़-दो वर्षों में म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के इन नरक जैसे स्कैम केंद्रों से 2400 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
विश्व के सभी युवाओं का सबसे बड़ा सवाल
क्या दुनिया की महाशक्तियां और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस आधुनिक गुलामी और संगठित साइबर आतंक पर मूकदर्शक बने रहेंगे? यदि हां तो कब तक ? अब देखना होगा कि जब तक चीनी माफिया और म्यांमार के आतंकी गुटों के इस गठजोड़ को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक दुनिया का कोई भी युवा सुरक्षित नहीं है। यह समय केवल चिंता जताने का नहीं, बल्कि एक निर्णायक और संयुक्त वैश्विक सैन्य व रणनीतिक कार्रवाई का है! यह समाचार पूरी दुनिया के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (चेतावनी) है। जब तक इंटरनेट पर बैठे इन चीनी माफियाओं और म्यांमार के सशस्त्र आतंकी गुटों के गठजोड़ को जड़ से जमींदोज नहीं किया जाता, तब तक दुनिया का हर वो युवा असुरक्षित है जो एक बेहतर भविष्य की तलाश में घर से निकलता है। अब समय सिर्फ बैठकों का नहीं, बल्कि इन हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड्स पर सीधी और निर्णायक वैश्विक कार्रवाई का है!
पूरा विश्व इस बात को भली-भांति जानता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में दो राजनीतिक दलों ही का बोलबाला है। लेकिन अमेरिकी राजनीति और मीडिया जगत के सबसे रसूखदार और आक्रामक चेहरों में शुमार टकर कार्लसन ने एक ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा है, जिससे वॉशिंगटन के सत्ता गलियारों में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति की सबसे बुलंद और प्रभावशाली आवाज माने जाने वाले कार्लसन, जो कभी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे प्रबल पैरोकार थे, अब ट्रंप से खुलकर बगावत पर उतर आए हैं। उन्होंने अमेरिका की पारंपरिक दो-दलीय व्यवस्था को चुनौती देते हुए ‘तीसरी राजनीतिक पार्टी’ बनाने का ऐलान कर दिया है।
ट्रंप से आर-पार की जंग के मूड में हैं पत्रकार
आपकों बता दें, कभी ट्रंप की नीतियों के सबसे बड़े रक्षक रहे कार्लसन और ट्रंप के बीच के मतभेद अब चौराहे पर आ चुके हैं। कार्लसन ने अपने पॉडकास्ट पर सीधे हमले करते हुए स्वीकार किया है कि “ट्रंप को लेकर उन्होंने लोगों को गुमराह किया था।” उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया और ट्रंप पर अपने चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया।
ट्रंप की तीखी आलोचना कर रहा है पत्रकार
पत्रकार कार्लसन ने ट्रंप द्वारा ‘अल्लाह’ शब्द के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर खुद को ईसा मसीह जैसी छवि में पेश करने की भी तीखी लानत-मलामत की है।
पत्रकार ऐसी लोकप्रियता जिससे ट्रंप को भी छोड़ गया पीछे !
मजे की बात है कि कार्लसन को पत्रकारिता विरासत में मिली है, उनके पिता रिचर्ड वार्नर कार्लसन भी मीडिया जगत से जुड़े रहे थे। साल 2016 से 2023 के बीच फॉक्स न्यूज के शो ‘टकर कार्लसन टुनाइट’ ने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। करीब 30 लाख दर्शकों तक सीधी पहुंच रखने वाले इस शो के दौरान कार्लसन का जादू ऐसा सिर चढ़कर बोल रहा था कि उनके नाम की टी-शर्ट और मग की बिक्री कई बार ट्रंप से जुड़े उत्पादों से भी ज्यादा हो जाती थी। रिपब्लिकन रणनीतिकार जेफ रो के मुताबिक, 2020-21 के दौरान कंजर्वेटिव राजनीति में कार्लसन जैसा रसूख रखने वाला दूसरा कोई शख्स नहीं था।
पत्रकार का विवादों से पुराना नाता, डिज़नी-लेक्सस ने खींचे थे हाथ
आपकों याद होगा इमिग्रेशन (आप्रवासन) विरोध, श्वेत पहचान और प्रखर राष्ट्रवादी मुद्दों पर बेहद आक्रामक रुख रखने वाले कार्लसन का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। उन्होंने बार-बार यह दावा करके तहलका मचाया कि अमेरिका का अभिजात वर्ग श्वेत ईसाई मतदाताओं की जगह नए प्रवासी मतदाताओं को स्थापित करना चाहता है। इन बयानों के बाद मचे भारी बवाल के कारण डिज़नी और लेक्सस जैसी दिग्गज कंपनियों ने उनके शो से अपने विज्ञापन तक हटा लिए थे।
अब फॉक्स न्यूज से विदाई और नया साम्राज्य
कार्लसन ने साल 2023 में फॉक्स न्यूज से अलग होने के बाद भी नहीं थमे। उन्होंने अपना खुद का स्ट्रीमिंग मंच ‘टकर कार्लसन नेटवर्क’ शुरू किया।
अमरीकियों के सामने बड़ा सवाल : सोचने को मजबूर सब
क्या कार्लसन अमेरिका की उस पारंपरिक ‘टू-पार्टी सिस्टम’ (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन) के दबदबे को उखाड़ फेंकने में कामयाब हो पाएंगे? वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के प्रयासों पर सवाल उठाने वाले और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी अलग राय रखने वाले 58 वर्षीय टकर कार्लसन ने ‘तीसरी पार्टी’ का पासा फेंककर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति की दशा और दिशा बदलने का माद्दा रखते हैं। भविष्य में अमेरिका की राजनैतिक तस्वीर क्या होगी ? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल, टकर कार्लसन ने ‘तीसरी पार्टी’ का पासा फेंककर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति की दशा और दिशा बदलने में ऐड़ी-चोटी का जोर लगा कर विश्व की राजनीति में नयी इबारत लिखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
जयपुर/राजसमंद, 25 जून। कृषि मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा की पहल अब साकार रूप लेती नजर आ रही है। जी हां, यह बात पूरी सोलह आने सही है। राजस्थान में किसानों के लिए खाद वितरण व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने जा रही है। राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी, फर्जी खरीद और लंबी कतारों की समस्या पर बड़ा प्रहार करते हुए फर्टीलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम (एफएसएएस) का शुभारंभ कर दिया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन से ही खाद की बुकिंग कर सकेंगे और उन्हें फार्मर आईडी के आधार पर पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
गौरतलब है कि डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के हितों के बारे में वक्तव्य देते हुए संदेश दिया था कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रही है। मीणा की पहल पर कृषि विभाग के आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र राजसमंद में इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह व्यवस्था किसानों को तकनीक आधारित, पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
अब नहीं लगानी पड़ेगी खाद के लिए लाइन
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद किसानों को खाद लेने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। किसान घर बैठे मोबाइल के जरिए खाद की मांग दर्ज कर सकेंगे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों का समय और श्रम दोनों बचेंगे।
कालाबाजारी और फर्जीवाड़े पर सीधा वार
एफएसएएस के जरिए उर्वरकों का वितरण सीधे किसान की फार्मर आईडी से जोड़ा गया है। इससे खाद की कालाबाजारी, फर्जी खरीद-फरोख्त और अनियमित वितरण पर प्रभावी रोक लग सकेगी। विभाग का दावा है कि अब अनुदानित खाद केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचेगी।
राजसमंद और सिरोही बने मॉडल जिले
इस अभिनव व्यवस्था की शुरुआत फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजसमंद और सिरोही जिलों में की गई है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो जल्द ही पूरे राजस्थान में इसे लागू किया जा सकता है।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की शुरुआत
कार्यक्रम में मौजूद एडीएम नरेश बुनकर ने कहा कि तकनीक आधारित यह पहल किसानों को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं अतिरिक्त निदेशक कृषि, खंड भीलवाड़ा निरंजन सिंह राठौड़ ने इसे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाली क्रांतिकारी व्यवस्था बताया।
इस खबर की खास बात
खाद वितरण में हर वर्ष सामने आने वाली अव्यवस्था, कृत्रिम संकट और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच राजस्थान सरकार का यह कदम किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले समय में खाद वितरण व्यवस्था का पूरा चेहरा बदल सकता है और किसान को उसकी जरूरत का उर्वरक बिना भटकाव और बिना सिफारिश के समय पर उपलब्ध हो सकेगा।
जयपुर। राजस्थान में वन प्रबंधन अब पारंपरिक तरीकों से निकलकर हाईटेक युग में प्रवेश करने जा रहा है। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘डिजिवन (DigiVan)’ पोर्टल को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को वन विभाग मुख्यालय अरण्य भवन में विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब जंगलों की निगरानी, योजना निर्माण और निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह डेटा आधारित और तकनीक संचालित होगी।
प्रत्येक माह पोर्टल के उपयोग की होगी विस्तृत समीक्षा
मुख्य सचिव ने डिजिवन को वन विभाग के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का गेम चेंजर बताते हुए कहा कि यह केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि भविष्य के वन प्रशासन की मजबूत नींव है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक माह पोर्टल के उपयोग की विस्तृत समीक्षा की जाए और प्रदर्शन के आधार पर जिलों की रैंकिंग तय की जाए। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
AI और डेटा एनालिटिक्स से जंगलों की होगी स्मार्ट मॉनिटरिंग
बैठक में सबसे ज्यादा जोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और मल्टीपल डेटा सोर्सेज को डिजिवन से जोड़ने पर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वन प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। इससे वन क्षेत्र की निगरानी, संसाधनों के संरक्षण और योजनाओं के क्रियान्वयन में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
देश का पहला और अनोखा डिजिटल वन प्लेटफॉर्म
मुख्य सचिव ने डिजिवन को देश में अपनी तरह का पहला और अद्वितीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि इसमें उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले मल्टी-लेयर डेटा का उपयोग विभिन्न सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित यह प्लेटफॉर्म वन विभाग की कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
युवा अधिकारियों को नवाचार का मंच, कर्मचारियों को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
मुख्य सचिव ने युवा अधिकारियों को डिजिवन के माध्यम से नवाचार और विश्लेषणात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। साथ ही फील्ड स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला स्तर पर अधिकाधिक डेटा संकलन और दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने को भी कहा ताकि पोर्टल की उपयोगिता लगातार बढ़ती रहे।
हर माह होंगे वेबिनार, विभागों के बीच होगा डेटा शेयरिंग नेटवर्क
क्षमता निर्माण और तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक माह वेबिनार आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य विभागों के साथ API आधारित डेटा शेयरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इससे विभिन्न विभागों के बीच डेटा आधारित समन्वय को नई गति मिलेगी और डिजिवन पोर्टल और अधिक प्रभावी बन सकेगा।
बैठक में वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) अरिजीत बनर्जी, प्रमुख शासन सचिव (वित्त) वैभव गलरिया सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
खबर की बड़ी बात
राजस्थान सरकार का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में AI, बिग डेटा और डिजिटल तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएंगी। डिजिवन यदि अपने लक्ष्य के अनुरूप कार्य करता है तो यह मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है।
खंडीप/वजीरपुर। पांचना बांध के पानी को कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़े जाने की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से जारी किसानों की ऐतिहासिक महापंचायत बुधवार को एक अहम मोड़ पर पहुंच गई। हजारों किसानों के संघर्ष, एकता और जनदबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा और कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मंच से घोषणा की कि अगले छह दिनों के भीतर, यानी 1 जुलाई तक, पांचना बांध का पानी नहरों के जरिए किसानों तक पहुंचा दिया जाएगा।
मंत्री ने किसानों के बीच बड़ा वादा करते हुए कहा कि यदि तय समय सीमा तक पानी नहरों में नहीं पहुंचा तो वह स्वयं पांचना बांध पर जाकर किसानों के साथ धरने पर बैठेंगे। इस घोषणा के बाद धरना स्थल पर मौजूद हजारों किसानों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ उनका स्वागत किया।
जनसैलाब बना किसानों का आंदोलन
महापंचायत के अंतिम दिन खंडीप का धरना स्थल जनसैलाब में तब्दील हो गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ ने आंदोलन को ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया। क्षेत्रभर से पहुंचे जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं ने किसानों के समर्थन में मंच साझा किया।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल खरीफ फसल ही नहीं, बल्कि रबी सीजन के लिए भी किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के धैर्य, अनुशासन और एकजुटता ने सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचा है।
“20 साल में ऐसा आंदोलन नहीं देखा” – सांसद मुरारी लाल मीणा
दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा ने कहा कि पांचना बांध के पानी का विवाद करीब दो दशकों से चला आ रहा है, लेकिन उन्होंने आज तक इतना व्यापक और जनभागीदारी वाला आंदोलन नहीं देखा। उन्होंने कहा कि युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी यह साबित करती है कि यह केवल पानी का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की भावनाओं और भविष्य का सवाल है।
सभी जनप्रतिनिधियों ने किसानों को दिया भरोसा
गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीणा ने किसानों से डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के नेतृत्व पर विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
महवा विधायक राजेन्द्र मीणा ने कहा कि समाधान का रास्ता अब खुल चुका है और जल्द ही नहरों में पानी बहता दिखाई देगा।
सपोटरा विधायक हंसराज मीणा ने कहा कि पांचना बांध राष्ट्रीय संपत्ति है और इसका पानी हर किसान का अधिकार है। किसानों की जायज मांग को सम्मान मिलना चाहिए।
बामनवास विधायक इन्द्रा मीणा ने उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद पानी नहीं छोड़े जाने पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जमवारामगढ़ विधायक महेन्द्र पाल मीणा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार सकारात्मक दिशा में काम कर रही है और जल्द ही शुभ समाचार मिलने वाला है।
संघर्ष रंग लाया, लेकिन अब 1 जुलाई पर टिकी निगाहें
वरिष्ठ किसान नेता भागचंद सैनी ने कहा कि वर्षों से लंबित इस मुद्दे के समाधान का समय आ चुका है। किसानों की एकजुटता और संघर्ष ने सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर किया है।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के आश्वासन के बाद महापंचायत समिति ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी, लेकिन किसानों की निगाहें अब 1 जुलाई पर टिकी हैं। यदि तय समय पर नहरों में पानी पहुंचता है तो यह आंदोलन क्षेत्र के इतिहास में किसानों की सबसे बड़ी जीत के रूप में दर्ज होगा। वहीं, यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो किसान दोबारा बड़े आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।
कोटा ग्रामीण। अयाना थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करा दिया। इटावा एसडीएम हेमंत कुमार घनघोर के निर्देश पर चलाए गए। इस विशेष अभियान में अयाना थाना प्रभारी अविनाश मीणा ने अहम भूमिका निभाई और पूरे अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित कराया।
अतिक्रमण पर चला बुलडोजर
अविनाश मीणा के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता पूरी मुस्तैदी के साथ रहा तैनात —
गौरतलब है कि सोमवार को पुलिस, राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम जैसे ही मौके पर पहुंची, अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप मच गया। खेल मैदान पर किए गए कच्चे और अस्थायी अतिक्रमणों को हटाकर सरकारी भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया गया। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह निर्णायक कदम उठाया। अभियान के दौरान थाना प्रभारी अविनाश मीणा के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहा। उनकी सतर्क निगरानी और कानून व्यवस्था बनाए रखने की प्रभावी रणनीति के चलते कार्रवाई शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुई। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मीणा की सक्रिय भूमिका की सराहना की।
सुप्रीम कोर्ट की मंशा के अनुरूप कार्रवाई —
सार्वजनिक और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुका है कि ऐसी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण कानून के शासन के विरुद्ध है। अदालत ने प्रशासन को सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्मीपुरा में हुई यह कार्रवाई भी उसी सख्त प्रशासनिक सोच का उदाहरण मानी जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों को समझाइश दी गई कि भविष्य में सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं किया जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान पीपल्दा तहसीलदार वी.पी. सिंह, इटावा पुलिस उपाधीक्षक ओमप्रकाश सरावग, अयाना थाना प्रभारी अविनाश मीणा सहित राजस्व विभाग एवं पुलिस बल के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। संदेश साफ है—सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानून का डंडा लगातार चलता रहेगा और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी।
टोंक। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक सोमवार को जिला परिषद सभागार में उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब टोंक-सवाईमाधोपुर सांसद एवं पूर्व डीजीपी हरीश चंद्र मीणा ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि “अधिकारियों की ढिलाई ही भ्रष्टाचार को जन्म देती है। यदि शिकायतें आने के बावजूद जांच नहीं होती तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।” बैठक में कलेक्टर टीना डाबी, पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सांसद ने ग्रामीण विकास, पुलिस, शिक्षा, राजस्व, स्वायत्त शासन और खनिज विभागों के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए जन समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
“पुलिस पिट रही है, तो आम आदमी कैसे सुरक्षित महसूस करेगा?”
कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए सांसद ने एसपी की मौजूदगी में कहा कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा — “जब पुलिसकर्मी ही पिट रहे हैं और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, तब आम आदमी खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेगा? ऐसी घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और कानून व्यवस्था पर लोगों का विश्वास डगमगा देती हैं।” सांसद ने आरोप लगाया कि कई मामलों में फरियादियों को न्याय दिलाने में पुलिस अनावश्यक ढिलाई बरत रही है। उन्होंने पीड़ितों को बैठक में बुलाकर अधिकारियों के सामने उनकी समस्याएं भी रखीं।
नगर परिषद की वसूली पर उठाए सवाल —
बैठक के दौरान सांसद ने नगर परिषद द्वारा अधिकृत एजेंसी के माध्यम से नेशनल हाईवे पर वाहनों से कथित रूप से वसूले गए टैक्स का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने नगर परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट से सीधे सवाल किया, “किसके आदेश पर हाईवे पर वाहनों से टैक्स वसूला गया और वह राशि आखिर गई कहां?” आयुक्त ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर हाईवे पर वसूली की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यह प्रक्रिया बंद कर दी गई है।
“100 साल पुरानी खातेदारी भी सैटेलाइट सर्वे में बदल गई”
राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए सांसद ने कहा कि आधुनिक सर्वेक्षणों की गलतियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा — “जिस जमीन पर परिवार 100 वर्षों से खेती कर रहा है, सैटेलाइट सर्वे में उसकी जमीन कहीं और दिखा दी गई। यह किसानों के साथ अन्याय है।” सांसद ने पीड़ित किसानों को कलेक्टर टीना डाबी से मिलवाया। कलेक्टर ने मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
शिक्षा विभाग पर भी बरसे सांसद —
निवाई क्षेत्र के एक विद्यालय में परीक्षा परिणामों को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए सांसद ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को फेल किया गया, फिर दबाव पड़ने पर पास कर दिया गया और मीडिया में मामला आने के बाद दोबारा फेल घोषित कर दिया गया। सांसद ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा — “बच्चों का भविष्य कोई प्रयोगशाला नहीं है। शिक्षा व्यवस्था में ऐसी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर दिया जोर बैठक के दौरान सांसद हरीश मीणा ने कहा कि जनता को बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों को जवाबदेही तय करते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
जनता की आवाज बने सांसद, अधिकारियों को दी जवाबदेही की सीख —
दिशा समिति की बैठक में सांसद हरीश चंद्र मीणा का तेवर स्पष्ट रूप से आक्रामक और जनहित केंद्रित नजर आया। भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था, किसानों की जमीन, शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों पर उन्होंने अधिकारियों से सीधे जवाब मांगे। बैठक ने यह संदेश दिया कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति अब सवालों के घेरे में है।
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हैलो सरकार आपके लिए एक ऐसा चौंकाने वाला समाचार सामने आया है जिससे GST व्यवस्था, बैंकिंग प्रणाली और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति के नाम पर यह कंपनी संचालित बताई जा रही है, वह अपनी आजीविका के लिए पंचर की दुकान चलाता है और उसे कथित तौर पर इस पूरे कारोबार की कोई जानकारी तक नहीं थी।
मौके पर पहुंचे टैक्स अधिकारी भी रह गए हैरान —
सूत्रों के अनुसार जब अधिकारी वास्तविक स्थिति जानने के लिए मौके पर पहुंचे तो वहां की परिस्थितियां देखकर स्वयं भी हैरान रह गए। करोड़ों के कारोबार और एक साधारण मजदूर की आर्थिक स्थिति के बीच का अंतर इस पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है।
एम्स थाने में शिकायत, नेटवर्क की जांच शुरू —
पीड़ित राज प्रजापति ने पूरे मामले की शिकायत एम्स थाना क्षेत्र में दर्ज कराई है। शिकायत के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर किसने दस्तावेजों का उपयोग किया, कंपनी कैसे बनाई गई, बैंक खाते किस प्रकार संचालित हुए और करोड़ों रुपये के कारोबार के पीछे कौन लोग शामिल थे।
सरकार से बड़ा सवाल : आम आदमी की पहचान कितनी सुरक्षित ?
यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ हुई कथित धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि यदि किसी गरीब मजदूर या छोटे कारोबारी के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा किया जा सकता है, तो आम नागरिक की पहचान और वित्तीय सुरक्षा कितनी सुरक्षित है?
आम आदमी के लिए प्रेरणादायक चेतावनी —
अब देखने वाली बात ही है कि क्या सरकार फर्जी कंपनी चलने वालों को बेनकाब कर उनकी पहचान जनता के सामने लायेगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल, सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खुलासा होने से हर आदमी की दिल और दिमाग पर दस्तावेजों को लेकर गंभीर चोट पहुंच रही है।
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के वीकेआई औद्योगिक क्षेत्र में कृषि मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा की औचक कार्रवाई ने कृषि माफियाओं के उस काले कारोबार का पर्दाफाश कर दिया है, जो वर्षों से किसानों की मेहनत, फसलों और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा था। निरीक्षण के दौरान नकली पोटाश, अवैध बायो-स्टिमुलेंट तथा बिना वैधानिक अनुमति संचालित कृषि उत्पाद निर्माण इकाइयों का बड़ा नेटवर्क सामने आया है।
ऊंचे दामों पर बेची जा रही थी नक़ली “पोटाश” —
डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा द्वारा की गई कार्रवाई से सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि किसानों को ऊंचे दामों पर बेची जा रही तथाकथित “पोटाश” वास्तव में नमक के अपशिष्ट पदार्थों से तैयार की जा रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उत्पाद न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति और फसल उत्पादन पर भी गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं।
औचक निरीक्षण में खुली कृषि माफियाओं की पोल —
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को भारी मात्रा में संदिग्ध कच्चा माल, तैयार उत्पाद, पैकिंग सामग्री और बिना अनुमति संचालित उत्पादन इकाइयां मिलीं। जांच में सामने आया कि कई उत्पाद बिना वैधानिक अनुमति के तैयार कर बाजार में बेचे जा रहे थे। कृषि विभाग की टीम ने मौके पर ही संबंधित उत्पादों के विक्रय पर तत्काल रोक लगाते हुए अवैध निर्माण इकाइयों को सीज कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही कृषि माफियाओं में हड़कंप मच गया।
किसानों के साथ धोखाधड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं : डॉक्टर किरोडी लाल
कैबिनेट मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसानों को शुद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं मानक कृषि आदान उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मैं अपने इस लक्ष्य से विचलित होने वाला नहीं हूं। किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के साथ उपस्थित कृषि अधिकारियों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व नकली और घटिया कृषि उत्पादों के जरिए किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे थे। ऐसे तत्वों के खिलाफ अब व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।
फसलों और मिट्टी के लिए बड़ा खतरा —
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नकली पोटाश और अवैध बायो-स्टिमुलेंट का उपयोग फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने, उत्पादन घटने और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका रहती है।
अब होगी सख्त कार्रवाई —
कृषि विभाग ने साफ कर दिया है कि किसानों को शुद्ध, गुणवत्तापूर्ण और मानक कृषि आदान उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग अब पूरे प्रदेश में ऐसे अवैध कारोबारियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है।
डॉक्टर किरोडी लाल मीणा की कार्रवाई के मुख्य बिंदु —
✅ नकली पोटाश निर्माण का बड़ा खुलासा ✅ नमक के अपशिष्ट से तैयार किया जा रहा था उत्पाद ✅ अवैध बायो-स्टिमुलेंट बनाने वाली इकाइयां पकड़ी गईं ✅ कई फैक्ट्रियां और उत्पादन इकाइयां सीज ✅ कृषि माफियाओं के खिलाफ एफआईआर की तैयारी ✅ किसानों को घटिया उत्पाद बेचकर की जा रही थी धोखाधड़ी
अब देखना होगा कि क्या सरकार द्वारा की जा रही इस धमाकेदार कार्रवाई से कृषि माफियाओं पर नकेल लगाने की साथ-साथ सजा होगी या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। बहरहाल इस कार्रवाई से किसानों को बड़ी राहत महसूस होगी।
जयपुर ग्रामीण/शाहपुरा। न्याय व्यवस्था में विश्वास रखने वाले एक आदिवासी परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंची जब अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण मामलों की विशेष अदालत के आदेश पर शाहपुरा थाने में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मामला शाहपुरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां अनुसूचित जनजाति वर्ग के सज्जन मीणा निवासी ढाणी ढिगार, ग्राम बागावास चौरासी, तहसील विराटनगर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन थानाधिकारी हेमराज सिंह गुर्जर, तत्कालीन वृत्ताधिकारी मुकेश चौधरी तथा एसआई गंगाराम सहित अन्य व्यक्तियों ने उनके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचकर न केवल अवैध हिरासत में रखा बल्कि बाद में एक चोरी के मामले में झूठा फंसाकर उन्हें महीनों तक जेल में रहने को मजबूर कर दिया।
आठ दिन तक अवैध हिरासत में रखने का आरोप **
परिवाद के अनुसार 27 सितम्बर 2025 को सज्जन मीणा को उनके खेत से पुलिसकर्मी उठाकर शाहपुरा थाने ले गए। आरोप है कि कई दिनों तक न तो परिवार को उनकी गिरफ्तारी की सूचना दी गई और न ही उन्हें नियमानुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
परिवार के लोगों ने जब उच्च पुलिस अधिकारियों, मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक शिकायतें भेजीं, तब भी उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। परिवाद में आरोप लगाया गया कि इस दौरान पुलिस ने परिवार को गुमराह किया और हिरासत की वास्तविक स्थिति छिपाई।
शिकायतों की रंजिश में झूठे मुकदमें में फंसाने का आरोप ***
परिवादी का दावा है कि अवैध हिरासत की शिकायतों से नाराज होकर संबंधित अधिकारियों ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते गोविन्दपुर विद्यालय की लैब से कम्प्यूटर चोरी के मामले में उन्हें आरोपी बना दिया। जबकि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कथित चोरी का माल तो 12 सितम्बर 2025 को ही बरामद दिखाया गया था।
परिवाद में कहा गया है कि न तो कोई सीसीटीवी फुटेज, न मोबाइल लोकेशन, न कॉल रिकॉर्ड और न ही कोई वैज्ञानिक साक्ष्य उनके खिलाफ मौजूद था, फिर भी उन्हें आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया। इतना ही नहीं, उनकी रोजी-रोटी का मुख्य साधन पिकअप वाहन भी जब्त कर लिया गया।
पीडित सज्जन कुमार मीणा
दो महीने से अधिक जेल में रहा परिवार का सहारा***
आरोप है कि केस डायरी में भ्रामक तथ्यों का उल्लेख कर अधीनस्थ न्यायालयों से जमानत प्रभावित करने का प्रयास किया गया। परिणामस्वरूप सज्जन मीणा को दो महीने से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ से जमानत मिलने के बाद 1 दिसम्बर 2025 को उन्हें रिहा किया गया।
इस दौरान उनकी अशिक्षित पत्नी, तीन नाबालिग बेटियां और दो नाबालिग बेटे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट से गुजरते रहे। परिवार की आजीविका प्रभावित हुई, बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई और लाखों रुपये कानूनी प्रक्रिया में खर्च होने का दावा किया गया है।
कोर्ट ने माना मामला गंभीर, दर्ज हुई FIR***
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरण, जयपुर ग्रामीण ने परिवाद में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कार्रवाई के आदेश दिए।
न्यायालय के निर्देशों के बाद शाहपुरा थाने में एफआईआर संख्या 206/2026 दर्ज की गई। एफआईआर में एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं। मामले की जांच वर्तमान वृत्ताधिकारी शाहपुरा को सौंपी गई है।
क्या पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही तय होगी ?
यह मामला केवल एक व्यक्ति की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक प्रश्न को भी सामने लाता है कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को पद और शक्ति के दुरुपयोग के माध्यम से झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा जाता है तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा, आर्थिक नुकसान और मानसिक पीड़ा की भरपाई कौन करेगा?
हालांकि पुलिस विभाग में अनेक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन ऐसे आरोप पूरे विभाग की छवि को प्रभावित करते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी होती है या नहीं तथा पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।
गौरतलब है कि फिलहाल पुलिस अफसरों पर FIR दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण हो सकेगा। इसलिए आप नियमित रूप से जोरदार समाचारों के लिए हैलो सरकारसे जुड़े रहे।
जयपुर। आज 12 जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने जारी किया। बूंदी में एक इंच से ज्यादा बरसात हुई तो वहां का पारा 40 के ऊपर रहा, जबकि प्रदेश का अलवर सबसे गर्म रहा। अजमेर संभाग के इलाकों में प्री-मानसून की बारिश राजस्थान में प्री-मानसून बारिश का दौर जारी है। आज भी 12 जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। शुक्रवार को कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग के इलाकों में प्री-मानसून की बारिश हुई। बूंदी, राजसमंद, अजमेर और कोटा समेत कई जिलों में 1 इंच तक पानी बरसा। प्री-मानसून बारिश का यह दौर 23 जून तक रह सकता है।पिछले 24 घंटों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में दोपहर तक मौसम साफ रहा। इसके बाद कई जिलों में हल्की बरसात हुई। शुक्रवार को अलवर सबसे गर्म रहा।
गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स —
राजस्थान बूंदी जिले में सबसे ज्यादा बरसात हुई । पिछले 24 घंटे में बूंदी के रायथल में 33MM, हिंडौली में 18, बूंदी शहर में 15, राजसमंद के कुंभलगढ़ में 12, सरदारगढ़ में 25, रेलमगरा में 16, अजमेर के सावर में 18MM बरसात दर्ज हुई। इनके अलावा बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, चितौड़गढ़, उदयपुर जिलों में भी कुछ स्थानों पर हल्की बारिश, बूंदाबांदी हुई। सबसे ज्यादा गर्मी अलवर में —
अलवर में 40 डिग्री से ऊपर तापमान: शुक्रवार को सबसे ज्यादा गर्मी अलवर में रही, यहां अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। अलवर, दौसा, भरतपुर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर, गंगानगर, नागौर समेत कई जिलों में दिनभर मौसम साफ रहा और उमस रही।
राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम —राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को दिनभर मौसम साफ रहा। दिन में हल्के बादल छाए रहे और उमस रही। हालांकि, तापमान में गुरुवार के मुकाबले 2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। यहां शुक्रवार को अधिकतम तापमान 37.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हैलो सरकार रंगमंच आज हैलो सरकार फिल्मी दुनिया के ऐसे महान कलाकार से परिचय कराने जा रहे हैं जिन्होंने न केवल अपने पिता के सपनों के चार चांद लगाए अपितु अथाह गरीबी से जूझ कर फिल्मी दुनिया में कदम रख कर तहलका मचाया। उनका नाम है गुलाब सलाट एक्शन एक्टर । गुलाब सलाट एक्शन एक्टर को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। अभी हाल ही में दर्पण यूट्यूब चैनल, महाराष्ट्र लोक कल्याणकारी सेवा संस्था राष्ट्रीय कार्य दर्पण गौरव पुरस्कार अवॉर्ड 13 जून को मुम्बई से सौराष्ट्र सम्राट न्यूज़ चैनल पुरस्कार अवार्ड गुलाब एक्शन एक्टर गुजरात राजकोट से मिला।
एक्शन फिल्मी हीरो गुलाब सलाट का जीवन परिचय
गुजरात के आनंद जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे गुलाब सलाट आज भारतीय सिनेमा के उभरते हुए एक्शन एक्टर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। गरीबी, संघर्ष और असफलताओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके जीवन की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है, लेकिन हालात से हार मान लेता है।
गुलाब को अब तक कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं —पुरस्कार अभिनंदन पत्र राष्ट्रीय एकता सन्मान महासोळा राज्यस्तरीय लोक सेवा गौरव अवार्ड दिल्ली बॉलीवुड सिने रिपोर्टर अवार्ड, नागपुर गौरव महाराष्ट्र अवार्ड, मुंबई जन गौरव कार्य दर्पण अवार्ड, वडोदरा सिने मीडिया अवार्ड, और वाइब्रेंट गुजराती फिल्म अवार्ड। ये सम्मान उनके कठिन परिश्रम और प्रतिभा की पहचान हैं।
संघर्ष की शुरुआत: तंबू से मुंबई तक का सफर
गुलाब के पिता तम्मा भाई सलाट बेहद गरीब थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन एक खाट-तंबू में बिताया। लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया। बचपन से ही गुलाब फिल्मों की दुनिया से आकर्षित थे। मात्र 8 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता से कहा कि एक दिन वे फिल्मों में काम करेंगे।
पिता ने बेटे के सपनों के लिए दिन-रात मेहनत की और उन्हें ऑल इंडिया वाडो काई कराटे दो अकादमी में दाखिला दिलाया। यहीं से गुलाब ने अपने जीवन की दिशा तय की — एक्शन और मार्शल आर्ट के जरिए फिल्मी दुनिया में नाम कमाना।
हैदराबाद से मुंबई तक — मेहनत और धोखे की कहानी
डांस और जिमनास्टिक में माहिर होने के लिए गुलाब हैदराबाद गए, जहां उन्होंने एक साल की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनके पिता उन्हें लेकर मुंबई पहुंचे ताकि उन्हें फिल्म में काम मिल सके। लेकिन किस्मत ने फिर परीक्षा ली — एक डायरेक्टर ने गुलाब के पिता से ₹15,000 ठग लिए और काम देने का वादा पूरा नहीं किया। निराश होकर पिता-पुत्र वापस आनंद लौट आए। कुछ समय बाद तम्मा भाई का निधन हो गया। यह गुलाब के जीवन का सबसे कठिन दौर था।
संघर्ष से सफलता तक
पिता की मृत्यु के बाद गुलाब ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कराटे सिखाना शुरू किया, छोटे-छोटे शो किए और डांस प्रस्तुतियों से जो भी कमा सकते थे, उससे घर चलाया। उनके परिवार में दो भाई और दो बहनें थीं, और मां की तबीयत भी बिगड़ती जा रही थी।
इन्हीं संघर्षों के बीच गुलाब ने निश्चय किया कि वे अपने पिता का नाम रोशन करेंगे। लगातार प्रयासों के बाद उन्हें टीवी सीरियल ‘जय जय जग जननी, दुर्गा मां, जय बजरंगबली’ में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद फिल्मों में भी उनका सफर शुरू हुआ।
अब एक्शन ही पहचान
गुलाब सलाट आज एक प्रशिक्षित एक्शन एक्टर हैं, जिन्होंने मार्शल आर्ट, कराटे, जिमनास्टिक, योगा, बॉडी स्टंट, ब्रेक डांस, लाठी, ननचाकू, तलवार, राइफल शूटिंग और फिल्मी अभिनय में महारत हासिल की है। उनका कहना है — “मैं अपने पिता का नाम रोशन करने का सपना जल्द ही पूरा करूंगा।”
गुलाब सलाट की यह यात्रा न सिर्फ एक अभिनेता की कहानी है, बल्कि उस संघर्षशील भारतीय युवा की दास्तान है जो हालात से नहीं, बल्कि अपने हौसलों से लड़ता है।
इस तरह देखा जाए तो “गुलाब सलाट — मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल” है, जो युवाओं के लिए प्रेरणादायक स्रोत है।
जयपुर। सड़कों को सुरक्षित बनाने और यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों को सबक सिखाने के लिए पुलिस का महा-अभियान हर दिन एक नया मुकाम हासिल कर रहा है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के कड़े दिशा-निर्देशों और महानिदेशक पुलिस यातायात श्री अनिल पालीवाल व अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी.एल. मीणा के सीधे पर्यवेक्षण में चल रही इस मुहिम ने उन वाहन चालकों की नींद उड़ा दी है जो काली फिल्म, अवैध बत्तियों और हूटर के दम पर सड़कों पर रसूख दिखाते घूमते थे।
14 दिनों में कार्रवाइयों का नया रिकॉर्ड, काटा 1.16 लाख वाहनों का चालान—
पुलिस की कार्रवाई पर गौर करें तो समेकित आंकड़ों का विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि 4 जून से 17 जून 2026 तक के 14 दिनों के भीतर राजस्थान पुलिस ने प्रदेशभर में कुल 1,16,937 वाहनों के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। अभियान के दौरान सबसे अधिक कार्रवाई वाहनों के शीशों पर अवैध काली फिल्म लगाने के मामलों में की गई, जिनमें 44,381 चालान बनाए गए। इसके अलावा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह के 30,148, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन के 16,036, वाहनों की संरचना (बॉडी/चेसिस) में अवैध परिवर्तन के 11,383, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर के 8,668 तथा प्रेशर हॉर्न/एयर हॉर्न के 6,321 मामलों में कार्रवाई की गई। बुधवार को भी प्रदेशभर में सघन चेकिंग जारी रही। एक ही दिन में 6,731 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इनमें 2,399 वाहन काली फिल्म, 1,686 नियम विरुद्ध नंबर प्लेट, 880 अनाधिकृत शब्द एवं लेखन, 777 अवैध मॉडिफिकेशन, 602 अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती एवं फ्लैशर तथा 387 प्रेशर हॉर्न के मामले शामिल रहे।
लगातार दूसरे दिन भी जयपुर पश्चिम जिला रहा अव्वल—
गौर तलब है कि इस कार्रवाई में जयपुर पश्चिम जिला 522 चालानों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। इसके बाद उदयपुर में 426, जयपुर ग्रामीण में 400, जयपुर यातायात में 319, धौलपुर में 272, दौसा में 265 तथा चित्तौड़गढ़ में 262 चालान किए गए। वहीं बारां 223, भरतपुर 200 और झुंझुनूं 196 भी प्रमुख जिलों में रहे।
यातायात नियमों का पालन करने की अपील —
डीजी श्री पालीवाल ने बताया कि सड़क सुरक्षा एवं यातायात अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। आमजन से अपील की गई है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, वाहनों में अनधिकृत संशोधन, काली फिल्म, अवैध हूटर, फ्लैशर एवं नियम विरुद्ध नंबर प्लेट का उपयोग नहीं करें, ताकि सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
जयपुर। राज्यव्यापी आह्वान पर जयपुर जिले के गोविन्दगढ़ में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को सद्बुद्धि यज्ञ किया। यह आयोजन पंचायत समिति परिसर में हुआ, जिसमें कर्मचारियों ने सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की।
राज्य सरकार पर अनदेखी का आरोप —
पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन, गोविन्दगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष कमल शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार पिछले ढाई वर्षों से उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि अन्य विभागों में कैडर रिव्यू हो चुके हैं, लेकिन पंचायतीराज विभाग में यह अब तक नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, नियमित कार्य विभाजन की व्यवस्था भी लागू नहीं की गई है।
एक जून से चल रहा आंदोलन —
गौरतलब है कि मंत्रालयिक कर्मचारी 1 जून से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में उत्तराखंड पैटर्न लागू करना, कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 के कर्मचारियों को नोशनल बेनिफिट देना, अंतरजिला स्थानांतरण नीति लागू करना और अनुकम्पात्मक नियुक्ति प्राप्त कर्मचारियों को टंकण परीक्षा से छूट देना शामिल है। इन मांगों पर सरकार ने मौन व्रत धारण कर लिया।
वीबीजी राम जी योजना के पूर्ण बहिष्कार से खुलेगी सरकार की आंखें —
आपकों बता दें , गुरुवार को सद्बुद्धि यज्ञ के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार से मंत्रालयिक संवर्ग की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। इसके बाद विकास अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें वीबीजी राम जी योजना के पूर्ण बहिष्कार के निर्णय से भी अवगत कराया गया। कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए नया तरीका इजाद किया है।
सुंदर लाल मीणा सहित बड़ी संख्या में रहे मौजूद —
इस अवसर पर नत्थू सिंह, दीपक कुमार शर्मा, गुलाब चंद बुरड़क, कमलेश कुमार टेलर, भागीरथ मल बुनकर, संदीप कुमार शर्मा, सुंदर लाल मीणा, जगवीर सिंह, अंकिता जैन, ज्योति पिंगोलिया, शीतल चौधरी, हेमलता पारीक, सुमन कुमारी यादव, प्रेमलता, सुमन ओला, अनिता वर्मा सहित पंचायत समिति क्षेत्र के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
देखना होगा कि क्या सरकार कर्मचारियों की मांगों पर विचार करती है या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। बहरहाल योजना के अटकलें से ग्रामीणों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सड़क सुरक्षा पर राजस्थान पुलिस का सख्त एक्शन : 12 दिनों में 1 लाख से ज्यादा वाहनों पर कार्रवाई
जयपुर। सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान पुलिस ने प्रदेशभर में व्यापक अभियान छेड़ रखा है। इस विशेष अभियान के तहत महज 12 दिनों में 1,02,878 वाहनों के खिलाफ चालान और जब्ती की कार्रवाई कर कानून तोड़ने वालों को कड़ा संदेश दिया गया है।
वाहन चालकों पर सख्ती से कार्रवाई —-
पुलिस मुख्यालय के अनुसार 4 जून से 15 जून तक चलाए गए इस अभियान में ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट, अवैध मॉडिफिकेशन, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, हूटर और प्रेशर हॉर्न लगाने वाले वाहन चालकों पर सख्ती से कार्रवाई की गई।
अभियान पूरी दृढ़ता के साथ रहेगा जारी —
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई गई है और भविष्य में भी यह अभियान पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।
ब्लैक फिल्म वालों पर सबसे बड़ी कार्रवाई —
अभियान के दौरान सबसे ज्यादा कार्रवाई वाहनों पर लगी ब्लैक फिल्म के खिलाफ हुई। पुलिस ने 39,417 वाहनों पर कार्रवाई कर ब्लैक फिल्म हटवाई। इसके अलावा— 26,545 नियम विरुद्ध नंबर प्लेट 14,119 अनाधिकृत शब्द और चिन्ह 9,870 अवैध मॉडिफिकेशन 7,428 अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर और हूटर 5,499 प्रेशर हॉर्न के मामलों में कार्रवाई दर्ज की गई। एक दिन में 7 हजार से अधिक वाहनों पर शिकंजा — अभियान के तहत 15 जून को ही पुलिस ने प्रदेशभर में 7,208 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें— * 2,646 ब्लैक फिल्म * 1,926 नियम विरुद्ध नंबर प्लेट * 984 अनाधिकृत शब्द और चिन्ह * 654 अवैध मॉडिफिकेशन * 653 अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती व हूटर * 345 प्रेशर हॉर्न के मामले शामिल रहे।
जयपुर वेस्ट रहा सबसे आगे —–
जिला स्तर पर कार्रवाई के मामले में जयपुर वेस्ट सबसे आगे रहा, जहां एक ही दिन में 470 वाहनों पर कार्रवाई की गई। इसके बाद धौलपुर (321), जयपुर यातायात (308), चित्तौड़गढ़ (303), जयपुर ग्रामीण (284) और बारां (271) का स्थान रहा।
आमजन से की अपील —-
डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल ने वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने वाहनों में किसी भी प्रकार की अवैध मॉडिफिकेशन, ब्लैक फिल्म, अनाधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, हूटर और प्रेशर हॉर्न का उपयोग न करें। यातायात नियमों का पालन न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि सड़क पर सभी की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
पुलिस के अभियान स्पष्ट संकेत —
राजस्थान पुलिस का यह अभियान स्पष्ट संकेत है कि सड़क सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए अब कोई रियायत नहीं होगी। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कोटपुतली। जिला कलेक्टर कोटपूतली -बहरोड की हठधर्मिता इस कदर हावी हो गई कि आम आदमी की समस्याओं का समाधान करना तो दूर न्यायालय के आदेश की पालना के बजाय उनकी बेजा धज्जियां उड़ाई जा रही है।
अनिश्चितकालीन धरना 1286 वे दिन भी जारी —
जोधपुरा संघर्ष समिति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि समिति का अनिश्चितकालीन धरना 1286 वे दिन भी जारी रहा। विज्ञप्ति के अनुसार जोधपुरा संघर्ष समिति न्यायालय (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) NGT भोपाल द्वारा दिए गए आदेश की अक्षरश: पालना करवाई जाने व गांव की आबादी से गुजरने वाले ओवर लोड ट्रकों को पूर्णतः बंद करवाई जाने को लेकर जिला कलेक्टर महोदया, पुलिस अधीक्षक महोदय, एसडीम महोदय को ज्ञापन दिया।
अनेक बार प्रशासन को कराया अवगत —
समिति के सचिव कैलाश यादव, उपाध्यक्ष सतपाल यादव ने कहा कि अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के ओवरलोड वाहनों द्वारा जोधपुरा( मोहनपुरा) के ग्रामीणों को हो रही परेशानी एवं NGT आदेशों की पालना के लिए ज्ञापन सौंपकर बताया कि अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के विरुद्ध जोधपुरा संघर्ष समिति का धरना पिछले 1286 दिनों से लगातार जारी है। अधिकार प्लांट के निकट आबादी क्षेत्र में संचालित क्रेशर एवं खनन क्षेत्र में होने वाली ब्लास्टिंग के कारण स्थानीय ग्रामीणों का जीवन अत्यंत प्रभावित हो रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा अनेक बार प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है।
हाई-मास्ट लाइटों का अत्यधिक उपयोग —
मजे की बात यह है कि इस मामले में माननीय राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) द्वारा भी ग्रामीणों के पक्ष में आदेश पारित किए जा चुके हैं, किन्तु उनका प्रभावी पालना नहीं हो रहा है। वर्तमान में प्लांट परिसर एवं खनन क्षेत्र तथा क्रेशर क्षेत्र में रात्रिकाल में हाई-मास्ट लाइटों के अत्यधिक उपयोग से आसपास के निवासियों की नींद प्रभावित हो रही है। साथ ही धूल एवं प्रदूषण के कारण बच्चों, बुजुर्गों तथा अन्य ग्रामीणों में एलर्जी, दमा एवं श्वास संबंधी बीमारियों की शिकायतें बढ़ रही हैं। NGT कोर्ट ने आबादी, स्कूल व मंदिर से 500 मीटर की दूरी छोड़कर ब्लास्टिंग किए जाने के आदेश दिए हैं। फिर भी अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट द्वारा 250 से 300 मीटर की दूरी पर ब्लास्टिंग की जा रही है।
अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से पढ़ाई होती है बाधित —
इसके अतिरिक्त, अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट से संबंधित ओवरलोड ट्रक एवं भारी वाहन रात्रि-दिवस ग्रामीण सड़क से गुजरते हैं, जिससे अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होता है। यह सड़क मूल रूप से ग्रामीण उपयोग हेतु निर्मित है तथा इसके आसपास आबादी, विद्यालय एवं खेल मैदान स्थित हैं। भारी वाहनों के आवागमन से दुर्घटना का गंभीर खतरा बना रहता है तथा ग्रामीणों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण है।
समिति के वरिष्ठ सदस्य राधेश्याम शुक्लावास ने हैलो सरकार को बताया कि अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट एवं क्रेशर से संबंधित ओवरलोड वाहनों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्यवाही की करने के साथ-साथ आबादी क्षेत्र, विद्यालय एवं खेल मैदान के निकट से भारी वाहनों के आवागमन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया जाए ताकि आवागमन बाधित नहीं हो। इसके अलावा माननीय NGT के आदेशों की प्रभावी पालना तुरन्त करवाई जाए।
उन्होंने बताया कि रात्रिकालीन ध्वनि एवं प्रकाश प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाना भी आवश्यक है। उनकी यह मांग काबिले गौर है कि ग्रामीणों के जीवन, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की रक्षा हेतु आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
यदि शीघ्र उचित कार्यवाही नहीं की जाती है तो ग्रामीणजन लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन अब सड़क पर बैठकर करने के लिए बाध्य होंगे। हम आबादी व स्कूल के बीचोबीच भारी वाहनों को नही चलने देंगे।
जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ होगी फौजदारी कार्यवाही —
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था कायम जिससे किसी भी अप्रिय घटना घटित होने की जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों की होना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को चेताया कि आदेश की पालना नहीं होती है तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ फौजदारी कार्यवाही करने के लिए सक्षम न्यायालय में फौजदारी कार्यवाही करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
इस अवसर पर कृष्ण रावत, भूप सिंह धानका, ग्यारसी लाल, सहित जोधपुरा संघर्ष समिति लोग साथ रहे।
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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर कुछ अलग और खास करने जा रही है। नगर निगम जयपुर ने 2 मई को “रंग दे गुलाबी” अभियान की शुरुआत करने का ऐलान किया है, जिसके तहत एक ही दिन में शहर की 500 दीवारों को रंगने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रयास अपने आप में अनोखा है और शहर की सुंदरता को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
500 दीवारों पर चलेगा ब्रश, ‘रंग दे गुलाबी’ अभियान में शहर बनेगा कलाकार
गौरतलब है कि आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया यह अभियान न केवल सफाई बल्कि शहर को आकर्षक और जीवंत बनाने पर भी केंद्रित है। नगर निगम आयुक्त ने इसे जयपुर के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि “सफाई सेवा मैराथन” के बाद यह अगला बड़ा कदम है, जो शहर की तस्वीर बदल सकता है। इस अभियान की खास बात यह है कि यह सिर्फ गुलाबी रंग तक सीमित नहीं रहेगा। जयपुर की दीवारों पर विभिन्न रंगों और कलात्मक डिजाइनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे हर क्षेत्र की अलग पहचान उभरकर सामने आएगी और शहर की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक अंदाज मिलेगा।
आप भी हो सकते हैं इस अभियान में शामिल
नगर निगम जयपुर ने लोगों से आह्वान किया कि इस पहल में स्कूल, कॉलेज, एनजीओ, कॉर्पोरेट समूह और आम नागरिक सभी भाग ले सकते हैं। जो लोग पेंटिंग में योगदान देना चाहते हैं, वे 7470651609 और 7878252518 पर संपर्क कर सकते हैं। नगर निगम द्वारा चिन्हित 500 दीवारों की जानकारी पेंटिंग से पहले और बाद में साझा की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। नगर निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और जयपुर को स्वच्छ, सुंदर और रंगीन बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं। अब देखना होगा कि इस महाअभियान मे लोगों की भागीदारी कितनी रहेगी। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, बहरहाल जयपुर नगर निगम का यह प्रयास काफी सराहनीय है।
जयपुर। नशा तस्करी से जुड़े मामलों में बेल को लेकर उच्चतम न्यायालय ने एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमर्शियल क्वांटिटी (commercial quantity) के मामलों में केवल “लंबी हिरासत” या “स्पीडी ट्रायल के अधिकार” का हवाला देकर जमानत नहीं दी जा सकती। सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जमानत आदेशों को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट की गलती क्या थी ?
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 37 की अनिवार्य शर्तों पर कोई संतुष्टि दर्ज नहीं होने, आरोपी के आपराधिक इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुति, पहले की जमानत याचिकाओं की जानकारी छिपाने, जैसे कई गंभीर खामियां खुलासा किया। कोर्ट ने कहा कि डिस्क्रेशन मांगने वाला व्यक्ति पूरी सच्चाई बताए, अधूरी जानकारी देना न्यायालय को गुमराह करने जैसा होता है। कोर्ट ने अपने पुराने फैसले Parwinder Singh versus State of Punjab का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में बढ़ते ड्रग्स संकट को देखते हुए अदालतों को बेल देने में अत्याधिक सतर्क रहने का फरमान भी जारी किया।
क्या हुआ अंतिम आदेश ?
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के दोनों बेल आदेश रद्द करते हुए आरोपियों को 1 सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश देते हुए आरोपियों को हिदायत दी गई कि कानून के अनुसार आरोपी नए सिरे से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस फैसले का बड़ा असर
यह निर्णय देशभर की अदालतों के लिए एक guideline बन गया है। इस निर्णय से अब NDPS मामलों में जमानत देना अब और भी कठिन हो गया। ऐसे मामलों में “लंबी हिरासत” अकेला आधार नहीं रहेगा। संबंधित न्यायालय को हर हाल में Section 37 की शर्तें रिकॉर्ड करनी होंगी। फैसले के अनुसार अधूरी जानकारी देने पर याचिका खारिज हो सकती है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि नशा तस्करी के मामलों में “लिबर्टी” और “सख्त कानून” के बीच संतुलन होना जरूरी है। जहां तक मामला commercial quantity का हो, तो कानून की कठोरता प्राथमिकता होगी।
क्या था मामला ?
10 जनवरी 2024 को पंजाब के तरनतारन जिले पुलिस थाना कालरा ने महिन्द्रा XUV-300 वाहन संख्या UP-15-DD-6521 को नाकाबंदी के दौरान सन्देह के आधार पर एक कार रोकी। जांच पड़ताल में पुलिस ने कार से 1.465 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। कार में सवार अभियुक्त को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के बाद NDPS Act के तहत गिरफ्तार किया गया। जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा करने की आदेश दिए। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
उच्चतम न्यायालय के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस जोर्ज मसीह की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि NDPS Act की धारा 37 के “ट्विन कंडीशन्स” अनिवार्य हैं, जिसके तहत बिना यह संतुष्टि दर्ज किए कि आरोपी निर्दोष हो सकता है और दोबारा अपराध नहीं करेगा, इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेशभर में जल जीवन मिशन, अमृत, ग्रीष्मकालीन कंटीन्जेंसी कार्यों, क्षतिग्रस्त पाईप लाइनों एवं हैण्डपम्पों का जिला प्रशासन एवं जलदाय विभाग के अधिकारियों द्वारा सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान हजारों स्थानों पर पाईप लाईन लीकेज व हैंडपंपों की मरम्मत कर दुरुस्तीकरण किया गया।
18 एवं 19 अप्रेल से शुरू होगा विशेष अभियान
राजस्थान प्रदेश में 18 एवं 19 अप्रेल को संचालित राज्यव्यापी विशेष अभियान में जिला कलक्टर, अतिरिक्त जिला कलक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार एवं खण्ड विकास अधिकारियों ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के तकनीकी अधिकारियों के साथ गांव-गांव जाकर कार्याें का निरीक्षण किया और मौके पर ही मरम्मत कार्य करवाकर समस्याओं का निस्तारण किया। इस अभियान के अन्तर्गत 2677 कार्यों का निरीक्षण किया गया, जिनमें जल जीवन मिशन के 407, अमृत के 80, ग्रीष्मकालीन कंटीन्जेंसी के 77 कार्य एवं अवरूद्ध हैण्डपम्प, क्षतिग्रस्त पाईप लाईन इत्यादि शामिल है।
हैंड पंप की मरमत करते हुए
अब तक कुल 2775 शिकायतों का निस्तारण
इसी प्रकार विभाग के तकनीकी कर्मचारी एवं अभियन्ताओं की लगभग 450 टीमों ने कुल 2792 शिकायतों को सूचीबद्ध कर 2775 शिकायतों का निस्तारण किया। इनमें 1535 हैण्डपम्प मरम्मत, 911 पाईप लाईन लीकेज सुधार एवं 329 अन्य सुधार कार्य शामिल है।
जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे, प्रधान कार्यालय जयपुर में आज दिनांक 15.04.2026 को भारत रत्न, संविधान शिल्पी, समाज सुधारक एवं न्याय के प्रबल पक्षधर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार दिनांक 14.04.2026 को कार्यालय में अवकाश होने के कारण दिनांक 15.04.2026 को भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयन्ती समारोह आयोजित किया गया।
समतामूलक, न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की स्थापना की थी बाबा साहेब ने
समारोह में उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबन्धक श्री अमिताभ ने बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। महाप्रबन्धक श्री अमिताभ ने अपने उद्बोधन में रेलवे कर्मचारियों एवं अधिकारियों से डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के आदर्शो को अपने जीवन में अपनाकर समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में योगदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कि बाबा साहब का जीवन संघर्ष, समानता और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। हमें उनके विचारों को आत्मसात करते हुए समतामूलक, न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की स्थापना हेतु निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहब के अदम्य साहस, प्रखर बुद्धिमत्ता और दूरदर्शी सोच से प्रेरणा लेकर हमें भारतीय रेल की गरिमा और सेवा की गुणवत्ता को और ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
जीवन मूल्यों को अपनाना चाहिए – भरतलाल मीना
कार्यक्रम में उत्तर पश्चिम रेलवे के कर्मचारी संगठनों और एसोशिएसन के पदाधिकारियों में श्री बी. एल. बैरवा, श्री टी. आर. मीना श्री प्रेमनारायण और श्री भरतलाल मीना ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के जीवनमूल्यों पर प्रकाश डाल कर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम के दौरान उत्तर पश्चिम रेलवे पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जीवनी पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में सफल रहे प्रतिभागियों को भी महाप्रबन्धक महोदय द्वारा पुरस्कृत किया गया ।
अवसर पर उपस्थित रहे
इस अवसर पर अपर महाप्रबंधक, श्री अशोक माहेश्वरी सहित सभी विभागाध्यक्ष, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधिगण, अधिकारीगण तथा कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
जयपुर। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा गुरूवार को सवाई माधोपुर जिले के बनोटा में राजकीय विद्यालय के नवनिर्मित भवन और भाड़ौती में कक्षा-कक्षों एवं अन्य सुविधाओं के उद्घाटन का शिलालेख देखकर मीणा समाज की प्रशंसा करता नजर आ रहा था।
शिलालेख पर मंत्री से लेकर सरपंच तक मीणा ही मीणा
हुआ यूं कि उद्घाटन शिलालेख पर ” राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बनोटा (स.मा.) के नवनिर्मित विद्यालय भवन का लोकार्पण” माननीय डॉ. किरोड़ी लाल मीना केबिनेट मन्त्री, कृषि एवं ग्रामीण विकास विभाग राजस्थान सरकार के कर कमलों द्वारा दिनांक 02 अप्रेल 2026 को सम्पन्न हुआ। इसके साथ ही :: गरिमामयी उपस्थिति :: में श्रीमती सुदामा मीना, जिला प्रमुख सवाई माधोपुर, श्री बाबूलाल मीना, उपजिला प्रमुख, सवाई माधोपुर, श्रीमती सविता मीना, प्रधान, पंचायत समिति सवाई माधोपुर, श्रीमती रचना मीना सरपंच ग्राम पंचायत बनोटा (स.मा.) ” को देखकर मीणा समाज मुख्यमंत्री होने की चर्चा करते नजर आ रहे थे।
विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाना समाज और सरकार दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा गुरूवार को सवाई माधोपुर जिले के बनोटा में राजकीय विद्यालय के नवनिर्मित भवन और भाड़ौती में कक्षा-कक्षों एवं अन्य सुविधाओं के उद्घाटन के दौरान कहा कि प्रदेश के होनहार विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित विद्यालय भवन उपलब्ध करवाना समाज और सरकार दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। डॉ. मीणा ने बनोटा में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन नवीन कक्षों एवं सुविधाओं वाले भवनों में विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण, प्रयोगात्मक शिक्षा, डिजिटल एवं पुस्तकालय सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
भामाशाहों एवं ग्रामीणजनों का आभार व्यक्त किया मीणा ने
डॉ. मीणा ने इन दोनों राजकीय विद्यालय भवनों के निर्माण में सहयोग के लिए भामाशाहों एवं ग्रामीणजनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्थानीय दानदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि सामुदायिक भागीदारी और आधारभूत आवश्यकताओं की उपलब्धता में राज्य सरकार को सहयोग से ही शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक विकास संभव है। कार्यक्रम में सभी ने विद्यालय के विकास हेतु निरंतर सहयोग का संकल्प व्यक्त किया। बनोटा विद्यालय भवन की निर्माण लागत 2.05 करोड़ रुपये आई है। इसमें राज्य सरकार के अंशदान एवं भामाशाहों से प्राप्त जनसहभागिता सहयोग राशि शामिल है। नवीन भवन में कुल 16 कक्षा-कक्ष, पुस्तकालय कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, कॉन्फ्रेंस/कम्प्यूटर कक्ष, स्टेज, चारदीवारी एवं फेंसिंग कार्य सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण एवं अन्य आधारभूत सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जिससे विद्यालय का समग्र वातावरण सुदृढ़ हुआ है।
बोर्ड परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के पश्चात स्थानीय लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित पद दंगल के दौरान क्षेत्रीय कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बोर्ड परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली कल्पना मीणा, अंगूरी मीणा और सोनिया मीणा को सम्मानित किया। इससे पूर्व डॉ. मीणा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भाड़ौती में 20 लाख 76 हजार रुपये की लागत से नवनिर्मित दो कक्षा-कक्षों का फीता काटकर लोकार्पण किया। विद्यालय भवनों के उद्घाटन के अवसर पर जिला प्रमुख सुदामा मीणा, उप प्रमुख बाबूलाल मीणा, पूर्व उप सभापति राजेश गोयल, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीपक मीना एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
जयपुर। नशे के कारण पैदा हो रही सामाजिक बुराई से निपटने के लिए पुलिस के बड़े अधिकारी राहुल प्रकाश ने एक दमदार आदेश जारी कर नशाखोरी पर नकेल कसने का प्रयास किया किया है। हालांकि यह बात अलग है कि क्रियान्वयन की कसौटी पर आदेश कितना खरा उतरता है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।
नशाखोरी के खिलाफ जयपुर पुलिस ने चलाया ‘ऑपरेशन एंटी वेनम’
गौरतलब है कि राजस्थान के युवाओं की रगों में घुलते नशे के जहर को खत्म करने के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने ‘ऑपरेशन एंटी वेनम’ का जुगाड बनाकर निर्णायक जंग छेड़ दी है। रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने साफ कर दिया है कि अब न केवल तस्कर, बल्कि वे शिक्षण संस्थान और हॉस्टल प्रबंधन भी पुलिस के रडार पर होंगे, जिनके कैंपस में ड्रग्स की सप्लाई पाई गई तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उनके अनुसार जयपुर रेंज में ‘ऑपरेशन एंटी वेनम’ के तहत 15 दिन में 229 ड्रग्स तस्करों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। आईजी राहुल प्रकाश ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि हॉस्टल या शिक्षण संस्थानों में ड्रग्स मिली, तो प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। नशा बिकने पर संबंधित SHO पर भी गाज गिरेगी।
मैनेजमेंट और SHO की तय होगी जवाबदेही
आपको बता दें, आईजी राहुल प्रकाश ने सख्त हिदायत दी है कि सीकर जैसे एजुकेशन हब और अन्य जिलों के हॉस्टल या कैंपस को ड्रग्स फ्री रखने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर वहां के प्रबंधन की होगी। यदि किसी कैंपस में नशा बिकता मिला, तो प्रबंधन के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, पुलिस महकमे के भीतर भी जवाबदेही तय कर दी गई है। जिस थाना इलाके में ड्रग्स की बिक्री पाई जाएगी, वहां के SHO के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। वहीं, जो अधिकारी अपने इलाके को पूरी तरह ‘ड्रग्स फ्री’ रखेंगे, उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
15 दिन में 229 कार्रवाई में सीकर और जयपुर ग्रामीण अव्वल
आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि 15 से 31 मार्च तक चले इस अभियान के पहले फेज में पुलिस ने ताबड़तोड़ 229 कार्रवाइयां की हैं। आंकड़ों के लिहाज से सबसे ज्यादा सीकर और जयपुर ग्रामीण क्षेत्रों में 49-49 कार्रवाइयां की गई जबकि दौसा में 35, अलवर में 26, कोटपुतली-बहरोड़ और दूदू में 24-24 कार्रवाइयां की गई। ठीक इसी तरह खैरथल-तिजारा में 22 कार्रवाइयां की गई। इन सभी कार्रवाइयों में पुलिस ने करीब 2 करोड़ रुपये कीमत की एमडी, स्मैक, गांजा, डोडा-पोस्त, अफीम और प्रतिबंधित नशीली दवाइयां जब्त की हैं।
तस्करों की संपत्ति होगी जब्त, बनेगा ‘मॉडल रेंज’
पुलिस अब तस्करों की कमर तोड़ने के लिए उनकी अवैध संपत्तियों की सूची तैयार कर रही है, जिन्हें जल्द ही कुर्क किया जाएगा। आईजी ने बताया कि पकड़े गए तस्करों से उच्च स्तरीय टीमें पूछताछ कर रही हैं ताकि बड़े सप्लायरों तक पहुंचा जा सके। जो तस्कर हाथ नहीं आएंगे, उन पर इनाम घोषित होगा। नशे के आदी हो चुके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए जन सहयोग से नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे। रेंज आईजी का लक्ष्य जयपुर रेंज को प्रदेश की ‘मॉडल रेंज’ बनाना है, जहां ड्रग्स के लिए कोई जगह न हो। अब देखना होगा कि क्या सरकार सख्ती बरतने का आदेश कितना कारगर साबित होता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा बहरहाल बढ़ते नशे की प्रवृत्ति
जयपुर। जिन लोगों के मुकदमें रेवेन्यू कोर्ट में चल रहे हैं उन लोगों के अच्छे दिन आने वाले हैं। जी हां, यह बात पूरे सौलह आने सही है। प्रदेश में राजस्व से जुड़े पेंडिंग मुकदमों को जल्दी निपटाने के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अफसरों को गाइडलाइन जारी की।
रेवेन्यू कोर्ट के जजों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव ने सर्कुलर जारी कर पेंडिंग मामलों को निपटाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। पुराने मामलों में रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। मुख्य सचिव ने सभी एसडीएम, सहायक कलेक्टरों, तहसीलदारों सहित सभी राजस्व अफसरों को हर वर्किंग डे पर सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक राजस्व अदालत चलाने और नियमित सुनवाई करने के निर्देश दिए। निर्देशों की पालना रेवेन्यू कोर्ट के जजेज नहीं करते हैं तो कार्रवाई की तलवार हमेशा उनके सिर पर लटकी रहेंगी।
SOP की सख्ती से होगी पालना
आपकों बता रहे, राज्य में राजस्व न्यायालयों के लिए पहले से ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू है। हालांकि, रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और तकनीकी कारणों से इसमें देरी होती रही है। अब मुख्य सचिव ने इस गैप को दूर करने के लिए सघन मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं। सभी लंबित वादों की मासिक समीक्षा की जाएगी। इसकी प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इससे जिला प्रशासन और राजस्व मंडल के बीच समन्वय बेहतर होगा और मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।
लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
मुख्य सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि अत्यधिक पुराने मामलों में संबंधित अभिलेख समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही तय होने से कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है।
न्यायालयों का नियमित निरीक्षण
मुख्य सचिव के आदेश के अनुसार संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टरों को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र के न्यायालयों का नियमित निरीक्षण करें। निरीक्षण की रिपोर्ट राजस्व मंडल को भेजी जाएगी, ताकि सिस्टम की कमियों को समय रहते सुधारा जा सके।
आमजन को मिलेगा त्वरित न्याय
इन प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश के उन हजारों किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा जिनके मामले सालों से राजस्व अदालतों में लटके हुए हैं। त्वरित न्याय मिलने से न केवल उनका समय बचेगा, बल्कि अदालती खर्चों का बोझ भी कम होगा। मुख्यमंत्री की इस पहल को राजस्थान में सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
रेवेन्यू अदालतों के कार्यों पर लगातार होगी मॉनिटरिंग
सर्कुलर के अनुसार राजस्व से जुड़े लंबित मुकदमों के जल्दी निपटाने के लिए SOP जारी हो चुकी है, लेकिन नोटिस तामील में देरी, रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और मुकदमों में जिरह के बीच गैर जरूरी अंतराल के कारण इनके निस्तारण में देरी हो रही है। इस गैप को दूर करने के लिए रेवेन्यू अदालतों में केस निपटारे की पूरी प्रक्रिया की सरकार के स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।
राजस्व अफसरों को 4 घंटे कोर्ट चलाने के आदेश
मुख्य सचिव ने सभी एसडीएम, सहायक कलेक्टरों, त हसीलदारों सहित सभी राजस्व अफसरों को हर वर्किंग डे पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक राजस्व अदालत चलाने और नियमित सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने तीन साल से ज्यादा समय तक लंबित राजस्व केस में संबंधित पक्षों को नोटिस रिसीव करवाने का काम प्राथमिकता से करने और तय पते पर नहीं मिलते हैं तो अखबारों में सूचना प्रकाशित करके नोटिस रिसीव करवाएं।
100 सबसे पुराने पेंडिंग केस की लिस्ट बनाकर निपटारा करना होगा
मुख्य सचिव के सर्कुलर के अनुसार सभी एसडीएम और सहायक कलेक्टरों को 1 अप्रैल को 100 सबसे पुराने लंबित केसों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता से निपटाना होगा। इन मामलों की हर महीने समीक्षा कर चालू वित्तीय वर्ष में उनका निस्तारण करना होगा।
पुराने मामलों में समय पर रिकॉर्ड पेश नहीं किया तो अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी
मुख्य सचिव की ओर से जारी सर्कुलर में अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। सर्कुलर के अनुसार राजस्व से जुड़े ज्यादा पुराने मामलों में संबंधित रिकॉर्ड समय पर प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी लंबित केसों की हर महीने समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजना अनिवार्य किया गया है। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जयपुर। बेमौसम बरसात से राजस्थान में सोमवार को कोटा-टोंक-बूंदी में तेज बारिश के साथ ओले गिरे। कोटा में पेड़ भी गिर गए। अजमेर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू और नागौर में बारिश हुई। जैसलमेर में दोपहर में आंधी चली। जयपुर-जोधपुर सहित कई जिलों में बादल छाए। राजस्थान में एक्टिव हुए वेस्टर्न डिस्टर्बेस के असर से 31 मार्च तक मौसम ऐसा ही रहेगा। 1 अप्रैल को सिस्टम का असर खत्म होने पर प्रदेश में मौसम ड्राय रहेगा। बीकानेर संभाग में दिन में धूप रही। जालोर, सिरोही और पाली में हल्के बादल छाए। जयपुर, भरतपुर, कोटा और अजमेर संभाग में आसमान बिल्कुल साफ रहा और धूप रही।
बूंदी में ओले गिरे,
गेहूं-चना की फसल को नुकसान बूंदी के नैनवां में सोमवार को बरसात और ओले गिरने से किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बारिश ओलावृष्टि से गेहूं-चना की फसल को नुकसान हुआ।
टोंक में ओले गिरे
टोंक के नगरफोर्ट तहसील मुख्यालय पर करीब दस मिनट तक ओले गिरे। ओलावृष्टि नगरफोर्ट, सतवाड़ा, बालूंदा, बालापुरा सहित एक दर्जन गांवों में शाम करीब सवा 5 बजे हुई।
आंधी में उड़ी सोलर प्लेट मंदिर पर गिरी
कोटा के रामपुरा बाजार क्षेत्र में आंधी से हरि कृष्णा होटल की सोलर प्लेट उड़कर श्री बृज गोपाल जी मंदिर की छत पर जा गिरी। इससे मंदिर पर रखी पानी की टंकियां और अन्य सामान क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि पास में संचालित श्री अग्रसेन विद्या निकेतन स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी, जिससे बच्चे सुरक्षित रहे।
चूरू के सरदारशहर में हुई बूंदाबांदी
चूरू के सरदारशहर में सुबह से ही मौसम का मिजाज बदल गया। क्षेत्र में काले बादल छाने से तापमान में गिरावट आई। क्षेत्र में सुबह 11 बजे से बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ, जो रुक-रुककर 2 बजे तक चला।
कोटा में पेड़ गिरा
कोटा शहर के अलग-अलग इलाकों में पिछले 1 घंटे से लगातार तेज बारिश जारी है। कई जगहों पर बारिश के साथ ओले भी गिरे हैं। नयापुरा इलाके के ग्रामीण पुलिस लाइन ऑफिस में तेज बारिश और आंधी के साथ पीपल के पेड़ का एक हिस्सा नीचे गिर गया। हालांकि इस दौरान किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
जयपुर । राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में शनिवार दोपहर एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहां दर्शन करने आई महिला सब-इंस्पेक्टर और ड्यूटी पर तैनात पुरुष कॉन्स्टेबल के बीच पार्किंग को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच मारपीट की नौबत आ गई। इस घटना ने पुलिस महकमे के आंतरिक अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉन्स्टेबल और महिला SI के बीच हाथापाई
गौरतलब है कि पुलिस मुख्यालय में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर अपने बच्चों के साथ स्कूटी पर मंदिर दर्शन के लिए पहुंची थीं। उन्होंने मंदिर के पास रास्ते में ही वर्दी का रोब दिखाते हुए अपनी स्कूटी खड़ी कर दी। ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल हरवेन्द्र सिंह ने उन्हें बीच रास्ते में वाहन खड़ा न करने की हिदायत दी। महिला SI ने कहा कि वह सिर्फ 10 मिनट में दर्शन करके लौट आएंगी, लेकिन कॉन्स्टेबल ने नियमों का हवाला देते हुए स्कूटी हटाने पर जोर दिया। मामला धीरे-धीरे तूं-तूं , मैं-मैं तक पहुंच गया और दोनों के बीच गर्मागर्म बहस शुरू हो गई। आरोप है कि महिला सब-इंस्पेक्टर ने पहले कॉन्स्टेबल को धक्का दिया, जिसके बाद कॉन्स्टेबल ने भी जवाबी कार्रवाई की और मामला दें घूंसा, दें लात तक पहुंच गया। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने दोनों को अलग-अलग किया।
दोनों पक्ष थाने पहुंचे, अपनी अपनी कराई रिपोर्ट दर्ज
घटना के बाद दोनों पक्षों को मोतीडूंगरी पुलिस थाने ले जाया गया। महिला सब-इंस्पेक्टर ने कॉन्स्टेबल हरवेन्द्र के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। वहीं कॉन्स्टेबल भी अपना पक्ष रखते हुए महिला अधिकारी पर नियम तोड़ने और राजकार्य में बांधा एवं मारपीट का आरोप कर मामला दर्ज कराया।
पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
काबिले गौर है कि एडीसीपी (ईस्ट) आलोक सिंघल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि महिला SI की शिकायत पर मोतीडूंगरी थाने में FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच एसीपी (गांधीनगर) नारायण बाजियां को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। किसी भी पक्ष को बचा नहीं जाएगा।
जयपुर। हाथी सवारी के लिए प्रसिद्ध आमेर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। हाथी को गुलाबी रंग से पोतने पर न केवल आदमी बल्कि अन्य हाथी भी रंगीन हाथी को देखकर चौंक गए।
हाथी को गुलाबी रंग में पोता गया फोटोशूट के लिए
गौरतलब है कि जयपुर में रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा के फोटोशूट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस फोटोशूट में एक हाथी को गुलाबी रंग में रंगा गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। जहां कुछ लोग इसकी सुंदरता और क्रिएटिविटी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसे पशु क्रूरता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। बताया गया कि जूलिया ने जयपुर में 6 हफ्ते बिताकर यह प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे पिंक सिटी से प्रेरणा मिली। हेरिटेज गेट के सामने मॉडल यशस्वी के साथ गुलाबी हाथी के साथ यह शूट किया गया।
पहले भी एक हाथी मर चुका रंग से पोतने पर
लोगों ने कहा कि इसी प्रकार कुछ समय पहले एक हाथी को रंग से पोता गया था, रंग पोतने के बाद हाथी की मौत हो गई थी। परंतु फोटोग्राफर का दावा है कि हाथी पर लगाया गया रंग ऑर्गेनिक और लोकल था, जो त्योहारों में भी इस्तेमाल होता है। हाथी मालिक शादिक खान के अनुसार, ‘चंचल’ नाम के हाथी पर केवल 10 मिनट के लिए कच्चा गुलाल लगाया गया और तुरंत बाद पानी से साफ कर दिया गया।
हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने भी कहा कि केवल आधी बॉडी पर ही रंग लगाया गया था। इस बीच सामने आया कि हाथी ‘चंचल’ का फरवरी में निधन हो चुका है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
मीनेश चंद्र मीना हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख जयपुर। बीसलपुर पेयजल परियोजना में मेंटेनेंस कार्य के चलते 29 और 30 मार्च को जयपुरवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे गर्मी की शुरुआत में ही परेशानी बढ़ने के आसार हैं।
अधिकांश इलाकों में पानी की सप्लाई बंद
राजधानी जयपुर में बीसलपुर पेयजल परियोजना के तहत होने वाले मेंटेनेंस कार्य के चलते अगले दो दिनों तक जलापूर्ति प्रभावित रहेगी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि 29 और 30 मार्च को शहर के अधिकांश इलाकों में पानी की सप्लाई बंद या आंशिक रूप से प्रभावित रहेगी।
सूरजपुरा पंपिंग स्टेशन की सप्लाई 28 मार्च से बंद
बीसलपुर प्रोजेक्ट के मुख्य अधिकारी सुधीर वर्मा के अनुसार पेयजल लाइन की मरम्मत के चलते 28 मार्च की रात से ही पंपिंग बंद कर दी गई है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि सूरजपुरा पंपिंग स्टेशन के लिए पानी की सप्लाई 28 मार्च रात 8 बजे से 29 मार्च रात 8 बजे तक पूरी तरह बंद रहेगी। इसका असर सीधे तौर पर जयपुर शहर की जलापूर्ति पर पड़ेगा। 29 मार्च को शहर में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप रहेगी, जबकि 30 मार्च की सुबह भी लोगों को जलापूर्ति नहीं मिल सकेगी। हालांकि 30 मार्च की शाम तक कुछ क्षेत्रों में आंशिक रूप से पानी की सप्लाई शुरू की जा सकती है।
मेंटेनेंस कार्य गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए किया
विभाग के अनुसार यह मेंटेनेंस कार्य गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है ताकि आगे किसी बड़ी समस्या से बचा जा सके और शहरवासियों को सुचारु जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके। वहीं, 31 मार्च की सुबह से जयपुर में जलापूर्ति फिर से सामान्य होने की उम्मीद है। ऐसे में विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे पहले से पानी का भंडारण कर लें, ताकि किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके।
जयपुर। डबल इंजन सरकार वाली सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अंबेडकर जयंती से पहले देशभर में बड़ा जनसंपर्क अभियान चलाएगी। अभियान के तहत पार्टी गांव-गांव और बस्तियों में पहुंचकर जनता से सम्पर्क करेगी।
गांव ढाणी तक पार्टी की ओर से होगा व्यापक कार्यक्रम >>>
गौरतलब है कि 7 से 14 अप्रैल तक शहर से गांव ढाणी तक पार्टी की ओर से व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इधर बीजेपी के स्थापना दिवस पर 6 अप्रैल को कार्यकर्ता अपने अपने घरों पर पार्टी का झंडा फहराएंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद प्रदेश स्तर पर इस महाअभियान की तैयारियां शुरू कर दी है।
भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस 6 अप्रैल को >>>
आपको बता दें, विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस 6 अप्रैल को है। देशभर में हर साल कार्यकर्ता पार्टी का स्थापना दिवस मनाते हैं। वहीं इस बार 14 अप्रेल को संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती है। दोनों प्रमुख पर्वों तक बीजेपी नेतृत्व ने जनता से महा जनसम्पर्क अभियान की योजना बनाई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरूण सिंह ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर व्यापक रूप से अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अरुण सिंह ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के निर्देशों के अनुसार 7 से 14 अप्रैल के बीच गांव-गांव और बस्तियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पार्टी कार्यालयों पर सजावट, घर-घर फहराएंगे झंडा >>>
बीजेपी की 6 अप्रेल 1980 को स्थापना हुई थी। 6 अप्रेल को हर साल पार्टी नेता, पदाधिकारी कार्यकर्ता पार्टी का स्थापना दिवस मनाते हैं। इस बार तीन दिन 5 से 7 अप्रैल तक पार्टी के सभी मंडल, जिला तथा प्रदेश कार्यालय पर सजावट की जाएगी। पार्टी के सभी कार्यालयों पर 6 अप्रैल को पार्टी का ध्वज फहराने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी कार्यलय में कार्यक्रम के दौरान पार्टी की विकास यात्रा पर भाषण के साथ ही मिठाई भी बांटी जाएगी।
सभी कार्यकर्ताओं को अपने घरों पर पार्टी का ध्वज फहराने तथा सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। 6 और 7 अप्रैल को प्रत्येक बूथ पर प्राथमिक एवं सक्रीय सदस्यों को इकट्ठा होकर कार्यक्रम मनाने के लिए कहा गया है। 8 और 9 अप्रैल को सक्रीय सदस्यों के सम्मेलन आयोजित कर भाजपा संगठनात्मक विस्तार, चुनावी सफलता में जन समर्थन पर चर्चा की जाएगी। भारतीय राजनीति में बीजेपी की ओर से जाए गए प्रदर्शन, सेवा भाव, अंत्योदय, विकासोन्मुख राजनीति तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वापरि रखने के निर्देश दिए हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के उल्लेखनीय और ऐतिहासिक कार्यों पर चर्चा के लिए कहा गया है।
7 अप्रैल से गांव बस्ती चलाे अभियान >>>
पार्टी की ओर से 7 से 12 अप्रैल के बीच गांव-बस्ती अभियान आयोजित किया जाएगा। अभियान में सभी पार्षद, पंचायत सदस्य से लेकर ऊपर स्तर तक के सभी जनप्रतिनिधियों सहित पार्टी के कार्यकर्ता प्रभावी रूप से भाग लेंगे। बड़ी विधानसभा क्षेत्र के कम से कम 50 बड़े गांव तथा छोटी विधानसभा के 10 बड़े गांव में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता कार्यक्रम >>>
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान, समाज के विभिन्न वर्गों के बुद्धिजीवी एवं गणमान्य व्यक्तियों से सम्पर्क कर उनका सम्मान किया जाएगा। केंद्र व एनडीए शासित प्रदेश सरकार की योजनाओं एवं उपलब्धियों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से जनसम्पर्क किया जाएगा।
प्रदेश में टोलियां गठित, जिलों में तैयारी >>>
प्रदेश में महाअभियान और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश 4 सदस्यीय तथा जिला स्तर पर 3 सदस्यीय टोली गठित करने के निर्देश हैं। इस क्रम में राजस्थान में पार्टी स्थापना दिवस के लिए प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी की संयोजक में चार सदस्यीय टोली का गठन कर दिया गया है। पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रमों के लिए केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, सांसद डॉ. संजय जायसवाल, जम्मू और कश्मीर के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना, तेलंगाना के पूर्व प्रदेश महासचिव प्रेमेंद्र रेड्डी, ओडिशा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समीर मोहंती और झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार रॉय को समन्वय समिति में शामिल किया गया है।
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि युवाओं के लिए सरकारी और निजी नौकरियों के साथ स्वरोजगार के अधिकाधिक अवसर प्रदान कर राज्य सरकार ने सवा दो साल में उनका भविष्य सुरक्षित करने का काम किया है।
तन और मन से स्वस्थ रहना सुखी जीवन का मूल आधार >>>
मुख्यमंत्री ने स्वस्थ जीवन पर चर्चा करते हुए कहा कि तन और मन से स्वस्थ रहना सुखी जीवन का मूल आधार है। हमारा देश युवाओं का देश है और इसी युवा तरुणाई को सिंचित रखने के लिए स्वस्थ रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब युवा बढ़ेगा तभी समाज और राष्ट्र आगे बढ़ेगा। ऐसे में युवा अपने जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाएं और अपने उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए देश-प्रदेश के विकास में योगदान दें।
महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी में हाफ मैराथन द टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित >>>
श्री शर्मा रविवार को जयपुर के अजमेर रोड स्थित महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी में द टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित हाफ मैराथन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए सरकारी और निजी नौकरियों के साथ स्वरोजगार के अधिकाधिक अवसर प्रदान कर राज्य सरकार ने सवा दो साल में उनका भविष्य सुरक्षित करने का कार्य किया है। श्री शर्मा ने आह्वान करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में सरकार की योजनाएं और नीतियां युवाओं पर केंद्रीत हैं। युवा इनका स्वयं भी लाभ उठाएं और अंतिम छोर तक बैठे व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का प्रयास करें।
फ्लैग ऑफ करने के बाद ही सीएम ने किया पौधारोपण >>>
मुख्यमंत्री ने हाफ मैराथन का फ्लैग ऑफ करने के बाद पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। इस दौरान द टाइम्स ऑफ इंडिया के डायरेक्टर श्री अनुराग अग्रवाल, महिन्द्रा लाइफस्पेस डेवलपर्स लिमिटेड के एमडी-सीईओ श्री अमित कुमार सिन्हा सहित बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। मैराथन में लोगों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।
जयपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के मद्देनज़र सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ शुक्रवार को वीसी के जरिए ली गई बैठक में प्रदत्त निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के क्रम में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास ने शनिवार को सचिवालय में प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, उर्वरक आपूर्ति सहित विभिन्न मुद्दों पर सभी विभागाध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक ली।
सभी विभागाध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक >>>
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। आमजन को इनकी आपूर्ति के संबंध में चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में आमजन को अधिकतम राहत देने के लिए सभी संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी का उत्पादन बढ़ने एवं पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ने से स्थिति में ओर अधिक सुधार हुआ है। घरेलू उपभोक्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों को एलपीजी की सुचारू आपूर्ति ज़ारी रखने के साथ अब व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है।
उर्वरकों का किसी प्रकार से ना हो डाइवर्जन >>>
मुख्य सचिव ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। अतः किसानों को यूरिया, डीएपी सहित उर्वरकों की आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रदेश में उर्वरकों की किसी भी प्रकार की कालाबाजारी एवं डाइवर्जन ना हो, इस पर विशेष स्थान दिया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक उर्वरक उपयोग वाले जिलों में समुचित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ‘धरती माता बचाओ अभियान’ का प्रभावित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए
अप्रैल में पांच लाख पीएनजी कनेक्शन का लक्ष्य प्रभावी रूप से हो पूरा >>>
मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रदत्त दिशा निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है वहां प्राथमिकता से आमजन एवं संस्थानों को पीएनजी कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही उन्होंने गोबरधन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और बायोगैस प्लांट्स को प्रोत्साहन देने के दिशा निर्देश दिए।
कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं सुचारू क्रियान्वयन करें सुनिश्चित >>>
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अधिकारी कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं सुचारू क्रियान्वयन कर आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को अधिकतम राहत देना सुनिश्चित करें। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभार्थियों को राशन आपूर्ति में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आनी चाहिए। साथ ही अन्नपूर्णा रसोइयों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए। आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। अवैध भंडारण, कालाबाजारी एवं डाइवर्जन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। हेल्पलाइन नंबरों पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी तरीके से निवारण किया जाए।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बने अतिरिक्त चार्जिंग पॉइंट >>>
मुख्य सचिव ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने हेतु अतिरिक्त चार्जिंग पॉइंट बनाए जाएं। परिवहन विभाग द्वारा संचालित परिवहन बसों का संचालन सुचारु रहे तथा आमजन को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए। ऑटोरिक्शा की रेट्रो फिटिंग पर विशेष ध्यान देकर इसका समुचित प्रोत्साहन किया जाए।
फेक न्यूज़ का हो प्रभावी रोकथाम >>>
मुख्य सचिव में अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में भ्रामक खबरों एवं अफवाहों की त्वरित एवं प्रभावी रोकथाम की जाए। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा दैनिक रूप से भ्रामक खबरों का खंडन कर सही एवं तथ्यपरक सूचनाएं आमजन तक पहुंचाई जाए। भ्रामक खबरों के माध्यम से आमजन में किसी प्रकार का पैनिक उत्पन्न ना हो इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।
खाड़ी देशों में कार्यरत प्रवासी राजस्थानियों का किया जा रहा सहयोग >>>
मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों के साथ संपर्क स्थापित कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। 24 घंटे संचालित हेल्पलाइन के माध्यम से खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों की समस्याओं का निवारण किया जा रहा है।
प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का करें निवारण >>>
मुख्य सचिव ने श्रम विभाग के अधिकारियों को प्रदेश में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों को समयबद्ध भुगतान, आवश्यकतानुसार भोजन, रहने एवं परिवहन की व्यवस्था करवाने हेतु निर्देशित किया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योगों को किसी भी प्रकार के लंबित भुगतान को त्वरित रूप से कराने के दिशा निर्देश दिए।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव श्री अम्बरीष कुमार ने भी किया संबोधित >>>
बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव श्री अम्बरीष कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त निर्देशों की शत प्रतिशत अनुपालना विभाग द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। बैठक में सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव सहित आला अधिकारी एवं ऑयल गैस मार्केटिंग कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मीनेश चंद्र मीना हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख दौसा : राजस्थान के दौसा स्थित रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इलाज नहीं, बल्कि सरेआम हुई ‘गुंडागर्दी’ है। अस्पताल परिसर से एक ऐसा विचलित करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में अस्पताल का स्टाफ एक शख्स को बेरहमी से पीटते और घसीटकर कमरे में ले जाते हुए दिखाई दे रहा है।
दर्द की पुकार पर मिलीं लाठियां और घूंसे —
घटना गुरुवार सुबह की है। दौसा निवासी नंदलाल पथरी के असहनीय दर्द से कराहता हुआ अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टर ने जांच के बाद उसे तुरंत इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। नंदलाल का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने दर्द से बेहाल होकर स्टाफ से जल्दी उपचार करने की गुहार लगाई। आरोप है कि जल्दी इलाज की बात सुनते ही वहां तैनात गार्ड और नर्सिंग स्टाफ आगबबूला हो गया। पीड़ित नंदलाल के अनुसार, पहले तो उसे सरेआम पीटा गया और फिर खींचकर एक कमरे में बंद कर दिया गया। बंद कमरे में उसके साथ फिर से मारपीट की गई। वह मदद के लिए चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन सफेद कोट पहने ‘धरती के भगवान’ और सुरक्षाकर्मियों का दिल नहीं पसीजा।
मामले पर लीपापोती की कोशिश ?
वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस हरकत में तो आए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल ‘जांच’ का आश्वासन मिला। अस्पताल के पीएमओ आरके मीणा ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई होगी। वहीं, कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि दोनों पक्ष थाने आए थे, लेकिन बिना किसी लिखित शिकायत के ‘आपसी बातचीत’ कर लौट गए। बाद में इसे ‘गलतफहमी’ का नाम दे दिया गया, जिससे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है।
विवादों का पुराना नाता : भ्रष्टाचार से लेकर लापरवाही तक
रामकरण जोशी अस्पताल के लिए यह कोई पहली घटना नहीं है। यह संस्थान अव्यवस्थाओं का गढ़ बन चुका है। जून 2019 में तत्कालीन एनएचएम निदेशक डॉ. समित शर्मा ने यहां की बदहाली देख 7 कर्मचारियों को निलंबित किया था। इसी अस्पताल और जिले के अन्य केंद्रों में फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र बनाकर लाखों रुपये डकारने का काला खेल भी उजागर हो चुका है, जिसमें 9 डॉक्टरों सहित 20 कर्मियों पर गाज गिरी थी।
कब सुधरेंगे हालात?
अस्पताल में बार-बार होने वाले हंगामे और स्टाफ के अड़ियल रवैये से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। जिलेवासियों का कहना है कि चाहे गलती किसी की भी हो, मरीज को इस तरह घसीटना और पीटना अपराध है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल का नियमित औचक निरीक्षण किया जाए और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हो जो नजीर बन सके।
हैलो सरकार न्यूज़ नेटवर्क जयपुर। पूरे विश्व में रामनवमी के त्योहार का बेहद खास महत्व है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ता है। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी रामनवमी की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम देखने को मिल रहा है। 26 मार्च या 27 मार्च, रामनवमी कब है, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं सही तिथि, साथ ही जानेंगे अयोध्या में यह पर्व कब मनाया जाएगा ?
रामनवमी 2026 कब है ??????
हिंदू पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। इसी कारण दो अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। उदय तिथि को मानने वाले लोगों के अनुसार, 27 मार्च 2026 को रामनवमी मनाना अधिक शुभ रहेगा। वहीं, भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए 26 मार्च को भी इस पर्व को मनाना शुभ माना जा रहा है। ऐसे में गृहस्थ लोगों के लिए 26 मार्च को रामनवमी मनाना शुभ माना गया है। जबकि वैष्णव संप्रदाय के लोग 27 मार्च को यह पर्व मनाएंगे।
भगवान श्रीराम के जन्म का विशेष समय दोपहर 12:27 बजे का श्रेष्ठ —
इस दिन का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक रहेगा और भगवान श्रीराम के जन्म का विशेष समय दोपहर 12:27 बजे माना गया है।
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कोटपूतली। अक्सर यह देखने में आता है कि अफसर न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं करते हैं, जिसकी वजह से न्यायालय की गरिमा को बेजा ठेस पहुंचती है। शायद अफसर इस बात को भूल जाते है कि यदि जनता जागरूक होकर केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965-नियम 14 एवं केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 3(1)(i)(ii), (iii) के तहत कार्रवाई की मांग उठाले तो किसी भी कीमत पर अफसर अपनी नौकरी को नहीं बचा सकता है।
न्यायालय के आदेश की पालना नहीं होने पर राधेश्याम शुक्लावास ने की गहलोत से मुलाकात >>>
शनिवार को जोधपुरा संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिला और कोटपुतली स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट से हो रहे प्रदूषण एवं कंपनी की मनमानी से क्षेत्र के आमजन के जीवन पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास ने श्री गहलोत को बताया कि अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा दिनांक 3 नवंबर 2025 को निर्णय पारित कर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि मंदिर, स्कूल, आबादी और बसावटों से 500 मीटर की परिधि में ब्लास्टिंग नहीं की जाएगी। साथ ही रात्रिकाल में आमजन एवं पशुधन की नींद में बाधा न हो, इसके लिए ध्वनि प्रदूषण तथा तेज लाइटिंग पर भी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए कमेटी गठित करने, ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु प्रत्येक माह दो बार मेडिकल कैंप लगाने सहित अन्य आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन आदेशों की पालना की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर कोटपुतली-बहरोड़ को दी गई है। आदेश में पालन के लिए 3 माह का समय दिया गया था l जबकि 4 माह से अधिक का समय होने पर भी पालन नहीं की गई हैl
कोटपूतली बहरोड जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी
NGT के आदेशों की पालना नहीं कर रहा है जिला कलेक्टर — राधेश्याम शुक्लावास >>>
सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास के नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि NGT के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक इनकी पूर्ण पालना नहीं हो रही है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीण परेशान हैं। जबकि NGT के आदेश में केंद्र सरकार और राज्य सरकार भी पक्षकार है उसके बावजूद भी डबल इंजन की सरकार ने न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राधेश्याम शुक्लावास ने कहा कि इसी संदर्भ में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्याओं और पीड़ा से अवगत कराया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और NGT के आदेशों की पालना सुनिश्चित कराने में पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने में हेमंत यादव का विशेष योगदान >>>
प्रेस विज्ञप्ति में सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास ने बताया कि अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात को कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसकी वजह से संघर्ष समिति की समस्याओं को श्री गहलोत के समक्ष रखा।
जब महिलाएं किसी संघर्ष में साथ खड़ी होती हैं तो जीत निश्चित — अशोक गहलोत >>>
इस अवसर पर श्री गहलोत ने कहा कि जब महिलाएं किसी संघर्ष में साथ खड़ी होती हैं तो उस संघर्ष की जीत निश्चित हो जाती है। संघर्ष समिति के सचिव कैलाश यादव, उपाध्यक्ष सतपाल यादव, शीला देवी योगी एवं रीता देवी योगी भी प्रतिनिधिमंडल के साथ उपस्थित रहे।
कलेक्टर को नौकरी से धोना पड़ सकता है साथ >>>
आपको बता दें, न्यायालय के आदेश की पालना नहीं करने पर जिला कलेक्टर कोटपुतली के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965-नियम 14 एवं केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 3(1)(i)(ii), (iii) के तहत कार्रवाई होने पर जिला कलेक्टर को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। इस बात की पुष्टि भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने के. के. धवन के मामले में बहुत पहले ही कर चुका है।
जमवारामगढ़। जयपुर जिले के तहसील जमवारामगढ़ क्षेत्र के लाली में अधिशासी अभियंता कार्यालय के नवीन भवन का रविवार को महेंद्र पाल मीना द्वारा विधिवत शुभारंभ किया गया। करीब ₹1 करोड़ की लागत से निर्मित यह भवन विभागीय कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के साथ-साथ क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को गति देने में सहायक होगा।
विधायक महेंद्र पाल मीणा के साथ अधिशासी अभियंता आरसी मीणा विधायक महेंद्र पाल मीणा नए भवन का उद्घाटन करते हुए
आमजन की समस्याओं का त्वरित होगा समाधान – आर सी मीणा >>>
अधिशासी अभियंता आरसी मीणा ने कहा कि अब क्षेत्र के लोगों को विभागीय कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा तथा आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सकेगा। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस भवन में कार्यालयीन कार्यों के लिए पर्याप्त कक्ष, बैठक व्यवस्था और अभिलेख रखने की सुविधाएं विकसित की गई हैं। अधिकारियों ने कहा कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था के लिए आधारभूत ढांचे का विकसित होना जरूरी है। नए भवन के बनने से योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि जमवारामगढ़ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
आम जन को संबोधित करते हुए विधायक महेंद्र पाल मीणा
₹18.36 लाख की लागत से मेदराजसिंहपुरा में बनेगी भोजनशाला >>>
इस मौके पर जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। साथ ही समग्र शिक्षा राज्य बजट के अंतर्गत स्वीकृत ₹18.36 लाख की लागत से मेदराजसिंहपुरा में बनने वाली भोजनशाला का भी शिलान्यास किया गया। यह भवन छात्राओं को बेहतर, स्वच्छ एवं सुरक्षित भोजन व्यवस्था उपलब्ध कराएगा। विधायक ने कहा कि शिक्षा के साथ सुविधाओं का विस्तार ही हमारा संकल्प है तथा जमवारामगढ़ की हर जरूरत और हर विकास कार्य के लिए वे सदैव प्रतिबद्ध हैं।
जयपुर। राजस्थान प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच राजधानी जयपुर में इसके समर्थन में आज भीम सेना के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन शहीद स्मारक पर हुआ।
यूसीसी के समर्थन में भीम सेना का जयपुर में प्रदर्शन >>>
आपको बता दें, एससी, एसटी और ओबीसी समाज के अधिकारों और यूसीसी के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने शाम को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें शहीद स्मारक पर ही रोक लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़कर संगठन का झंडा लहराने लगे, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद नीचे उतारा। मौके पर जमकर नारेबाजी भी हुई।
यूसीसी के समर्थन में शहीद स्मारक पर धरना >>>
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान हाथों में भीम आर्मी के झंड़े, बाबा साहेब की फोटो और संविधान की किताब लेकर आगे बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने कार्यकर्ताओं को आगे जाने से रोका। इससे पहले दोपहर 12 बजे भामाशाह चेतराम बैरवा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने शहीद स्मारक पर धरना दिया। चेतराम बैरवा ने कहा कि यूसीसी के समर्थन में यह महा-आंदोलन किया गया है, क्योंकि मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं को लंबे समय से भेदभाव और अन्याय का सामना करना पड़ रहा है।
मनुवादी सोच से जुड़े कुछ लोग इस बिल का किया था विरोध >>>
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मनुवादी सोच से जुड़े कुछ लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, जबकि यह कानून वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समाजों के लोग इस आंदोलन में शामिल हुए हैं, जिससे समर्थन लगातार बढ़ रहा है।
सरकार और कोर्ट के भरोसे बैठे हैं लोग >>>
चेतराम बैरवा ने कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार यह बिल लेकर आई थी, लेकिन विरोध के चलते इस पर रोक लग गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस पर सकारात्मक फैसला करेंगे और यूसीसी को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय की समस्याओं को समझना चाहिए। जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें एक बार इन वर्गों की स्थिति को महसूस करना चाहिए।
मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास >>>
भीम सेना के कार्यकर्ताओं ने एससी, एसटी और ओबीसी समाज के अधिकारों और यूसीसी के समर्थन में शाम को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें शहीद स्मारक पर ही रोक लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी देखने को मिली।
बड़े दिल से सोचने और व्यवस्था में सुधार की अपील >>>
बड़े आदर भाव से भीम सेना कार्यकर्ताओं ने कहा कि यूसीसी लागू होने से समाज में समानता बढ़ेगी। उन्होंने स्वर्ण जाति समाज से भी बड़े दिल से सोचने और व्यवस्था में सुधार के लिए सहयोग करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक >>>
गौरतलब है कि यूसीसी लागू होने से पहले प्रदेशभर में बड़े स्तर पर विरोध हुआ था। इसके बाद गुरुवार, 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जब तक अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 2012 के नियम लागू रहेंगे। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया नए नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है। भीम सेना ने कार्यकर्ताओं ने बड़े मार्मिक ढंग से सरकार से अपील की है कि सरकार समुचित रूप से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करके कानून को लागू करें।
जयपुर। पंचायतीराज एवं शहरी निकाय चुनाव लडने वाले लोगों के लिए खुशखबरी। प्रदेश में अब दो से ज्यादा संतान वाले भी पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला 30 साल बाद बदल दिया गया है। इससे निकाय और पंचायतीराज की सियासत बदलेगी।
कैबिनेट ने दी मंजूरी >>>
गौरतलब है कि पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इन दोनों संशोधनों के बाद अब दो से ज्यादा बच्चों वालों के निकाय-पंचायत चुनाव लड़ने पर लगी रोक हटा जाएगी। मंत्री जोगा राम पटेल ने कहा- दोनों बिल इसी सत्र में पारित होंगे। जिस वक्त ये प्रावधान लागू किए थे, उस वक्त जनसंख्या नियंत्रण का मकसद था। अब हालात बदल गए हैं। इसके साथ ही अजमेर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय खुलेगा। कैबिनेट ने अजमेर में आयुर्वेद एंड नेचुरोपैथी यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दी है।
बनेगा राजस्व आसूचना और आर्थिक अपराध निदेशालय >>>
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने कहा- राजस्व आसूचना निदेशालय की जगह राजस्व आसूचना और आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन को मंजूरी दी है। इसका मुख्यालय जोधपुर होगा। यह निदेशालय बैंक, शेयर से लेकर मल्टी लेवल मार्केटिंग के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने का काम करेगा। सहकारी सोसाइटी के जरिए जमीनों की धोखाधड़ी रोकने का काम करेगा। निदेशालय के लिए 60 पद बनाए गए हैं।
भारत मंडपम की प्रोजेक्ट लागत 5800 करोड़ >>>
भारत मंडपम की प्रोजेक्ट लागत 5800 करोड़ की उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि जयपुर में बी-टू बायपास पर भारत मंडपम बनने का फैसला हुआ था। पहले के फैसले को सुधारा है। उस वक्त कुल प्रोजेक्ट लागत 3500 करोड़ आ रही थी। उस कीमत में रेवेन्यू जनरेट करने में गैप आ रहा था, वो 635 करोड़ था। हमने उसे बदल दिया है। अब प्रोजेक्ट कॉस्ट को 5800 करोड़ कर दिया है। इससे अब रेवेन्यू जनरेशन 5800 करोड़ से ज्यादा होगा। राज्य सरकार पर अब कोई भार नहीं आएगा। राठौड़ ने कहा कि उदयपुर में आयरन ओर (लौह अयस्क) की खान है। कंपनी आयरन के लिए 500 करोड़ का निवेश करना चाहती है। इस कंपनी को 53 एकड़ जमीन आवंटन करने की मंजूरी दी है।
भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला 30 साल बाद बदला >>>
आपको याद होगा, 1995 में तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार के समय 2 से ज्यादा बच्चों पर निकाय और पंचायतीराज चुनाव नहीं लड़ सकने का प्रावधान किया था। उस वक्त पंचायतीराज कानून और राजस्थान नगरपालिका कानून में संशोधन करके ये प्रावधान जोड़े थे। अब 30 साल पुराने इस प्रावधान को बदलने का फैसला हुआ है। दो से ज्यादा बच्चों वालों को निकाय-पंचायतीराज चुनाव लड़ने पर पाबंदी हटाने से स्थानीय स्तर की सियासत बदलेगी। तीन बच्चों वाले कई नेता जो चुनाव नहीं लड़ पाते थे। अब उन्हें मौका मिलेगा। बीजेपी और कांग्रेस में जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं।
कई संगठनों ने उठाई थी मांग, विधानसभा में भी उठा था मामला >>>
पंचायतीराज और शहरी निकायों में चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की बाध्यता हटाने की लंबे समय से मांग चल रही थी। बीजेपी के कई नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने भी सरकार को ज्ञापन देकर दो बच्चों का प्रावधान बदलने की मांग उठाई थी। विधानसभा में भी कई विधायकों ने इसकी मांग उठाई थी। गहलोत सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने दो संतान की बाध्यता हटाने की मांग उठाई थी।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नहीं है यह प्रतिबंध >>>
पिछले बजट सत्र में चित्तौड़गढ़ से विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने सरकार से पूछा था कि प्रदेश में तीन संतान होने पर पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यह प्रतिबंध नहीं है। पंचायत चुनाव में इस नियम को हटाया जाए। इस पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने विचार करने कर आश्वासन दिया था।
जयपुर। किसानों के कई वर्षों के आंदोलनों के बाद भारत में फसल बीमा योजना का शुभारंभ हुआ। लेकिन किसान बेचारा टुकर टुकर देखता रह गया और भारत में काले कारनामें करने वालों की फौज ने ऐसा कबाड़ा कर दिया जिससे न केवल किसानों के धोखा हुआ अपितु बीमा कंपनीयों को भी बेजा चपेट लगी। इसलिए बीमा कंपनियां अब सावचेत हो गई।
एआई के इस्तेमाल से हो रहा है फर्जीवाड़े का खुलासा >>>
वर्तमान समय में एआई का ऐसा दौर शुरू हुआ है जिसके कारण अब खेतीबाड़ी में अब मौसम से लेकर रोग लगने की आशंका और अनुमान एआई बताने लगी है। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमा करने वाली कंपनियां भी अब एआई का इस्तेमाल बीमा पॉलिसी के लिए कर रही हैं। इससे कई जगह फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। श्रीगंगानगर, अलवर और बूंदी जिले में बीमा कंपनी क्षेमा ने एआई और सैटेलाइट इमेज की मदद से करीब सवा दो लाख फर्जी बीमा क्लेम पकड़े हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दो लाख इक्कीस हजार छ: सौ इकसठ फर्जी आवेदक >>>
गौरतलब है कि इन क्लेम में खेतों में बताई गई फसल की जगह खाली मिली या दूसरी फसलें थीं। कंपनी ने श्रीगंगानगर, अलवर और बूंदी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावों में किसानों को 423 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया मगर इस दौरान आवेदनों की जांच में केवल खरीफ 2025 सीजन में ही 221661 आवेदन फर्जी पाए। इन सभी आवेदनों के दावों को कंपनी ने अस्वीकार कर दिया है। इतने आवेदनों पर केंद्र और राज्य सरकार से दी जाने वाली सब्सिडी के रूप में 30.17 करोड़ रुपए खर्च होते। वहीं, रबी 2024-25 सीजन के लिए स्मार्ट सैंपलिंग तकनीक पर आधारित क्रॉप कटिंग प्रयोग के गलत क्रियान्वयन को चुनौती दी है। क्रॉप कटिंग प्रक्रिया में सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। चीफ रिस्क ऑफिसर कुमार सौरभ ने बताया कि तकनीक का उपयोग वास्तविक किसानों को लाभ पहुंचाना है। हमने श्रीगंगानगर जिले की करणपुर तहसील में 79 करोड़ के बीमा दावों का भुगतान किया है। मगर एआई के विश्लेषण में फर्जी पाए गए आवेदन स्वीकार नहीं कर सकते।
एआई द्वारा हर तस्वीर को स्कैन से खुलासा हुआ काले कारनामों का >>>>
सैटेलाइट चित्रों और एआई इनपुट्स के उपयोग से ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगाई है। जांच में यह सामने आया है कि जहां खेत में फसल बोई ही नहीं गई हो, वहां भी बीमा आवेदन किए या आवेदन पत्र में दर्ज फसल और वास्तविक बोई गई फसल में अंतर मिला। एआई हर तस्वीर को स्कैन करती है। रंग, आकार, बनावट और पैटर्न में अंतर देखकर भूमि की श्रेणी के अनुसार चिह्नित करती है। खेती की जमीन, पानी, पेड़, मकान, सड़क हो या अन्य निर्माण एआई से मैपिंग हो जाती है। इसके बाद सैटेलाइट इमेज एक्स्पर्ट और कृषि विशेषज्ञ इसकी समीक्षा करते हैं।
बीमा कंपनीयों तीन स्तर पर जांच के बाद कर रही है आवेदन खारिज >>>
बीमा कंपनियां तीन स्तर पर बीमा आवेदनों की जांच कर रही हैं। जिसमें आवेदन में दी गई जानकारी और सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करना, मौके पर जाकर जीपीएस लोकेशन की पुष्टि और फोटो लेने के साथ एआई और सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग तक का इस्तेमाल करना शामिल है। सैटेलाइट इमेज में जहां फसल है, उस स्थान को हरा दिखाया। जा रहा और जहां खाली जगह है, वहां ग्रे दिखाया जाता है। जिन खाली खसरों के लिए फसल बीमाआवेदन किए गए, उन्हें लाल रंग में मार्क किया जा रहा है।
जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सरपंच गाँव के विकास कार्यकर्ता के साथ भारत विकास के संवाहक बने। उन्होंने कहा कि राजस्थान धर्म धरा है। यहां गौपालन की परम्परा गांव – गांव है। नंदी संरक्षण के लिए भी अब काम होना चाहिए। उन्होंने गांवों का विकास सुनियोजित योजना बनाकर किए जाने का भी आह्वान किया। उन्होंने सरपंचों को गांवों में विद्यालय और सार्वजनिक स्थलों के भवनों की स्थिति पर निगरानी रखने, गांवों के विद्यालयों के प्रभावी संचालन और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिये जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों की बौद्धिक क्षमता निर्माण की नींव है। इस पर सभी स्तरों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए। उन्होंने गांवों में बच्चों का आत्मविश्वास जगाने और उन्हें सिविल सेवाओं और उच्च पदों की परीक्षाओं के लिए आरम्भ से ही मन से तैयार किए जाने के लिए कार्य करने पर जोर दिया।
सरपंच गाँव के सुख – दुख के सहभागी ही नहीं वहां के विकास के सच्चे भागीरथ >>>
राज्यपाल श्री बागडे सोमवार को एक निजी होटल में ग्राम संसद कार्यक्रम में सरपंच संवाद में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरपंच गाँव के सुख – दुख के सहभागी ही नहीं वहां के विकास के सच्चे भागीरथ बने। गाँव विकास के लिए ग्राम पंचायतें इस बात का ख्याल रखें कि जिन्हें आवश्यकता है, जो वंचित और पिछड़े हैं, उन्हें सही मायने में उनका लाभ मिले। उन्होंने सरपंचों को गांवों में जल, विद्युत आदि की सर्वसुलभता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध होकर कार्य किए जाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान को इस बात का गौरव है कि देश में यहां सबसे पहले पंचायत राज व्यवस्था नागौर के एक गांव से प्रारंभ हुई। उन्होंने पंचायतराज व्यवस्था को ग्राम लोकतंत्रीकरण के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राजस्थान में जब भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री थे तो गांवों के विकास की महत्वपूर्ण योजनाओं की पहल की। उन्होंने कहा कि सरपंच गांव विकास की सशक्त कड़ी है। सरपंच गाँवों में मार्ग खुलवाने, सड़क निर्माण, आवास और “हर घर जल” के अंतर्गत निरंतर कार्य करें। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने “हर घर जल” की योजना की ऐतिहासिक पहल इसलिए की है कि गांव के हर घर में पानी पहुंच सके।
राजस्थान में 11 हजार 266 ग्राम पंचायतें >>>
राज्यपाल ने पिपलांत्री पंचायत समिति में बच्चियों के जन्म लेने पर पेड़ लगाने की चर्चा करते हुए कहा कि इस तरह से एक करोड़ पेड़ किसी सरपंच द्वारा लगाना और लगने के बाद उनका संरक्षण प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज भारत में 2 लाख 55 हजार ग्राम पंचायतें हैं। राजस्थान में 11 हजार 266 ग्राम पंचायतें हैं। इन सबका विकास यदि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनेगी तभी भारत तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ सकेगा। उन्होंने गांव के लोगों के प्रति श्रद्धा रखकर सरपंचों को काम करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने इससे पहले गांवों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित भी किया।
मीनेश चन्द्र मीना हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख जयपुर। राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री श्री किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि तारबंदी योजना के तहत किसानों की लागत कम करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियमों में समय-समय पर शिथिलता के बारे में अवगत कराया। इससे किसानों को बहुत बड़ा फायदा होगा।
पहले हर 10 फीट पर पोल गाड़ने का नियम, अब किया 15 फीट >>>
गौर तलब है कि पहले हर 10 फीट पर पोल गाड़ने का नियम था, जिसे बढ़ाकर 15 फीट किया गया है। इसी प्रकार 6 तारों और 2 क्रॉस वायरों के स्थान पर 5 वायर मान्य किये गए हैं। पहले हर दसवें पोल पर सपोर्ट पोल लगाने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर पंद्रह कर दिया गया है। इसके अलावा पोल पर फाउन्डेशन की अनिवार्यता पर छूट दी गई है तथा चेन लिंक जाली के स्थान पर नोटेड जाली लगवाने पर भी अनुदान दिया जा रहा है।
मापदण्ड पूरे नहीं करने वाले किसान योजना के पात्र नहीं >>>>
कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री सुभाष मील द्वारा पूछे गये पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि खंडेला विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 4482 कृषकों द्वारा आवेदन प्रस्तुत किये गए। इनमें से नियमानुसार कार्य पूर्ण करने वाले 540 कृषकों को 150.18 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध करवाया गया है तथा 1190 कृषकों की पत्रावलियां प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि निर्धारित मापदण्ड पूरे नहीं करने के कारण शेष किसानों को पात्र नहीं माना गया है। कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि आवेदक किसानों द्वारा मौके पर बताए गए खसरा क्षेत्रफल के कम होने, खसरा नम्बरों के एक परिधि में नहीं होने, प्री-वेरिफिकेशन से पहले ही तारबंदी पाये जाने, समूह में आवंटन पर किसी कृषक का सहमत नहीं होने, आवेदक कृषक की मृत्यु होने, कृषकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने तथा खेत में फसल होने के कारण इस वित्तीय वर्ष में तारबंदी संभव नहीं हो पाने आदि कारणों की वजह से उन्हें अनुदान के लिए अपात्र माना गया है।
तारबंदी की अनुदान राशि को बढ़ाने पर विचार >>>
डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय अनुकूलता के आधार पर तारबंदी की अनुदान राशि को बढ़ाने पर विचार किया जा सकेगा। इससे पूर्व सदस्य श्री मील द्वारा पूछे गए मूल सवाल के लिखित जवाब में कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों की फसलों को नीलगाय, जंगली जानवरों एवं निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए तारबंदी कार्यक्रम संचालित है। तारबंदी कार्यक्रम अन्तर्गत कृषकों द्वारा खेतों पर तारबंदी स्थापित करने पर 400 रनिंग मीटर तक लघु व सीमान्त कृषकों को इकाई लागत का 60 प्रतिशत अथवा अधिकतम 48 हजार रुपये की राशि ,सामान्य कृषकों को 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रू. 40 हजार तथा सामुदायिक स्तर पर तारबंदी करने पर 70 प्रतिशत या अधिकतम राशि रू. 56 हजार एवं वनाधिकार पट्टा धारक कृषकों को 90 प्रतिशत या अधिकतम राशि रू. 72 हजार जो भी कम हो, अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। कृषक द्वारा 400 रनिंग मीटर से कम परिधि में तारबंदी स्थापित करने पर प्रोरेटा बेसिस पर अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। उन्होंने तारबंदी कार्यक्रम अन्तर्गत विधानसभा क्षेत्र खंडेला में वर्ष 2017-18 से 2025-26 (10.02.2026) तक कृषकों के कुल आवेदन, दिये गए अनुदान तथा प्रक्रियाधीन पत्रावलियों का विवरण सदन के पटल पर रखा।
आवेदनों का निस्तारण ‘’पहले आओ पहले पाओ’’ के आधार पर >>>
कृषि मंत्री ने कहा कि तारबंदी योजना में आवेदनों का निस्तारण प्राप्त लक्ष्यों के अनुरूप ‘’पहले आओ पहले पाओ’’ के आधार पर किया जाता है। कृषकों द्वारा आवेदन किये जाने के उपरांत प्रत्येक स्तर (दस्तावेज सत्यापन, प्री वेरिफेशन, प्रशासनिक स्वीकृति एवं भौतिक सत्यापन) पर लंबित रही पत्रावलियां आगामी वर्षों में उसी स्तर पर सम्मिलित होती हैं तथा दिशा-निर्देशानुसार पात्रता पूर्ण करने वाले कृषकों की पत्रावलियां जिले की वरियता के आधार पर निस्तारित की जाती हैं।
जयपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र परिवारों को बड़ी राहत देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने राशनकार्ड में छूटे सदस्यों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी है। अब उपभोक्ताओं को ई-मित्र या विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे स्वयं पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे।
पोर्टल पर ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन >>>
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के निर्देशों के अनुसार, जिन परिवारों के राशनकार्ड में किसी सदस्य का नाम अब तक दर्ज नहीं हो पाया है, वे राज्य सरकार के निर्धारित https://rrcc.rajasthan.gov.in/ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यदि किसी सदस्य के नाम पर गैस कनेक्शन दर्ज है, तो आवेदन के समय एलपीजी आईडी का विवरण देना अनिवार्य होगा। आवेदन जमा होने के बाद जिला रसद अधिकारी, विकास अधिकारी या अधिशासी अधिकारी द्वारा सत्यापन और स्वीकृति के पश्चात नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने से पहले संबंधित सदस्य का नाम जन आधार कार्ड में होना अनिवार्य है। आवेदक को जन आधार नंबर दर्ज कर सदस्य का चयन करना होगा तथा आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
15 अगस्त 2024 से ई-केवाईसी अनिवार्य >>>
आपको बता दें, आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज कर आवेदन सबमिट किया जा सकेगा। यदि परिवार पहले से खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल है, तो नाम जुड़ने के बाद नए सदस्य को भी नियमित रूप से राशन मिलना शुरू हो जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आवेदन स्वीकृत होने में सामान्यतः 3 से 4 दिन का समय लग सकता है। 15 अगस्त 2024 से ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई थी, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि राशन कार्ड में जन आधार सीडिंग पूरी हो। जिन परिवारों ने अब तक ई-केवाईसी नहीं करवाई है, उन्हें पहले यह प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। जिला रसद अधिकारी ने बताया कि नई ऑनलाइन व्यवस्था से आमजन को काफी सुविधा मिलेगी।
नहीं लगाने पड़ेंगे अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर >>>
अब लोगों को आवेदन के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी आवेदन नियमानुसार जांच के बाद स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस नई व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवार समय पर योजना का लाभ उठा सकें।
जयपुर। राजस्थान प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर शिक्षा विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष की तैयारी शुरू कर दी है।
सेनेटरी नैपकिन वितरण के लिए सभी जिलों से मांग >>>
गौरतलब है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने राज्य की महत्वाकांक्षी उड़ान योजना के तहत सेनेटरी नैपकिन वितरण के लिए सभी जिलों से मांग अर्थात डिमांड मांगी जा रही है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम चरण (अप्रैल, मई और जून) का डेटा राज सिम्स पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य किया गया है।
सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी >>>
आपको बता दें, परिषद की राज्य परियोजना निदेशक अनुपमा जोरवाल ने सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्कूलवार मांग सूचना जल्द से जल्द पोर्टल पर इन्द्राज करने को कहा है। वर्तमान में जनवरी से मार्च 2026 तक की आपूर्ति आरएसएससीएल की ओर से की जा रही है। इसे देखते हुए अगले सत्र की योजना पहले ही तैयार की जा रही है। ब्लॉक स्तर पर सीबीइओ की ओर से डेटा का सत्यापन किया जाएगा।
जयपुर। राजस्थान सरकार के पास डमी टीचरों की शिकायतें जोरों पर आ रही है। शिक्षकों की लापरवाही पर रोक लगाने के लिए प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रॉक्सी (एवजी) शिक्षकों की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।
शिक्षक के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई >>>
गौरतलब है कि शिक्षा विभाग को प्रॉक्सी (एवजी) शिक्षकों को लेकर बड़ी तादाद में शिकायतें मिलने पर शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों में जांच समितियों के गठन और फ्लाइंग स्क्वॉड सक्रिय करने के निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई शिक्षक अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को पढ़ाने भेजता पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा से पृथक करना भी शामिल है।
सभी जिलों में जांच समितियों के गठन >>>
शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि जांच और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया संबंधित जिले के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) के मार्गदर्शन में संचालित होगी।
अब देखना होगा कि क्या सरकार सख्ती बरतने वाले आदेश को लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ पूरी तरह लागू कर पाएगा या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल शिक्षकों के बड़े-बड़े संगठन राजस्थान प्रदेश के कोने-कोने में फैले हुए है। यदि किसी शिक्षक के खिलाफ सरकार कार्रवाई करती हैं तो शिक्षक संगठन सड़क पर आने से कतई नहीं चूकेंगे।
रवि प्रकाश जूनवाल हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख जयपुर। प्रदेश के बेरोजगार लोगों के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ की अवधारणा को जमीनी स्तर पर उतारते हुए राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है जिसके तहत अब राज्य में ‘राजस्थान होमस्टे (पेईंग गेस्ट हाउस) योजना–2026’ लागू की गई है।
क्या है राजस्थान सरकार की होमस्टे योजना—2026 >>>
अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन प्रवीण गुप्ता ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के विजन अनुसार राजस्थान सरकार की होमस्टे योजना—2026 पर्यटन-विकास, ग्रामीण आय-वृद्धि और स्वरोज़गार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहल है।
यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने तथा छोटे स्तर के उद्यम को बढ़ावा देने का साधन >>>
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया भारत सरकार के डिरेगुलेशन 2.0 उपायों और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस की भावना के अनुरूप उक्त योजना को सरलीकृत किया गया है। यह योजना राज्य में पर्यटन गतिविधियों को विकेन्द्रिकृत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने तथा छोटे स्तर के उद्यम को बढ़ावा देने का साधन है। योजना अंतर्गत लाइसेंस प्रक्रिया को कम कर, मंज़ूरी को डिजिटल व तेज़ बनाया गया है। पहले जहाँ होमस्टे शुरू करने के लिए कई विभागों की अनुमति और अधिक कागज़ी कार्य करनी पड़ती थी अब सिंगल-विंडो सिस्टम, कम दस्तावेज़ और आसान रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
सहजता से खोल और संचालित कर सकेंगे छोटे निवेशक >>>
अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन ने बताया कि राज्य में होमस्टे खोलना पहले की तुलना में अब अधिक सरल, तेज़ और किफ़ायती होगा, इस योजना के तहत राज्य के निवासी अपने घर या संपत्ति के कुछ कमरों को पर्यटकों के ठहरने हेतु उपलब्ध करा सकते हैं। अब गृहस्वामी होमस्टे इकाइयाँ अधिक सहजता से खोल और संचालित कर सकेंगे जिससे छोटे निवेशक, ग्रामीण परिवार और महिला उद्यमी भी पर्यटन से सीधे जुड़कर लाभ ले सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों को आय का स्रोत मिलेगा और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव भी मिलेगा। ग्रामीण और पारिवारिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और राज्य में पर्यटन और रोजगार को पँख लगेंगे।
योजना पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू >>>
‘राजस्थान होमस्टे (पेईंग गेस्ट हाउस) योजना–2026’ के तहत प्रति आवासीय इकाई अनुमत कमरों की अधिकतम संख्या 5 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है, जबकि अधिकतम बैड क्षमता 24 निर्धारित की गई है। इससे आवास क्षमता बढ़ेगी, लेकिन होमस्टे का पारिवारिक स्वरूप भी सुरक्षित रहेगा और छोटे उद्यमियों को भी पर्यटन व्यवसाय में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह योजना पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
केयरटेकर द्वारा किया जा सकेगा योजना का संचालन >>>
गौरतलब है कि पूर्व में लागू शर्त जिसके तहत संपत्ति स्वामी या परिवार का सदस्य उसी परिसर में निवास करेगा को इस योजना में समाप्त कर दिया गया है। अब होमस्टे इकाई का संचालन संपत्ति स्वामी, लीजधारी या निर्धारित मानकों के अनुसार नियुक्त केयरटेकर द्वारा किया जा सकेगा। यदि स्वामी या पट्टेदार स्वयं परिसर में निवास नहीं करता है, तो दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक नामित केयरटेकर नियुक्त किया जा सकेगा। इससे संचालन में लचीलापन और व्यावसायिक दक्षता दोनों सुनिश्चित होंगे।
सरल और पारदर्शी तरीके से घर बैठे कर सकते हैं आवेदन >>>
योजना में पंजीकरण प्रक्रिया को शीघ्र ही पूर्णतः ऑनलाइन किया जाएगा, जिससे घर बैठे सरल और पारदर्शी आवेदन संभव होगा। आवेदन प्राप्ति के सात कार्य दिवस के भीतर अस्थायी पंजीकरण जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर संचालन प्रारंभ किया जा सकेगा। तीन माह के भीतर निरीक्षण के बाद स्थायी पंजीकरण प्रदान किया जाएगा, जिसकी वैधता दो वर्ष होगी। यदि निर्धारित समय में प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता है तो आवेदन स्वतः पंजीकृत माना जाएगा, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
निकटतम पर्यटक स्वागत केन्द्र (TRC) के माध्यम से हो सकेगा पंजीकरण >>>
पंजीकरण पर्यटन विभाग के स्थानीय कार्यालयों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे विकेन्द्रीकृत क्रियान्वयन को बल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के गृहस्वामी अपने निकटतम पर्यटक स्वागत केन्द्र (TRC) के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकेंगे। यह व्यवस्था ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करेगी।
रिहायशी परिसर में संचालित हो सकेगा होमस्टे का संचालन >>>
अधिसूचना के अनुसार प्रत्येक होमस्टे पूर्णतः रिहायशी परिसर में संचालित होगा। प्रत्येक किराये के कमरे में अटैच बाथरूम, शौचालय, पर्याप्त जल एवं विद्युत आपूर्ति, वेंटिलेशन, स्वच्छता और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा। परिसर में पार्किंग व्यवस्था और स्थानीय निकायों के अनुरूप कचरा निस्तारण की व्यवस्था भी आवश्यक होगी। प्रत्येक विदेशी पर्यटक की सूचना संबंधित प्राधिकरण को देना तथा अतिथि पंजिका का संधारण कम से कम सात वर्ष तक करना अनिवार्य किया गया है।
सिल्वर और गोल्ड दो श्रेणियों में वर्गीकृत है होमस्टे योजना >>>
योजना के अंतर्गत होमस्टे को सिल्वर और गोल्ड श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। सिल्वर श्रेणी के लिए पंजीकरण शुल्क एक हजार रुपये और गोल्ड श्रेणी के लिए दो हजार रुपये निर्धारित है। गोल्ड श्रेणी में एसी/हीटिंग, इंटरनेट सुविधा, उन्नत फर्निशिंग, स्मोक डिटेक्टर और सुरक्षा प्रबंध जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। टैरिफ में शामिल नाश्ते के लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जा सकेगा और इसकी स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।
जयपुर। राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री अविनाश गहलोत ने विभाग द्वारा उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत शैक्षणिक सत्र 2022-23 से 2024-25 तक के लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं।
नियमानुसार छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलने से गहलोत थे नाराज >>>
गौरतलब है कि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की कारण अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य छात्रवृत्ति के पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिलने की शिकायतें मंत्री के पास पहुंच रही थी। श्री गहलोत ने कहा कि जिन विद्यार्थियों के आवेदन पत्र आक्षेप पूर्ति के अभाव में लंबित हैं उन छात्रवृत्ति आवेदन पत्रों में पाई गई कमियों एवं आपत्तियों की पूर्ति करवाकर उन्हें शीघ्र जिला कार्यालयों को अग्रेषित किया जाए, ताकि पात्र विद्यार्थियों को नियमानुसार छात्रवृत्ति का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि अधिकारीगण यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र विद्यार्थी को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े अन्यथा संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
छात्रवृत्ति के फर्जी एवं अनियमित आवेदन पत्रों की होगी छंटनी >>>
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा शिक्षण संस्थानों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रवृत्ति आवेदनों की नियमानुसार जांच कर ही उन्हें अग्रेषित करें। उन्होंने कहा कि अनियमित अथवा फर्जी आवेदन अग्रेषित करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें छात्रवृत्ति पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
अवश्य देखते रहे विभागीय वेबसाइट >>>
श्री गहलोत ने विद्यार्थियों एवं संस्थानों से अपील की है कि वे केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जारी अद्यतन दिशा-निर्देशों की जानकारी www.sjmsnew.rajasthan. gov.in/scholarship या विभागीय वेबसाइट sje.rajasthan.gov.in पर अवश्य देखते रहें ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।
अब देखना होगा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री अविनाश गहलोत के निर्देशों की पालना किस हद तक होती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा बहरहाल समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिलने से छात्रों को बेजा समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में कृषि और सहकारिता विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के बीच कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा लगातार छाए हुए हैं। प्रतिपक्ष की तरफ से बोलते हुए उप नेता रामकेश मीणा ने कहा की सरकार और बीजेपी सिर्फ किरोड़ी लाल मीणा का इस्तेमाल कर रही है। रामकेश मीणा ने कहा कि पूर्वी राजस्थान में लोगों को बीजेपी का नाम किसी ने लेना सिखाया, तो उसका नाम किरोड़ी लाल मीणा है। लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो भाजपा का दोगला चरित्र सामने आ गया।
अगर बीजेपी के ताबूत में कोई आखिरी कील ठोकेगा, तो वह भी किरोड़ी लाल मीणा ही ठोकेगा – रामकेश
अपने जोशीले भाषणों के साथ रामकेश मीणा ने यहां तक कह दिया अगर बीजेपी पर कोई संकट आया, तो उसको दूर करने वाले का नाम किरोड़ी लाल है। रामकेश मीणा यही नहीं रुके, उन्होंने यह भी कह दिया कि, अगर बीजेपी के ताबूत में कोई आखिरी कील ठोकेगा, तो वह भी किरोड़ी लाल मीणा ही ठोकेगा। माल खाएं भजन लाल, जेल जाएं किरोड़ी लाल यहीं हैं भाजपा का दोगला चरित्र।
मुख्यमंत्री कुर्सी तो उन्हें मिलनी चाहिए जिसका हमें खेद है >>>
राजस्थान विधानसभा में अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान बोलने के लिए रामकेश मीणा को 15 मिनट का वक्त मिला था। रामकेश मीणा ने किरोड़ी लाल मीणा को किसान का बेटा, पूर्वी राजस्थान का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कुर्सी तो उन्हें मिलनी चाहिए थी, लेकिन बीजेपी ने ऐसा नहीं किया। उपनेता ने कृषि मंत्री को और ज्यादा अधिकार देने की पैरवी भी की। रामकेश ने कहा कि किरोड़ी लाल मीणा को कृषि विभाग दिया गया, लेकिन वह भी अधूरा और ग्रामीण विकास विभाग दिया तो उसे भी आधा कर दिया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि किसी मंत्री और उसके विभागों के अधिकार का मुद्दा अनुदान की मांगों में कहां से आ गया?
आप लोगों में से कोई कभी जेल गया है क्या >>>
उन्होंने बीजेपी के नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि आप लोगों में से कोई कभी जेल गया है क्या? रामकेश ने कहा कि यहां पर किरोड़ी लाल मीणा ही है, जो आंदोलन में जेल गए हैं। उनके ऊपर 200 से ज्यादा मुकदमे है और उन्होंने कई आंदोलन किए हैं।
किरोड़ी के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र >>>
रामकेश मीणा ने सदन में कहा कि डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने भारतीय जनता पार्टी के लिए लंबे समय तक काम किया है, लेकिन पार्टी में उनकी राजनीतिक हैसियत के अनुरूप उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी गई। उनका मानना है कि डॉ. किरोड़ीलाल को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीद थी कि कम से कम उन्हें उपमुख्यमंत्री या गृहमंत्री का पद मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि उन्हें कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री बनाकर उनके विभागों का बंटवारा कर दिया गया और उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। हालांकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नेता प्रतिपक्ष उप नेता की बात को हल्के में ले रहे थे।
जयपुर। राजस्थान सरकार की कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को मांग से अधिक उर्वरक उपलब्ध करवाया गया है। अच्छी बारिश के कारण अधिक मांग के बावजूद खाद की कमी नहीं आने दी गयी। साथ ही राज्य सरकार द्वारा कालाबाजारियों और नकली खाद बीज के विक्रेताओं के खिलाफ भी बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई है।
नकली खाद-बीज विक्रेताओं और कालाबाजारियों पर की होगी सख्त कार्रवाई >>>
कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीड और फर्टिलाइजर की गुणवत्ता और निर्बाध आपूर्ति के लिए सख्त कानून लाया जाएगा, जिसमें 20 साल की सजा और 20 लाख रुपए के जुर्माने के प्रावधान होगा। राजस्थान विधानसभा में कृषि मंत्री प्रश्न काल में इस संबंध में विधायक श्री घनश्याम द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अच्छे प्रबंधन के कारण प्रदेश में खाद वितरण के समय पिछली सरकार के समय जैसी अप्रिय स्थितियां नहीं बनीं। इस बार लंबे मानसून के कारण जमीन में नमी बनी रही और बुवाई का रकबा बढ़ गया। साथ ही एक अतिरिक्त फसल बोने से फसलों के बीच का गैप कम हुआ। इससे खाद की आवश्यकता में वृद्धि हुई। अधिक मांग के कारण कहीं कहीं किसानों की लाइनें लगने की स्थिति बनी, लेकिन खाद की कमी नहीं हुई।
किसानों को मांग की तुलना में अधिक मात्रा में उर्वरक कराया उपलब्ध >>>
डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को मांग की तुलना में अधिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में यूरिया की मांग 26.20 लाख मैट्रिक टन थी, जबकि 29.29 लाख मैट्रिक टन उपलब्ध कराया गया। डीएपी की 8.50 लाख मैट्रिक टन मांग के मुकाबले 7.80 लाख मैट्रिक टन उपलब्ध हुआ। इसी प्रकार 5.57 लाख मैट्रिक टन एसएसपी तथा 2.72 लाख मैट्रिक टन एनपीके खाद उपलब्ध कराए गए। वहीं वर्ष 2025-26 में 25.52 लाख मैट्रिक टन यूरिया की मांग के विरुद्ध 29.06 लाख मैट्रिक टन उपलब्ध कराया गया। 8.43 लाख मैट्रिक टन डीएपी की मांग के मुकाबले 8.45 लाख मैट्रिक टन उपलब्ध हुआ। उन्होंने कहा कि फरवरी और मार्च माह के लिए भी अतिरिक्त रूप से 1 लाख मैट्रिक टन यूरिया तथा 50 हजार मैट्रिक टन डीएपी और स्टॉक में उपलब्ध करवाया जाएगा। कृषि मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री घनश्याम द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।
107 एफआईआर दर्ज होने पर 28 लोगों की गिरफ्तारी >>>
विधानसभा में उस समय सन्नाटा छा गया जब डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने इस बात का खुलासा किया कि किसानों को लूटने वाले अधिकांश कांग्रेसी के लोग थे। मंत्री ने कहा कि खाद वितरण केंद्रों पर अधिकारियों की तैनाती की गई और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सख्त कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन में 107 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि पिछली सरकार में केवल 20 एफआईआर दर्ज हुई थीं। निरीक्षण के दौरान 11,938 लाइसेंसों में से 765 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। 169 लाइसेंस निलंबित और 46 लाइसेंस निरस्त किए गए। 46 मामलों में से 28 में गिरफ्तारी हुई, 16 मामलों में अदालत में चालान पेश हुआ तथा 21 मामलों में आरोपियों ने अग्रिम जमानत ली है।
सीड और फर्टिलाइजर मामलों में 27 फैक्ट्रियों पर लगाए ताले >>>
कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सीड और फर्टिलाइजर मामलों में 27 फैक्ट्रियों पर ताले लगाए गए हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों और वर्तमान सरकार के दो वर्षों की तुलना करते हुए कहा कि बीज प्रकरण में पूर्व सरकार ने एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की, वर्तमान सरकार द्वारा 5 दर्ज कराई गई हैं। बीज लाइसेंस निरस्तीकरण पूर्व में शून्य थे, अब 8 हुए हैं। फर्टिलाइजर में पूर्व में 8 कार्रवाई, अब 31 प्रकरणों में कार्रवाई की गई है। इसी प्रकार कीटनाशक में पूर्व में कोई कार्रवाई नहीं, वर्तमान में 7 की गई है। वहीं नमूनों की जांच भी वर्तमान सरकार में अधिक की गई है।
किसानों की मांग से ज्यादा किया उर्वरकों की आपूर्ति >>>
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि खरीफ 2024 (अप्रैल–सितंबर 2024) के लिए 11.50 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 6.00 लाख मैट्रिक टन डीएपी की मांग 05 फरवरी 2024 को भारत सरकार को भेजी गई। रबी 2024-25 (अक्टूबर 2024–मार्च 2025) के लिए 15.00 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 4.50 लाख मैट्रिक टन डीएपी की मांग 21 अगस्त 2024 को भेजी गई। खरीफ 2025 (अप्रैल–सितंबर 2025) के लिए 12.00 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 6.00 लाख मैट्रिक टन डीएपी की मांग 31 जनवरी 2025 को प्रेषित की गई। वहीं रबी 2025-26 (अक्टूबर 2025–मार्च 2026) के लिए 15.00 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 3.50 लाख मैट्रिक टन डीएपी की मांग 08 अगस्त 2025 को भेजी गई। उन्होंने कहा कि सभी मांगें फसल सीजन से पूर्व आयोजित जोनल कॉन्फ्रेंस में समय पर भारत सरकार को भेजी गईं। इसके अतिरिक्त डीएपी के विकल्प के रूप में 2.61 लाख मैट्रिक टन एनपीके तथा 4.73 लाख मैट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) उपलब्ध कराया गया है और उर्वरकों की आपूर्ति निरंतर जारी है।
रवि प्रकाश जूनवाल हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख जयपुर। राजस्थान सरकार के कैबिनेट राजस्व मंत्री श्री हेमंत मीणा ने गुरुवार को विधान सभा में कहा कि विधान सभा क्षेत्र सूरतगढ़ में भूमि आवंटन पत्रावली उपलब्ध है। मूल आवंटन पत्रावलियों के अभाव में किस्तें जमा नहीं कराने संबंधी कोई प्रकरण लंबित नहीं है। उन्होंने कहा कि आवंटन पत्रावलियों के अभाव में कोई काश्तकार खातेदारी अधिकार, बैंक ऋण, फसल बीमा एवं अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हेमंत मीणा का जवाब >>>>
आपको बता दे, राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान राजस्व मंत्री ने सदन के सदस्य श्री डूंगरराम गेदर के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि सूरतगढ़ तहसील में कुल 500 गाँव चको में से 455 गांव चक ऑनलाइन है। इन चकों के नक्शे ऑनलाइन हैं, शेष 45 गांव ऑफलाइन है। इनमें से 27 गांव के रेकार्ड एवं मौके की स्थिति में भिन्नता है। अतः इन गांवों में सर्वे कार्य कराने की आवश्यकता है।
27 गांव में से 17 गांवों में जमाबंदी व नक्शे दोनों उपलब्ध : हेमंत मीणा
राजस्व मंत्री ने कहा कि इन 27 गांवों की केवल जमाबंदी को ऑनलाइन करने का प्रस्ताव राजस्व विभाग को प्राप्त हुए थे। जिसमें निर्णय हो चुका है, जल्द ही नोटिफिकेशन भी जारी करवा दिया जाएगा। जमा बंदी ऑनलाइन होने के बाद सर्वे, री— सर्वे का कार्य किया जा सकेगा एवं इसके बाद नक्शे ऑनलाइन किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इन 27 गांव में से 17 गांवों में जमाबंदी व नक्शे दोनों उपलब्ध हैं। इन गांवों की जमाबंदी को अलग करके मैपिंग कराने का कार्य प्रक्रियाधीन है।
नियमानुसार मिलेगी खातेदारी >>>
विधानसभा में राजस्थान सरकार के राजस्व मंत्री श्री हेमन्त मीणा ने कहा कि चकबंदी, वन टू वन मैपिंग तथा सर्वे प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद इन गांवों के काश्तकारों को नियमानुसार खातेदारी अधिकार प्रदान किया जाना संभव होगा।
जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार सुशासन एवं ई-गवर्नेंस को सुदृढ़ करते हुए आरक्षण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। आयुक्त श्री सिद्धार्थ महाजन के निर्देशानुसार विकसित की जा रही इस डिजिटल प्रणाली के तहत दस्तावेज़ अपलोड, ऑनलाइन परीक्षण, अनुमोदन एवं निर्गमन तक की संपूर्ण कार्यवाही पोर्टल आधारित होगी।
सुशासन की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण का बड़ा कदम >>>
नागरिकों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे इसके लिए जेडीए ने नई व्यवस्था के माध्यम से आवेदक घर बैठे अपने प्रकरण की अद्यतन स्थिति, आवश्यक टिप्पणियाँ एवं संबंधित अभिलेख देख सकेंगे। इससे न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि प्रक्रिया में लगने वाला समय भी घटेगा ।
जेडीए में आरक्षण पत्र जारी करने की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन >>>
जयपुर विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से आयुक्त श्री महाजन ने गुरुवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में विभिन्न हितधारकों से विस्तृत चर्चा की। बैठक में शहरी नियोजन, प्रक्रियागत सरलीकरण, जनसुविधाओं के विस्तार तथा जयपुर के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया साथ ही कार्यक्रम में पधारे आमजन के लम्बित प्रकरणों का भी हाथों हाथ अवोलकन कर संबंधित उपायुक्त को समयबद्ध तरीके से निस्तारण के निर्देश दिए । इस दौरान जेडीए आयुक्त ने जनसुनवाई प्रकरणों की समीक्षा भी की साथ ही अधिकारियों को सुझावों का परीक्षण करवा कर प्राथमिकता के साथ लागू करने के निर्देश दिये। संवाद कार्यक्रम में पधारे हितधारकों ने जेडीए की इस पहल पर संतोष जताया है।
आयुक्त श्री महाजन ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऑनलाइन प्रणाली लागू करने के साथ तीन वर्ष से अधिक पुराने लंबित प्रकरणों एवं लिगेसी डेटा का परीक्षण कर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें। इससे अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण, लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को बल मिलेगा।
पुराने हस्तलिखित एवं मुद्रित अभिलेखों का डेटा एंट्री >>>
गौरतलब है कि जेडीए द्वारा विभिन्न योजनाओं में अधिग्रहित भूमि के बदले पूर्व में जारी मैनुअल आरक्षण पत्रों का चरणबद्ध डिजिटलीकरण भी प्रारंभ कर दिया गया है। पुराने हस्तलिखित एवं मुद्रित अभिलेखों का डेटा एंट्री के माध्यम से कंप्यूटरीकरण कर उन्हें प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे संबंधित हितधारक बिना कार्यालय आए आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकें। अब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए आगामी समय में जारी किए जाने वाले सभी आरक्षण पत्र ई-प्रणाली के माध्यम से तैयार करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा ई-साइन किए गए दस्तावेज़ सीधे ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। इससे दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी, रिकॉर्ड प्रबंधन सुव्यवस्थित होगा साथ ही मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम रहेगी।
प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता एवं नागरिक-केंद्रित सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा >>>
आपको बता दे, डिजिटल माध्यम से सेवा प्रदायगी को सरल बनाकर प्राधिकरण ने शहर के सुव्यवस्थित विकास एवं जनसुविधाओं के सशक्तीकरण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया है। जयपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता एवं नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक सुदृढ़ कदम साबित होगी। इस अवसर पर जेडीए सचिव श्री निशांत जैन, अतिरिक्त आयुक्त श्री भागचंद बधाल सहित सभी ज़ोन के उपायुक्त एवं हितधारक उपस्थित रहे। अब देखना होगा कि क्या जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जनहित में की जा रही ऑनलाइन प्रक्रिया कितनी सफल होती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल सुधार के ऐसे प्रयास एक नजर में सही माने जा सकते हैं।
सिरोही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि किसान भारत की आत्मा है। जब किसान सशक्त होता है तो गांव, प्रदेश और देश प्रगति करता है। उन्होंने कहा कि हम संकल्प पत्र में किए गए वादों को लगातार पूरा कर रहे हैं तथा हमारी सरकार किसानों के कल्याण एवं समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 23 जनवरी (बसंत पंचमी) से प्रदेश के प्रत्येक गिरदावर सर्कल पर ग्राम उत्थान शिविरों को आयोजन किया जाएगा। उन्होंने किसानों एवं पशुपालकों से इन शिविरों से अधिक से अधिक संख्या में जुड़कर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
शर्मा गुरूवार को सिरोही में किसान सम्मान निधि के हस्तानान्तरण एवं ग्राम उत्थान शिविर के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन दो वर्ष पहले यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत एवं दशकों से लंबित मांग को पूरा कर अयोध्या में रामलला की प्राणप्रतिष्ठा की गई थी। साथ ही, आज ही के दिन प्रधानमंत्री ने हरियाणा के पानीपत से महिला उत्थान एवं महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का अभियान शुरू किया था।
राज्य के हर गिरदावर सर्किल पर 23 जनवरी से लगेंगे शिविर >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार गरीब, महिला, युवा और किसान सहित सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। आमजन तक राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ‘ग्राम उत्थान शिविर शुरू किये जा रहे हैं। इन शिविरों में तारबंदी, डिग्गी, पाइप लाइन, फार्म पाँड, फव्वारा एवं ड्रिप, प्लास्टिक मल्च, सौर पंप जैसी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की स्वीकृतियां दी जाएंगी। साथ ही, मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के तहत मिले आवेदनों का निस्तारण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में सोलर पंप, किसान क्रेडिट कार्ड, नए कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए आवेदन, मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत पशुओं का पंजीकरण, पशु टीकाकरण करवाया जाएगा। साथ ही प्राथमिक डेयरी सहकारी समिति और डेयरी सहकारी समितियों का पंजीकरण, स्वामित्व कार्ड का वितरण, नहरों एवं खालों की मरम्मत, पीएम सूर्य घर योजना के तहत पंजीकरण, वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत जल संरक्षण सहित विभिन्न कार्य इन शिविरों में करवाएं जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने 1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को दी कई सौगातें >>>
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में प्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसान, महिला एवं श्रमिक लाभार्थियों को 1 हजार 590 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में भेजी। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ की पांचवीं किस्त के रूप में प्रदेश के 65 लाख से अधिक किसानों के खातों में 653 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी की, साथ ही 5 लाख किसानों को फसल खराबे पर 327 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया गया। श्री शर्मा ने समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 10 हजार से अधिक किसानों को 240 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई तथा मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत 4 लाख पशुपालकों को 50 करोड़ की राशि भेजी गई। इस दौरान मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के 30 लाख से अधिक लाभार्थियों को 75 करोड़ रुपये से अधिक राशि अंतरित की गई तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के 20 हजार लाभार्थियों को 100 करोड़ रुपये की राशि दी गई। मुख्यमंत्री ने एक लाख निर्माण श्रमिकों को 100 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की। इस दौरान 40 करोड़ रुपये के कृषि उपकरणों का वितरण भी किया गया।
टोंक। जिले में गुरुवार को हुई इस सीजन की पहली मावठ से बीसलपुर बांध से भी नहरों में छोड़े जा रहे पानी की मात्रा को भी डिमांड कम होने से घटा दिया गया है। बांध की दाएं मुख्य नहर में करीब 30 प्रतिशत और बाएं मुख्य नहर में 50 प्रतिशत तक कम किया गया है। यह कटौती गुरुवार सुबह आठ बजे से साढ़े आठ की है। इसके बाद अभी बीसलपुर बांध दाएं मुख्य नहर में प्रति सेकंड 400 क्यूसेक पानी और बाएं मुख्य नहर में प्रति सेकेंड 50 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। अब और बारिश होती हैं तो नहरों में पानी की मात्रा को और कम किया जा सकता है।
मावठ के बाद पानी की कम हुई डिमांड
आपको बता दे, बीसलपुर बांध अभी तक इस सीजन में महज 16 सेंटीमीटर खाली हुआ है। अभी इसका जल स्तर 315.39 आर एल मीटर है। बीसलपुर बांध परियोजना के सहायक अभियंता ब्रह्मानंद बैरवा ने बताया कि दाएं मुख्य नहर में प्रति सेकेंड पानी की क्षमता 735 क्यूसेक है। यानि कि इस नहर में बांध से प्रति सेकेंड अधिकतम 735 क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकता है। इसके मुकाबले इसमें बांध से गुरुवार सुबह तक प्रति सेकेंड 560 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। मौसम के अनुसार कटौती आगे भी हो सकती है। रात हुई मावठ के बाद पानी की डिमांड कम हो गईं। ऐसे में आज सुबह 7 बजे नहर में पानी की मात्रा को कम करते हुए 500 क्यूसेक कर दिया। फिर किसानों से मिले फीडबैक को देखते हुए नहरी पानी की डिमांड और कम होने पर सुबह साढ़े आठ बजे इसे घटाकर प्रति सेकेंड 400 क्यूसेक कर दिया गया। उन्होंने बताया कि बारिश और होती हैं तो पानी की मात्रा को और कम किया जा सकता है।
10 दिसंबर 2025 को छोड़ा था नहरों में पानी
गौरतलब है कि कलेक्टर कल्पना अग्रवाल की अध्यक्षता में 10 दिसंबर 2025 को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई जल वितरण समिति की बैठक में उसी शाम को ही नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय लिया था। ऐसे में उसी शाम पांच बजे से साढ़े पांच बजे बांध से दोनों नहरों में पानी छोड़ दिया था। यह 16वीं बार पानी छोड़ा गया। किसान अब फसलों की सिंचाई में जुट हुए है। यह नहरें 15 मार्च तक खुली रहेगी। बीसलपुर बांध परियोजना के सहायक अभियंता दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि बाएं मुख्य नहर में अधिकतम पानी छोड़ने की क्षमता प्रति सेकंड 110 क्यूसेक है। इसके मुकाबले आज सुबह तक इस बाएं मुख्य नहर में बांध से प्रति सेकंड 100 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इसे आज सुबह 8.30 बजे 50 प्रतिशत घटाकर अब प्रति सेकंड 50 क्यूसेक कर दिया है। इस बांध की दाएं और बाएं नहर से 81800 हैक्टेयर फसलें सिंचित होगी। बीसलपुर बांध के सभी गेट 4 दिसंबर को बंद किए गए थे। उसके बाद से अब तक बांध काफी कम खाली हुआ है। अभी तक बांध महज 16 सेंटीमीटर खाली हुआ है। आज सुबह बांध का जल स्तर पूर्ण भराव क्षमता 315.50 आर एल मीटर के मुकाबले 315.39 आर एल मीटर है।
जयपुर। राजस्थान सरकार 15 वर्ष पुरानी कारों पर स्क्रैप पॉलिसी लागू करके गरीब परिवारों के साथ अन्याय कर रही है। यह कहना है राजस्थान सरकार के पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का, जो पुरजोर तरीके स्क्रैप पॉलिसी विरोध कर रहे हैं।
बड़ी- बड़ी कार कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लागू कर रही है पॉलिसी
पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि भजनलाल सरकार गरीब मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों की आंखों में उनकी 15 साल पुरानी कार को देखकर भी चमक आ जाती लेकिन बीजेपी वालो से बच्चों की आंख की चमक नहीं देखी जाती। बीजेपी सरकार अपनी जेब भरने के लिए और बड़ी- बड़ी कार कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीबों की गर्दन पर वार कर रही है।
काला कानून वापस लेना पड़ेगा वरना हम सड़कों पर आएंगे
पूर्व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सरकार को अपना यह काला कानून वापस लेना पड़ेगा वरना हम गरीब परिवारों के लिए सड़कों पर आएंगे, लेकिन आपकी तानाशाही नहीं चलने देंगे। पहले भी सरकार स्मार्ट मीटर लगाने की पॉलिसी लाई थी लेकिन आम जनता और कांग्रेस के भारी विरोध के चलते पॉलिसी को ऑफिस लेना पड़ा था, ठीक ऐसा ही अब हो जाएगा।
बयान भारी ट्रोल हो रहा है सोशल मीडिया पर
प्रताप सिंह खाचरियावास के बयान आने के बाद सोशल मीडिया पर सरकार की बेजा किरकरी हो रही है। क्योंकि एक गरीब आदमी 20-25 हजार रुपए में सेकंड हैंड कार लाकर अपने बच्चों का सपना पूरा कर देता है, तो ऐसे में ऐसी पॉलिसी का विरोध होना लाजमी है।
सवाई माधोपुर। पूरी दुनिया नई साल का जश्न मना रही थी तो दूसरी ओर नए साल 2026 के पहले ही दिन भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सवाई माधोपुर ने जिला उद्योग केंद्र कार्यालय में यूडीसी सूर्य प्रकाश नामा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
सब्सिडी जारी करने के बदले मांग रहा था रुपए
गौर तलब है कि आरोपी ने सरकारी सब्सिडी जारी करने की एवज में 25 हजार रुपए की मांग की थी। एसीबी सवाई माधोपुर के एएसपी ज्ञान सिंह चौधरी ने बताया कि आरोपी यूडीसी ने अंबेडकर प्रोत्साहन योजना के तहत उपभोक्ता के खाते में डाली जाने वाली सब्सिडी राशि जारी करने के बदले रिश्वत मांगी थी। परेशान उपभोक्ता ने इसकी शिकायत एसीबी कार्यालय में दर्ज कराई।
शिकायत सही मिलने पर बिछाया गया ट्रैप
शिकायत मिलने के बाद एसीबी टीम ने मामले का सत्यापन किया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। तय रणनीति के तहत उपभोक्ता को आरोपी के पास भेजा गया। एसीबी ने नये साल के पहले दिन जिला उद्योग केन्द्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दिया है।
आरोपी को कार्यालय में रिश्वत लेते ही दबोचा
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के चक्रव्यूह के अनुसार जैसे ही उपभोक्ता ने जिला उद्योग केंद्र कार्यालय में आरोपी यूडीसी को 25 हजार रुपए की रिश्वत दी, एसीबी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया। एसीबी टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही जिला उद्योग केंद्र कार्यालय से जुड़े अन्य सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है। कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। ट्रैप होने की सूचना आगे की तरह फैल गई। नए साल की छुट्टी होते हुए भी सभी कर्मचारियों में हड़कंप मच गया कि कहीं पूछताछ में हमारा नाम नहीं आ जाए।
सवाई माधोपुर। भारतीय राजनीति का चमकता सितारा सांसद प्रियंका गांधी ने गुरुवार को अपने परिवार के साथ सवाई माधोपुर के रणथम्भौर नेशनल पार्क में सफारी की। इस दौरान प्रियंका गांधी की जिप्सी के सामने टाइगर आ गया। जैसे ही टाइगर झाड़ियों से निकला टूरिस्ट सहम गए। टाइगर जब आगे बढ़ा तो खड़े होकर वीडियो बना रहे पर्यटक डर कर अपनी सीटों पर बैठ गए।
अद्भुत नजारे को पर्यटकों ने अपने कैमरे में कर रहे कैद
गौरतलब है कि प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी और परिवार के साथ 30 दिसंबर को चार दिन के दौरे पर रणथंभौर पहुंची हैं। उन्होंने आज रणथंभौर में टाइगर सफारी का लुत्फ उठाया। 1 जनवरी को टूरिस्ट की जिप्सियों के सामने से टाइगर टहलते हुए कच्चा रास्ता पार कर झाड़ियों में ओझल हो गया। इस अद्भुत नजारे को पर्यटकों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया।
5 जिप्सियों में सवार था वाड्रा परिवार
आपको बता दे, प्रियंका वाड्रा की ओर से गुरुवार को सफारी के लिए 5 जिप्सियां बुक की गई थीं। प्रियंका के साथ उनके पति रॉबर्ट वाड्रा, बेटे रेहान, बेटी मिराया और रेहान की मंगेतर अवीवा बेग और उनका परिवार भी था। प्रियंका अपने परिजनों के साथ दोपहर करीब 2 बजे गणेश धाम गेट से एंट्री ली। इस दौरान उन्होंने लेक एरिया और जोगी महल इलाके में प्राकृतिक सुंदरता को निहारा। उन्होंने जोन नंबर तीन में करीब ढाई घंटे तक सफारी की। इस दौरान टाइगर के आने की सूचना मिली तो जिप्सियां एक जगह ही रुक गईं। तभी बाघिन रिद्धि का बेटा शुभ झाड़ियों से निकलकर जिप्सियों के आ गया। धीरे-धीरे कच्चे रास्ते से होते हुए दूसरी तरफ झाड़ियों में चला गया।
चार दिन तक रणथंभौर में रुकने का कार्यक्रम
प्रियंका वाड्रा का काफिला मंगलवार दोपहर 12.45 बजे राहुल गांधी के साथ रणथंभौर पहुंचा था। इसके बाद वे सीधे होटल शेर बाग पहुंचे। जानकारी के अनुसार- प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी 4 दिन तक रणथंभौर में रुकेंगे। हालांकि कार्यक्रम को व्यक्तिगत रखा गया है, जिसमें बाहरी लोगों की आवाजाही मना है।
इस साल राहुल का दूसरा और प्रियंका का तीसरा दौरा
गौरतलब है कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व गांधी परिवार का पसंदीदा स्पॉट है। इस साल राहुल गांधी का यह दूसरा रणथंभौर दौरा है। जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा तीसरी बार यहां पहुंची हैं।
बिजनेसमैन की बेटी हैं अवीवा बेग
प्रियंका वाड्रा की होने वाली बहू अवीवा दिल्ली के एक प्रतिष्ठित बिजनेस परिवार से आती हैं। उनके पिता इमरान बेग एक बिजनेसमैन हैं। वहीं उनकी मां नंदिता बेग एक जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रियंका गांधी वाड्रा और नंदिता बेग पुरानी दोस्त हैं। नंदिता बेग ने कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के इंटीरियर डिजाइन पर भी काम किया है, जिससे दोनों परिवारों के रिश्ते और गहरे हुए। प्रियंका वाड्रा के साथ पहले भी कई बार अवीवा का परिवार भ्रमण कर चुका है।
अलवर। एक तरफ लोग नई साल 2026 का जश्न मनाने के लिए लोग इधर-उधर भाग दौड़ कर रहे थे तो दूसरी तरफ पुलिस नए साल पर चालान काटने का नया तरीका आजमा रही थी, जो काफी हद तक सफल रहा।
अलवर पुलिस का अनोखा तरीका
अलवर में नए साल पर पुलिस ने यातयात के नियम तोड़ने वालों को पहले माला पहनाई फिर उसको प्यार से चॉकलेट खिलाई उसके बाद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी भरकम चालान ठोका। और भविष्य में ट्रैफिक नियमों की पालना की करने की हिदायत दी गई। जी हां यह बात पूरे सौलह आने सही है। अलवर शहर के भगत सिंह सर्किल पर नए साल के मौके पर पुलिस ने यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों को समझाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। बिना हेलमेट वाहन चला रहे और ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करने वाले बाइक चालकों को रोककर पुलिस ने न तो सख्ती दिखाई और न ही डांट फटकार लगाई, बल्कि उन्हें माला पहनाकर चॉकलेट दी और नए साल की बधाई दी।
अभियान की शुरुआत की थी एडिशनल एसपी गोपीनाथ शरण
आपको बता दे, इस अभियान के दौरान खुद एडिशनल एसपी गोपीनाथ शरण कांबले ने बिना हेलमेट वाहन चला रहे चालकों से हाथ मिलाया, माला पहनाई और चॉकलेट देकर यह संदेश दिया कि वे ट्रैफिक नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई का वीडियो भी बनवाया। इस मौके पर बाइक पर सवार युवक-युवती को रोका गया, जिनके हाथ में हेलमेट था, लेकिन सिर पर नहीं पहना हुआ था। पुलिस ने उनसे पूछा कि हेलमेट सिर पर क्यों नहीं लगाया गया। इसके बाद उन्हें भी माला पहनाकर नए साल की शुभकामनाएं दी गई। उसके बाद चॉकलेट खिलाई और उनके हाथ में चालान थमाया।
लगातार अभियान चलाने के बाद भी ट्रैफिक नियमों की नहीं हो रही थी पालना
ट्रैफिक नियमों की बड़ी तादाद में अवहेलना होने पर एडिशनल एसपी गोपीनाथ शरण कांबले ने बताया कि पिछले कई दिनों से पुलिस लगातार अभियान चलाकर बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों, मॉडिफाइड वाहनों और तेज आवाज वाले साइलैंसर लगी बुलेट बाइकों पर कार्रवाई कर रही है। इसके बावजूद लोग यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए साल के मौके पर लोगों को समझाने के लिए यह नया तरीका अपनाया गया है, ताकि लोग खुद शर्म महसूस कर नियमों की पालना करने लगे।
सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों के कारण पुलिस आमजन को कर रही जागरूक
एडिशनल एसपी गोपीनाथ शरण कांबले ने कहा कि नए साल के मौके पर लोगों को समझाने के लिए यह नया तरीका अपनाया गया है, ताकि लोग खुद शर्म महसूस कर नियमों की पालना करने लगे। लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है, इसी को देखते हुए पुलिस नए-नए तरीकों से जागरूक करने का प्रयास कर रही है। इस दौरान नियम तोड़ने वालों को चॉकलेट और माला पहनाने के साथ-साथ नियमानुसार चालान भी काटे गए। काबिले गौर है कि इस प्रकार के तरीके से जनता में ट्रैफिक नियमों की पालना कराने में पुलिस अच्छा खासा रोल अदा कर रही है, जहां एक तरफ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों का पहला स्वागत किया जाता है, फिर उनका चालान काटा जाता है। जो भी एक अच्छी शुरुआत है।
बांसवाड़ा। नए साल के शुभ अवसर पर पुलिस थाना बांसवाड़ा में तैनात अनुसूचित जनजाति की महिला कांस्टेबल ने एक औरत की जान बचाकर पूरे देश की नायक बन गई। महिला सिपाही को पूरा देश धन्यवाद देकर उसका मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ साहस और वीरता की चर्चा कर रहा है।
जान जोखिम में डालकर बचाई औरत की जान
गौरतलब है कि खुदकुशी करने के लिए नहर में कूदी महिला को लेडी कांस्टेबल गंगा डामोर ने अपनी जान को खतरे में डालकर बचा लिया। कांस्टेबल गंगा डामोर तेज पानी के बहाव में कूद गई और महिला को कस कर पकड़ लिया। पानी के तेज वेग में करीब 200 मीटर तक दोनों बह गए लेकिन गंगा ने महिला को पकड़े रखा। मानसिक रोगी महिला ने उल्टा पानी में लेडी कांस्टेबल से उलझ गई। इससे लेकिन कांस्टेबल ने न सिर्फ खुद को बचाया बल्कि जैसे-तैसे महिला को काबू में कर किनारे ले आई। हालाकि कांस्टेबल को महिला से संघर्ष कर थकते देख कांस्टेबल दीपक ने भी छलांग लगा दी और दोनों को बाहर निकलने में मदद की।
महिला को जिला अस्पताल में कराया भर्ती
घटना बांसवाड़ा से सटे बारी सियातलाई गांव में बुधवार सुबह 11 बजे की है। कोतवाल बुधाराम बिश्नोई ने बताया कि सुबह सूचना मिली थी कि एक महिला नहर में कूदकर खुदकुशी करने पर आमदा है। ऐसे में, थाने से जाब्ता भेजा था। इसमें कालिका टीम की महिला कांस्टेबल गंगा डामोर और थाने से कांस्टेबल दीपक लबाना शामिल थे। दोनों ही मौके पर पहुंचे और महिला की जान बचा ली। महिला ने अपने बारे में कुछ भी नहीं बताया है और नहीं आसपास के लोगों ने उसे पहचाना है। फिलहाल महिला को जिला एमजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
निवाई। टोंक जिले के निवाई उपजिला मजिस्ट्रेट प्रीति मीणा ने बुधवार को अचानक बस स्टैंड स्थित उप जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
गंदगी पर सफाई कर्मचारी को लगाई फटकार
औचक निरीक्षण के दौरान कार्यवाहक पीएमओ डॉ. योगेंद्र विजय ने उपजिला मजिस्ट्रेट को अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं से अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान उपजिला मजिस्ट्रेट प्रीति मीणा ने अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने महिला और पुरुष वार्डों का दौरा किया और वहां भर्ती मरीजों से सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। वार्डों में गंदगी और अव्यवस्थित सफाई देखकर उन्होंने मौके पर मौजूद सफाई कर्मचारियों को फटकार लगाई।
सफाई व्यवस्था पर जताई नाराजगी
अस्पताल प्रशासन ने उपजिला मजिस्ट्रेट को बताया कि उप जिला अस्पताल में प्रति वर्ष सफाई की निविदा जारी की जाती है, लेकिन वर्तमान ठेकेदार की लापरवाही के कारण सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। इस पर उपजिला मजिस्ट्रेट मीणा ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शैलेंद्र चौधरी से दूरभाष पर बात कर अस्पताल की बदहाल सफाई व्यवस्था पर कड़ा एतराज जताया।
खाली पदों को जल्द भरने के दिए निर्देश
चिकित्सालय प्रशासन ने उपजिला मजिस्ट्रेट को यह भी जानकारी दी कि उप जिला अस्पताल में वार्ड बॉय, नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों के कई पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। उपजिला मजिस्ट्रेट ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कागजात और नकदी चोरी की हो रही है घटनाएं
प्रीति मीणा ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। प्रशासन ने बताया कि ओपीडी में लगी लाइनों में अक्सर जेबकतरों द्वारा मरीजों के महत्वपूर्ण कागजात और नकदी चोरी की घटनाएं होती हैं। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन कई कैमरों के बंद होने के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
अस्पताल के मुख्य गेट का कार्य छह महीने से लंबित
उपजिला मजिस्ट्रेट प्रीति मीणा ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क किया और उप जिला अस्पताल के निर्माणाधीन मुख्य गेट का कार्य छह माह से लंबित होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आमजन और मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए यह कार्य शीघ्र पूरा करने और इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए।
बारां। इंसान कितना ही अपने दिल को कठोर कर ले परंतु अपने बिछड़े हुए की याद आने पर स्वाभाविक रूप से भावुक हो जाता है। ऐसे ही शहीद राजमल मीणा के बलिदान दिवस पर बुधवार को वीरांगना कमलेश देवी शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते समय भावुक हो गई।
जिला सैनिक कल्याण परिषद कोटा की ओर से हुआ था आयोजन
गौर तलब है कि कार्यक्रम में फर्स्ट बटालियन जंगी पलटन व 22 ग्रेनेडियर बटालियन सेना के जवानों ने कर्नल रविंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में शहीद की प्रतिमा पर पुष्पचक्र व पुष्पांजलि अर्पित किए। जिला सैनिक कल्याण परिषद कोटा की ओर से भी पुष्पचक्र अर्पित किया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर शहीद को सलामी भी दी। इस अवसर पर सैनिक कल्याण परिषद कोटा ने शहीद की वीरांगना कमलेश मीणा को विशेष रूप से आमंत्रित किया था। जैसे ही वीरांगना कमलेश मीणा शहीद माल्यार्पण किया तो भावुक हो गई।
अलवर। उद्योग नगर थाना क्षेत्र के सैयद खेड़ली गांव में एक गरीब आदमी खेत पर जबरन कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। पूर्व विधायक का दामाद एक खेत की तारबंदी के लिए 300 लोगों को लेकर पहुंच गया। पीड़ित परिवार रात को एसपी से मिलने पहुंचे तब जाकर विधायक के दामाद की पोल खुली।
पूरी दमखम के साथ पहुंचा विधायक का दामाद
अलवर पुलिस अधीक्षक से मिलकर पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक जयराम जाटव का दामाद बेलाका सरपंच अशोक जाटव तारबंदी के लिए पहुंच गए। आरोपी पक्ष ने न केवल दबाव बनाया बल्कि कथित रूप से हथियार भी लहराए। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस मूकदर्शक बनी रही और पीड़ितों की पिटाई का तमाशा देखती रही।
रात होने पर पीड़ित से नहीं मिले एसपी
पीड़ित अपने परिवार के साथ मंगलवार रात साढ़े सात बजे मिनी सचिवालय स्थित एसपी ऑफिस पहुंचा, लेकिन रात होने के कारण एसपी नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने कुछ पुलिस कर्मियों को अपनी शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
अलॉटमेंट जमीन पर जबरन कब्जा
पीड़ित रिंकू ने बताया कि बेलाका का सरपंच अशोक जाटव उनकी साढ़े छ बीघा जमीन पर तारबंदी कर कब्जा करना चाहता है, जबकि उसकी केवल डेढ़ बीघा जमीन निकल रही है। उन्होंने कहा कि यह जमीन 1975 में अलॉट हुई थी। रिंकू ने बताया कि मंगलवार दोपहर को अशोक जाटव अपने साथ लगभग 300 लोगों को लेकर जमीन पर तारबंदी करने पहुंचा। उनके साथ आए लोग हाथों में लाठी-डंडे और हथियार लिए हुए थे। जब उन्होंने विरोध किया तो उनके साथ हाथापाई हुई, जिसका एक वीडियो भी सामने आया है।
जयपुर और अलवर कंट्रोल रूम से संपर्क करने पर भी पुलिस ने नहीं लिया एक्शन
पीड़ित लोगों ने बताया कि इस घटना की जानकारी उद्योग नगर थाना पुलिस को दी गई, लेकिन वे समय पर मौके पर नहीं पहुंचे। इसके बाद जयपुर और अलवर कंट्रोल रूम से संपर्क किया गया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन उचित कार्रवाई नहीं की। इस पर परेशान पीड़ित एसपी ऑफिस पहुंचे ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। जबकि उद्योग नगर थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जो भी उचित कार्रवाई होगी, उसे किया जाएगा। धनबल भुजबल और सत्ता बल के आगे पीड़ित पक्ष का पलड़ा कमजोर नजर आ रहा है।
मीनेश चन्द्र मीना हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख अजमेर। शहर के हरिभाऊ उपाध्याय नगर थाना क्षेत्र के कोटड़ा स्थित पिंक गार्डन के पास दुकान पर एक युवक वृद्ध महिला दुकानदार को ऑनलाइन पेमेंट का फर्जी मैसेज दिखा कर सामान ले गया। पीड़ित पक्ष ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर जांच कर रही है।
साढ़े तीन हजार रुपए से ज्यादा का सामान ले गया ठग
पुलिस सूत्रों के अनुसार दुकान संचालक बुजुर्ग पदम ने बताया कि बुधवार को वह किसी काम से बाजार गया था। दुकान पर उसकी पत्नी और बेटी थीं। एक युवक वहां आया। उसने साढ़े तीन हजार रुपए से ज्यादा का सामान खरीदा और यूपीआई से पेमेंट करने की बात कही। उसने मोबाइल में एक मैसेज दिखाया और कहा पेमेंट हो गया और वहां से सामान लेकर निकल गया, जबकि पेमेंट मिला ही नहीं। पीड़ित ने बताया कि सीसीटीवी की फुटेज में नजर आ रहा है कि आरोपी पहले बाइक से आगे गया। फिर वापस आया और सामान लेकर फरार हो गया।
जानकार होने का कराया एहसास
ठग इतना चालाक था कि बुजुर्ग महिला के आया और पूछा कि अंकल कहा हैं वह सामान की एक लिस्ट उन्हें देकर गया था। वह सामान दे दीजिए। जब उससे कहा कि उन्होंने ऐसी कोई लिस्ट नहीं दी, तब उसने जल्दी जल्दी सामान की लिस्ट बनाई और दुकान से खुद भी सामान निकालने की कोशिश की। इसके बाद उसने पेमेंट का मैसेज दिखा और वहां से निकल गया। बुजुर्ग महिला ने समझा कि लिस्ट पहले दे गया तो कोई जानकारी हो सकता है।
नववर्ष के पहले दिन जयपुर के आराध्य देव श्री गोविंद देव जी मंदिर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा है। सुबह से ही मंदिर परिसर जय श्री राधे के जयघोष से गूंज रहा है। नए साल की शुरुआत भगवान के दर्शन से करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धाल कतारबद्ध होकर मंदिर पहुंचे हैं। और श्रद्धालुओं ने मंगल आरती में भाग लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और स्वयंसेवकों ने भीड़ नियंत्रण में सहयोग किया।
खाटूश्यामजी मंदिर : तोरण द्वार पर हुई आतिशबाजी
सीकर में खाटूश्यामजी मंदिर में भक्तों की भीड़ लगातार उमड़ रही है। देर रात से ही भक्तों का खाटू पहुंचने का सिलसिला जारी है। नए साल के मौके पर रोक के बावजूद खाटू में तोरण द्वार पर आतिशबाजी हुई। दर्शनों की सभी 14 लाइन लगातार फुल चल रही है।
सीकर एसपी प्रवीण नायक खाटू में रातभर व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग करते रहे। खाटू में भीड़ को देखते हुए 3 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
साल के आखिरी दिन बुधवार को खाटूश्याम मंदिर में लोगों को करीब आधे घंटे में ही दर्शन हुए। मंदिर में मशीनों के जरिए दर्शनों की लाइन के पास स्नोफॉल करवाया जा रहा है।
खाटूश्यामजी मंदिर में 2 जनवरी तक रींगस मार्ग नो व्हीकल जोन
न्यू ईयर पर खाटूश्यामजी में लाखों संख्या में भक्त पहुंचेंगे। ऐसे में बुधवार सुबह 10 बजे से 2 जनवरी सुबह 10 बजे तक रींगस से खाटू तक का 17 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग पूरी तरह नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है। रींगस एसडीएम बृजेश कुमार ने कहा- पैदल आने वाले भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
गोविंद देव जी मंदिर में बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचे
नववर्ष के पहले दिन 1 जनवरी को जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देव जी मंदिर में बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंच रहे हैं। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है, ताकि दर्शनार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो और यातायात सुचारू रूप से चलता रहे।
गोविंद देव जी मंदिर और जलेब चौक के आसपास पार्किंग सीमित होने के कारण आमजन से अपील की गई है कि वे वाहन भूमिगत पार्किंग रामनिवास बाग में पार्क कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
मोतीडूंगरी गणेश जी को लड्डुओं का लगेगा भोग
नए साल पर जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक आयोजन किया गया है। नववर्ष के मौके पर गणेशजी सोने का मुकुट धारण करेंगे और भक्तों को विशेष श्रृंगार के साथ दर्शन होंगे।
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया मंदिर में 56 तरह के लड्डुओं का विशेष भोग लगाया जाएगा। पहली बार 56 भोग की जगह 56 तरह के लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
चूरू के सालासर बालाजी धाम में सजावट, हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए
चूरू जिले के विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ सालासर बालाजी धाम में नववर्ष के मौके पर सजावट की गई है। इस दौरान मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
हनुमान सेवा समिति के अध्यक्ष सत्यप्रकाश पुजारी ने बताया- मंदिर में विशेष रूप से लाइट और फूलों की सजावट की गई है। संगरूर के कारीगरों ने मंदिर परिसर में लाइटिंग का काम किया है, जबकि अजमेर से आए कारीगरों ने पूरे परिसर को फूलों से सजाया है।
मेहंदीपुर बालाजी में दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़े
नए साल के पहले दिन दर्शन करने के लिए दौसा के मेहंदीपुर बालाजी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।
मंदिर के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के निर्देशन में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक बंदोबस्त किए गए हैं। मंदिर परिसर को रोशनी से सजाया गया है।
सांवलियाजी में बुधवार को किए साढ़े 3 लाख भक्तों ने दर्शन
श्री सांवलियाजी में 2 जनवरी तक दर्शन के लिए भक्तों को एंट्री मीरा-सर्किल स्थित गेट से होगी। जिग-जैग 4 लाइन से होते हुए दर्शनार्थियों को सिंहद्वार से प्रवेश करवाया जा रहा है। यशोदा विहार चौक वाले द्वार से दर्शनार्थियों की एग्जिट निर्धारित की गई है। श्रद्धालुओं के आने-जाने और ट्रैफिक के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रभा गौतम ने बताया कि मंदिर में बुधवार को 3 से साढ़े 3 लाख भक्तों ने दर्शन किए हैं। पिछले साल 1 जनवरी को ज्यादा भीड़ आई थी
जयपुर । मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास से आज शाम जयपुर में पदस्थापित भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों ने भेंट की। इस दल का नेतृत्व पत्र सूचना कार्यालय की अपर महानिदेशक श्रीमती ऋतु शुक्ला ने किया।
केंद्र और राज्य सरकार की जन कल्याण योजनाओं का प्रचार जरुरी
सभी अधिकारियों से अनौपचारिक चर्चा में श्री वी श्रीनिवास ने कहा कि केंद्र सरकार ओर राज्य सरकार जन कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और पिछले वर्षों में कई जनकल्याणकारी नीति और योजनाएँ बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं और नीतियों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने में केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय की मीडिया इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं से राज्य में आये सकारात्मक बदलाव भी विमर्श का विषय होना चाहिए।
उप निदेशक श्री धर्मेश भारती सहित सभी प्रमुख अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर पत्र सूचना कार्यालय की अपर महानिदेशक श्रीमती ऋतु शुक्ला ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय की मीडिया इकाइयों की ओर से किये जा रहे कार्यों में बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्य सचिव से मिलने वाले दल में पत्र सूचना कार्यालय के निदेशक श्री अनुभव बैरवा, उप निदेशक श्री धर्मेश भारती, दूरदर्शन समाचार की उप निदेशक श्रीमती मंजू मीना, सहायक निदेशक श्री मुरारी गुप्ता, आकाशवाणी समाचार के उप निदेशक श्री राम नाथ मीणा ओर सहायक निदेशक जितेंद्र द्विवेदी शामिल रहे।
जयपुर। केंद्रीय उप मुख्य श्रम आयुक्त श्री निरंजन कुमार ने कार्यालय में नवीन श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में इनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
श्रम इतिहास में एक नए युग की शुरुआत
उन्होने बताया कि भारत सरकार ने 21 नवम्बर 2025 से 29 श्रम कानूनों के स्थान पर चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं। देश के श्रम इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से लागू की गई नई श्रम संहिताएं देश में श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव का मार्ग खोलती हैं। यह संहिताएँ श्रम नियमावली को आधुनिक बनाती हैं तथा श्रमिकों की भलाई सुनिश्चित करते हुए श्रम इकोसिस्टम को कार्य की बदलती दुनिया के साथ जोड़ती हैं। देश के कई श्रम कानून आज़ादी के बाद के शुरुआती दौर में बनाए गए थे, उस समय अर्थव्यवस्था और कार्य की दुनिया बहुत अलग थी। बदलती अर्थव्यवस्था, रोजगार के बदलते तरीकों तथा आधुनिक वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाते हुए ये संहिताएँ श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को सशक्त बनाती हैं तथा आत्मनिर्भर भारत के लिए मार्ग प्रशस्त करती हैं।
सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य
श्री निरंजन कुमार ने बताया कि नई श्रम संहिताओं के तहत सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें रोज़गार सुनिश्चित होगा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुगमता से मिल सकेगा। इसके साथ ही वेतन के समानिकरण और समयबद्ध वेतन भुगतान के प्रावधानों से श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा मज़बूत होगी। श्रम शक्ति में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से संहिताओं में प्रावधान किए गए हैं, जिनके अनुसार उनकी सहमति से उन्हें रात्रिकालीन पारी में भी काम करने की अनुमति होगी। इससे महिलाओं के लिए बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे।
29 श्रम कानूनों का समावेश
केंद्र सरकार ने मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थिति संहिता सहित कुल चार संहिताओं में 29 श्रम कानूनों का समावेश किया है। ये सभी नए श्रम कानून देश के समग्र विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
कानून की मुख्य मुख्य विशेषताएं
श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी तथा सम्मानजनक जीवन की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। विशेष रूप से सभी के लिए न्यूनतम मजदूरी का क्रियान्वयन तथा नियुक्ति आदेश (अपॉइंटमेंट लेटर) जारी करना अनिवार्य कर दिया गया। इसी प्रकार एक वर्ष में 180 दिन कार्य करने पर सवेतन अवकाश लागू होने के साथ मजदूरी राष्ट्रीय फ्लोर वेतन से कम नहीं होनी चाहिए। इसी तरह महिलाओं को अनुमति के साथ सभी क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर दिया गया है तथा उनकी उचित सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी और 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश भी मिलेगा। जहाँ महिलाएँ कार्यरत हों, वहाँ चाइल्ड केयर (बाल देखभाल) केंद्रों की स्थापना करना जरूरी होगा। कानून के अनुसार महिलाओं को घर से काम करने का अवसर प्राप्त होगा। सभी श्रमिकों की प्रत्येक वर्ष निःशुल्क स्वास्थ्य जांच अनिवार्य रूप सेहोगी। कार्य, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में संतुलन हेतु कार्य समय में लचीलापन (प्रतिदिन 8-12 घंटे, सप्ताह में 48 घंटे का होगा यदि किसी श्रमिक से अतिरिक्त कार्य करवाया जाएगा तो दोगुना वेतन देना अनिवार्य कर दिया गया। कानून की सबसे खास बात सिंगल लाइसेंस तथा सरलीकृत रिटर्न नीति का क्रियान्वयन करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य परिस्थितियों का भी मानकीकरण जरूरी किया गया है।
सवाई माधोपुर 12 दिसम्बर। खंडार विधायक जितेन्द्र गोठवाल ने कहा कि “कांग्रेस सरकार के पाँच वर्षों की तुलना में हमारी सरकार ने मात्र दो वर्षों में अधिक ठोस, प्रभावी और जनहितकारी कार्य कर दिखाए हैं।
वादों को पूरा करना हमारी प्रतिबद्धता और संवेदनशील शासन का प्रमाण – गोठवाल
खंडार विधायक जितेन्द्र गोठवाल ने कहा कि घोषणा पत्र के 70 प्रतिशत से अधिक वादों को पूरा करना हमारी प्रतिबद्धता और संवेदनशील शासन का प्रमाण है।” उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है, वहीं राइजिंग राजस्थान में हुए एमओयू में से लगभग 8 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट धरातल पर उतर चुके हैं। जिले में 114 एमओयू के माध्यम से 1281 करोड़ रूपये का निवेश प्रस्तावित है। लगभग 500 करोड़ रूपये के 33 एमओयू धरातल पर उतरे है।
यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में गत दो वर्षों में हुए जनकल्याणकारी कार्यों, नीतिगत सुधारों और सुशासन को मजबूत बनाने के प्रयासों के संबंध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए खंडार विधायक जितेन्द्र गोठवाल ने कहीं। इस अवसर पर जिले में महिला सशक्तिकरण, कृषि एवं ग्रामीण विकास, पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, आधारभूत संरचना और पर्यटन क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। प्राकृतिक आपदा जैसे चुनौतीपूर्ण समय में प्रशासन द्वारा चलाए गए बाढ़ राहत कार्यो के माध्यम से स्थानीय निवासियों को राहत पहुंचाने और गणेश उत्सव के सफल आयोजन को प्रशासनिक दक्षता और जनसहयोग का अद्वितीय उदाहरण बताया।
सरकार विकास रथों पर सवार – मानसिंह गुर्जर
गंगापुर सिटी के पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर ने कहा कि सरकार विकास रथों के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में आमजन तक योजनाओं की सही जानकारी पहुँच रही है तथा सुझाव पेटिकाओं के माध्यम से जनता की समस्याएँ सीधे सरकार तक पहुंचेगी।
महिला एवं बालिका सशक्तिकरण से जिले को मिली नई पहचान :-
प्रेस वार्ता में बताया गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं से जिले में ठोस परिवर्तन हुआ है। 30 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी श्रेणी में लाया गया। 2 हजार 721 महिला स्वयं सहायता समूहों को 59.63 करोड़ रुपये का ऋण दिलवाया गया। लाड़ो प्रोत्साहन योजना के तहत 11 हजार 811 बालिकाओं के जन्म पर 2.95 करोड़ रुपये डीबीटी से प्रदत्त किए गए। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में 26 हजार से अधिक महिलाओं को 9.65 करोड़ रुपये सीधे खातों में हस्तांतरित किए गए।
किसानों के जीवन में आये वास्तविक बदलाव :-
कृषि एवं पशुपालन विभाग ने दो वर्षों में किसानों को अभूतपूर्व सहायता प्रदान की है। फार्म पौण्ड निर्माण पर 1.77 करोड़ और सिंचाई पाइपलाइन पर 4.54 करोड़ की सहायता, तारबंदी योजना पर 628.98 लाख, कृषि यंत्रों पर 1408.87 लाख, और पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 31.70 करोड़ रुपये किसानों के खातों में हस्तांतरित किए गए। 995 किसानों को सौर ऊर्जा पंप उपलब्ध कराए गए। जिले में 12 नए पशु चिकित्सा उपकेंद्र स्वीकृत और 10 संस्थाएँ क्रमोन्नत की गईं।
घर-घर जल के माध्यम से सतत आपूर्ति :-
जल जीवन मिशन के तहत 131.75 करोड़ रुपये से 52,488 ग्रामीण परिवारों तक पेयजल पहुँचाया गया। ग्रीष्मकालीन आकस्मिक योजनाओं पर 418.51 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत हुए।
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा विस्तार :-
जिले में 27 चिकित्सा संस्थानों के 13.92 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य पूर्ण हुए हैं। पिपलाई, पीलूखेड़ा पीपलवाड़ा एवं उलियाना में 4 नये पीएचसी और अन्य स्थानों पर 6 उप-केंद्रों का निर्माण पूरा हुआ। मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत 37 अस्पतालों में 1.20 लाख से अधिक लाभार्थियों को 47.63 करोड़ रुपये की कैशलेस सुविधा प्रदान की गई। 11 नये प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र खोले गये। चौथ का बरवाड़ा सीएचसी को 75 बेड अस्पताल में विकसित करने का कार्य प्रगतिरत है। सीएचसी खण्डार को उप जिला अस्पातल में क्रमोन्नत किया गया।
युवाओं के लिए शिक्षा, खेल, रोजगार में अवसरों का हुआ विस्तार :-
जिले में दो वर्षों में 1433 नियमित एवं 412 संविदा नियुक्तियाँ दी गईं। उच्च शिक्षा हेतु 33.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियाँ वितरित की गईं। कालीबाई भील एवं देवनारायण स्कूटी योजनाओं में कुल 547 स्कूटी वितरित। 341 ओपन जिम और हजारों ग्राम पंचायतों में खेल मैदान विकसित किए गए।
गरीब कल्याण और आवास :-
मुख्यमंत्री स्वनिधि/पीएम स्ट्रीट वेंडर योजना में 2129 लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराया गया। पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में 25 हजार 879 परिवारों को नए आवास स्वीकृत हुए, 6192 लाख रुपये लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए। गैस सिलेंडर सब्सिडी में 1.37 लाख परिवारों को 1999.85 लाख रुपये डीबीटी से दिए गए।
सड़क एवं आधारभूत संरचना विकास बड़े पैमाने पर कार्य :-
पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु घड़ियाल संरक्षण हेतु पालीघाट में वैज्ञानिक रियरिंग एन्क्लोजर प्रणाली विकसित की गई। वहीं त्रिनेत्र गणेश मंदिर क्षेत्र और खंडार किले के लिए नए पर्यटन विकास कार्य स्वीकृत। 91.27 करोड़ रुपये से 115.32 किमी सड़कें विकसित की गईं। 208.95 करोड़ रुपये से 141 सड़कों का नया स्वीकृति कार्य। हमीर सर्किल-आलनपुर सड़क उन्नयन, खंडार के कई मार्गों का चौड़ीकरण, और 43.03 करोड़ के आरओबी का निर्माण प्रगति पर है।
सेवा शिविरों, जनसुनवाई के माध्यम से समाधान की पारदर्शी व्यवस्था :-
ग्रामीण सेवा शिविरों में 26 हजार से अधिक प्रकरणों का निस्तारण किया गया। शहरी सेवा शिविरों में 889 पट्टे, 154 भवन मानचित्र और 447 नामांतरण जारी किए गए। पेंशन सत्यापन, मातृ वंदना योजना पंजीकरण तथा श्रमिक व टूलकिट सहायता योजनाओं में हजारों लाभार्थियों को सीधा लाभ मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए संकल्पबद्ध है। आगामी वर्षों में नए विकास कार्य, जनकल्याणकारी योजनाएं और संसाधनों के विस्तार के साथ राजस्थान को एक विकसित एवं आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। प्रेस वार्ता के दौरान जिला कलक्टर काना राम, खण्डार प्रधान नरेंद्र चौधरी, नगर परिषद सभापति सुनील तिलकर, जनप्रतिनिधि एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जोधपुर। राजस्थान के इतिहास में सालों पहले वकील समुदाय और पुलिस के बीच मामला इतना तूल पकड़ गया था कि अंत में राजस्थान सरकार ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को पद से हटाना पड़ा। ठीक उसी प्रकार जोधपुर की घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही हुआ वाकिया बयां कर रही है जहां वकील के साथ धक्का-मुक्की करने पर थाना अधिकारी हमीर सिंह को सस्पेंड किया गया।
बयान लेने के दौरान वर्दी में नहीं था पुलिसकर्मी —
बयान लेने के दौरान पुलिसकर्मी वर्दी में नहीं था। वकील ने सवाल उठाया तो जोधपुर के कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड थाने के शो हमीरसिंह भड़क गए।
राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वत: ही लिया संज्ञान —-
जोधपुर के कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में वकील भरतसिंह राठौड़ से धक्का-मुक्की के बाद मामला गर्मा गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेकर मंगलवार सुबह पुलिस कमिश्नर, पुलिस उपायुक्त (डीसीपी वेस्ट) और कुड़ी थानाधिकारी को तलब किया था।
पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश, डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल, एसीपी, थानाधिकारी हमीरसिंह कोर्ट पहुंचे थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश संजीव प्रकाश शर्मा को थाने में वकील के साथ हुए दुर्व्यवहार का वीडियो चलाकर दिखाया गया।
वीडियो देखकर हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को लगाई फटकार —
राजस्थान हाई कोर्ट ने वीडियो देखने के बाद पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश को जमकर फटकार लगाई। जोधपुर पुलिस कमिश्नर और सरकार को हिदायत दी कि सभी पुलिसकर्मियों को ‘सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग’ दी जाए। किससे, किस तरीके से बात करनी चाहिए, कैसे लोगों से पेश आना चाहिए, यह पुलिस को आना चाहिए।
आईपीएस रैंक के अधिकारी करेंगे जांच —
जोधपुर पुलिस कमिश्नर ने कोर्ट में कहा कि आईपीएस स्तर के अधिकारी से जांच करवाई जा रही है। फिलहाल थानाधिकारी को सस्पेंड करके अन्य जो भी दोषी हैं, उन्हें भी थाने से हटाया जा रहा है।
घटनाक्रम के मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। इसके साथ ही पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
वकील को बंद करने की दी थी धमकी —
थाने में बिना यूनिफॉर्म के पुलिसकर्मी के बयान लेने पर वकील ने सवाल उठाए थे। इससे थानाधिकारी (शो) हमीरसिंह तमतमा गए और कहा- वकील है तो क्या हुआ, अभी 151 में बंद कर दूंगा। सारी वकालत निकल जाएगी।
वकील बैठे थाने के बाहर धरने पर —
आरोप है कि थाने में वकील का कोट भी फाड़ दिया गया था। इसके विरोध में बड़ी संख्या में वकील थाने के बाहर देर रात धरने पर बैठ गए थे। मंगलवार को भी धरना जारी रहा।
घटनाक्रम को पढ़कर समझिए कौन गलत और कौन था सही —
वकील : साहब, आप वर्दी में क्यों नहीं हैं? आप थाने में ड्यूटी पर हैं।
सीआई : (तेज आवाज में) तुझे क्या करना है? तू वीडियो क्यों बना रहा है? बंद कर इसे।
वकील : वीडियो बनाना मेरा अधिकार है। मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपकी यूनिफॉर्म कहां है? आप बिना वर्दी के थाने में कैसे बैठे हैं?
सीआई : मैं एसएचओ (या अधिकारी) हूं, मुझे मत सिखा। और ये मोबाइल नीचे कर ले।
वकील : मैं वकील हूं, मुझे कानून पता है। आप बदतमीजी से बात कर रहे हैं।
सीआई : वकील है तो क्या हुआ? ज्यादा नेतागिरी मत कर। अभी 151 में बंद कर दूंगा, सारी वकालत निकल जाएगी।
महिला वकील (पत्नी) पूजा कंवर : (बीच-बचाव करते हुए) सर, आप ये क्या कह रहे हैं? आप एक वकील को 151 में बंद करने की धमकी दे रहे हैं? ये लीगल नहीं है।
पुलिस अधिकारी : लीगल वीगल सब यहीं धरा रह जाएगा। इसको अंदर डालो। ए, इसको 151 में बंद करो। शांतिभंग कर रहा है ये।
वकील : आप मुझे डरा नहीं सकते। मैं अपनी बात रख रहा हूं। आपने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया है।
सीआई : दुर्व्यवहार क्या होता है अब बताऊंगा। बाहर निकालो इनको…
वकील : देख लेंगे साहब। आप वर्दी में नहीं हैं और ऊपर से दादागिरी कर रहे हैं। ये वीडियो सब देखेंगे।
जयपुर शहर की पुलिस ने जाली नोट तस्करी करने वाले एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। उसके पास पुलिस की तलाशी में 5600 रुपए की फेंक करेन्सी पाई गई।
गुरु के कहने पर करता था जाली नोटों की सप्लाई ???
पुलिस की गिरफ्त में आया बदमाश अपने गुरु के कहने पर बाजार में जाली नोट की सप्लाई करने आया था। विद्याधर नगर थाना पुलिस को तलाशी में 5600 रुपए की फेंक करेंसी मिली है। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है।
डीसीपी (नॉर्थ) करन शर्मा ने बताया कि जाली करेंसी की तस्करी में आरोपी विशाल रावत (23) को गिरफ्तार किया है। शनिवार रात करीब 9:30 बजे मुखबिर से सूचना मिली कि विद्याधर नगर के मार्केट में जाली नोट की सप्लाई की फिराक में एक युवक घूम रहा है। तभी मुखबिर ने पुलिस को सूचनादी। पुलिस ने सूचना को डबल कर हुलिए के आधार पर विद्याधर नगर कब्रिस्तान के पास संदिग्ध को धर-दबोचा।
तलाशी में मिले 5600 रुपए के जाली नोट —
पुलिस की तलाशी में बदमाश के पास जाली नोट मिले। जिस पर आरोपी विशाल रावत को गिरफ्तार किया। उसकी तलाशी में मिले 5600 रुपए के जाली नोट को भी जब्त किया गया।
मूलत बिहार का रहने वाला है आरोपी —
विद्याधर नगर के थानाधिकारी नरेन्द्र खींचड़ ने बताया कि पकड़ा गया तस्कर विशाल रावत (23) मूलत बिहार का रहने वाला है। वह वर्तमान में दिल्ली रहता है। उसके पास 100-200 रुपए के 5600 के जाली नोट मिले हैं। पूछताछ में सामने आया है कि जाली नोट देने वाला ज्ञानचंद उर्फ हरिकृष्ण महाजन उसका गुरु है। उसने ही डिलीवर करने के लिए जाली करेंसी दी थी। पुलिस ने नाम सामने आने पर आरोपी ज्ञानचंद उर्फ हरिकृष्ण महाजन की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने सभी आम लोगों से अपील की है कि बाजार में ऐसे जाली नोट चलाने वालों पर सख्त नजर रखे और पता चलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद, शामली, बागपत सहित कई जिलों में आंगनवाड़ी के 16 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upanganwadibharti.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। हालांकि फॉर्म भरने की आखिरी तारीख जिलेवार अलग-अलग है।
हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख, अलवर राजस्थान लोक सेवा आयोग का RAS Result 2023 आने के बाद एक से बढ़कर एक खबर सामने आ रही है। आज एक ऐसी खबर सामने आई है कि जिसे जानकर हर बाप अपनी बेटी को आगे बढ़ाने में कतई संकोच नहीं करेगा। जी हां, यह बात पूरे सौलह-आने सही है।
पापा, मैं RAS बन गई, बेटी बात फोन पर सुनते ही आंखों में आये खुशी के आंसू —
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के गांव नांगल खोडिया की रहने वाली प्रीति यादव ने अपने पिता इंद्राज यादव को नीमराना की एक फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नाईट ड्यूटी करते समय फोन कर बताया –’पापा, मैं RAS बन गई…’ इतनी बात सुनते ही पापा की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से किया ऊंचा —
अपनी मेहनत और हौसले से वो कर दिखाया, जो लाखों युवा सपना देखते हैं। RAS परीक्षा-2023 में उन्होंने 218वीं रैंक हासिल की और पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। इस खबर की प्रेरणा से हर बाप अपनी बेटी को आगे बढ़ाने कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
भीलवाड़ा। राजस्थान सरकार वैसे तो एससी और एसटी के हितों की बातें लंबी-लंबी करते हैं परंतु हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जी हां, यह बात पूरे सौलह आने सही है।
यूडीएच मंत्री के सामने हंगामा : किया लीपापोती का प्रयास ―
गौर तलब है कि भीलवाड़ा में रियायती आवासीय भूखंड योजना की लॉटरी में एसटी कोटे में दूसरे वर्ग के लोगों के नाम निकलने पर यह हंगामा हो गया। हंगामा बढ़ने पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आवेदकों को समझाया और मामले को दबाने के लिए लीपापोती करने का प्रयास किया। यूडीएच मंत्री ने कहा कि 1 महीने के अंदर लॉटरी प्रक्रिया की जांच पूरी होगी। जिन लोगों के दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उनको ही आवंटन पत्र जारी होगा। वहीं जिन लोगों के दस्तावेज सही नहीं पाए जाएंगे, उनके आवेदन निरस्त किए जाएंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि अगर किसी ने गलत दस्तावेज चाहे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र या कोई भी दस्तावेज गलत प्रस्तुत किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री की बात का समर्थन करते हुए जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने आवेदनों की दोबारा जांच करने और डॉक्यूमेंट्स का फिर से वेरिफिकेशन करवाने की बात कही। तब जाकर मामला शांत हुआ।
3081 प्लॉटों के लिए मिले थे 88 हजार से ज्यादा आवेदन ―
दरअसल, भीलवाड़ा नगर निगम टाउन हॉल में गुरुवार को यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने यूआईटी के 3081 प्लॉटों के लिए लॉटरी निकाली। इसके लिए कुल 88 हजार 239 आवेदन मिले थे। इस लॉटरी प्रक्रिया में शामिल होने जयपुर विकास प्राधिकरण की 3 सदस्यीय टीम भी पहुंची थी और लॉटरी की प्रक्रिया चालू की।
एसटी कोटे में अन्य वर्ग के लोगों के नाम खुलने पर हंगामा ―
लॉटरी के दौरान एसटी कोटे में अन्य वर्ग के लोगों के नाम खुलने पर टाउन हॉल में मौजूद आवेदकों ने आपत्ति की। इनका कहना था कि जब एसटी के लिए निर्धारित कोटा है और लॉटरी के फॉर्म की चेकिंग की गई है तो इस कोटे में दूसरे समाज के लोगों के नाम कैसे निकले। इस पर काफी देर तक टाउन हॉल में अधिकारियों की समझाइश के बाद लोग माने, लेकिन कुछ आवेदक लॉटरी निरस्त करने की मांग को लेकर हंगामा करते रहे।
फॉर्म चेक करने के लिए इतना टाइम लिया तो फिर गड़बड़ियां कैसे ―
कैंप में उपस्थित लोगों ने इस बात को लेकर हंगामा किया कि लॉटरी की पूरी प्रक्रिया दूषित है इसलिए इस लॉटरी को निरस्त किया जाए। लॉटरी में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि जब यूआईटी ने फॉर्म चेक करने के लिए इतना टाइम लिया तो फिर गड़बड़ियां कैसे निकली। साथ ही लोगों ने कहा कि प्रकिया के दौरान जो भी गड़बड़ियां सामने आ रही है, उनका इसी समय पर निस्तारण किया जाए और लॉटरी को स्थगित किया जाए।
डॉक्यूमेंट्स का फिर से वेरिफिकेशन करेंगे – कलेक्टर
लॉटरी में विवाद को लेकर जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने कहा कि जो भी आपत्तियां जिस-जिस कैटेगरी में आई है, हम उन कैटेगरी के सभी सब्मिट डॉक्यूमेंट का दोबारा वेरिफिकेशन करवाएंगे। यदि किसी भी टेक्निकल कारण से कोई भी मिस्टेक हुई है तो उसे क्लियर करवाई जाएगी। यूआईटी लॉटरी के बाद तभी प्लॉट अलॉट करेगी, जब पूरी कंडीशन चेक होगी। हंगामा कर रहे लोगों ने प्रकिया के दौरान जो भी गड़बड़ियां सामने आई, उनका उसी समय पर निस्तारण करने और लॉटरी को स्थगित करने की मांग की।
8 योजनाओं में 3081 भूखंडों का होना था आवंटन ―
यूआईटी की 8 योजनाओं में 3081 भूखंडों के लिए 88 हजार 239 आवेदन लॉटरी में आए। सबसे ज्यादा आवेदन इडब्ल्युएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी में 321 प्लॉट के लिए 21,877 लोगों ने किए। एलआईजी (निम्न आय वर्ग) में 261 भूखंडों के लिए 8421 आवेदन और एमआईजी-ए श्रेणी में 1470 भूखंडों के लिए 40,560 आवेदन आए। एमआईजी-बी श्रेणी में 687 भूखंडों के लिए 10,080 आवेदन आए।
दोपहर 2 बजे सम्पन्न हुई लॉटरी प्रक्रिया ―
आपको बता दे, सुबह 10 बजे लॉटरी प्रक्रिया शुरू करनी थी, लेकिन 10:30 बजे प्रक्रिया शुरू हुई। करीब 11.15 से नाम निकलने शुरू हुए। गड़बड़ी सामने आने पर दोपहर 12.15 लोगों ने हंगामा कर दिया। करीब 1 घंटे तक हंगामा चलता रहा। इस दौरान लॉटरी प्रकिया भी चलती रही। दोपहर 2 बजे लॉटरी प्रक्रिया का समापन हो गया।
पारदर्शिता के लिए यूट्यूब पर किया सीधा प्रसारण ―
यूआईटी ने लॉटरी में पारदर्शिता के लिए पूरी प्रक्रिया का यू-ट्यूब पर सीधा प्रसारण किया गया। दूर-दराज के आवेदकों ने ऑनलाइन प्रक्रिया देखी। टाउन हॉल में एक बड़ी एलईडी स्क्रीन, कॉरिडोर और निगम परिसर में 2 एलईडी स्क्रीन लगाई गई। ई-लॉटरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए 10 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। सफल आवेदकों की सूची पोर्टल पर, असफल को 15 दिन में रिफंड सफल आवेदकों की सूची पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। जिसमें आवेदन नंबर, आवेदक का नाम, पिता का नाम, भूखंड संख्या और योजना का नाम शामिल होगा। असफल आवेदकों के अकाउंट में लॉटरी निकलने के 15 दिन में राशि रिफंड कर दी जाएगी।
जयपुर। राजस्थान के किसान का बेटा आरएएस परीक्षा में टॉपर आकर न केवल अपना और अपने मां-बाप का नाम रोशन किया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि टॉपर बनने के लिए कोई अच्छे-खासे घर में जन्म लेना जरूरी नहीं है। पहला अवसर में सफल नहीं हुआ तो तनाव में आ गया। हिम्मत नहीं हारी। आरएएस परीक्षा की तैयारी बिना कोचिंग के शुरू की और दूसरी प्रयास में पूरी प्रदेश में टॉपर आकर सफलता अर्जित की।
पहले अटेंप्ट में सफलता प्राप्त नहीं हुई तो स्ट्रेस में आ गया — टॉपर कुशल चौधरी
आरएएस परीक्षा में टॉपर मैं टॉपर आने वाले 27 वर्षीय कुशल चौधरी का कहना है कि —” 2021 में पहले अटेंप्ट में सफलता प्राप्त नहीं हुई। इसके कारण स्ट्रेस में आ गया था और उम्मीद तक छोड़ दी थी। परिवार के सपोर्ट के बाद फिर शुरुआत की।” हालांकि पहले प्रयास में कुशल चौधरी की रैंक 1038 वीं आई थी, लेकिन उससे संतुष्ट नहीं था। हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर अपना सपना पूरा किया। मेहनत और लगन का फल हर हाल में मिलता है।
अजमेर जिले के डूंगरिया कलां गांव के रहने वाले हैं कुशल चौधरी —
आपको बता दें, कुशल चौधरी अजमेर जिले के डूंगरिया कलां गांव के रहने वाले हैं। कुशल बताते हैं कि उनके पिता प्रभुराम चौधरी (60) एक किसान हैं और उन्होंने बचपन से ही उन्हें पूरा सहयोग दिया। जब वे छोटे थे और स्कूल में ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती थी, तो उनके पिता ही उन्हें पढ़ाया करते थे। उन्होंने कक्षा 10 तक की पढ़ाई गांव के स्कूल से की है। 12वीं तक की पढ़ाई कुचामन के नोबल स्कूल से की। ग्रेजुएशन महाराजा कॉलेज जयपुर से किया। उसके बाद में सरकारी नौकरी लगी और 2018 से वे लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। कुशल चौधरी के 5 बहनें और माता-पिता है।
फिजिक्स टीचर ने किया था मोटिवेट —
RAS परीक्षा में टॉप करने वाले कुशल चौधरी का सफर आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि लैब असिस्टेंट की जॉब लगने के बाद उन्होंने RAS की पढ़ाई शुरू कर दी थी। यहां उनकी पहली पोस्टिंग हुई। वहां के फिजिक्स टीचर खुद RAS की तैयारी कर रहे थे। कुशल का कहना है कि टीचर ने मुझे मोटिवेट किया और अपने नोट्स भी मुझे दिए। इसके बाद मैंने बिना कोचिंग के RAS की तैयारी शुरू कर दी। 2021 में मुझे सफलता नहीं मिली, जिसके कारण मैं स्ट्रेस में आ गया था और उम्मीद तक छोड़ दी थी। परिवार के सपोर्ट के बाद मैंने वापस शुरुआत की और इसके बाद RAS 2023 में सफलता प्राप्त की। कुशल चौधरी का कहना है कि मेहनत और लगन का फल अवश्य मिलता है।
तस्वीर कुशल और उनकी कॉन्स्टेबल बहन इंद्रा की है। साथ उनके जीजा भी खड़े हैं।
लगातार असफलता के बाद भी नहीं मानी हार —
RAS परीक्षा में टॉप करने वाले कुशल चौधरी ने बताया कि उन्होंने लगातार 3 बार आरपीएससी में इंटरव्यू दिए थे – ACF, SI और RAS का इंटरव्यू। 2021 में जब पहली बार सफलता हाथ नहीं लगी तो उनके दिमाग में यही आया कि वे नहीं कर पाएंगे। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दोस्त और परिवार के सपोर्ट से वापस कॉन्फिडेंस हासिल किया। दूसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। कुशल ने बताया कि उन्हें RAS क्लियर करने में करीब 7 साल लग चुके थे और उन पर सोसाइटी और फैमिली का काफी प्रेशर था। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।
बहनों के साथ शादी का दबाव बनाया —
RAS परीक्षा में टॉप करने वाले कुशल ने बताया कि उनके परिवार में पांच बहनें हैं। परिवार चाहता था कि उनके साथ ही मेरे भी शादी हो जाए। ऐसे में मैंने परिवार से एक बार और समय मांगा। कुशल ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया है। पांच बहनों में एक भाई हैं। एक बहन अजमेर पुलिस में कॉन्स्टेबल है। दूसरी टीचर है। दो बड़ी बहनें और एक छोटी सिस्टर भी कॉम्पिटीशन की तैयारी कर रही हैं। कुशल जब इंटरव्यू देकर आए तब उन्होंने RPSC के बाहर ये तस्वीर ली थी।
दोस्त को रोल नंबर देकर रिजल्ट चेक करवाया —
कुशल ने बताया कि रिजल्ट जब आया तब मैं बाहर घूम रहा था। ग्रुप में चल रहा था आज रिजल्ट आएगा। पहली बार जब 2021 में रिजल्ट आया तो मेरे द्वारा चेक किया गया था तब सफलता हाथ नहीं लगी थी। इसी कारण इस बार दोस्त को अपना रोल नंबर देकर रिजल्ट चेक करने के लिए कहा था। कुशल ने बताया कि जब भी मैंने अपना रिजल्ट खुद देखा तब सिलेक्शन नहीं हुआ। इस बार दोस्त पर भरोसा किया था। दोस्त ने फोन कर बताया कि मेरी फर्स्ट रैंक आई है। इसके बाद भी विश्वास नहीं हुआ था। घर जाकर फाइल से एडमिट कार्ड निकाल कर रोल नंबर से चेक किया तब जाकर विश्वास हुआ था।
बहन के ससुराल में रहकर की पढ़ाई —
कुशल ने बताया कि कॉन्स्टेबल बहन के ससुराल में रहकर RAS की पढ़ाई की थी। इस पूरे कामयाबी का श्रेय परिवार और बहन-जीजा के साथ अन्य लोगों को रहेगा। कुशल ने बताया कि जिस भी डिपार्टमेंट में जाने का मौका मिलेगा, वहां अपने विश्वास और लगन के साथ ड्यूटी करेंगे।
जयपुर। राजस्थान सरकार ने कर्मचारियों को मौज कर दी। मौज भी ऐसी कि प्रदेश के करीब 6 लाख नॉन गजटेड कर्मचारियों को दिवाली का बोनस मिलेगा। सीएम और वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद वित्त विभाग ने एडहॉक बोनस के आदेश जारी कर दिए हैं।
करीब 500 करोड़ का भार आएगा सरकार पर –
गौरतलब है कि सोमवार दोपहर बाद ही वित्त मंत्री और डिप्टी सीएम ने बोनस को मंजूरी दी थी। करीब 6 लाख कर्मचारियों को दिवाली का एडहॉक बोनस का भुगतान होगा। इससे सरकार पर करीब 500 करोड़ का भार आएगा।
बोनस का 75% पैसा नकद और 25% कर्मचारी के जीपीएफ खाते में –
बोनस का लाभ पे-मैट्रिक्स के पे लेवल एल-12 या ग्रेड पे-4800 और उससे कम वेतन वाले कर्मचारियों को मिलेगा। बोनस की गणना 7000 रुपए और 30 दिन के महीने के आधार पर की जाएगी। कर्मचारी को अधिकतम 7000 रुपए बोनस मिलेगा। बोनस का 75% पैसा नकद और 25% कर्मचारी के जीपीएफ खाते में जमा होगा। राज्य कर्मचारियों के अलावा पंचायत समिति, जिला परिषद कर्मचारियों को भी बोनस मिलेगा। सरकार ने पिछले दिनों ही कर्मचारियों का डीए 3 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा की थी, अब बोनस की घोषणा की है। दिवाली से पहले हर साल बोनस दिया जाता है।
सरकार ने कर्मचारियों-पेंशनर्स का डीए 3% बढ़ा था 10 दिन पहले –
केंद्र के बाद 10 दिन पहले राजस्थान सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (दा) बढ़ाने का फैसला किया था। कर्मचारियों और पेंशनर्स के डीए में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। सीएम की मंजूरी के बाद वित्त विभाग ने डीए 3 प्रतिशत बढ़ाने के आदेश जारी किए । अब कर्मचारियों और पेंशनर्स का डीए 55 से बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है।
8 लाख कर्मचारियों और 4.40 लाख पेंशनर्स को फायदा –
राजस्थान में लगभग 8 लाख कर्मचारियों और 4.40 लाख पेंशनर्स को बढ़े हुए डीए का फायदा मिलेगा। पंचायत समिति, जिला परिषद के कर्मचारियों को भी इस बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा। बढ़े हुआ डीए का फायदा जुलाई से मिलेगा।
बढ़े हुए डीए से सरकार पर 1230 करोड़ रुपए का सालाना भार आएगा। 1 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़ाने की घोषणा की थी। राजस्थान में भी पिछले कई साल से यह परिपाटी है कि केंद्र के डीए बढ़ाने के सप्ताह भर में राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसका फायदा देने के आदेश जारी कर देती है।
कर्मचारियों को नवंबर के वेतन से बढ़े हुए डीए का नकद भुगतान –
कर्मचारियों को नवंबर में दिए जाने वाले अक्टूबर के वेतन से बढ़े हुए डीए का नकद भुगतान किया जाएगा। 1 जुलाई से 30 सितंबर तक 3 महीने के बढ़े हुए डीए का पैसा कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड खाते में जमा किया जाएगा। पेंशनर्स को 1 जुलाई से डीए का नकद भुगतान किया जाएगा।
भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कुछ वर्षों पूर्व पुलिस थाने में एक ऐसी घटना घटी जिसके कारण पुलिस महकमें को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। भीलवाड़ा के एक थाने में तैनात महिला कॉन्स्टेबल से ASI ने गाली-गलौज की। इसके बाद महिला ने थाना परिसर में बने सरकारी क्वार्टर में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया।
महिला कांस्टेबल ने 2018 में किया था सुसाइड >>>
गौर तलब है कि भीलवाड़ा जिले के करेड़ा थाने में तैनात महिला कॉन्स्टेबल सूरमा जाट से थाने के ASI उपेंद्र सिंह ने गाली-गलौज की। इससे प्रताड़ित होकर महिला कॉन्स्टेबल सूरमा ने 22 अक्टूबर 2018 को अपने सरकारी क्वार्टर में फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी ने जांच के निर्देश दिए। तत्कालीन एसपी ने मामले की जांच करवाई, जिसकी रिपोर्ट 7 साल बाद आई। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने ASI उपेंद्र सिंह का डिमोशन करके कॉन्स्टेबल बना दिया है। मामला जिले के करेड़ा थाने का है।
विभागीय जांच में दोषी पाया गया था थानेदार >>>
काफी लंबे समय से चल रही जांच में ASI उपेंद्र सिंह दोषी पाया गया इसलिए उपेंद्र सिंह को ASI से सिपाही बना दिया गया। मृतक सिपाही सूरमा मूल रूप से सीकर की रहने वाली थी। पुलिस की प्राथमिक जांच में ही पता लगा की ASI उपेंद्र सिंह का बर्ताव सूरमा के प्रति ठीक नहीं था। उसके आचरण से पुलिस विभाग की छवि काफी धूमिल हुई। इस आधार पर उपेंद्र सिंह के खिलाफ नियम 16 सीसीए के तहत औपचारिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
थानेदार के काले कारनामों से बदनामी हुई थी विभाग की >>>
एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि तत्कालीन एएसआई उपेंद्र सिंह ने करेड़ा में पोस्टेड महिला कॉन्स्टेबल को गालियां दी, उसके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके कारण महिला ने सुसाइड कर लिया। प्राथमिक जांच में पुलिस विभाग की छवि खराब होना प्रमाणित हुआ। इस पर उपेंद्र सिंह के खिलाफ 16 सीसीए के तहत कार्रवाई की गई। विभागीय जांच एएसपी द्वारा की गई और आरोप प्रमाणित होने पर सीसीए नियम 14 (4) के तहत आरोपी उपेंद्र सिंह को एएसआई से कॉन्स्टेबल पद पर डिमोशन किया गया है।
जयपुर। भ्रष्टाचार के मकडजाल में फंसा डॉक्टर मनीष अग्रवाल एसीबी को पहले तो लुगाई करवा चौथ का व्रत कर रही लुगाई का हवाला देकर घर जाने का तरीका अपनाया। वह तरीका काम नहीं आया तो एसीबी को ही घूस देने का खुला ऑफर दे डाला।
घर से 4.85 लाख रुपए कैश, जयपुर में 5 प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट और 1 बैंक लॉकर —
गौर तलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की गिरफ्त में आया घूसखोर डॉक्टर मनीष अग्रवाल करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक है। एसीबी की सर्च कार्रवाई में उसके घर से 4.85 लाख रुपए कैश, जयपुर में 5 प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट और 1 बैंक लॉकर मिला है। इसके अलावा घूसखोर डॉक्टर के जयपुर में 1 फ्लैट, 3 मकान और 1 कृषि भूमि है। वहीं एसीबी की जांच में डॉ. मनीष अग्रवाल के दो-चार घोटालों की जानकारी सामने आई है। अब एसीबी की ओर से डॉ. मनीष अग्रवाल के कार्यकाल में जारी किए गए सभी टेंडर्स की जांच की जाएगी। एसीबी ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि यह तो ट्रैलर आया है, फिल्म तो बाकी है।
हेड कॉन्स्टेबल से कहा- जो चाहिए वो ले लो, लेकिन मुझे छोड़ दो –
एसीबी सूत्रों के अनुसार, एसएमएस अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. मनीष अग्रवाल को जब रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया तो वह गिड़गिड़ाने लगा। उसने एसीबी के हेड कॉन्स्टेबल से कहा- जो चाहिए वो ले लो, लेकिन मुझे छोड़ दो। घर पर मेरी लुगाई करवा चौथ का व्रत कर रही है।
जबकि एसीबी ने रिश्वतखोर डॉक्टर मनीष अग्रवाल और उसके सहयोगी जगत सिंह को शुक्रवार दोपहर में कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। डॉक्टर से पूछताछ जारी है।
डॉक्टर की लुगाई बोली मेरा करवा चौथ का व्रत है, पति को छोड़ दो –
एसीबी ने बैंक लॉकर खुलवाकर जांच करने के लिए कहा तो डॉक्टर की पत्नी ने करवा चौथ का व्रत होने की बात कहकर 1 दिन की मोहलत मांगी। लेकिन एसीबी टीम ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। डॉक्टर की पत्नी ने कहा- वे शनिवार को बैंक चलकर लॉकर खुलवाएंगी। अब शनिवार और रविवार को बैंक में छुट्टी होने के कारण लॉकर सोमवार को खोला जाएगा। इससे और भी बड़े खुलासा होने की संभावना है।
अब आने लगी है रिश्वतखोर डॉक्टर के खिलाफ नई शिकायतें –
आपको बता दे, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एसीबी को शुक्रवार को कुछ और शिकायतें मिली हैं, जिनकी एसीबी ने जांच शुरू कर दी है। एसीबी ने डॉक्टर के घर से मिले बैंक लॉकर की चाबी जब्त कर ली है।
घर पर 1 लाख रुपए घूस लेते ही हुआ गिरफ्तार –
एसीबी ने एसएमएस अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड और एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एडिशनल प्रिंसिपल डॉक्टर मनीष अग्रवाल को उनके घर पर 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था। एसीबी की टीम जब कार्रवाई करने पहुंची तो डॉ. मनीष का सहयोगी घूस की रकम उठाकर भागने लगा, लेकिन एसीबी ने घेर लिया।
डॉक्टर को पकड़ने का ऐसा बनाया था जाल –
घूसखोरी डॉक्टर बहुत बड़ा चालाक था इसलिए एसीबी ने अपने एक कॉन्स्टेबल को पहले ही मरीज बनाकर डॉक्टर के घर में संचालित क्लिनिक में बैठा रखा था। जगत सिंह ने एसीबी से खुद को घिरा देखा तो पड़ोस के प्लॉट में घूस के पैसे फेंक दिए। एसीबी की टीम ने रिश्वत की रकम को प्लॉट से बरामद कर लिया। पुलिस ने डॉक्टर के कर्मचारी जगत को भी गिरफ्तार कर लिया।
ब्रेन कॉइल सप्लाई करने वाली कंपनी के बिल पास करने की एवज में मांग रहा था घूस –
काबिले गौर है कि डॉ. मनीष अग्रवाल ब्रेन कॉइल सप्लाई करने वाली कंपनी के 12.50 लाख रुपए के बिल पास करने की एवज में घूस मांग रहा था। कुछ दिन पहले कंपनी प्रतिनिधि के कागज फेंकते हुए बोला था- साइन ऐसे ही थोड़े होते हैं। शाम को 7 बजे आकर घर मिलो। प्रतिनिधि ने दोबारा पूछा तो बोला- मेरी पर्सनैलिटी के हिसाब से वैल्यू लगाओ। इस पर कंपनी ने एसीबी में शिकायत दी। अब डॉक्टर की वैल्यू को दुनिया देख रही है।
जयपुर। पढ़े लिखे बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं जबकि दूसरी तरफ फर्जी कागजात बनवाकर अच्छी खासी नौकरी कर रहे हैं। एटीएस ( एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने आज 28 फर्जी पूर्व सैनिक को गिरफ्तार किया है।
सिक्योरिटी एजेंसी के जरिए एफसीआई में लगे नौकरी —
गौर तलब है कि आरोपी फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर सिक्योरिटी एजेंसी के जरिए एफसीआई में नौकरी लगे थे। पुलिस ने फर्जी डॉक्यूमेंट जब्त किये गये। आरोपियों से पूछताछ जारी है।
सारा खेल दलालों का –
मजे की बात यह है आपके नौकरी के बाद 3 से 5 हजार रुपए हर महीने दलाल को कमीशन देते थे। एटीएस ने फर्जीवाड़े का पता लगने पर मॉक ड्रिल का जाल बिछाकर सभी के डॉक्यूमेंट मांगे थे। इसके बाद फर्जी जवानों को लिस्टेड कर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के राजस्थान में 31 ठिकानों पर दबिश देकर इन्हें पकड़ा। एटीएस आरोपियों से पूछताछ के बाद जल्द मामले का खुलासा करेगी। मॉकड्रिल के बहाने सिक्योरिटी गार्ड्स के डॉक्यूमेंट लिए।
90 प्रतिशत सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती रिटायर्ड सैनिकों से –
मीडिया से बातचीत में आईजी (अट्स) विकास कुमार ने बताय कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के प्रावधान में 90 प्रतिशत सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती रिटायर्ड सैनिकों की रहती है। एटीएस को इनपुट मिला था कि इसका फायदा उठाकर कई लोगों ने फर्जी तरीके से खुद को रिटायर्ड इंडियन आर्मी जवान बताकर नौकरी पाई है। इनपुट मिलने के बाद एफसीआई के कोटा, भीलवाड़ा और उदयपुर व बांसवाड़ा के 31 ठिकानों पर दबिश देकर मॉक ड्रिल की बात कहकर सभी सिक्योरिटी गार्ड्स को इकट्ठा किया गया। सभी से इंडियन आर्मी से जुड़े डॉक्यूमेंट लिए गए। डॉक्यूमेंट की जांच करने के बाद 28 फर्जी जवानों की लिस्ट बनाई गई। इसके बाद सभी को गिरफ्तार किया।
आरोपी करीब 3-4 साल से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। आर्मी के फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए 30 से 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति खर्च किया गया था। हर महीने दलाल को कमीशन देते थे।
विकास कुमार आईजी (एटीएस)
हर महीने दलाल को देते थे कमीशन –
आपको बता दें पकड़े गए फर्जी जवान करीब 3-4 साल से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। आर्मी के फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए 30 से 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति खर्च किया गया था। एफसीएल में 21 हजार से ज्यादा सैलरी में नौकरी लगे थे। जॉब लगने के बाद प्रति महीने सैलरी में से 3 से 5 हजार रुपए कमिशन के दलाल को दिया करते थे। एटीएस को इस तरीके से सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी पाने वालों का आंकड़ा ज्यादा होने का अनुमान है। इस फर्जीवाड़े की गैंग का जल्द खुलासा होगा। एटीएस की ओर से कुल 3 प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है।
अंता। झालावाड़ जिले की अंता विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव के लिए नरेश मीणा ने ताल ठोक दी है। कांग्रेस से टिकट लेने के लिए नरेश मीणा ने पुरज़ोर मांग की है।
अंता विधानसभा के उपचुनाव में घमासान जारी >>>
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए युवा नेता नरेश मीणा ने अंता विधानसभा के होने उपचुनाव में उम्मीदवार के रूप में 14 अक्टूबर को फॉर्म भरने का ऐलान किया है। नरेश मीणा की ऐलान करने के बाद कांग्रेस पार्टी सकते में आ गई। कांग्रेस पार्टी इस बात को भली भांति जानती है कि नरेश मीणा कांग्रेस के वोट बैंक में बेजा सेंध लगा सकते हैं।
पूर्व मंत्री प्रभु लाल सैनी मैदान में >>>
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राजस्थान सरकार के मंत्री प्रभु लाल सैनी भी अंता विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने इस बात से आगाह किया है कि नरेंद्र मोदी के लोकल फोर वोकल का सिद्धांत अपनाती है तो मैं चुनाव निश्चित रूप से लडूंगा। हालांकि उन्होंने इस बात से भी आश्वस्त किया भारतीय जनता पार्टी मांग करने वालों को टिकट नहीं देती है। मैं पार्टी के सिद्धांतों पार्टी के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा।
नरेश मीणा ने राहुल गांधी से की अपील >>>
युवा नेता नरेश मीणा ने अंता विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में टिकट देने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से राहुल गांधी से टिकट देने की अपील की है। उन्होंने बताया कि यदि राहुल गांधी मुझे अवसर देती है तो मैं अंता विधानसभा सीट निकाल कर बता दूंगा।
कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचा सकता है नरेश मीणा >>>
काबिले गौर है कि नरेश मीणा का दबदबा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। जब-जब भी नरेश मीणा ने चुनाव लड़ा है तब-तब कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचा है, इसमें कोई संदेह नहीं है। इसलिए कांग्रेस पार्टी को जन भावनाओं की कदर करते हुए युवा नेता नरेश मीणा को टिकट देना चाहिए।
जयपुर। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), जयपुर ने राजस्थान के पत्रकारों के लिए एक विशेष प्रेस यात्रा का आयोजन किया। इस सात दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों को सरकार की विभिन्न विकास परियोजनाओं, औद्योगिक प्रगति और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था। पत्र सूचना कार्यालय के 2 अधिकारी – कर्मचारी व 13 पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 24 सितंबर से 30 सितंबर, 2025 तक गुजरात के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा किया।
अमूल डेयरी का निरीक्षण करते हुए धर्मेश भारती
पत्रकारों ने वडनगर स्थित उस विद्यालय का दौरा किया जिसमें प्रधानमंत्री ने की थी प्रारम्भिक शिक्षा
यात्रा के पहले दिन, 24 सितंबर, 2025 को, पत्रकारों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गृहनगर वडनगर का दौरा किया और बारहवीं शताब्दी में निर्मित कीर्ति तोरण की स्थापत्य कला का अवलोकन किया, जो एएसआई के अंतर्गत एक स्मारक है। इसके पश्चात पत्रकारों ने वडनगर स्थित उस विद्यालय का दौरा किया जिसमें प्रधानमंत्री ने प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की थी। शाम को, उन्होंने अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और गुजरात की सांस्कृतिक पहचान, गरबा नृत्य का आनंद लिया।
ग्रुप फोटो खिंचवाते हुए प्रेस प्रतिनिधिमंडल के सदस्य
अमूल कंपनी और ग्रामीण प्रबंधन संस्थान का भी किया दौरा >>>
दूसरे दिन, प्रतिनिधिमंडल ने केवड़िया स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का दौरा किया, जो राष्ट्र निर्माता सरदार पटेल को समर्पित दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है, जो सिर्फ़ एक प्रतिमा नहीं, बल्कि एक एकीकृत पर्यटन स्थल और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। रात में, उन्होंने वडोदरा स्थित लक्ष्मी विलास पैलेस हेरिटेज गरबा का आनंद लिया। अगले दिन, उन्होंने आणंद स्थित अमूल कंपनी और ग्रामीण प्रबंधन संस्थान (आईआरएमए) का दौरा किया और ग्रामीण सशक्तिकरण की वैश्विक सफलता की कहानी और श्वेत क्रांति के माध्यम से प्राप्त सहकारी ढाँचे का अध्ययन किया।
अहमदाबाद स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से हुए रूबरू >>>
आणंद से लौटने के बाद, अहमदाबाद स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के दौरे के दौरान, पत्रकारों ने इसरो के संचालन और उपलब्धियों के बारे में गहन जानकारी प्राप्त की। इस दौरान, पत्रकारों को चंद्रयान और मंगलयान जैसे अभियानों की सफलता के बारे में जानकर गर्व महसूस हुआ और उन्होंने इसरो निदेशक श्री नीलेश देसाई से बातचीत की। दोपहर में, उन्होंने साबरमती रिवरफ्रंट का दौरा किया, जहाँ उन्होंने नगर आयुक्त और साबरमती रिवरफ्रंट विकास परियोजना के प्रबंध निदेशक, श्री बंछानिधि पाणि (आईएएस) के साथ परियोजना पर चर्चा की और अटल ब्रिज का दौरा किया। साबरमती रिवरफ्रंट और अटल ब्रिज के दौरे के दौरान, उन्होंने शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं का एक उत्कृष्ट मॉडल देखा।
प्रेस प्रतिनिधिमंडल सात दिवस की यात्रा के बाद जयपुर पहुंचे
लोथल में हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों का लिया जायजा >>>
इसके बाद, रविवार को प्रतिनिधिमंडल ने धोलेरा में निर्माणाधीन स्मार्ट सिटी परियोजना का अध्ययन किया। इसके बाद, उन्होंने लोथल में हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों को देखा और वहाँ विकसित की जा रही पर्यटन परियोजना का गहन अध्ययन किया। अगले दिन, पत्रकारों ने गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और भारत के पहले स्मार्ट बिज़नेस पार्क, गिफ्ट सिटी का दौरा किया, ताकि वहाँ के अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे और संचालन प्रक्रियाओं को समझा जा सके।
विभिन्न पर्यटक स्थलों का दौरा करते हुए प्रेस प्रतिनिधि मंडल
श्री धर्मेश भारती एवं श्री छविकांत शर्मा रहे शामिल >>>
इस प्रतिनिधिमंडल में फर्स्ट इंडिया से सुश्री रचना सिंह, जन टीवी से श्री योगेंद्र शर्मा, राजस्थान चौक से श्री अंकित तिवारी, पंजाब केसरी से श्री विशाल सूर्यकांत, राजस्थान पत्रिका से श्री अश्विनी भदौरिया, दैनिक नवज्योति से श्री सौरभ पंथारी, हिंदुस्तान समाचार से श्री ईश्वर बैरागी, जी टीवी से सुश्री नेहा जोशी, समाचार जगत से श्री राजेश शर्मा, टीवी 18 से श्री रोशन शर्मा, प्रातःकाल से श्री कुश गोयल, भास्कर डिजिटल से श्री शिवम ठाकुर और हुकुमनामा से श्री वैभव लोढ़ा शामिल थे। पत्र सूचना कार्यालय से श्री धर्मेश भारती एवं श्री छविकांत शर्मा शामिल थे।
सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति स्थल पर पहुंचे प्रेस प्रतिनिधिमंडल
प्रतिनिधिमंडल गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति से की मुलाकात >>>
यात्रा के अंतिम दिन, 30 सितंबर, 2025 को, सुबह कोचरब आश्रम का दौरा करने के बाद, प्रतिनिधिमंडल ने गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) का दौरा किया और कुलपति से मुलाकात की। शाम को, उन्होंने राजभवन में गुजरात के राज्यपाल, श्री आचार्य देवव्रत से शिष्टाचार भेंट की।
सात दिवसीय प्रेस यात्रा में गुजरात विकास मॉडल का गहन अध्ययन >>>
इस सात दिवसीय प्रेस यात्रा के दौरान, राजस्थान के पत्रकारों ने गुजरात के विकास मॉडल का गहन अध्ययन किया और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में व्यापक जानकारी प्राप्त की, जिसके बाद वे राजस्थान लौट आए। यह यात्रा गुजरात और राजस्थान के बीच सूचना और ज्ञान के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण सेतु साबित हुई।
जयपुर। गुजरात दौरे पर आए राजस्थान के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने 30 सितंबर को गांधीनगर राजभवन में राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत से शिष्टाचार भेंट की। राज्यपाल ने सभी पत्रकारों से रूबरू होते से परिचित हुए।
गुजरात के राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए पीआईबी उपनिदेशक धर्मेश भारती
राज्यपाल ने प्राकृतिक कृषि मिशन को जन-जन तक पहुँचाने का किया आह्वान >>>
इस यात्रा के दौरान, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), राजस्थान के उप निदेशक श्री धर्मेश भारती ने राज्यपाल को प्रतिनिधिमंडल द्वारा गुजरात के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और विकास परियोजनाओं के दौरे के बारे में जानकारी दी। राज्यपाल ने उप निदेशक श्री धर्मेश भारती द्वारा प्रेस प्रतिनिधिमंडल का कुशल नेतृत्व एवं अथक प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाएं साबित हो रही हैं मील का पत्थर >>>
गौर तलब है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के पत्रकारों को केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं, भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों और राज्य में लागू की जा रही योजनाओं से रूबरू कराना था। राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने प्रतिनिधिमंडल को गुजरात में विद्या समीक्षा केंद्र, सेमीकंडक्टर परियोजना और बुलेट ट्रेन जैसे प्रगतिशील कार्यों की जानकारी दी।
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान >>>
इसके साथ ही, राज्यपाल ने राजस्थान के प्रेस प्रतिनिधिमंडल से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक कृषि मृदा की उर्वरता के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मिलेगा जैविक खेती को बढ़ावा >>>
पत्रकारों ने अपने क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। यह यात्रा दोनों राज्यों के बीच सूचनाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान की दिशा में एक सकारात्मक कदम था।
पत्र सूचना कार्यालय से श्री धर्मेश भारती एवं श्री छविकांत शर्मा रहे शामिल
प्रतिनिधि मंडल में शामिल पत्रकार >>>
इस प्रतिनिधिमंडल में फर्स्ट इंडिया से सुश्री रचना सिंह, जन टीवी से श्री योगेंद्र शर्मा, राजस्थान चौक से श्री अंकित तिवारी, पंजाब केसरी से श्री विशाल सूर्यकांत, राजस्थान पत्रिका से श्री अश्विनी भदौरिया, दैनिक नवज्योति से श्री सौरभ पंथारी, हिंदुस्तान समाचार से श्री ईश्वर बैरागी, जी टीवी से सुश्री नेहा जोशी, समाचार जगत से श्री राजेश शर्मा, टीवी 18 से श्री रोशन शर्मा, प्रातःकाल से श्री कुश गोयल, भास्कर डिजिटल से श्री शिवम ठाकुर और हुकुमनामा से श्री वैभव लोढ़ा शामिल थे। पत्र सूचना कार्यालय से श्री धर्मेश भारती एवं श्री छविकांत शर्मा शामिल थे।
बीकानेर। आधी रात को नकली पर नकेल लगाने पहुंच गए राजस्थान सरकार की कैबिनेट मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा। जी हां, यह बात पूरी सौलह आने सही है।
दोनों फैक्ट्रियों को सील करने के निर्देश >>>
गौर तलब है कि कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने रविवार देर रात बीकानेर के कोलायत में स्थित उर्वरक (खाद) फैक्ट्रियों में छापेमारी की। इस दौरान 2 फैक्ट्रियों से 64 हजार नकली खाद के बैग कब्जे में लिए गए। दोनों फैक्ट्रियों को सील करने के निर्देश भी मंत्री ने दिए। कार्रवाई के बाद मंत्री ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि यह नकली खाद नेपाल तक सप्लाई किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान मंत्री के साथ विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। रविवार को रात करीब 10 बजे मंत्री मीणा पहले नाल बाइपास पहुंचे। यहां उन्होंने कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक मदनलाल और अन्य अधिकारियों को बुलाया। उनके साथ गजनेर थाना क्षेत्र के खारी गंगापुरा गांव में पहुंचे। यहां एक फैक्ट्री से 24 हजार बैग खाद के कब्जे में लिए। इसके बाद कोलायत के सांखला फांटे से 3 किलोमीटर दूर स्थित एक फैक्ट्री में भी पहुंचे। यहां भी मिलावट की शिकायत मिली थी। यहां से 40 हजार बैग खाद के कब्जे में लिए गए। 64 हजार बैग में उर्वरक के साथ ही मिट्टी मिलाई हुई थी।
खाद में मिला रहे थे मिट्टी >>>
मीडिया से रू-ब-रू होते हुए मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि मिट्टी की मिलावट करने के बाद ये उर्वरक राजस्थान के कई जिलों में पहुंचाई जा रही है। इससे धरती बंजर हो रही है। नेपाल तक इसकी सप्लाई की जा रही है। मीणा ने दोनों फैक्ट्रियों को सील करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने यहां का सारा रिकॉर्ड भी लिया है, ताकि यहां रखी उर्वरक की जांच की जा सके।
बीकानेर में पहले भी कर चुके हैं छापेमारी >>>
आपको बता दे, जुलाई में भी कृषि मंत्री मीणा अचानक बीकानेर आए थे। मीणा के निर्देश पर यहां बीछवाल में किराए के गोदामों पर छापा मारा गया था। 20 जून को संयुक्त निदेशक (गुण नियंत्रण) कृषि आयुक्तालय के निर्देश पर पहले निरीक्षकों ने कार्रवाई की। बाद में खुद मंत्री मौके पर पहुंच गए और बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र में छापामारी की थी।
श्रीगंगानगर और अलवर में भी कार्रवाई >>>
मजे की बात यह है कि बीकानेर के अलावा मंत्री किरोड़ी ने 1 दिन पहले श्रीगंगानगर में छापेमारी की कार्रवाई की थी। इससे पहले अलवर में भी कुछ फैक्ट्रियों की छानबीन की थी। 25 सितंबर को अलवर में अचानक उमरैण में योगेश खाद बीज भंडार पर पहुंच गए। वहां के किसानों की शिकायत थी कि दुकानदार 2 कट्टे खाद के साथ 950 रुपए का अतिरिक्त सामान देने को बाध्य करता है। डॉ. किरोड़ी ने सीधे दुकान पर पहुंचकर दुकानदार से सवाल-जवाब किए थे।
तत्काल रोक लगाई बिक्री पर >>>
बीज कंपनियों के रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी पाई 28 सितंबर को श्रीगंगानगर जिले के रावला और घड़साना मंडियों में नकली बीज और खाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान बीज कंपनियों के रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी पाई गई थी। उनकी बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई थी। मंत्री किरोड़ी दोपहर घड़साना कृषि उपज मंडी पहुंचे थे। यहां रीको स्थित दीपक सीड्स पर भी छापा मारा गया। निरीक्षण के दौरान कंपनी के पास किसी भी तरह का रिकॉर्ड नहीं मिला था।
सवाई माधोपुर। राजस्थान प्रदेश के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछडी जाति अधिकारी कर्मचारी संयुक्त महासंघ की बैठक सवाई माधोपुर के उत्सव गॉर्डन में आयोजित की गई। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में विचार विमर्श करते पदाधिकारी गण
विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की गई राज्य सरकार से >>>
महासंघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जिलाध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा के नेतृत्व मे संगठन के जिला व ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी व सदस्यों ने सवाई माधोपुर के उत्सव गॉर्डन में आयोजित राजस्थान शिक्षक संघ अम्बेडकर के जिला शैक्षिक सम्मेलन आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से राज्य सरकार द्वारा आरक्षित वर्ग के साथ भेदभाव को लेकर चर्चा की गई। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि राजस्थान सरकार समय रहते हुए शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर समुचित समाधान करें। इस बात को लेकर महासंघ ने सरकार के नाम से समाधान करने कीकी मांग की गई।
महासंघ ने वर्ष 2015 से बना नये नियम का किया विरोध >>>
गौरतलब है कि संस्कृत शिक्षा विभाग में पदोन्नति में स्नाकोत्तर मे 48 % से अधिक प्राप्तांक होने पर ही व्याख्याता अथवा प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति दिए जाने के नियम बनाया गया था। महासंघ ने सरकार का नया नियम संविधान विरोधी होने से पुरजोर विरोध किया गया। प्रेस विज्ञप्ति बताया गया कि ऐसा नियम सामान्य शिक्षा विभाग या अन्य विभाग में नहीं होने व वर्ष 2015 से ही यह नया नियम हठधर्मिता से बनाए जाने के कारण पूरे शिक्षक समाज में असंतोष व्याप्त है। अतः राज्य सरकार द्वारा इस नियम को शीघ्र प्रभाव से हटवाकर 48% के नियम के कारण पदोन्नति से वंचित शिक्षको की 2015 से रिव्यू पदोन्नति करवाने की पुरजोर मांग की गई।
महासंघ की बैठक में पहुंचे सभी लोगों का किया भव्य स्वागत >>>
प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछडी जाति अधिकारी कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि महासंघ के जिला महासचिव भामाशाह बृजेश मीणा द्वारा भोजन की व्यवस्था एवं सीमा महेन्द्र मीणा सरपंच सेलू द्वारा जिला शैक्षिक सम्मेलन मे बैग वितरण किया गया।
गणमान्य लोग रहे उपस्थित >>>
जिला शैक्षिक सम्मेलन में महासंघ के जिला कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार सेवलिया , चौथ का बरवाड़ा ब्लॉक प्रभारी हरिमोहन वर्मा, जिला प्रवक्ता संदीप इंदौरिया, जिला महासचिव बृजेश मीणा, शिक्षक संघ अंबेडकर के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय सिंह सहित हजारों शिक्षकों के साथ साथ एवं जिला व ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों ने बढ चढकर भाग लिया व शिक्षकों को संबोधित करके मार्ग-दर्शन किया।
हनुमानगढ़। जन-जन के हृदय सम्राट राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोडी लाल मीणा की भगवान शिव की तरह तीसरी आंख खुलने से नकली बीज तैयार करने वाली फैक्ट्री में हड़कंप मचा हुआ है।
नकली बीज के 1 लाख 70 हजार बैग सीज >>>
गौर तलब है कि कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने शनिवार को हनुमानगढ़ जिले के संगरिया क्षेत्र में स्थित स्टार एग्री फैक्ट्री पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई। फैक्ट्री में बीज की मैन्युफैक्चरिंग, ग्रेडिंग और प्रोडक्शन का काम तमिलनाडु के नाम पर दिखाया जा रहा था, जबकि सारा काम संगरिया में हो रहा था। छापेमारी के दौरान करीब 40 हजार गेहूं के बीज के थैले और कुल 1 लाख 70 हजार बैग सीज किए गए। मंत्री के निर्देश पर बीज की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई और गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल लिए गए।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए होती रहेगी ऐसी कार्रवाई >>>
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाकी जाएगी। आपको बता दें, कुछ दिन पहले ही कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने हनुमानगढ़ में प्रमाणिक बीज तैयार करने को लेकर आवंटित खेतों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद मंत्री ने मीडिया को बताया था कि कुछ महीने पहले श्रीगंगानगर में मैंने नकली बीज निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद बीज निर्माता फर्मों ने जांच पर सवालिया निशान लगाया था। उन्हीं के जवाब तलाशने के लिए मैं यहां आया हूं। मंत्री ने मीडिया के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि हकीकत यह है कि कंपनियां खेतों की बजाय कागजों में प्रमाणिक बीज तैयार कर रही है।
और तेज होगा “नकली पर नकेल” का अभियान >>>
हनुमानगढ़ सर्किट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कृषि मंत्री डॉ अरुण लाल मीणा ने बताया कि कृषक भाइयों की समस्याओं एवं उनकी युक्तिसंगत अपेक्षाओं से प्रेरित होकर प्रदेश में प्रवर्तित “नकली पर नकेल” अभियान को और तेज कर कृषक समुदाय राहत पहुंचाई जाएगी। अंत में कृषि मंत्री ने क्षेत्रीय कृषक समाज द्वारा प्रदत्त असीम स्नेह, अनुपम आदर तथा आत्मीय आतिथ्य के लिए हृदयतल से कृतज्ञता एवं आभार प्रकट किया।
जयपुर। गिरफ़्तारी का नाम सुनते ही बड़े-बड़े अपराधियों के चेहरे की हवा-हवाइयां उड़ जाती हैं, लेकिन कानोता थाने का एएसआई 30 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार होने पर थानेदार जी का चेहरा सामान्य की तरह नजर आ रहा था।
घूसखोर थानेदार को धमकाने का बड़ा शौक था >>>
गौर तलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बुधवार को राजस्थान की राजधानी के नाक के नीचे बड़ी कार्रवाई करते हुए कानोता थाने में तैनात थानेदार बने सिंह को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी थानेदार पीड़ित द्वारा दर्ज करवाए गए परिवाद पर कार्रवाई करने और विपक्षी पक्ष की क्रॉस रिपोर्ट को दबाने की एवज में लगातार रिश्वत मांग रहा था। लेकिन परिवादी के दिल और दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। शिकायतकर्ता ने ब्यूरो ने एसीबी के एडिशनल एसपी भूपेंद्र चौधरी को शिकायत दर्ज कराई और थानेदार को ट्रैप करने का कार्यक्रम शुरू किया गया। शिकायतकर्ता ने शिकायत में ब्यूरो को अवगत कराया कि एएसआई बने सिंह उस पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत देने का दबाव बना रहा है। आरोपी ने कुल 50 हजार रुपए की मांग रखी थी और अंततः 30 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इसी आधार पर एसीबी ने बुधवार को जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गुरुवार आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया।
20 सितंबर को हो गया था सत्यापन >>>
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, शिकायत की पुष्टि करने के लिए 20 सितंबर को कराए गए सत्यापन के दौरान भी आरोपी एएसआई ने परिवादी से 10 हजार वसूल किए थे। यह स्कम तय सौदे से अलग थी। सत्यापन रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ही ब्यूरो ने आगे की कार्रवाई कर ट्रैप की योजना बनाई। एसीबी टीम ने योजना के तहत नोटों पर पहचान की स्याही लगाकर परिवादी को थाने भेजा। जैसे ही एएसआई बने सिंह ने पैसे लिए, टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों धर दबोचा। आरोपी के हाथों पर रंग चढ़ने से रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
सालभर पहले ही ट्रैफिक पुलिस से कानोता लगा था >>>
आरोपी एएसआई करीब एक साल पहले ही ट्रैफिक पुलिस से ट्रांसफर होकर कानोता थाने में आया था। विभाग बदलने के बाद से ही वह थाने में पदस्थापित था। गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी मूल रूप से भरतपुर का रहने वाला है और वर्तमान में जयपुर के सुमेल रोड स्थित ओम शिव विला में रह रहा था।
आरोपी के आवास और अन्य ठिकानों पर हो रही है तलाशी >>>
आपको बता दे, एएसआई के गिरफ्तार होने के बाद ब्यूरो टीम ने आरोपी के आवास स्थान और संदिग्ध ठिकानों पर छापामारी का अभियान शुरू कर दिया है। कुछ दिनों में आरोपी के और भी मामला उजागर होने से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल से एएसआई पद पर पदोन्नत हुआ था। इसलिए थानेदार भ्रष्टाचार करने का अच्छा खासा तजुर्बा होने की आशंका है।
जयपुर। राजस्थान सरकार के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में गोधाम विकसित करने का निर्णय लिया है जो एक ऐतिहासिक कदम है और हम सभी गोमाता सेवकों के लिए बड़ी खुशी का समाचार है।
भारतीय संस्कृति में गाय का अद्भुत महत्व >>>
श्री कुमावत ने ड़ीग जिले में स्थित श्रीजड़खोर गोधाम में आयोजित नवरात्र गो आराधन महोत्सव में कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का अद्भुत महत्व है, हमारे दिलों में गोमाता का दर्जा राष्ट्र माता का है। गाय के पंचगव्यों की पूरे विश्व में महता है। ऐसे में यदि इसे सम्पूर्ण विश्व की माता कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। डीग स्थित श्रीजड़खोर गोधाम में शारदीय नवरात्र के उपलक्ष में आयोजित श्रीकृष्ण बलराम गो-आराधन महोत्सव में गोपालन मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा की सनातन संस्कृति मानव कल्याण की बात करती है। पत्थर, नदी, वृक्ष आदि का पूजन करती है और गाय के पूजन का विशेष महत्व है।
सरकार बढ़ायेगी गोशालाओं का अनुदान >>>
सनातन के विरुद्ध दुष्प्रचार करने वालों पर आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग सनातन को बदनाम करते हैं, बीमारी की संज्ञा देते हैं और मिटाने की साजिश करते हैं। उन्होंने पूर्व की कई सरकारों द्वारा गो कल्याण के प्रति उदासीन होने का उलाहना देते हुए वर्तमान सरकार द्वारा गो कल्याण के प्रयासों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा द्वारा गाय के प्रति आस्था का उल्लेख करते हुए श्री कुमावत ने कहा की प्रदेश सरकार ने गोशालाओं का अनुदान बढ़ाया और हर पंचायत स्तर पर गोशाला विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं।
गणमान्य लोग रहे उपस्थित >>>
इस अवसर पर गृह राज्यमंत्री श्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा की सनातन संस्कृति के क्षय से घर परिवार में बिखराव बढ़ता है। उन्होंने गाय सनातन के संरक्षण के लिए श्रीजड़खोर गोधाम और स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज की सराहना की।
नित्य होंगे श्रीमद्भागवत का पाठ और सहस्त्र चंडी यज्ञ >>>
गौरतलब है कि श्रीजड़खोर गोधाम में इस नवरात्र गो आराधन महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें नित्य श्रीमद्भागवत का पाठ और सहस्त्र चंडी यज्ञ के साथ अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
कोटखावदा। जयपुर जिले के तहसील कोटखावदा में एक व्यक्ति की हत्या को लेकर पुलिस के लाचार सिस्टम के कारण लोगों ने भारी आक्रोश पैदा हो गया। आक्रोशित लोगों ने पुलिस थाना कोटखावदा के सामने मृतक का शव रखकर स्टेट हाईवे पर धरना प्रदर्शन किया।
पुलिस प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप >>>
गौरतलब है कि पुलिस थाना कोटखावदा के सामने नारायण चौधरी की लाश को रखकर उपस्थित लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस समय रहते शिकायत करने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं करने से एक आदमी को जान से हाथ धोना पड़ा। मृतक की पहचान चाकसू के पास विनोदीलालपुरा निवासी होना बताया जा रहा है। रविवार को सुबह जैसे ही लोगों को पता चला तो एक संदिग्ध मौत ने हड़कंप मच गया। मृतक नारायण चौधरी की परिजन शव लेकर सीधे कोटखावदा थाने पहुंचे और पुलिस प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाने लगे। कोटखावदा थाना क्षेत्र इलाके में एक संदिग्ध मौत ने हड़कंप मचा दिया है। मृतक की पहचान नारायण चौधरी (विनोदीलालपुरा निवासी) के रूप में हुई है। परिजन शव लेकर सीधे कोटखावदा थाने पहुंचे और पुलिस प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
मृतक ने 18 सितंबर को जमीन विवाद को लेकर पुलिस में 3 लोगों के खिलाफ कराई थी रिपोर्ट >>>
जानकारी के अनुसार, मृतक ने 18 सितंबर को जमीन विवाद को लेकर पुलिस में 3 नामजद लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने मामले में सुनवाई नहीं की। मृतक के परिजन इसे हत्या से जोड़कर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर इसे सुसाइड का मामला बताया है। वहीं परिजनों का कहना है कि नारायण की हत्या की गई है और मामले में पुलिस जांच में लापरवाही कर रही है। घटना के बाद मौके पर एसीपी भी पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद ही कोई ठोस जानकारी साझा की जाएगी।
सोशल मीडिया में घटना हो रही है वायरल >>>
सोशल मीडिया यूजर रोशन मीणा कोटखावदा में पोस्ट डालकर अवगत कराया कि इस घटना ने इलाके में भय और चिंता बढ़ा दी है, और ग्रामीण पुलिस प्रशासन से संपूर्ण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कोटखावदा रामनगर में हुए #नारायण चौधरी की हत्या के विरोध व न्याय दिलाने को लेकर #कोटखावदा थाने के सामने में अनिश्चित कालीन धरना व रोड जाम कर के विरोध प्रदर्शन किया है। आप सभी साथियों से निवेदन है की ज्यादा से ज्यादा संख्या में कोटखावदा थाने पर पहुंचे।
सरकार को किसी बड़े हादसे का इंतजार >>>
यदि समय रहते हुए राज्य सरकार ने घटना के बारे में संज्ञान नहीं लिया तो यह कहना गलत ना होगा कि मामला उग्र हो सकता है। जिससे बहुत बड़े स्तर पर धन हानि और जन हानि होने की प्रबल संभावना है। लगता है राज्य सरकार को किसी बहुत बड़े हादसे का इंतजार है।
जयपुर। दुकानदारों पर जीएसटी की नई दरों को लेकर तलवार लटकने वाली है। जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार 22 सितम्बर 2025 से जीएसटी 2.0 की नई कर दरें लागू हो जाएगी।
जीएसटी की नई दरों का लाभ आम जनता तक पहुंचाने की पूरी तैयारी >>>
गौर तलब है कि राजस्थान प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग ने दरों में कमी का लाभ आम जनता तक सही रूप में पहुंचे, इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है तथा स्पष्ट किया है कि इस बार कर में कमी का लाभ सीधे आम जनता तक पहुँचना चाहिए।
जीएसटी 2.0 के सुधारों के विस्तृत दिशा निर्देश जारी >>>
राज्य के मुख्य कर आयुक्त श्री कुमार पाल गौतम द्वारा संबंधित विभागीय अधिकारियो को जीएसटी 2.0 के सुधारों को आम जन तक पहुँच सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये गये है। इन दिशा निर्देशों के तहत विभागीय अधिकारी विभिन्न ट्रेड के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर नई दरों एव ITC के नियमों की विस्तृत जानकारी दी देंगे।
एमआरपी रिपोर्ट हर माह विभाग को भेजने का फॉर्मेट जारी >>>
मुख्य कर आयुक्त द्वारा विभागीय अधिकारियों को बाज़ार में जाकर यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि वस्तुओं और सेवाओं पर कर कटौती का सीधा असर कीमतों पर दिखे, साथ ही अधिकारी यह भी सुनिश्चित करेगे कि वस्तुओं के दर संशोधन से पहले और बाद की एमआरपी रिपोर्ट हर माह विभाग को भेजनी होगी। इसके लिए विभाग द्वारा एक फॉर्मेट जारी किया गया है जिसकी हर हफ्ते अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी द्वारा समीक्षा की जाएगी ।
सर्वोच्च प्राथमिकता है राज्य सरकार की >>>
मुख्य आयुक्त, राज्य कर ने कहा कि जीएसटी सुधारों का लाभ सीधे उपभोक्ता तक पहुंचना ही राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी अधिकारी और व्यापारी इस दिशा में सक्रिय सहयोग दें। इस प्रकार यह कहना गलत ना होगा कि यदि जीएसटी नयी दरों का लाभ आम जनता को दुकानदार नहीं पहुंचाया तो दुकानदारों पर भारी जुर्माने के साथ जेल जाना निश्चित है।
जयपुर। मालवेयर और साइबर धोखाधड़ी लगभग नेट बैंकिंग या नेट से संबंधित काम करने वाले सभी लोग शिकार हो सकते हैं। जी हां, यह बात पूरे सौलह-आने सही है। लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पुलिस महकमा रात-दिन नए-नए प्रयोगों पर अमल कर रहा है।
राजस्थान पुलिस ने दी ई-स्कैन बोट रिमूवल ऐप का उपयोग करने की सलाह >>>
गौर तलब है कि राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने मालवेयर हैकिंग और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के मद्देनजर आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी कर ई-स्कैन बोट रिमूवल ऐप का उपयोग करने की सलाह दी है। इस एडवाइजरी का उद्देश्य लोगों को संभावित साइबर हमलों से सचेत करना और उनसे बचने के उपाय बताना है।
नकली वेबसाइट, मैलवेयर और फिशिंग हमलों का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं साइबर अपराधी >>>
एसपी साइबर क्राइम श्री शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी नकली वेबसाइट, मैलवेयर और फिशिंग हमलों का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। ये हमले आमतौर पर स्मार्टफोन, लैपटॉप, बैंकिंग ऐप्स या सोशल मीडिया के माध्यम से लिंक भेजकर किए जाते हैं। एक बार जब उपयोगकर्ता इन लिंक पर क्लिक करता है तो मैलवेयर उसके डिवाइस में प्रवेश कर जाता है जिससे उसकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी खतरे में पड़ जाती है।
एप की रिपोर्ट के अनुसार रिमूव या डिलीट बटन दबाकर कर सकते हैं अपना बचाव >>>
एडवाइजरी में ऐसे हमलों से बचने के लिए एक सरल और प्रभावी तरीका ई-स्कैन बोट रिमूवल ऐप का उपयोग सुझाया गया है। इसके लिए अपने मोबाइल या कंप्यूटर में ई-स्कैन बोट रिमूवल ऐप ओपन करें और मुख्य स्क्रीन पर ‘स्कैन’ का विकल्प चुनें। फुल स्कैन विकल्प पर टैप करें, स्कैन पूरा होने पर ऐप एक रिपोर्ट दिखाएगा जिसमें पाए गए बॉट्स, मैलवेयर या संदिग्ध फ़ाइलों की जानकारी होगी। रिपोर्ट के आधार पर आप रिमूव या डिलीट बटन दबाकर इन हानिकारक फ़ाइलों को हटा सकते हैं। हमेशा फुल स्कैन करने से आपकी डिवाइस सुरक्षित रहेगी।
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते ही तुरंत करें निकटतम पुलिस स्टेशन में शिकायत >>>
इसके साथ ही एडवाइजरी में बताया गया है कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते ही तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करवाएं। इसके अतिरिक्त साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930/9257510100 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
जयपुर। राजस्थान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को जयपुर जिले के तहसील बस्सी के ग्राम बिराजपुरा में ग्रामीण सेवा शिविर के शुभारंभ समारोह में पहुंच कर लोगों को संबोधित किया।
शिविरों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास एवं सुशासन की पहुंचेगी लहर >>>
सभा को संबोधित करने से पहले मुख्यमंत्री ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी एवं बस्सी विधानसभा क्षेत्र बस्सी के भाजपा प्रत्याशी चंद्र मोहन मीना तथा राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री डॉक्टर कन्हैया लाल मीना से विस्तृत विचार विमर्श किया। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाया जा रहा है। इस पखवाड़े के तहत आयोजित होने वाले ग्रामीण सेवा शिविर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत को धरातल पर उतारने के प्रयासों का हिस्सा हैं। इन शिविरों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास एवं सुशासन पहुंचाया जाएगा।
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मूलमंत्र हमारे लिए मार्गदर्शक >>>
श्री शर्मा बुधवार को बस्सी की ग्राम पंचायत टोडाभाटा के बिराजपुरा में ग्रामीण सेवा शिविर के शुभारंभ समारोह पर आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 8 करोड़ प्रदेशवासियों की तरफ से प्रधानमंत्री को जन्मदिवस की बधाई देते हुए कहा कि उनका सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मूलमंत्र हमारे लिए मार्गदर्शक है। उनके इसी मूलमंत्र से प्रेरणा लेते हुए ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
करोड़ों रुपये की सब्सिडी बिना किसी लीकेज के सीधे लाभार्थियों तक पहुंची >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में परिवर्तन आया है और गरीब कल्याण की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री जन धन योजना में 55 करोड़ से अधिक खाते खुले हैं तथा आमजन को बैंकिंग से जोड़ा गया है। इन खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये की सब्सिडी बिना किसी लीकेज के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है। वहीं, हर घर शौचालय जैसी पहल से स्वच्छता के साथ ही महिला शक्ति को सम्मान मिला है।
निःशुल्क इलाज, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना व जीवन ज्योति बीमा योजना से करोड़ों परिवार हुए लाभान्वित >>>
श्री शर्मा ने कहा कि उज्ज्वला योजना से करोड़ों माताओं-बहनों को चूल्हे के धुंए से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से देशवासियों को निःशुल्क इलाज, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना व जीवन ज्योति बीमा योजना से करोड़ों परिवारों को बीमा सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
ग्रामीण सेवा शिविरों से आमजन को मिलेगा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ >>>
श्री शर्मा ने कहा कि ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुंचाया जाएगा। इन शिविरों में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना जैसी योजनाओं से आमजन को जोड़ा जाएगा। साथ ही, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी मुक्त भारत अभियान से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा पीएमजेएवाई कार्ड बनाए और वितरित किए जाएंगे। इसी तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, पालनहार योजना और मुख्यमंत्री घुमंतू आवास योजना जैसी योजनाओं के लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बीज मिनीकिट वितरित किए जाएंगे। दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना के तहत 10 हजार और गांवों का बीपीएल सर्वे किया जाएगा।
राजस्व मामलों का होगा निस्तारण, मिलेंगे स्वामित्व के पट्टे >>>
श्री शर्मा ने कहा कि शिविरों में आपसी सहमति से विभाजन, नामांतकरण और रास्ते खोलने जैसे कार्य भी आसानी से हो सकेंगे। स्वामित्व योजना के तहत पट्टे बनाए और वितरित किए जाएंगे तथा किसान गिरदावरी ऐप द्वारा गिरदावरी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में क्षतिग्रस्त स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, छात्रावासों और सड़कों के सुधार का कार्य किया जाएगा। साथ ही, विधायक और सांसद स्थानीय क्षेत्र कार्यक्रमों के तहत भी विकास कार्यों को गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एनएफएसए के लंबित प्रकरणों का निस्तारण होगा और आधार सीडिंग भी की जाएगी। पशुओं की जांच, इलाज और टीकाकरण की सुविधा भी इन शिविरों में उपलब्ध होगी तथा जनहानि, पशुहानि, मकानों के नुकसान के आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे और सहायता राशि स्वीकृत की जाएगी।
गरीब, महिला, किसानों का हो रहा है उत्थान >>>
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने गरीब, महिला, किसानों के हित में अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हम गरीब परिवार की महिलाओं को 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराकर उन्हें राहत प्रदान कर रहे हैं। अल्प आय वर्ग के बुजुर्गों, विधवाओं, एकल नारियों, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पेंशन राशि को बढ़ाकर 1250 रुपये प्रतिमाह की है। साथ ही, हमने किसान सम्मान निधि में सहायता राशि 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये एवं गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रति क्विंटल बोनस राशि बढ़ाकर 150 रुपये की है।
गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजना के तहत एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त अल्पकालीन ऋण >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजना के तहत एक लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त अल्पकालीन ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 14 लाख से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लाडो प्रोत्साहन योजना के माध्यम से बालिकाओं के जन्म पर डेढ़ लाख रुपये का संकल्प-पत्र प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी आमजन इन शिविरों का लाभ लें एवं आस-पड़ोस के लोगों को भी प्रेरित करें। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों से भी आह्वान किया कि वे इन शिविरों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।
शिविर में विभिन्न विभागों की स्टॉल्स का किया निरीक्षण >>>
इससे पहले मुख्यमंत्री ने ग्रामीण सेवा शिविर-2025 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने शिविर में विभिन्न विभागों की स्टॉल्स का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों से योजनाओं और उनकी क्रियान्विति के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी ली। शिविर में मुख्यमंत्री ने नामांतकरण, सहमति विभाजन, आवासीय पट्टा, बीज मिनीकिट का वितरण किया। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी राशि, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत सहायता राशि से लाभार्थियों को लाभान्वित किया। इसी प्रकार प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना के तहत बीमा राशि का चैक भी सौंपा। उन्होंने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत लाभार्थियों को बॉन्ड सौंपा और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सहायता राशि का भुगतान किया। श्री शर्मा ने खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी सौंपे। साथ ही, उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान व हरियालो राजस्थान के तहत कार्यक्रम स्थल पर पौधारोपण किया।
इस अवसर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा की पूर्व अधिकारी तथा विधानसभा क्षेत्र बस्सी भाजपा प्रत्याशी चंद्र मोहन मीना, राजस्थान सरकार की पूर्व मंत्री डॉक्टर कन्हैया लाल मीना, विधायक श्री महेन्द्रपाल मीना, श्री रामावतार बैरवा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
जयपुर। भारत सरकार के केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज एक दिवसीय दौरे पर जयपुर पहुंचे और वंदे भारत ट्रेन के अनुरक्षण शेड का उद्घाटन किया। श्री वैष्णव गुरुवार को सुबह स्पेशल ट्रेन से रेवाड़ी-खातीपुरा रेल खंड का विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण करते हुए खातीपुरा स्टेशन पहुंचे।
माननीय रेल मंत्री ने खातीपुरा मेंटेनेंस शेड की विस्तृत जानकारी दी >>>
रेल मंत्री ने खातीपुरा स्टेशन में बन रहे ट्रेन मेंटिनेंस शेड के मॉडल का अवलोकन किया । इस दौरान माननीय मंत्री जी के साथ श्रीमती मंजू शर्मा, सांसद/जयपुर और श्री गोपाल शर्मा, विधायक (सिविल लाइंस) भी उपस्थित रहे। मीडिया से वार्ता के दौरान माननीय रेल मंत्री ने खातीपुरा मेंटेनेंस शेड की विस्तृत जानकारी दी । रेल मंत्री ने वंदे भारत सहित अन्य ट्रेनों की अनुरक्षण के लिए कोच केयर कंपलेक्स जयपुर में अनुरक्षण सुविधाओं के विस्तार हेतु नवनिर्मित शेड का उद्घाटन किया। उन्होंने शेड में बने 4 टियर प्लेटफॉर्म का निरीक्षण किया तथा यात्री सुविधाओं में वृद्धि के अंतर्गत कोच में किए गए टॉयलेट मॉडीफेशन और ब्रेक वान में किए गए मॉडीफेशन का निरीक्षण किया।
शीघ्र ही बीकानेर-दिल्ली और जोधपुर- दिल्ली वंदे भारत ट्रेन का संचालन होगा शुरू >>>
रेल मंत्री ने इसके पश्चात अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित किये जा रहे जयपुर स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की भव्यता की प्रशंसा की और कहा कि यह पूरे जयपुर के लिए गौरव का बात है कि स्टेशन के सेकंड एंट्री के पुनर्निर्माण का कार्य बहुत तेजी से और सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही बीकानेर-दिल्ली और जोधपुर- दिल्ली वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू किया जा रहा है। साथ ही जैसलमेर और दिल्ली के मध्य भी एक ओवरनाइट ट्रेन का संचालन शीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने जयपुर वासियों, मीडिया प्रतिनिधियों और जन प्रतिनिधियों से कहा कि वे आपस में इस बात पर विचार करे कि जयपुर के आसपास के स्टेशनों के नाम में जयपुर शब्द को जोड़ा जाए जैसे गांधीनगर में जयपुर गांधीनगर, खातीपुरा को जयपुर खातीपुरा के रूप में नामकरण किया जाए। और इस प्रस्ताव को अपने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र में भिजवाएं। साथ ही श्री अश्विनी वैष्णव ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल नेटवर्क को और मज़बूत बनाने की बात कही। उन्होंने शहर के रेल फाटकों को समाप्त करने की योजना के तहत अंडरपास और रोड ओवर ब्रिज बनाने के लिए भी दिशा निर्देश प्रदान किए। श्री अश्विनी वैष्णव, स्टेशन पर कार्य कर रहे कार्मिकों से संवाद भी किया। उन्होंने जयपुर स्टेशन के मुख्य प्रवेश की बिल्डिंग के कार्य भी जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।
स्थापत्य कला और आर्किटेक्चर का नमूना है जयपुर >>>
जयपुर स्टेशन के निरीक्षण के बाद रेल मंत्री जयपुर के उपनगरीय स्टेशन गांधीनगर जयपुर पर अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत चल रहे पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण किया व दिशा निर्देश प्रदान किए। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह जयपुर की अपनी एक स्थापत्य कला और आर्किटेक्चर है उस हेरिटेज को ध्यान में रखते हुए स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है। गांधीनगर जयपुर के कार्य को शीघ्र पूर्ण करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने इस कार्य का शिलान्यास किया है और जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा।
मौके पर रहे मौजूद >>>
निरीक्षण के दौरान माननीय रेल मंत्री जी के साथ श्री अमिताभ, महाप्रबंधक, उत्तर पश्चिम रेलवे, श्री रवि जैन/मंडल रेल प्रबंधक, जयपुर, सभी प्रमुख विभागाध्यक्ष, उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय और जयपुर मंडल के अधिकारी, उपस्थित रहे।
नई दिल्ली। जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर, 2025 को अपनी 56वीं बैठक में जीएसटी कर दरों में बदलाव से संबंधित सिफारिशें की हैं। इसके तहत व्यक्तियों, आम लोगों, महत्वाकांक्षी मध्यम वर्ग को राहत प्रदान करने और जीएसटी में व्यापार को सुगम बनाने के उपायों पर ज़ोर दिया गया है। घटी हुई जीएसटी दरें 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगी।
जीएसटी दर युक्तिकरण के लाभ:
सरल कर संरचना लगभग सभी खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी आई है, जिससे जीवन सुगमता को बढ़ावा मिला है। कम कीमतों से खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ेगी, निवेश बढ़ेगा और रोजगार सृजन होगा। विनिर्माण के लिए समर्थन: असंगत शुल्क ढांचे को सही करने से घरेलू मूल्य संवर्धन और निर्यात को बढ़ावा मिलता है। व्यापक आधार और बेहतर अनुपालन से क्षेत्र में बेहतर राजस्व सृजन। वर्गीकरण संबंधी मुद्दों का समाधान- समान वस्तुओं और सेवाओं को एक ही दर स्लैब में रखा जाएगा, जिससे विवादों में कमी आएगी और मुकदमेबाजी की लागत कम होगी।
जिन प्रमुख प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर जीएसटी दरें कम की गई हैं, उनका विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है। जो इस प्रकार से हैं :—
विश्लेषण:
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को सरल बनाने के एक ऐतिहासिक कदम के तहत, जीएसटी परिषद ने अपनी 56वीं बैठक में जीएसटी संरचना को चार स्लैब (5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत, 28 प्रतिशत) से घटाकर दो मुख्य दरें – 5 प्रतिशत (मेरिट रेट) और 18 प्रतिशत (स्टैंडर्ड रेट) कर दी हैं, साथ ही नीतिविरुद्ध/विलासिता की वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर भी लागू कर दी है। ये बदलाव 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगे।
कर दरों के इस युक्तिकरण में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र प्रमुख लाभार्थी रहा है, तथा अधिकांश उत्पादों पर जीएसटी की दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई है।
जीएसटी को निम्न स्तर पर लाने से इस क्षेत्र को कई प्रकार के प्रोत्साहन मिलेंगे तथा निम्नलिखित के माध्यम से आर्थिक विकास के एक अच्छे चक्र को प्रोत्साहन मिलेगा ;
सरल कर संरचना: सरल कर संरचना, कर स्लैब की संख्या कम करके, खाद्य पदार्थों में एकरूपता लाती है। एक स्थिर कर वातावरण, व्यवसायों को दीर्घकालिक निवेश की योजना बनाने, अनुपालन को प्रोत्साहित करने और आर्थिक विकास को गति देने में मदद करेगा।
कम कीमतें : उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की कीमतों में कुल मिलाकर कमी देखने को मिलेगी, जिससे जरूरी चीजें ज्यादा किफायती हो जाएंगी। इससे उपभोक्ता मांग में तेजी आएगी और एफएमसीजी और पैकेज्ड फूड व्यवसायों की बिक्री में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अलावा, यह सरलीकरण अनुपालन लागत और मुकदमेबाज़ी के जोखिम को कम करके व्यवसायों की मदद करेगा।
असंगत शुल्क ढांचा: नई संरचना असंगत शुल्क के मामलों को ठीक करने में मदद करती है। इनपुट पर तैयार उत्पादों की तुलना में अधिक कर लगाया जाना इसका उदाहरण है। इससे खाद्य क्षेत्र में मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, विशेष रूप से एमएसएमई के लिए तरलता में सुधार, कार्यशील पूंजी की रुकावट को कम करने और घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए तत्काल राहत मिलती है।
वर्गीकरण संबंधी मुद्दों का समाधान: नई संरचना समान उत्पादों पर अलग-अलग कर दरों से उत्पन्न होने वाले वर्गीकरण संबंधी विवादों को समाप्त करती है। उदाहरण के लिए, पैकेज्ड बनाम खुले पनीर या पराठों पर पहले अलग-अलग दरें होती थीं, लेकिन अब एक स्पष्ट संरचना का पालन किया जाता है और वर्गीकरण संबंधी विवादों को काफी कम कर दिया जाता है।
अन्य प्रक्रियात्मक सुधार: दरों में कटौती के अलावा, परिषद ने सुव्यवस्थित पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने, विशेष रूप से उल्टे शुल्क दावों के लिए अनंतिम रिफंड प्रणाली और अपील संबंधी समाधान में तेजी लाने और मुकदमेबाजी को कम करने के लिए जीएसटीएटी (माल और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण) के कार्यान्वयन के माध्यम से प्रक्रियात्मक सुधारों को मंजूरी दी।
प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को बढ़ावा: कुल मिलाकर, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उपभोक्ता वस्तुओं पर कम जीएसटी दरें और परिणामस्वरूप कम कीमतें उद्योग के लिए बढ़ती मांग और विकास का एक सकारात्मक चक्र शुरू कर सकती हैं। समग्र उद्योग में निम्नलिखित सकारात्मक पहलू हैं:
· उपभोग: जीएसटी दर में कटौती से खुदरा कीमतें कम होंगी, जिसके परिणामस्वरूप प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों सहित विनिर्मित उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
· निवेश: बढ़ती मांग और सकारात्मक व्यापार, भावना तथा अनुपालन, बोझ में कमी के साथ निवेश में वृद्धि होने की उम्मीद है।
· रोजगार: बढ़ती मांग, निवेश में अपेक्षित वृद्धि और उद्योग के औपचारिकीकरण के साथ, इस क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था में अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
· किसानों और खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए आय स्तर में वृद्धि : अर्थव्यवस्था में खपत और निवेश में वृद्धि, खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे में वृद्धि, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के स्तर और फसल-पश्चात नुकसान में कमी के माध्यम से किसानों और खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं की आय और पारिश्रमिक में वृद्धि होने की उम्मीद है।
जमवारामगढ़। जयपुर जिले का प्रसिद्ध रामगढ़ बांध इस समय जल संकट से जूझ रहा है। इसको भरने के लिए राज्य सरकार एडी-चोटी का जोर लगा रही है। रामगढ़ बांध को भरने की उम्मीद से चलाया जा रहा कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) का प्रोजेक्ट आखिरी दौर में भी नाकाम रहा।
तीन बार ड्रोन से क्लाउड सीडिंग की, लेकिन बांध क्षेत्र में एक बूंद बारिश नहीं हो सकी >>>
गौर तलब है कि रविवार को कृषि व आपदा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, स्थानीय विधायक महेंद्रपाल मीणा की मौजूदगी में वैज्ञानिकों ने तीन बार ड्रोन से क्लाउड सीडिंग की, लेकिन बांध क्षेत्र में एक बूंद बारिश नहीं हो सकी। हालांकि वैज्ञानिकों का दावा है कि पहाडियों में हल्की बरसात हुई है और इसका असर कैचमेंट एरिया में देखने को मिल सकता है। ड्रोन को कभी 900 मीटर तो कभी 1000 फीट की ऊंचाई पर भेजा गया। लेकिन स्थानीय स्तर पर बारिश का असर दिखाई नहीं दिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाउड सीडिंग का असर कई बार कुछ किलोमीटर दूर जाकर देखने को मिलता है।
जनता को गुमराह करने के लिए लगी हुई है सरकार — पूर्व विधायक गोपाल मीणा >>>
पूर्व विधायक गोपाल मीणा ने कहा कि सरकार बांध को भरने के नाम पर जनता को गुमराह करने में लगी हुई है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि चार चरणों में कुल 10 बार क्लाउड सीडिंग की गई और तकनीकी दृष्टि से ये सभी प्रयास सफल रहे।
जिस दिन यहां अच्छी बारिश होगी, उसी दिन अतिक्रमण अपने आप हट जाएंगे – डॉक्टर किरोडी लाल >>>
एक सवाल के जवाब में मंत्री डॉ. किरोड़ी ने कहा कि बांध क्षेत्र में फैले अतिक्रमण पर सरकार येनकेन प्रकारेण किसी भी तरह से रामगढ़ बांध भरा जा सकें इसके लिए गंभीर है। बांध के कैचमेंट एरिया के अतिक्रमण पर मंत्री ने कहा कि जिस दिन यहां अच्छी बारिश होगी, उसी दिन अतिक्रमण अपने आप हट जाएंगे।
हमने देखा कि उत्तराखंड, हिमाचल में पहाड़ों पर बारिश से तबाही मची है। जिस दिन यहां अच्छी बारिश होगी, उसी दिन अतिक्रमण अपने आप हट जाएंगे। मंत्री का इशारा था कि भारी बारिश होने पर अतिक्रमण बहकर या टूटकर अपने आप हट जाएंगे और इसके लिए अलग से किसी बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं पड़े। हालांकि केबिनेट मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी कांग्रेस ने इसको लेकर तंज कसा है। गौरतलब है कि रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया के अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट कमेटी भी कई दौरे कर चुकी है और कमेटी ने भी माना की आवक क्षेत्र में रसूखदारों के अतिक्रमण है।
विधानसभा में रखी जाएगी दो माह के ट्रायल की रिपोर्ट >>>
मंत्री डॉ. किरोड़ी ने स्पष्ट किया कि अब तक इस प्रोजेक्ट पर सरकार का एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है। लगभग 3 करोड़ रुपये का पूरा खर्च कंपनी ने उठाया है। मंत्री ने कहा कि दो महीने के ट्रायल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विधानसभा में रखी जाएगी और मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि बड़े स्तर पर नई कार्ययोजना बनाई जाएगी, ताकि बांध को भरने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रह सकें। दूसरी तरफ जमवारामगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक गोपाल मीणा ने इसे जनता को गुमराह करने वाला प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि क्लाउड सीडिंग पूरी तरह फेल है। पिछले दो महीने से करोड़ों रुपये खर्च की बात कर रहे हैं, लेकिन बांध में तो एक बूंद भी पानी कृत्रिम बारिश से नहीं आया। सरकार और वैज्ञानिक केवल दिखावा कर रहे हैं।
मीनेश चन्द्र मीना हैलो सरकार ब्यूरो प्रमुख बस्सी। जयपुर जिले के तहसील बस्सी के ग्राम भाजूपुरा में पागल बंदर का आंतक अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। बंदर के हमले से गांव के छोटे बच्चों के जख्मी किए जाने से लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। रविवार की शाम को भी पागल बंदर ने एक 8 वर्षीय बालक को काट लिया। इससे बालक लहूलुहान हो गया। बाद में परिजन उसे लेकर अस्पताल दौड़े और उपचार कराया।
प्रशासन बना धृतराष्ट्र >>>
गौर तलब है कि जख्मी हुए बंदर के आंतक से ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने एसडीएम प्रशासन व पंचायत प्रशासन से बंदर को पकड़ कर आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग की। ग्रामवासियों ने बताया कि गांव में पिछले कुछ दिनों से एक बंदर देखने को मिल रहा है। जो अब लोगों को काटने से नहीं चूक रहा। पिछले चार दिनों में बंदर ने गांव के ही तीन बच्चों को अपना शिकार बना लिया।
बंदर के हमले से यह लोग हुए घायल >>>
आपको बता दे, बंदर के काटे जाने से अंजली (17) पुत्री कैलाश शर्मा व किट्टू (6) पुत्र जीतू शर्मा को अपना शिकार बना लिया। वहीं रविवार को सोमदत्त (8) पुत्र सौरभ शर्मा छोटे बच्चों के साथ घर के समीप ही खेल रहा था। तभी एकाएक पेड़ से उतर कर आए बंदर ने सोमदत्त को काट लिया। बच्चों को काटे जाने की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने मामले से पंचायत प्रशासन को अवगत कराया। बाद में ग्रामीणों ने बंदर को गांव से खदेडते को लेकर घेराबंदी की। लेकिन बंदर लोगों की नजरों से ओझल हो गया। आतंकी बंदर से कब निजात मिलेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा बहरहाल लोगों ने प्रशासन की जानकारी में डाल दी।
झालावाड़। केंद्रीय कारागार झालावाड़ से नरेंद्र मीणा 42 दिन बाद हाई कोर्ट के आदेश से जमानत पर रिहा हो गए। जेल से बाहर निकलते ही नरेश मीणा ने अपने दुश्मनों पर हमला बोल दिया। नरेश मीणा ने बताया कि मैं बच्चों को न्याय दिलाने के लिए धरने पर बैठा था। मुझे कई धाराओं में फंसा कर सवा महीने जेल में रखा, मुझे जिस-जिस नेता ने जेल में भेजा और जिस दिन उनका पता लग गया तो उससे समय आने पर गिन-गिन कर हिसाब लूंगा। वो दिन जरूर आएगा, जिस दिन हिसाब बराबर करूंगा। यह मेरा खुला चैलेंज है।
25 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे नरेश मीणा >>>
गौर तलब है कि नरेश मीणा ने झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे के विरोध में मृतक आश्रितों और घायलों को आर्थिक मदद देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, परंतु कुछ नेताओं के इशारों पर पुलिस ने 25 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
नरेश मीणा को शनिवार शाम 5.50 बजे कर दिया रिहा >>>
नरेश मीणा को दो दिन पहले हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। जमानत की आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद झालावाड़ जेल प्रशासन ने नरेश मीणा को शनिवार शाम 5.50 बजे रिहा कर दिया। जेल के बाहर खड़े समर्थकों ने नरेश मीणा के पक्ष में नारेबाजी की। बाद में वे समर्थकों के साथ बारां के लिए रवाना हो गए।
नरेश मीणा जन क्रांति यात्रा छोड़कर गए थे प्रदर्शन करने >>>
आपको बता दे, देवली-उनियारा विधानसभा उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा ने उप जिला मजिस्ट्रेट अमित कुमार चौधरी के थप्पड़ मार दिया था। नरेश मीणा को 14 नवंबर 2024 को समरावता गांव से गिरफ्तार किया था। उसके बाद करीब आठ महीने बाद 14 जुलाई में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर टोंक जेल से रिहा हुए थे।
सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत के कारण किया था प्रदर्शन >>>
14 जुलाई में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर टोंक जेल से रिहा होते ही हाड़ौती में जन क्रांति यात्रा निकाल रहे थे। इस बीच झालावाड़ जिले में 25 जुलाई को पिपलोदी सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा SRG हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। उस दौरान पुलिस ने नरेश मीणा और दो उसके समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया था।
दौसा। सरकार की कुंभकर्णी नींद के चलते सरकारी जमीन पर धड़ाधड़ अतिक्रमण हो रहे हैं। शिकायत करने के बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों के कानों से जूं तक नहीं रेंग रही हैं। जी हां, यह बात पूरे सौलह-आने सही है। दौसा-लालसोट सड़क पर बावड़ी के पास सरकारी जमीन पर हो रहे हैं अतिक्रमण >>>
गौर तलब है कि कस्बे में दौसा-लालसर सड़क पर बावड़ी के पास सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमण से रास्ता बंद होने के विरोध में चाचा-भतीजे पानी की टंकी पर चढ़ गए। सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर ढाई घंटे तक समझाइश कर दोनों को नीचे उतारा।
क्या है मामला >>>
चौंकाने वाले मामले के बारे में भांडारेज के रामफूल व रामेश्वर ने बताया कि खेत पर जाने के रास्ते में सरकारी जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है, जिससे रास्ता बंद है। इसकी शिकायत नगरपालिका में की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। फिर नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी से शिकायत की तो उन्होंने कर्मचारी को भेज कर सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को बंद कराया था। लेकिन फिर अतिक्रमण कर लिया। इससे तंग आकर शुक्रवार दोपहर 3.30 बजे रामफूल व भतीजा रामेश्वर खेड़ली दरवाजा स्थित पानी टंकी पर चढ़ गए। टंकी पर चढ़ते ही आसपास के क्षेत्र में अपरा-तफरी मच गई।
दौसा डीएसपी रवि शर्मा पहुंचे मौके पर >>>
कोई बड़ी अनहोनी घटना ना घटित हो जाए, इस बात से चिंतित होकर मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पानी की टंकी पर चढ़े दोनों चाचा-भतीजे को भांडारेज तहसीलदार रामसिंह, सदर थानाधिकारी रविन्द्र चौधरी ने करीब 2.30 घंटे तक समझाइश कर शाम 6 बजे नीचे उतारा। इस दौरान दौसा डीएसपी रवि शर्मा मौके पहुंचे। टंकी पर चढ़े चाचा भतीजा की मांग की है कि सरकारी जमीन पर नगरपालिका का बोर्ड लगाया जाए। दौसा डिप्टी रवि शर्मा ने बताया कि नगरपालिका सरकारी जमीन पर नगरपालिका का बोर्ड लगा दिया जाएगा। अब सरकारी जमीन पर अतिक्रमण नहीं होगा। यह कहना गलत ना होगा कि दौसा प्रशासन को सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के बारे में बखूबी जानकारी है कि बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कई सालों से हो रहा है। लेकिन सरकार की निष्क्रियता के कारण अतिक्रमियों के हौसले बुलंद रहते हैं।
जयपुर। राजस्थान में भजनलाल सरकार का एक ऐसा नमूना सामने आया है जहां रिश्वत के कांड में ट्रैप होने के बाद से पद पिछले पौने दो साल से खाली चल रहा है। जी हां यह बात पूरे सौलह-आने सही है। 6 दिसंबर 2023 को कालवाड़ बिजली निगम कार्यालय के तत्कालीन जेईएन अनिल कुमावत को एसीबी ने 17,000 रुपये की रिश्वत लेते ट्रैप किया था। इस कार्रवाई के बाद से ही कालवाड़ जेईएन का पद रिक्त पड़ा हुआ है।
करीब 25 हजार उपभोक्ता बुरी तरह प्रभावित >>>
गौरतलब है कि 20 महीने बीत जाने के बावजूद विभाग ने अब तक नई नियुक्ति नहीं की। नतीजा यह हुआ कि कालवाड़ और लालपुरा दोनों की जिम्मेदारी एक ही जेईएन के कंधों पर डाल दी गई। इससे करीब 25 हजार उपभोक्ता बुरी तरह प्रभावित हैं। नए कनेक्शन महीनों अटके रहते हैं और फाल्ट सुधारने में घंटों लग जाते हैं। हालांकि निगम के अधिकारी इसे स्थानांतरण और नियुक्ति प्रक्रिया की औपचारिकता बता कर टालते रहे हैं। वर्कलोड ज्यादा होने से अधिकारी प्रॉपर तरीके से काम नहीं कर सकते हैं।
बिजली कनेक्शन मिलने में लग जाते हैं 2-3 महीने >>>
नई कॉलोनियों में कनेक्शन अटके विद्युत निगम ने लालपुरा में पदस्थापित जेईएन प्रिया कटियार को कालवाड़ का अतिरिक्त चार्ज सौंप रखा है। यानी लालपुरा और कालवाड़ दोनों जगहों के 25 हजार उपभोक्ताओं का जिम्मा एक ही जेईएन के भरोसे है। कालवाड़ और आसपास के इलाकों में बीते कुछ सालों में कई नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। इनमें कनेक्शन दिलाने की प्रक्रिया बेहद धीमी पड़ गई है। उपभोक्ता महीनों चक्कर काटते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते फाइलें अटक जाती हैं। नई बस्तियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि घर बनकर तैयार हो जाते हैं, मगर बिजली कनेक्शन मिलने में 2-3 महीने तक लग जाते हैं। फाल्ट आने पर घंटों ठप रहती है सप्लाई: ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में या फाल्ट आने पर घंटों बिजली गुल रहती है। जेईएन एक ही समय में दो-दो जगह नहीं पहुंच पाते। नतीजा यह होता है कि कई गांवों में देर रात तक अंधेरा छाया रहता है।
एईएन को खुद करना पड़ता है जेईएन का काम >>>
कालवाड़ एईएन मोहनलाल शर्मा ने माना कि पिछले 20 महीनों से स्थिति बेहद खराब है। एक जेईएन पर पूरे क्षेत्र का भार है। कई बार उपभोक्ताओं का काम समय पर नहीं होने पर मुझे स्वयं का काम छोड़कर उनका काम करना पड़ता है। उपभोक्ताओं को कनेक्शन में देरी हो रही है, फाल्ट आने पर भी कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जयपुर। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं दूदू विधानसभा क्षेत्र के के विधायक डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने अधिकारियों के साथ शुक्रवार को अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय जनों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही, प्रभावित व पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री प्रदान की गई ताकि इस कठिन समय में उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि जनसेवा और हर ज़रूरतमंद तक सहायता पहुँचाना ही हमारा प्रथम कर्तव्य है।
अतिवृष्टि से नुकसान जांचने ट्रैक्टर पर निकले उपमुख्यमंत्री >>>
गौर तलब है कि प्रदेश के डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा शुक्रवार को दूदू विधानसभा क्षेत्र में बारिश से हुए नुकसान को लेकर दूदू पहुंचे और अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय पर दूदू, फागी और मौजमाबाद उपखंड के राजस्व, पंचायतीराज और शहरी निकाय, पुलिस, जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। बैठक में क्षेत्र में अतिवृष्टि से हुई फसल खराबे और नुकसान ओर राहत कार्यों की रिपोर्ट मांगी गई। डिप्टी सीएम ने दूदू तहसील की ग्राम पंचायतों में हुए सर्वाधिक नुकसान और राहत कार्यों की धीमी गति को लेकर दूदू एसडीएम रमेश कुमार को राहत कार्यों में देरी को लेकर नाराजगी जताई, और तत्काल पीडितों को मदद पहुंचाने के निर्देश दिए।
नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी ईओ मीटिंग में नहीं पहुंचने पर जताई नाराजगी >>>
उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने दूदू शहरी क्षेत्र के नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी ईओ मीटिंग में नहीं पहुंचने को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद वे मौजमाबाद उपखंड के सबसे अधिक प्रभावित सेवा गांव पहुंचे और पीड़ित किसानों व ग्रामीणों से मिलकर हालचाल जाना। अधिकारियों के साथ गांवों में जाकर नुकसान का जायजा भी लिया। डिप्टी सीएम बैरवा ने मौके पर जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री की किट वितरित की। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर गोपाल परिहार, एएसपी शिवलाल बैरवा, मौजमाबाद एसडीएम बलबीर सिंह, फागी एसडीएम राकेश कुमार, दूदू एसडीएम रमेश कुमार और मौजमाबाद तहसीलदार सुरेंद्र बिश्नोई, भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रकाश चंद जैन, पंचायत समिति सदस्य संजय सिंह सिरोही, फागी मंडल अध्यक्ष रामदयाल टोडावता, जिला परिषद सदस्य रामरतन नासना सहित कई भाजपा पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
दूदू जल संसाधन विभाग को जारी होगा बजट >>>
विधानसभा क्षेत्र दूदू वित्तीय बजट से जूझ रहे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से नहरों की मरम्मत को लेकर डिप्टी सीएम बैरवा ने रिपोर्ट मांगी तो अधिकारियों ने बजट की कमी की बात बताई। जिसके बाद डिप्टी सीएम ने तत्काल जल संसाधन विभाग के सीनियर अफसर को तत्काल बजट जारी करने के निर्देश दिए।
मौजमाबाद में आपदा राहत प्रबंधन के बेहतर मैनेजमेंट की तारीफ >>>
उप मुख्यमंत्री डॉक्टर प्रेमचंद बैरवा अतिवृष्ट क्षेत्र के जायजा लेने के दौरान सेवा गांव में प्रभावित लोगों से रूबरू हुए तो मौजमाबाद एसडीएम बलवीर सिंह और तहसीलदार सुरेंद्र बिश्नोई के बेहतर मैनेजमेंट की डिप्टी सीएम में तारीफ भी की गई।
आरएसआरडीसी अधिकारियों को लगाई फटकार >>>
इसी दौरान दूदू-मालपुरा स्टेट हाईवे पर सेवा गांव के हुए जल भराव को लेकर स्टेट हाईवे पर अधिकारियों और लोगों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। दूसरी और आरएसआरडीसी के अधिकारियों को मामले में फटकार लगाई और सड़क पर पानी निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए, दूसरी और दूदू, फागी, पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियरों से क्षतिग्रस्त सड़कों को तत्काल दुरुस्त करने और गड्डों को भरने को लेकर भी निर्देशित किया गया।
कोटा। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी एवं लोकनायक स्व. भैरवलाल काला बादल ने अपने गीतों और साहित्य से हाड़ौती की ढाणियों और गांवों में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाई। आजादी की लड़ाई में उनकी प्रेरणा से हाड़ौती क्षेत्र ने भी अहम योगदान दिया। शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव और नई चेतना लाने के उनके विचारों को मूर्त रूप देते हुए ही आदिवासी-मीणा समाज ने कोटा के रानपुर में देश का पहला आदिवासी विश्वविद्यालय स्थापित किया है।
काला बादल जयंती समारोह आयोजित >>>
लोकसभा अध्यक्ष गुरुवार को जय मीनेष आदिवासी विश्वविद्यालय, रानपुर में आयोजित काला बादल जयंती समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से बना यह विश्वविद्यालय भविष्य में अपनी अलग पहचान कायम करेगा। यहां तकनीकी एवं प्रोफेशनल कोर्स शुरू किये जा रहे हैं और आने वाले वर्षों में प्रदेशभर से आदिवासी छात्र-छात्राएं यहां शिक्षा प्राप्त कर क्षेत्र और देश का नाम रोशन करेंगे।
गीतों, कविताओं से जन-जन में स्वतंत्रता की चेतना >>>
बिरला ने कहा कि भैरवलाल ‘कालाबादल’ जी ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गीतों और कविताओं के माध्यम से जन-जन में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। गाँव-गाँव और ढाणी-ढाणी में जाकर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध जनजागरण किया और लोगों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। विधायक और मंत्री रहते हुए भी उनकी सादगी, सेवा और साहित्यिक योगदान आज भी समाज के लिए आदर्श है। बिरला ने कहा कि कालाबादल जी के प्रयासों से शिक्षा का महत्व आदिवासी समाज में गहराई से स्थापित हुआ।
रानपुर बनेगा शिक्षा का हब >>>
उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर जिले और उपखंड स्तर पर प्राथमिकता से छात्रावास खोले जाएंगे। रानपुर को शिक्षा का हब बनाने की दिशा में तेजी से काम होगा। यहां पहले से ट्रिपल आईटी है, आगे और विश्वविद्यालय एवं शिक्षण संस्थान स्थापित होंगे। श्री बिरला ने कहा कि जनजाति क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं और केंद्र सरकार इनके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएगी। विद्यालयों में कंप्यूटर लैब और आधुनिक सुविधाएं देकर छात्रों की प्रतिस्पर्धी क्षमताएं बढ़ाई जाएंगी।
कन्या छात्रावास निर्माण पर विचार >>>
कार्यक्रम में केन्द्रीय जनजाति कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास निर्माण के लिए यदि राज्य सरकार आर्टिकल 275 के तहत प्रस्ताव भेजेगी तो उस पर सकारात्मक निर्णय होगा। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के पास जनजाति क्षेत्रों के विकास के लिए 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए का बजट है, जिसका पूरा उपयोग ट्राइबल एरिया डवलपमेंट में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाड़ौती संभाग के विकास में भी कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।
समाज की साझेदारी से बना विश्वविद्यालय >>>
राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया ने कहा कि आदिवासी-मीणा समाज द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय एक पौधा है, जिसे माली बनकर समाज को सींचना होगा ताकि यह वटवृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ियों को छाया दे। लाडपुरा विधायक श्रीमती कल्पना देवी ने कहा कि उनके क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय स्थापित होना गौरव की बात है। उन्होंने परिसर में हरियाली बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।
अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजाति क्षेत्र विकास विभाग श्री कुंजी लाल मीणा ने बताया कि इस विश्वविद्यालय के निर्माण में समाज के हर वर्ग ने योगदान दिया। किसानों ने तूड़ी बेचकर, कर्मचारियों ने एक माह का वेतन देकर और भामाशाहों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार सहयोग देकर इसे संभव बनाया। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने सांसद विकास निधि से योगदान दिया, जबकि लाडपुरा विधायक सहित 93 विधायकों ने भी अपने कोष से सहयोग किया।
32 करोड़ की लागत से मुख्य भवन >>>
विश्वविद्यालय के चेयरमैन एवं पूर्व आरएएस अधिकारी श्री आरडी मीणा ने बताया कि सांसद-विधायकों, कंपनियों के सीएसआर फंड और 4 हजार भामाशाहों के सहयोग से विश्वविद्यालय का मुख्य भवन 32 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा स्टूडेंट ब्लॉक, 300 क्षमता का बॉयज हॉस्टल और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का भी निर्माण हुआ है, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से विश्वविद्यालय में बालिका छात्रावास के लिए फंड उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
श्रद्धांजलि और लोकार्पण >>>
इस अवसर पर जिला कलक्टर श्री पीयूष समारिया, मीणा समाज के गणमान्यजन, समिति पदाधिकारी और विश्वविद्यालय निर्माण में योगदान देने वाले भामाशाह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष और केन्द्रीय जनजाति मंत्री ने विश्वविद्यालय की लोकार्पण पट्टिका का अनावरण किया। इससे पहले अतिथियों ने स्वतंत्रता सेनानी स्व. भैरुलाल काला बादल की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पूर्व छत्रपुरा स्थित कालाबादल की प्रतिमा पर भी स्पीकर बिरला ने माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
जयपुर। जन-जन की लोकप्रिय नेता एवं राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री के निर्देश से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गुरूवार को सचिवालय स्थित समिति कक्ष में राज्य स्तरीय फर्टिलाइज़र डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स की बैठक आयोजित हुई।
डॉक्टर किरोडी लाल मीणा निरीक्षण करते हुए
फर्टिलाइज़र कंपनियां मांग और आपूर्ति का विशेष रखें ध्यान >>>
मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत ने कहा कि रबी सीज़न उर्वरक-प्रधान होता है, इसलिए सभी फर्टिलाइज़र कंपनियां मांग और आपूर्ति का विशेष ध्यान रखें। इस वर्ष अप्रत्याशित वर्षा के कारण किसानों को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि आयुक्त को निर्देश दिए कि नियमित मॉनिटरिंग कर किसी भी समस्या का प्राथमिकता से तुरंत समाधान सुनिश्चित किया जाए।
पारदर्शी वितरण और कालाबाज़ारी पर सख्ती >>>
मुख्य सचिव ने कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने पुलिस विभाग को विशेष अभियान चलाकर कालाबाज़ारी रोकने, सहकारी समितियों से पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने और उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव सुधांशु पंत अधिकारियों की बैठक लेते हुए
रेलवे रेक पॉइंट्स को मज़बूत करने के निर्देश >>>
उन्होंने रेलवे विभाग को निर्देश दिए कि मांग के समय दबाव कम करने के लिए जयपुर, हनुमानगढ़, झुंझुनू और दौसा रेक पॉइंट्स को विकसित कर नई सुविधाओं से मज़बूत किया जाए। वर्तमान में राज्य में 35 रेल रेक पॉइंट्स कार्यरत हैं, जिनमें से 15 पर नियमित, 12 पर मौसमी और 8 पर आकस्मिक आपूर्ति होती है।
कृषि आयुक्त की प्रस्तुति >>>
बैठक में कृषि एवं उद्यानिकी आयुक्त सुश्री चिन्मयी गोपाल ने प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से उर्वरक संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य और जानकारी प्रस्तुत की। प्रस्तुति में बताया गया कि इस वर्ष अब तक राज्य की खरीफ सीज़न मांग में से यूरिया की आपूर्ति 98 प्रतिशत रही, वहीं डीएपी की उपलब्धता 88 प्रतिशत तक पहुँची। एनपीके और एमओपी की स्थिति अपेक्षाकृत कम रही। जिला-वार समीक्षा में अधिकांश जिलों में यूरिया और डीएपी की अधिकतम उपलब्धता दर्ज की गई।
कंपनीवार समीक्षा >>>
बैठक के दौरान कंपनीवार समीक्षा में पाया गया कि यूरिया की आपूर्ति में जीएसएफसी ने 224 प्रतिशत आपूर्ति कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, आईपीएल ने 153 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया, जबकि आरसीएफ की आपूर्ति सबसे कम (लगभग 69 प्रतिशत) रही। डीएपी के मोर्चे पर कोरोमंडल ने लक्ष्य से अधिक आपूर्ति दर्ज की। साथ ही किसानों ने डीएपी पर निर्भरता कम करते हुए वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ाया, जिसमें एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का उपयोग 28 प्रतिशत और एनपीके का 83 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।
विभागीय प्रयास और कार्रवाई >>>
बैठक में विभागीय प्रयासों की जानकारी दी गई। जिलास्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर आपूर्ति की निगरानी की जा रही है और सभी दुकानों पर स्टॉक व मूल्य सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। नियम उल्लंघन पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक अधिक विक्रय करने वाले 981 खुदरा उर्वरक विक्रेताओं पर कार्यवाही की गई है।
बैठक में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून एवं व्यवस्था), सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां सहित विभिन्न विभाग- कृषि, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति , रेलवे तथा उर्वरक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जयपुर। ऑल इंडिया बार परीक्षा पास नहीं करने के बाद भी वकालत का प्रोफेशन करने से जुड़े मामले में जयपुर जिले की एससी-एसटी मामलों की स्पेशल कोर्ट में जज विद्यानंद शुक्ला ने बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन को अधिवक्ता के खिलाफ सम्यक कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में मामले में आरोपी पंकज स्वामी और अजीत स्वामी ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।
क्या है मामला >>>
एडवोकेट देवराज सिंह, मिनार्क जैन एवं टीसी स्वामी ने पंकज एवं अजीत की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि ऑल इंडिया बार परीक्षा पास नहीं करने पर अधिवक्ता टीनू यादव सहित अन्य अधिवक्ताओं के प्रोफेशन पर बार कौंसिल ऑफ राजस्थान ने 03 मार्च, 2025 को रोक लगा दी थी। इस तरह अयोग्य घोषित होने के बाद भी अधिवक्ता टीनू वकालत का प्रोफेशन कर रही हैं। अधिवक्ता देवराज सिंह, मिनार्क जैन और टीसी स्वामी ने अदालत को यह भी बताया कि बीसीआर के वर्जित करने के बाद भी उपरोक्त मामले में एडवोकेट टीनू यादव ने 8 मार्च, 2024 को एक आरोपी उत्तम यादव की ओर से अदालत के समक्ष वकालतनामा पेश किया गया था। साथ ही 7 जून को चालान की प्रति प्राप्त की गई एवं 24 जून को जमानत अर्जी में उपस्थिति दी गई है। प्रेक्टिस से वर्जित होने के बाद भी न्यायालय में निरंतर उपस्थित होकर पैरवी की जा रही है, ऐसे में कार्यवाही करने के आदेश दिए जाए। बाद सुनवाई अदालत ने विशिष्ट लोक अभियोजक को वजह सबूत को अदालत में पेश करने के निर्देश दे दिए।
जयपुर। आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने गुरूवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में प्रभावितों को राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्ध है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन द्वारा आश्रय स्थलों का निर्माण किया जा रहा है। फ़ूड पैकेट व अन्य आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली द्वारा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाए प्रश्न का जवाब >>>
गौरतलब है कि आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा ने शून्यकाल में सदन के सदस्य व नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली द्वारा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाए प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। कई क्षेत्रों में जलभराव का संकट उत्पन्न हुआ है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार सभी व्यवस्थाएं सुचारू करने में जुटी हुई हैं।
प्रभावित लोगों की राहत में कोताही बर्दाश्त नहीं मीणा >>>
डॉ. मीणा ने कहा कि इस अवधि में बाढ़ से प्रभावित मृतकों के आश्रितों को 104 लाख रूपए की सहायता राशि दी जा चुकी है। पशुधन की क्षति से प्रभावित व्यक्तियों को 2 लाख 53 हजार रूपए दिए गए हैं। आवासीय क्षति से प्रभावित 515 लोगों को लगभग 184 लाख रूपए की आर्थिक मदद की गई है। साथ ही, बर्तनों के लिए 193 लोगों को 10 लाख रूपए दिए गए हैं।
33 प्रतिशत नुकसान पर ही प्रभावितों को राहत >>>
आपदा प्रबंधन मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा ने कहा कि गत सरकार में अतिवृष्टि से 50 प्रतिशत नुकसान होने पर प्रभावितों को सहायता दी गई थी, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र 33 प्रतिशत नुकसान पर ही प्रभावितों को राहत पहुंचाकर सम्बल दिया है।
सुजानगढ़। तेजा दशमी के दिन देर रात करीब 2:30 बजे ऐसा माहौल हो गया जिससे तेजाजी महाराज के मेले में आए श्रद्धालु हक्का-बक्का रह गए। पुलिस दारू पीकर मंच पर चढ़ने से सांसद हनुमान बेनीवाल नाराज होकर पुलिस को खरी-खोटी सुना दी।
पटककर मेडिकल कराऊंगा-बेनीवाल >>>
गौरतलब है कि मंच पर भीड़ कंट्रोल कर रहे थाना अधिकारी सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल अचानक भड़क गए। उन्होंने कहा-आधे पुलिसवाले दारू पीते हैं। पटककर मेडिकल कराऊंगा। SHO से कहा- बकवास कर रहे हो, औकात में रहो। कुछ समय के लिए सभा में सन्नाटा छा गया लेकिन पब्लिक पुलिस वालों की हूटिंग करने लगी।
तेजा दशमी के कार्यक्रम में हनुमान बेनीवाल >>>
मंगलवार की रात चूरू के बीदासर (सुजानगढ़) में चल रहे तेजा दशमी के कार्यक्रम में हनुमान बेनीवाल पहुंचे थे। सभा को संबोधित करते हुए अचानक आक्रामक हो गए। पुलिस वालों पर नशे में होने का आरोप लगाया और मंच से उतार दिया। बेनीवाल मंगलवार रात करीब ढाई बजे बीदासर में चल रहे तेजा दशमी कार्यक्रम में गए थे। उनके साथ भीड़ भी मंच पर चढ़ गई। बेनीवाल आगे बढ़कर माइक लिए और संबोधित करने लगे। इधर पीछे SHO कैलाशचंद्र यादव और हेड कॉन्स्टेबल रमेश कुमार मंच से भीड़ को हटाने का प्रयास कर रहे थे।
बेनीवाल ने कहा- शराब पीते हुए शर्म नहीं आती >>>
अचानक बेनीवाल भड़क गए। उन्होंने कहा- थानेदार जी, आप नीचे जाओ… ए नीचे उतरो, नशा कर रखा है सभी ने। दिमाग खराब है क्या? चलो यहां से। क्या देख रहे हो मेरी तरफ, उतरो नीचे। जाओ यहां से… सेट अप… नीचे आऊं क्या मैं? बकवास कर रहे हो। दिमाग आउट हो रहा है क्या तुम्हारा? दारू पीकर मंच पर आए हो, शर्म नहीं आती। औकात में रहो अपनी।
ये आधे पुलिसवाले दारू पीते हैं। अब चुपचाप यहां से चले जाओ। मैं सभी का मेडिकल कराऊंगा पटककर। चलो यहां से। अगले पांच मिनट में यहां से चले जाना, नहीं तो तुम्हारे एसपी-आईजी मौके पर आएंगे और उनके सामने पटककर मेडिकल कराऊंगा। शराब पीते हुए शर्म नहीं आती, बड़े बेशर्म लोग हो।
मौके पर मौजूद भीड़ करने लगी हूटिंग >>>
फटकार लगाने पर पुलिसकर्मी एक-दूसरे को देखने लगे और मौके पर मौजूद भीड़ हूटिंग करने लगी। लोगों ने भी पुलिसकर्मियों को बाहर जाने के लिए कहना शुरू कर दिया। बेनीवाल ने कहा- अभी हाल ही में 600 का कचरा SI भर्ती में निकाला है, लेकिन पुराने कचरे का क्या होगा? इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मंच के पास मौजूद पुलिसकर्मी धीरे-धीरे गेट के बाहर चले गए।
किसी पुलिसकर्मी ने शराब नहीं पी थी -प्रहलाद राय >>>
बीदासर पुलिस उपाधीक्षक प्रहलाद राय ने कहा- जो बोला गया, वह गलत था। किसी भी पुलिसकर्मी ने शराब नहीं पी रखी थी। PSO ड्यूटी पर थे। मंच पर जब भीड़ चढ़ गई, तो उन्हें नीचे उतारने के लिए PSO एक बार मंच पर गए थे। बाद में वे मंच पर नहीं, बल्कि साइड में खड़े थे। जबकि फोटो के अंदर पुलिस वाले मंच पर मौजूद दिखाई दे रहे हैं। कार्यक्रम दिन में होना था, लेकिन वे रात करीब 2:30 बजे पहुंचे। उस समय थानाधिकारी सहित कई पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे। कस्बे में रामदेवजी मंदिर सहित अन्य कार्यक्रम भी चल रहे थे। कुछ पुलिसकर्मी गणगौरी चौक पर, तो कुछ अन्य स्थानों पर ड्यूटी कर रहे थे। तीन अलग-अलग जगहों पर टीमें तैनात थीं। मैं भी किसी अन्य कार्यक्रम में था। घटना की जानकारी मिलने पर बाद में वहां पहुंचा। सांसद के कार्यक्रम में आदेश आने पर PSO की ड्यूटी लगाई जाती है। यह ऑन रोड कार्यक्रम था, इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही थी।
खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर से नहीं आ पाए थे >>>
सांसद हनुमान बेनीवाल का कार्यक्रम पहले ही तय था। तेजा दशमी पर वीर तेजा मंदिर समिति की ओर से गायन, रात्रि जागरण और भंडारे का आयोजन हुआ था। सांसद बेनीवाल दोपहर में हेलिकॉप्टर से आने वाले थे। इसके लिए ढाणी स्वामियान में हेलीपैड भी तैयार किया गया था। मगर खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर यात्रा रद्द हो गई थी।
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार गुड गवर्नेन्स के मानकों पर खरा उतरते हुए आमजन के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारी उनकी नियमित मॉनिटरिंग करें। साथ ही, संबंधित विभागों से समन्वय कर भूमि आवंटन, डीपीआर, टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए, जिससे विकास कार्यों का लाभ लोगों को समय पर मिल सके।
मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग की समीक्षा बैठक >>>
श्री शर्मा मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग, तकनीक एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से काश्तकारों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में किसानों को स्वयं फसल गिरदावरी की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए एग्रीस्टेक मोबाईल ऐप विकसित किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए इस ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
गांव चलो अभियान से ग्रामीणों तक सुलभ होंगी सरकारी सेवाएं >>>
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 18 सितम्बर से प्रदेशभर में सप्ताह में तीन दिन ‘गांव चलो अभियान’ संचालित किया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों तक सरकारी सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान के तहत ग्रामीणों के सीमाज्ञान, सहमति विभाजन, नामांतरण आदि लंबित प्रकरणों को निस्तारित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यक्ति अभियान के लाभों से वंचित ना रहे।
पुराने भवनों की मरम्मत करें, गुणवत्ता का रखें ध्यान >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी गत दो वर्ष के बजट में घोषित भवन निर्माण के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए तय समय में पूरा करें। साथ ही नियमित निगरानी कर इनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने भवनों का भी आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण एवं मरम्मत की जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।
आवंटन के लंबित आवेदनपत्रों के निस्तारण के लिए योजना >>>
श्री शर्मा ने कहा कि जैसलमेर जिले के सामान्य आवंटन के लंबित आवेदनपत्रों के निस्तारण के लिए योजना बनाई जाए, साथ ही 15 दिन का अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों को निस्तारित किया जाए। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए वर्तमान नियमों में यथासंभव संशोधन कर नियमों के सरलीकरण के निर्देश भी दिए।
आधार नम्बर को राजस्व रिकॉर्ड के साथ मेपिंग का कार्य समस्त जिलों में प्रारम्भ >>>
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि फार्मर रजिस्ट्री योजना के माध्यम से किसानों के आधार नम्बर को राजस्व रिकॉर्ड के साथ मेपिंग का कार्य समस्त जिलों में प्रारम्भ कर दिया गया है। अब तक 87 प्रतिशत किसानों की फार्मर आईडी जनरेट की जा चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य के 48 हजार 463 गांवों की जिओ रेफरेंस शीट फाइल भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड कर 4.49 करोड़ यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नम्बर (ULPIN) जारी किए जा चुके हैं। बैठक में राजस्व न्यायालयों के लिए रेवेन्यू कोर्ट मॉर्डनाइजेशन सिस्टम, राजस्व इकाइयों का पुर्नगठन, पूर्णकालिक सरकारी अधिवक्ताओं को रिटेनर शुल्क, उपनिवेशन क्षेत्र में भूमि आवंटन की दर में परिवर्तन, ग्राम दान एवं भूदान अधिनियम सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राजस्व मंत्री श्री हेमन्त मीणा एवं मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का प्रमुख ध्येय अंत्योदय की संकल्पना को सिद्धि की ओर ले जाते हुए अंतिम छोर के व्यक्ति को अधिक से अधिक राहत पहुंचाना है। 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक संचालित होने वाला शहर चलो अभियान इस उद्देश्य की प्राप्ति में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों को अभियान के सफल संचालन के लिए प्रभावी कार्ययोजना के अंतर्गत कार्य करने के लिए निर्देशित किया, ताकि शहरी निकायों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं सुदृढ़ हों और सेवाओं को नई गति मिले।
पार्षदों से चर्चा कर समस्याओं का होगा चिन्हीकरण >>>
श्री शर्मा मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभियान से पूर्व 4 से 13 सितम्बर तक प्री-कैम्प आयोजित किए जाएं। इस दौरान अधिकारी शहरी निकायों के वार्डों में पहुंचें और पार्षदों से चर्चा कर समस्याओं का चिन्हीकरण करें। इससे आमजन को मुख्य कैम्प के दौरान सुगम और त्वरित राहत मिल सकेगी।
जन उपयोगी कार्यों के त्वरित निस्तारण से आमजन को मिलेगी राहत >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी निकायों में सफाई व्यवस्था सुधार, नई स्ट्रीट लाइट्स लगाने, आवारा पशुओं को पकड़ने, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, सार्वजनिक स्थानों का रखरखाव और सौंदर्यकरण, सड़क मरम्मत जैसे जनोपयोगी कार्य इस अभियान में किए जाएंगे। उन्होंने पीएम स्वनिधि ऋण वितरण, पीएम सूर्यघर 150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना के आवेदन प्राप्त करने के साथ ही सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी एवं विद्यालय आदि के मरम्मत के कार्य विशेष रूप से संपादित करने के लिए भी निर्देशित किया।
ग्रामीण क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिए करें विशेष कार्य >>>
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सुनियोजित विकास को गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश के सुदृढ़ बुनियादी ढांचे को गति मिल सके। उन्होंने भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के सुनियोजित विकास पर विशेष जोर देते हुए स्वच्छता, पेयजल, सड़क, सीवरेज जैसी आधारभूत सुविधाओं पर विशेष रूप से कार्य करने के लिए निर्देशित किया।
बैठक में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री झाबर सिंह खर्रा एवं नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की 8 करोड़ जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने तथा पारदर्शी एवं जवाबदेही सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी अधिकारी-कर्मचारी जनहित से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ जान-माल के नुकसान पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर्स अतिवृष्टि से उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर कार्य करें।
आवश्यक सेवाओं पर संबंधित जिला कलक्टर से गहन चर्चा >>>
श्री शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में विभिन्न मुद्दों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों के साथ ही आमजन के लिए चिकित्सा सेवाएं, खाद्य सामग्री की उपलब्धता सहित आवश्यक सेवाओं पर संबंधित जिला कलक्टर से गहन चर्चा करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने घग्गर नदी में पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए इस संबंध में हनुमानगढ़ जिला कलक्टर को पंजाब एवं हरियाणा राज्यों से समन्वय बनाते हुए अलर्ट मोड पर कार्य करने के लिए निर्देशित किया। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश के 21 जिलों में असामान्य तथा 16 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों का रेस्टोरेशन कार्य तेजी से कराया जा रहा है।
हर प्रभावित को राहत के लिए 2 सितम्बर से तीन दिवसीय अभियान >>>
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अतिवृष्टि से प्रभावित कोई भी व्यक्ति सहायता से वंचित नहीं रहे। इस संबंध में उन्होंने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में 2 सितम्बर से 3 दिवसीय विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए, जिसमें प्रभावितों को नियमानुसार सहायता राशि एवं अन्य राहत सुनिश्चित हो। श्री शर्मा ने जिला कलक्टर्स को फसल खराबे पर गिरदावरी रिपोर्ट शीघ्र भिजवाने के लिए निर्देशित भी किया। मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में अतिवृष्टि और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित राजस्थान के नागरिकों को राहत एवं बचाव के संबंध में भी चर्चा कर आवश्यक निर्देश प्रदान किए।
15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक शहर चलो अभियान >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी निकायों में सफाई व्यवस्था सुधार, नई स्ट्रीट लाइट्स को लगाने, आवारा पशुओं को पकड़ने, शहरी निकायों के लंबित प्रकरणों के निस्तारण, सड़क मरम्मत जैसे जनोपयोगी कार्य सम्पादित करने के लिए राज्य सरकार प्रदेशभर में 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक शहर चलो अभियान संचालित करने जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन अधिक से अधिक संख्या में लाभान्वित हो। साथ ही, अभियान में लगने वाले मुख्य कैंप से पहले तैयारी कैंप लगाकर आमजन से आवेदन प्राप्त किए जाएं।
हर पंचायत समिति की 2 ग्राम पंचायतों पर संचालित होगा गांव चलो अभियान >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 18 सितंबर से हर पंचायत समिति की दो ग्राम पंचायतों में ग्राम चलो अभियान चलाएगी। यह अभियान सप्ताह में तीन दिन चलेगा। सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन, स्वास्थ्य शिविर, विद्यालय इत्यादि के मरम्मत कार्य, बीज मिनी कीट वितरण आदि कार्य होंगे। साथ ही, प्रदेशभर में 2 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक सहकार सदस्यता अभियान भी संचालित किया जाएगा। श्री शर्मा ने इन सभी अभियानों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए।
भ्रष्ट, लापरवाह और अनुशासनहीन कार्मिकों पर हो सख्त कार्रवाई- >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी और कार्मिक आमजन के कार्यों का निस्तारण निष्ठा एवं समर्पण भाव से करें। राज्य सरकार कार्य में लापरवाही बरतने वाले तथा भ्रष्ट कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और समर्पित कार्मिकों को सम्मानित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने जिला कलक्टर्स को निर्देश दिए कि वे भ्रष्ट, लापरवाह तथा अनुशासनहीन कार्मिकों की सूची तैयार कर राज्य सरकार को भिजवाएं, ताकि ऐसे कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
कानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता, अपराध पर पुलिस तुरंत ले सख्त एक्शन >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के क्रम में छोटी-बड़ी हर घटना पर तत्परता के साथ कड़ी कार्यवाही करें। त्यौहारी सीजन को देखते हुए मंदिरों आदि धार्मिक स्थलों तथा पर्यटन स्थलों पर अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और आमजन के साथ मिलकर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि आपराधिक घटनाओं के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई का प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का कानून-व्यवस्था के प्रति विश्वास कायम रहे। उन्होंने जिला कलक्टर्स को विद्यालय, आंगनबाड़ी और अस्पताल आदि भवनों की मरम्मत या नवीन निर्माण के प्रस्ताव अतिशीघ्र भिजवाने के लिए निर्देशित किया। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीएम स्वनिधि योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, लखपति दीदी योजना, पीएम कुसुम योजना से अधिक से अधिक पात्र लोगों को जोडे़ं। श्री शर्मा ने पंच गौरव कार्यक्रम की अद्यतन प्रगति, जिलों में राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के अंतर्गत प्राप्त हुए एमओयू की स्थिति तथा ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स पर चर्चा, बजट घोषणाओं की समयबद्ध क्रियान्विति और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त प्रकरणों के निस्तारण की समीक्षा करते हुए भी आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने आने वाले त्यौहारों को देखते हुए जिलों में सफाई व्यवस्था, नई स्ट्रीट लाइट्स लगाने तथा सड़क मरम्मत से संबंधित कार्य भी शीघ्र पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया। बैठक में मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव शर्मा, विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव तथा पुलिस के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही, प्रदेशभर से संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स, रेंज आईजी एवं पुलिस अधीक्षक वीसी के माध्यम से बैठक से जुड़े।
जयपुर। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने मंगलवार को जयपुर में “वॉयसेज़ ऑफ भारत : युवा फॉर सस्टेनेबिलिटी” अभियान के तीसरे न्यूज़लेटर का विमोचन किया। उन्होंने सितंबर के अंतिम सप्ताह में जयपुर में प्रस्तावित दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में भी आमंत्रण स्वीकार किया।
युवा इसके सशक्त वाहक >>>
डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने इस दौरान कहा कि सतत विकास समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हमारे युवा इसके सशक्त वाहक बन सकते हैं। ‘वॉयसेज़ ऑफ़ भारत : युवा फ़ॉर सस्टेनेबिलिटी’ राजस्थान से शुरू होकर अब राष्ट्रीय आंदोलन बन रहा है। उन्होंने द्वितीय राष्ट्रीय युवा सस्टेनेबिलिटी सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्रेरित और प्रशिक्षित करना >>>
इस एक वर्षीय अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून, 2025 को की थी। “वॉयसेज़ ऑफ भारत: युवा फॉर सस्टेनेबिलिटी” अभियान का उद्देश्य युवाओं को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए कहानी कहने, पॉडकास्ट, वीडियो और डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्रेरित और प्रशिक्षित करना है। अभियान के तहत अब तक कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें वेबिनार श्रृंखला और जयपुर में आयोजित पहला राष्ट्रीय युवा स्थिरता सम्मेलन शामिल है।
जयपुर। वर्षाजनित परिस्थितियों से निपटने के लिए जयपुर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। जयपुर जिले में वर्षा से प्रभावित हालातों पर नियंत्रण और राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने स्वयं फील्ड का मोर्चा संभाल रखा है। मंगलवार को उन्होंने कोटखावदा, बस्सी एवं तुंगा सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर वर्षाजनित परिस्थितियों का निरीक्षण किया।
जलभराव, डूब क्षेत्र एवं लो-लाइन एरिया में विशेष सतर्कता बरतने के आदेश >>>
निरीक्षण के दौरान डॉ. सोनी ने स्थानीय ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और तत्काल राहत पहुंचाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने जलभराव, डूब क्षेत्र एवं लो-लाइन एरिया में विशेष सतर्कता बरतने के आदेश देते हुए कहा कि आमजन की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जाए। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देश पर जिला प्रशासन की 40 से अधिक टीमें फील्ड में सक्रिय रूप से तैनात की गई। उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लिया एवं जल निकासी सहित अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही को अंजाम दिया।
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी जिले में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि जिले के किसी भी हिस्से में आमजन को कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वर्षाजनित परिस्थितियों से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, खाद्य सामग्री एवं चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। रपट वाले स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएं और आवागमन पर निगरानी रखी जाए।
आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष से करें तुरंत संपर्क >>>
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने आमजन से अपील की है कि वे जलभराव और वर्षाजनित परिस्थितियों में अतिरिक्त सतर्कता बरतें। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर वे नियंत्रण कक्ष अथवा स्थानीय प्रशासन को तुरंत सूचित करें ताकि समय पर राहत पहुंचाई जा सके। साथ ही यह भी अपील की गई है कि बहते पानी की रपट अथवा पुलिया को पार न करें, बच्चों को जलभरे स्थानों और नालों के पास न जाने दें तथा जल स्रोतों से दूर रहें। किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा स्थापित बाढ़ नियंत्रण कक्ष से तुरंत संपर्क किया जा सकता है। इस कक्ष के दूरभाष नंबर 0141-2204475 और 0141-2204476 हैं, जहां 24 घंटे संपर्क किया जा सकता है। जिला नियंत्रण कक्ष में प्राप्त शिकायतों पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
राजकीय अवकाश के बावजूद संचालित निजी विद्यालयों को नोटिस >>>
बाबा रामदेव जयंती -तेजा दशमी के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा घोषित राजकीय अवकाश के दिन कुछ गैर-सरकारी विद्यालयों द्वारा अवकाश घोषित नहीं कर विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु बुलाए जाने की शिकायतें कलेक्ट्रेट एवं विभागीय अधिकारियों को प्राप्त हुईं। जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के निर्देश पर इन शिकायतों पर तत्परता से संज्ञान लिया गया और संबंधित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त की गई।
विद्यालय बंद करने तथा स्पष्टीकरण सहित मांगी पालना रिपोर्ट >>>
जांच में टिओलर हाई स्कूल सिरसी रोड जयपुर, टिओलर अनबाउण्डेड सिरसी रोड जयपुर, जय श्री पेरिवाल स्कूल वैशाली नगर जयपुर, जय श्री पेरिवाल स्कूल महापुरा जयपुर तथा सवाई मानसिंह विद्यालय रामबाग सर्किल जयपुर के संचालित होने की पुष्टि हुई। इस पर जिला कलक्टर के निर्देशानुसार इन विद्यालयों के सचिवों को तत्काल नोटिस जारी कर विद्यालय बंद करने तथा स्पष्टीकरण सहित पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पाबंद किया गया।
साथ ही जिला कलक्टर के निर्देश पर संबंधित विद्यालयों को यह भी स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया है कि भविष्य में राजकीय अवकाश के दिनों में विद्यालय पूर्णतः बंद रखे जाएं और विभागीय आदेशों की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही संबंधित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को भी कठोरता से पालना करवाने और भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने हेतु निर्देशित किया गया है। अवहेलना की स्थिति में तत्काल कार्यवाही हेतु स्पष्ट प्रस्ताव भिजवाने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी), शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएंडएल) के सहयोग से कल (बुधवार, 3 सितंबर, 2025) नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को एक ही परिसर में स्थापित किए जाने को लेकर पर दिशानिर्देश जारी करेगा।
विभागों के प्रतिनिधि और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी रहेंगे उपस्थित >>>
इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के दोनों विभागों के प्रतिनिधि और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी उपस्थित रहेंगे।
देश में 2.9 लाख से अधिक आंगनवाड़ियों केंद्र >>>
यह पहल, विकसित भारत की मानव पूंजी के लिए एक मजबूत आधारशिला बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ये दिशानिर्देश, आंगनवाड़ियों और स्कूलों को एक ही परिसर स्थापित करने के साथ एकीकृत मॉडलों के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) के महत्व पर जोर देते हैं। 2.9 लाख से अधिक आंगनवाड़ियों केंद्र पहले से ही स्कूलों के परिसर में स्थित हैं, इसलिए ये दिशानिर्देश संचालन संबंधी आवश्यक स्पष्टता प्रदान करेंगे और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को इस मॉडल को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में सक्षम बनाएंगे।
जयपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री शेखावत ने रविवार को रामदेवरा में आयोजित नेत्र कुंभ शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने रामदेवरा में आयोजित नेत्र महाकुंभ को सेवा एवं समरसता का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि बाबा रामदेव के भाद्रपद मेले में हो रहा यह आयोजन स्वयं में पुण्य का सर्जक है। उन्होंने कहा कि लक्षाधिक लोगों तक नेत्र सेवा पहुंचाना एक अभिनंदनीय प्रयास है। उन्होंने इस सेवा संकल्प से जुड़े प्रत्येक चिकित्सक, स्वयंसेवक व आयोजक का उन्होंने हार्दिक अभिनंदन किया एवं इसे जनकल्याण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया।
नेत्रहीनों को रोशनी देना है सबसे बड़ा दान >>>
निरीक्षण के दौरान श्री शेखावत ने स्वयं का ब्लड प्रेशर चेक करवाया तथा रोगियों की सुविधा और सेवा के लिए की गई व्यवस्थाओं की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर समाज सेवा एवं जनकल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। नेत्रहीनों को रोशनी देना सबसे बड़ा दान है और नेत्र कुंभ इस पुण्य कार्य को समर्पित है।
दौसा। राजस्व मंडल अजमेर ने 38 तहसीलदार और 42 नायब तहसीलदारों की तबादला लिस्ट जारी की है। इसमें गत दिनों वकीलों से विवाद के बाद चर्चा में आए लालसोट तहसीलदार अमितेश कुमार मीणा को निर्वाचन शाखा सीकर जिले में लगाया है।
वकीलों ओर राजस्वकर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर किया था धरना-प्रदर्शन >>>
गौरतलब है कि 19 अगस्त को तहसील कार्यालय में हंगामा व मारपीट की घटना हुई थी। इसके बाद तहसीलदार ने थाने के सामने धरना दिया तथा उनके सोशल मीडिया पर बयान भी विवाद का कारण बने। इस विवाद के बाद वकीलों ओर राजस्वकर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन किए थे। 25 अगस्त को हुए समझौते के बाद लालसोट तहसीलदार को जिला कलक्टर ने छुट्टी पर भेज दिया था और राहुवास तहसीलदार को चार्ज सौंपा था। अब राजस्व मंडल ने लालसोट तहसीलदार का तबादला कर दिया है तथा बारां जिले के अटरू से सत्यनारायण शर्मा को तहसीलदार लालसोट लगाया है। इनके अलावा जैसलमेर के सम से गजानंद मीणा को तहसीलदार दौसा, अजमेर राजस्व मंडल से रवि प्रकाश गुप्ता को तहसीलदार रामगढ़ पचवारा लगाया गया है। वहीं रामगढ़ पचवारा एसडीएम कार्यालय में नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह को जयपुर, जयपुर के मनोहरपुर से दिलीप सिंह को राहुवास, सीकर जिले के श्रीमाधोपुर से नायब तहसीलदार संग्राम सिंह गुर्जर को मंडावर तथा बाड़मेर जिले के एसीईएम फास्ट ट्रैक वीरेंद्र कुमार को बालाहेड़ी नायब तहसीलदार लगाया है।
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद् की बैठक में मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना के लाभार्थियों को सौर ऊर्जा से जोड़कर 150 यूनिट निःशुल्क बिजली देने, प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में सुव्यवस्थित सीवरेज सिस्टम बनाने के लिए सीवरेज एवं अपशिष्ट जल नीति-2016 में संशोधन, राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 लाने, राजसेस महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए शीघ्र भर्तियां करने सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।
1 करोड़ 4 लाख घरेलू श्रेणी के रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ >>>
उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री सुमित गोदारा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती एवं सुलभ सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जादाता बनाने की दिशा में एक अनूठी पहल की है। प्रदेश में जल्द ही पीएम सूर्यघर 150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना लागू की जाएगी। घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाने की दिशा में देश के किसी भी राज्य में अपनी तरह की यह महत्वाकांक्षी योजना है। श्री गोदारा ने बताया कि इस निर्णय का लाभ 1 करोड़ 4 लाख घरेलू श्रेणी के रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं को होगा और वे सौर ऊर्जा से जुड़कर प्रतिमाह 100 यूनिट के स्थान पर अब 150 यूनिट तक निःशुल्क बिजली का लाभ उठा पाएंगे।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना के रजिस्टर्ड लाभार्थियों को और अधिक लाभ देने की मंशा के साथ पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को लीवरेज करते हुए रूफ टॉप सोलर पैनल लगाकर 150 यूनिट प्रतिमाह निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। साथ ही, ऐसे परिवारों, जिनके घर में सोलर प्लांट लगाने के लिए पर्याप्त छत नहीं है, उनके लिए सामुदायिक सोलर संयंत्र लगाने की घोषणा भी बजट में की गई थी।
150 यूनिट से अधिक औसत मासिक उपभोग >>>
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना में पंजीकृत 27 लाख लाभार्थी परिवारों, जिनका औसत मासिक उपभोग 150 यूनिट से अधिक है, उनके घर की छत पर इस योजना में 1.1 किलोवाट क्षमता के निःशुल्क सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसके लिए ऐसे प्रत्येक उपभोक्ता को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत भारत सरकार से प्रति संयंत्र 33,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। वहीं राज्य सरकार द्वारा 17,000 रूपए प्रति संयंत्र की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे 1.1 किलोवाट क्षमता का पैनल पूरी तरह निःशुल्क हो जाएगा और 150 यूनिट तक मासिक खपत पर उपभोक्ता का मासिक बिजली बिल शून्य हो जाएगा। वहीं करीब 27 लाख परिवारों के रूफ टॉप संयंत्र लगने से 3,000 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता सृजित होगी।
150 यूनिट से कम औसत मासिक उपभोग >>>
उन्होंने बताया कि 150 यूनिट से कम औसत मासिक उपभोग वाली श्रेणी के अन्तर्गत प्रथम कैटेगरी में मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना के ऐसे 11 लाख लाभार्थी परिवार, जिनके पास अपने घर की छत पर निःशुल्क रूफ टॉप सोलर संयंत्र लगाने के लिए छत उपलब्ध है, उनके लिए वितरण कंपनियों द्वारा अपने चयनित वेंडर्स के माध्यम से निःशुल्क 1.1 किलोवाट क्षमता के सोलर संयंत्र लगाए जाएंगे। द्वितीय कैटेगरी में ऐसे रजिस्टर्ड शेष उपभोक्ता जिनके रूफ टॉप संयंत्र लगाने के लिए छत उपलब्ध नहीं है, के लिए डिस्कॉम्स सामुदायिक सोलर संयंत्र लगाएंगे। साथ ही, इन संयंत्रों पर वर्चुअल नेट मीटरिंग के माध्यम से ऐसे उपभोक्ताओं को इन सामुदायिक सोलर संयंत्रों से मिलने वाली बिजली के रूप में 150 यूनिट निःशुल्क बिजली प्रतिमाह उपलब्ध होगी। सामुदायिक सोलर संयंत्रों की स्थापना में होने वाला सम्पूर्ण व्यय डिस्कॉम्स वहन करेंगे। इससे उन लोगों को भी निःशुल्क बिजली योजना का लाभ मिलेगा जिनके पास स्वयं की छत उपलब्ध नहीं है।
प्रथम 10 लाख उपभोक्ताओं को डिस्कॉम्स देंगे 1100-1100 रूपये >>>
उन्होंने बताया कि शून्य कार्बन उत्सर्जन की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को हासिल करने में राजस्थान सरकार की यह योजना प्रेरक पहल एवं मील का पत्थर साबित होगी। इस सामाजिक एवं राष्ट्रीय सरोकार में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रथम 5-5 लाख विद्युत उपभोक्ताओं (150 यूनिट से अधिक तथा इससे कम औसत मासिक उपभोग, दोनों ही श्रेणियों में प्रथम 5-5 लाख उपभोक्ताओं) के बैंक खातों में डिस्कॉम्स डीबीटी के माध्यम से 1100 रूपये की राशि हस्तांतरित करेंगे।
नगरीय निकायों में 1 लाख के स्थान पर 2 लाख स्ट्रीट लाइटें >>>
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने बताया कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ-साथ आवासीय क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए सड़कों पर एक लाख एलईडी स्ट्रीट लाईटें लगाने की घोषणा वर्ष 2025-26 के बजट में की गई थी। नगरीय निकायों की संख्या 282 से बढ़कर 312 होे जाने एवं कई नगरीय निकायों में पुरानी हो चुकी लाइटों के स्थान पर नवीन लाइटें लगाने की जरूरत के मद्देनजर अब एक लाख लाइटों के स्थान पर 2 लाख स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। संशोधित बजट घोषणा के अन्तर्गत इस पर अनुमानित 160 करोड़ रूपये का व्यय होगा।
राजसेस महाविद्यालयों में भर्तियों से विद्यार्थियों को मिलेगी बेहतर शिक्षा >>>
उप मुख्यमंत्री डॉ. बैरवा ने बताया कि प्रदेश में राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसाइटी (राजसेस) का गठन गत सरकार के समय वर्ष 2020 में किया गया था और इसके अंतर्गत 374 महाविद्यालय संचालित हैं। राजसेस के अन्तर्गत संचालित इन महाविद्यालयों में कुल 10,594 पद हैं, जिनमें 5,299 शैक्षणिक तथा 5,295 अशैक्षणिक पद हैं। ये सभी पद वर्तमान में रिक्त हैं तथा शिक्षण कार्य विद्या संबल द्वारा करवाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राजसेस महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए 4,724 शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक संविदा पदों पर भर्ती की जाएगी। 3,540 शैक्षणिक पदों पर यूजीसी मापदंडों के अनुरूप योग्य अभ्यर्थियों का नेट/स्लेट/सेट/पीएचडी के माध्यम से भर्ती करने पर विचार किया जा रहा है। इन सभी पदों पर भर्ती के माध्यम से हायर किए जाने वाले कार्मिकों का सेवाकाल 5 वर्ष रहेगा। इन पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा पैटर्न तय करने एवं भर्ती एजेंसी के निर्धारण तथा राजसेस हायरिंग ऑफ मैनपावर रूल्स 2023 में संशोधन की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
सीवरेज एवं अपशिष्ट जल नीति-2016 में संशोधन >>>
डॉ. बैरवा ने बताया कि प्रदूषित जल से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य सम्बन्धी दुष्प्रभावों से बचाव के लिए प्रदेश में सीवरेज एवं अपशिष्ट जल नीति-2016 में संशोधन को कैबिनेट में मंजूरी दी गई है। यह संशोधित नीति स्वच्छ भारत मिशन की अवधारणा के अनुरूप सुव्यवस्थित सीवरेज सिस्टम बनाकर सभी घरों को उससे जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंनेे बताया कि राज्य सरकार की मंशा है कि वर्षा के अलावा कोई पानी नाली अथवा सड़कों पर नहीं बहे। पुराने सीवरेज नेटवर्क के कारण इसे पूरा करने में आ रही समस्याओं को देखते हुए इस नीति में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अपशिष्ट जल प्रबंधन क्षेत्र में तकनीकी बदलाव एवं नवाचारों और विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों को समाहित करते हुए को राज्य सीवरेज एवं अपशिष्ट जल नीति-2016 का संशोधित प्रारूप तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि संशोधित नीति के माध्यम से राज्य के सभी नगरीय निकायों में सीवरेज व्यवस्था स्थापित कर उसका प्रभावी उपयोग एवं सर्कुलर इकॉनोमी के सिद्धांत पर कार्य करते हुए सीवेज शोधन उपरान्त प्राप्त जल, खाद, गैस आदि का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि संशोधित नीति में नमामि गंगे परियोजनाओं के अनुरूप हैम मॉडल को अपनाया गया है। इसमें कुल परियोजना लागत की 40 प्रतिशत राशि कार्य समाप्ति एवं शेष 60 प्रतिशत राशि संचालन-संधारण समयावधि में समान किश्तों में प्राइवेट पार्टनर को दी जाएगी।
राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 >>>
विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने बताया कि प्रलोभन अथवा कपटपूर्वक धर्मान्तरण के प्रयासों को रोकने के लिए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 विधानसभा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में अवैध रूप से धर्मान्तरण को रोकने के सम्बन्ध में कोई विशिष्ट कानून नहीं है, इसलिए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 को पिछले सत्र में विधानसभा में लाया गया था। अब इस विधेयक को वापस लेकर इसमंे और कठोर प्रावधान करते हुए राजस्थान विधिविरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2025 का नया प्रारूप विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। मंत्रिमण्डल की बैठक में इस विधेयक के नये प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
उन्होंने बताया कि इस विधेयक के कानून बनने के उपरान्त कोई व्यक्ति या संस्था, किसी व्यक्ति पर मिथ्या निरूपण, कपटपूर्वक, बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव आदि का प्रयोग कर धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकेंगे। अगर कोई व्यक्ति अथवा संस्था ऐसा कृत्य करते हैं, तो उन्हें कठोर दण्ड दिया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति केवल विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से विवाह करता है, तो ऐसा विवाह शून्य होगा। इस विधि में अपराध गैर-जमानती व संज्ञेय होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में मूल पैतृक धर्म में वापसी को धर्म परिवर्तन की परिभाषा में सम्मिलित नहीं किया गया है। अवैध धर्मान्तरण पर न्यूनतम 7 वर्ष एवं अधिकतम 14 वर्ष के कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रूपये का जुर्माना, नाबालिग, दिव्यांग, महिला, एससी, एसटी वर्ग के पीड़ित के विरूद्ध ऐसा अपराध करने पर न्यूनतम 10 वर्ष एवं अधिकतम 20 वर्ष के कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रूपये का जुर्माना, सामूहिक धर्म परिवर्तन पर न्यूनतम 20 वर्ष एवं अधिकतम आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। धर्म परिवर्तन के लिए विदेशी संस्थान एवं अवैध संस्थान से धन प्राप्त करने पर न्यूनतम 10 वर्ष एवं अधिकतम 20 वर्ष के कारावास एवं न्यूनतम 20 लाख रूपये जुर्माना प्रस्तावित किया गया है। भय, बल, विवाह का वादा, विवाह, नाबालिग, महिला अवैध व्यापार जैसे अपराधों के लिए न्यूनतम 20 वर्ष एवं अधिकतम आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रूपये का जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि विधेयक में अपराध की पुनरावृति पर आजीवन कारावास तक सजा एवं न्यूनतम 50 लाख रूपये का जुर्माना, अवैध धर्मान्तरण में लिप्त संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द करने, राज्य सरकार द्वारा ग्राण्ट बंद किए जाने, जिस स्थान पर अवैध धर्म परिवर्तन हुआ है उस सम्पत्ति की जांच के पश्चात जब्ती अथवा गिराए जाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस प्रस्तावित कानून में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होगा जिसने धर्म परिवर्तन करवाया है।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के सेवा नियमों को मंजूरी >>>
श्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मंत्रालयिक एवं अधीनस्थ सेवा संवर्ग के पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2014 में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन किया गया था, लेकिन सेवा नियम अब तक नहीं बनाए गए थे। मंत्रिमंडल की बैठक में बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों हेतु नए सेवा नियम राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (गैज़ेटेड स्टाफ) सर्विस रूल्स, 2025 एवं राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड (मिनिस्टीरियल एंड सबऑर्डिनेट सर्विसेज) रूल्स, 2025 बनाए जाने के साथ ही राजस्थान सबऑर्डिनेट एंड मिनिस्टीरियल सर्विसेज (कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) रूल्स, 2022 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इन नियमों के लागू होने के बाद बोर्ड में नियमित कार्मिकों की भर्ती का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे बोर्ड का कार्य सुचारू एवं प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेगा।
विभिन्न संवर्गों में पदोन्नति के अवसरों में वृद्धि >>>
उन्होंने बताया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग में अन्वेषणकर्ता (सांख्यिकी सहायक) पद का पदनाम एवं पे-लेवल आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अनुसार सहायक सांख्यिकी अधिकारी के अनुरूप करने, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद का संशोधित पे-लेवल पूर्व में एल-2 निर्धारित करने के कारण इस पद से पदोन्नति के पद जैसे दफ्तरी, रिकॉर्ड लिफ्टर तथा लेबोरेट्री ब्वॉय का पे-लेवल संशोधित कर एल-3 किए जाने तथा कारागार विभाग में वरिष्ठ प्रहरी के पद को विलोपित किए जाने की मंजूरी भी मंत्रिमंडल में दी गई। इसके लिए राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम-2017 की अनुसूची-।। में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य कृषि विपणन सेवा नियम, 1986 की वर्तमान अनुसूची में अतिरिक्त निदेशक का पद सम्मिलित नहीं होने के कारण अनुसूची में संशोधन कर इस पद को सम्मिलित किया जाएगा। साथ ही, इस सेवा में उप निदेशक एवं सहायक निदेशक के पद सौ प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने के कारण उनकी अनुसूची में अंकित सीधी भर्ती की न्यूनतम अर्हताएं एवं अधिकतम आयु सीमा की प्रविष्टियों को हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भू-जल विभाग में पदोन्नति के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने और विभागीय आवश्यकता को देखते हुए अधीक्षण भू-भौतिकविद् एवं अधीक्षण रसायनज्ञ के एक-एक नए पद सृजित किए गए हैं। इसके लिए राजस्थान भू-जल सेवा नियम, 1969 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहन देते हुए आने वाले त्यौहार के सीजन में स्वदेशी उत्पादों को खरीदें। इससे स्थानीय कारीगरों को अधिक से अधिक रोजगार मिलेगा और हमारे लघु एवं कुटीर उद्योग सशक्त होंगे।
दूदू में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास >>>
श्री शर्मा रविवार को दूदू में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम के दौरान कहा कि समाज के अंतिम पायदान के व्यक्ति के उत्थान से ही देश का विकास संभव है। उनके कल्याण से ही देश और प्रदेश की प्रगति सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। विकास एवं गरीब कल्याण की योजनाओं की प्रभावी शुरूआत की गई। साथ ही, उनके मार्गदर्शन में आतंकवाद-नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही दुनिया में भारत का गौरव बढ़ा है।
संकल्प पत्र में किए हर वादे को करेंगे पूरा >>>
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित राजस्थान का रोडमैप भी बनाया गया है। हम निरंतर इस दिशा में काम कर रहे हैं। राज्य सरकार संकल्प पत्र में किए हर वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री शर्मा ने आह्वान किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदेश के हर जरूरतमंद तक पहुंचाने में आमजन सक्रिय भूमिका निभाएं।
रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौते जैसे किए अभूतपूर्व निर्णय >>>
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल आपूर्ति और उपलब्धता के क्षेत्र में प्राथमिकता से कार्य कर रही है। रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, इंदिरा गांधी नहर, गंगनहर, माही बांध जैसी परियोजनाओं के माध्यम से जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, 2027 तक प्रदेश के किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले 20 महीने में जो विकास कार्य करवाए हैं, उतने पूर्ववर्ती सरकार पांच साल में भी नहीं करवा पाई।
मुख्यमंत्री ने हरियालो राजस्थान के अंतर्गत पिछले वर्ष लगभग 7.5 करोड़ पौधे लगाए थे। इस वर्ष हमने 10 करोड़ का लक्ष्य रखा था, लेकिन 11 करोड़ से अधिक पौधारोपण का कार्य हुआ है। 5 साल में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने आमजन से एक पेड़ मां के नाम लगाने का आह्वान किया।
गेंहू के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अब 150 रूपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस >>>
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में निरंतर बढ़ोतरी की जा रही है। पिछले वर्ष किसानों को गेहूं के एमएसपी पर 125 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया गया था। अब 150 रूपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सभी क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित कर रही है। दूदू के लिए 271 करोड़ रुपये की लागत से विश्व बैंक द्वारा ईपीसी मोड अंतर्गत स्वीकृत दूदू-सांभर-भाटीपुरा सड़क का निर्माण करवाया जा रहा है। साथ ही, 90 करोड़ रुपये से रसाईनी-मौजमाबाद-झाग-रामपुरा ऊँटी-बगरू सड़क निर्माण करवाया जा रहा है। हमारी सरकार ने दौसा से कुचामन मार्ग जो दूदू और सांभर से होकर गुजरता है, उसके सुदृढ़ीकरण के लिए 32 करोड़ 66 लाख रुपये आवंटित किए हैं। उन्होंने ग्राम साखनू में बाईपास निर्माण, 40 करोड़ रुपये से छापरवाड़ा बांध की नहरों का नवीनीकरण, दूदू में जिला अस्पताल के भवन का निर्माण और मोहनपुरा-फागी में औद्योगिक क्षेत्र आदि कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि ये दूदू के विकास में नया आयाम स्थापित करेंगे।
उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले 20 महीनों में दूदू क्षेत्र को विकास की कई सौग़ातें दी है। आज इस अवसर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आधारभूत संरचना से जुड़े लगभग 50 करोड़ की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास हुआ है, जिससे इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।
इन कार्यों का हुआ लोकार्पण एवं शिलान्यास >>>
मुख्यमंत्री ने दूदू विधानसभा क्षेत्र के लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, सड़क निर्माण, मरम्मत व भवन निर्माण कार्यों एवं लगभग 10.5 करोड़ रुपये की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र, स्वास्थ्य कल्याण केंद्र, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट भवन का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही 10 करोड़ रुपये की लागत के एकीकृत आयुष चिकित्सालय, दूदू एवं 9 करोड़ की लागत के राजकीय पॉलिटेनिक महाविद्यालय, फागी के भवन का शिलान्यास किया । कार्यक्रम में परिवहन विभाग एवं मारूति सुजुकी इण्डिया लिमिटेड ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ए.डी.टी.टी.) के ऑटोमेशन कार्य निष्पादन के एमओए करार पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम में पंचायतीराज राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी, विधायक श्री रेवंतराम डांगा, श्री रामस्वरूप लाम्बा, श्री राधेश्याम बैरवा, श्री अरूण चौधरी, जिला प्रमुख श्रीमती रमा देवी चोपड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं भारी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
जयपुर। राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना के लाभार्थियां को सौर ऊर्जा से जोड़ कर 150 यूनिट निशुल्क बिजली देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद् की बैठक में यह निर्णय किए गए।
बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने पत्रकारों को बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती एवं सुलभ सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा दाता बनाने की दिशा में एक अनूठी पहल की है और प्रदेश में जल्द ही पीएम सूर्यघर 150 यूनिट निशुल्क बिजली योजना लागू की जाएगी।
उपभोक्ताओं को होगा फायदा >>>
घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाने की दिशा में देश के किसी भी राज्य में अपनी तरह की यह महत्वाकांक्षी योजना है। गोदारा ने बताया कि इस निर्णय का लाभ एक करोड़ चार लाख घरेलू श्रेणी के रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं को होगा और वे सौर ऊर्जा से जु? कर प्रतिमाह 100 यूनिट के स्थान पर अब 150 यूनिट तक निशुल्क बिजली का लाभ उठा पाएंगे।
सरकार ने की थी घोषणा >>>
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना के रजिस्टर्ड लाभार्थियों को और अधिक लाभ देने की मंशा के साथ पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को लीवरेज करते हुए रूफ टॉप सोलर पैनल लगाकर 150 यूनिट प्रतिमाह निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। साथ ही ऐसे परिवारों, जिनके घर में सोलर प्लांट लगाने के लिए पर्याप्त छत नहीं है, उनके लिए सामुदायिक सोलर संयंत्र लगाने की घोषणा भी बजट में की गई थी।
निशुल्क सोलर पैनल लगाए जाएंगे >>>
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना में पंजीकृत 27 लाख लाभार्थी परिवारों, जिनका औसत मासिक उपभोग 150 यूनिट से अधिक है, उनके घर की छत पर इस योजना में 1.1 किलोवाट क्षमता के निशुल्क सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसके लिए ऐसे प्रत्येक उपभोक्ता को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत भारत सरकार से प्रति संयंत्र 33 हजार रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी।
वहीं राज्य सरकार द्वारा 17 हजार रुपए प्रति संयंत्र की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे 1.1 किलोवाट क्षमता का पैनल पूरी तरह निःशुल्क हो जाएगा और 150 यूनिट तक मासिक खपत पर उपभोक्ता का मासिक बिजली बिल शून्य हो जाएगा। वहीं करीब 27 लाख परिवारों के रूफ टॉप संयंत्र लगने से 3,000 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता सृजित होगी।
1.1 किलोवाट क्षमता के लगेंगे सोलर संयंत्र >>>
उन्होंने बताया कि 150 यूनिट से कम औसत मासिक उपभोग वाली श्रेणी के तहत प्रथम कैटेगरी में मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना के ऐसे 11 लाख लाभार्थी परिवार, जिनके पास अपने घर की छत पर निशुल्क रूफ टॉप सोलर संयंत्र लगाने के लिए छत उपलब्ध है, उनके लिए वितरण कंपनियों द्वारा अपने चयनित वेंडर्स के माध्यम से निशुल्क 1.1 किलोवाट क्षमता के सोलर संयंत्र लगाए जाएंगे।