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नरेंद्र मोदी

 

 

गरीबों की कोई नहीं सुनता!!

 

 हैलो सरकार संवाददाता
दौसा। कहते हैं कि गरीब की कोई नहीं सुनता, जी हां, यह बात पूरी सोलहआने सही है। नगर परिषद दौसा का ऐसा काला कारनामा सामने आया है जिसको सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।
  भू माफियाओं की बुरी नजर का शिकार बुंदू खां हो गया। 90 के दशक में पिताजी मरने के बाद काफी गरीबी का सामना करना पड़ा, अथाह गरीबी होने के कारण बुंदू खां कमाने-खाने बाहर चला गया। भू माफियाओं ने बुंदू खां के पीछे से सारी जमीन के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नगर परिषद दौसा से पट्टे जारी करवा कर बेच डाले। बुंदू खां जब दौसा आया तो पता चला कि भू माफियाओं ने सारी जमीन को हड़प कर नगर परिषद से दौसा से पट्टे बनाकर बेच भी डाले और उनकी जमीन पर रसूखदारों के बड़े-बड़े मकान बन गए। कहते हैं "बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया" । बुंदू खां के पास रुपए नहीं होने के कारण अच्छा खासा वकील के मार्फत केस नहीं लड़ सका और अपनी जमीन प्राप्त करने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। परंतु बुंदू खां की पुकार किसी ने भी नहीं सुनी। चार बहनों का भाई तथा वृद्ध मां का इकलौता पुत्र बुंदू खां दौसा नगर परिषद की सबसे कीमती अपनी जमीन प्राप्त करने के लिए लोगों को जी-हुजूरी करते-करते बुढ़ापा आ गया, परंतु जमीन के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।
  बुंदू खां को किसी ने बताया कि हैलो सरकार गरीब लोगों की आवाज सुनता है और उसे प्रकाशित भी करता है। इसी बात की आस लेकर बुंदू खां आज हैलो सरकार के दफ्तर आया और अपनी पीड़ा बताई। बुंदू खां की जमीन से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर प्रथम-दृष्टया यह बात प्रमाणित हो जाती कि पीड़ित बुंदू खां के साथ घोर अन्याय हुआ है। कहीं पर भी बुंदू खान के पिता अथवा माता अथवा बहनों एवं खुद के हस्ताक्षर है ही नहीं। अब सवाल इस बात का पैदा होता है कि जब कोई खातेदार अपनी जमीन का समर्पण नामा नहीं करता है तब तक कोई भी सरकारी महकमा अथवा स्थानीय निकाय अथवा न्यायालय काश्तकार की खातेदारी अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकता है। लेकिन धड़ल्ले के साथ भू माफियाओं ने नगर परिषद दौसा के माध्यम से जमीन हड़प कर गए।
  अब देखना यह होगा कि क्या सरकार वाकई गरीबों की हिमायती है अथवा नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इस बात का कोई भी दावे के साथ कह सकता है कि पीड़ित के साथ में घोर अन्याय हुआ है। जिसका कोई धणी धोरी भी नहीं है। नाही कोई पुकार सुनता है।


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