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नरेंद्र मोदी

 

 

लापता हो गई पुलिस जवाबदेही समितियां

 

 रविप्रकाश जूनवाल हैलो सरकार विशेष संवाददाता जयपुर। आज के दौर में जनता के दिल और दिमाग में राजद्रोह के केस का एक ऐसा भय का वातावरण पैदा हो गया जिसके चलते सरकार अथवा सरकारी नुमाइंदों बड़ी से बड़ी चूक हो जाने पर अथवा गलती हो जाने पर भी किसी की मजाल नहीं जो उनके खिलाफ आवाज उठा सके। यहां तक, विपक्ष भी कई ऐसे मुद्दे होते हैं, जिन पर सरकार से जवाब लेना आवश्यक होता है, परंतु विपक्ष अपना मुंह खोलना उचित नहीं समझता।


  यह बात कटुसत्य है कि राजस्थान पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 62 की उप धारा 1 की पालना करने में राजस्थान सरकार बड़ी भारी चूक कर रही है। वर्तमान विधानसभा के प्रतिपक्ष के नेता एवं तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के समय में राजस्थान पुलिस विभाग में पुलिस जवाबदेही समितियां का गठन हुआ था।  संपूर्ण राजस्थान के लिए राज्य स्तरीय पुलिस जवाबदेही समिति का गठन किया गया। ठीक, इसी प्रकार प्रत्येक जिला स्तर पर जिला स्तरीय पुलिस जवाबदेही समितियां का गठन किया गया। पुलिस महकमे में जवाबदेही समितियों का गठन होने के बाद राजस्थान पुलिस की छवि में काफी सुधार हुआ। जनता का काम भी सही समय पर होने लगा। झूठे मुकदमे दर्ज होने में भी काफी कमी देखने को मिली। पुलिस अधिनियम के तहत इन समितियों का कार्यकाल 2 वर्ष का निर्धारित किया गया। समिति में कुल 5 सदस्य होते हैं, इनमें से 4 स्वतंत्र एवं गैर सरकारी होते हैं। स्वतंत्र सदस्यों में से एक को अध्यक्ष बनाया जाता है। समिति को सिविल न्यायालय की संपूर्ण शक्तियां प्राप्त थी ताकि समिति जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए उचित कदम उठाकर दोषी पुलिस अधिकारी, चाहे वह आईपीएस अधिकारी हो अथवा आरपीएस अधिकारी या अधीनस्थ पुलिस अधिकारी हो, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई कर सके। राजस्थान की जनता ने यही सोच कर अशोक गहलोत को राज्य की सत्ता सौंपी थी कि बेहतर ढंग से विधि के शासन की स्थापना होगी। लेकिन अशोक गहलोत सरकार के पूरे ढाई साल होने वाले है, परंतु अब तक भी पुलिस जवाबदेही समितियों का गठन नहीं हो सका। राजस्थान सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का वादा कर रही है तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाली संस्थाओं का समय पर गठन भी नहीं हो रहा है। जिसकी जनता आस लगाए बैठी है। ऐसा लगता है राज्य सरकार कुंभकर्णी नींद में सो रही है। सरकार की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल जनता को पुलिस के प्रति समस्याओं के समाधान के लिए कोई स्थाई हल नहीं सूझ रहा है। इसलिए जनहित में सरकार को चाहिए कि पुलिस जवाबदेही समितियों का गठन करें ताकि जनता को राहत प्रदान हो सके। पुलिस जवाबदेही समितियों के गठन करने से न केवल पुलिस की छवि में सुधार होगा, अपितु काफी हद तक भ्रष्टाचार पर अंकुश भी लगेगा।

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